22 November, 2010

प्याज व लहसुन के दामो ने अतीत की याद दिलाई

कुछ दिनों पूर्व तक दस रूपये किलो तक बिकने वाली प्याज इन दिनों दुगने भाव में बिक रही है इस प्रकार प्याज पर महगाई डायन के  कहर से लोग न केवल  परेशान है बल्कि वे आँसू भी नहीं बहा पा रहे है, वही सब्जियों के दामो ने भी आम नागरिक का स्वाद फीका कर दिया है.
सब्जी का तड़का तो लहसुन-प्याज से ही लगता है और ये दोनों चीजो के भाव सातवे आसमान पर है लेकिन हालत कुछ ऐसे है की गरीब तबके के लोग जो की सब्जी के अभाव में प्याज-लहसुन से ही रोटी खाकर अपना पेट भर लेते थे, वे अब प्याज लहसुन का उपयोग बमुश्किल कर पा रहे है.
आम तौर पर प्याज के भाव अधिकतम  दस रूपये तक रहते थे जो की  इन दिनों बीस से तीस रूपये किलो पर पहुच गए है वही लहसुन जो अधिकतम बीस-तीस रूपये किलो तक बिकती थी वह अब १२० रूपये किलो में बिक रही है. इतने अधिक भावो के चलते निम्न वर्ग के लोगो को प्याज लहसुन खरीदने से पहले सोचना पड़ रहा है, प्याज पर महगाई डायन का कहर सुरसा के मुह की तरह बढ़ रहा है, प्याज लहसुन के दामो में ऐसा लगता है की अब यह गरीब की थाली से भी कोसो दूर हो चुकी है.
महगाई से अधिक बढ़ने से इनकी बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है इस सम्बन्ध में प्याज लहसुन  विक्रेताओं ने बताया की हमेशा प्याज की खपत अधिक रहती है लेकिन जब से इनके भाव सातवे आसमान पर पहुचे है. खपत में गिरावट आई है जो प्रतिदिन गिरती ही जा रही है
जिस प्याज ने केंद्र की सरकार को ध्वस्त कर दिया था तथा काफी समय से प्याज के  भाव अधिकतम दस रूपये तक पहुचे थे लेकिन एकदम से बढे प्याज व लहसुन के दामो ने अतीत की याद ताजा कर दी है क्योकि पूर्व  में भी प्याज एवं लहसुन के भावो ने रिकार्ड स्थापित किये थे. इस प्रकार लोगो को पुराने दिन ताजा हो गए.
हाल ही में हुई बारिश के कारण  प्याज के भावो में लम्बा उछाल आया है क्योकि रुक-रूककर हुई इस बारिश से प्याज की फसल प्रभावित हुई है. उत्पादित प्याज भी बारिश होने से दागदार हो गयी है जिसके चलते बाजार में प्याज की आवक मांग के अनुरूप नहीं हो पा रही है. स्थानीय प्याज के थोक विक्रेताओं ने बताया की इस समय जिन-जिन प्रदेश, क्षेत्रो तथा अन्य प्रान्तों से प्याज आती थी वहा की फसल बारिश होने से ख़राब हो गई है जिसके चलते बाजार में प्याज के भाव सातवे आसमान पर पहुच चुके है वही लहसुन का स्वाद भी भाव के कारण लोगो से कोसो दूर पहुच चुका है.

.......तो इंसानों की प्रजाति पर ही खतरे मडराने लगेगे.

कटनी / कभी हरी सब्जी को मानव जीवन के लिए स्वास्थ्यप्रद मना जाता था लेकिन अब वह भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गई है. चौकिये मत अब प्रत्येक सब्जी फल, मिठाई, दूध, घी, तेल आदि सभी में जहर है. इन जहर मिली चीजो के सेवन से जहा इंसानों की सेहत बिगड़ रही है वही दूसरी ओर दुर्लभ पशु पक्षियों की प्रजातियों पर भी लुप्त होने का खतरा बन गया है.
यदि आप सोच रहे है की दूध, घी, फल, सब्जी खाना सेहत के लिए लाभकारी है तो बिलकुल गलत सोच रहे है.क्योकि अब शायद ही कोई साग-सब्जी या फसल हो जिनपर रासायनिक खाद या दवाओं का प्रयोग न होता हो.. बढ़िया किस्म का गेहू, चावल, चना, सोयाबीन आदि  भी आज जहरीली हानिकारक दवाओं के हानिकारक उपयोग से उगाया जा रहा है.
सब्जियों में इंजेक्सन के प्रयोग से अब लोग अनजान नहीं है, लौकी एवं ककड़ी में आक्सीटोसिन के इंजेक्सन लगाना आम बात है. इन से न केवल स्वास्थ्य पर प्रतिकूल  असर पड़ता है बल्कि कई लोगो की मौत भी लौकी के जूस पीने से हो चुकी है.
आज सब्जियों को चमकदार तथा ज्यादा हरा दिखाने  के लिए केमिकल में डुबाया जाता है... केले एवं पपीते को केमिकल में डुबाकर ही पकाया जाता है जो जहर बनकर सीधे शरीर में प्रवेश कर जाता है. तालाब एवं डबरो में सिंघाडो   की खेती के लिए भी खतरनाक केमिकल एवं दवाईया पानी में डाली जाती है. सब्जियों को ज्यादा चमकदार और हरी दिखाने के लिए रासायनिक रंगों का प्रयोग भी किया जा रहा है.
भिन्डी, करेला, परवल, मटर आदि रंगों एवं केमिकल के प्रयोग के बिना इतने चमकदार नहीं दिख सकते.
पशु पालन एवं दुग्ध डेयरी में गाय, भैसों आदि को पालने वाले ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में ऑक्सीटोसिन का इंजेक्सन प्रतिदिन लगाकर दूध दुह रहे है. जिससे ज्यादा दूध निकलता है और इस इंजेक्सन के कारण दूध भी जहरीला हो जाता है और फिर इस दूध को पीने वालो की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. खासतौर पर छोटे बच्चो एवं बड़ो में भी ऐसे दूध के सेवन से कैंसर एवं अन्य खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. बार-बार इंजेक्सन लगाने से जानवरों के शरीर भी जहरीले हो जाते है जिनके मरने पर चील, गिद्धों एवं कौओ द्वारा इनका मांस खाने से इन प्रजातियों पर भी संकट मंडरा रहा है, एवं इनकी प्रजातिया भी अब लुप्त होने की कगार पर है.
होटलों पर मिलने वाली मिठाइयो को भी मीठा जहर कहा जा सकता है क्योकि आये दिन नकली मावा पकडे जाने की खबरों को से अखबार और चैनल आते पड़े है. दूध धल्ल्ले से नकली बनाया जा रहा है और इतनी वैज्ञानिक तकनीक से बनाया जा रहा है  की इसे जाँच में भी नहीं पकड़ा जा सकता. कई मामलो में बीसियों टेस्ट करने के बाद भी असली दूध की पहचान नहीं की जा सकती.
तेल के नाम पर तेल की तरह दिखने वाला एवं व्यव्हार करने वाले केमिकल्स बाजार में बेचे जा रहे है, मसालों में मिलावट तो अब कोई नई बात नहीं है.
हरी सब्जियों को और चटकदार एवं ताजा बनाये जाने के लिए मिलाया जा रहा रसायन शरीर के लिए नुकसानदायक  हो इससे इंकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में यह रसायन शरीर में पहुचकर आंतो, गुर्दों एवं त्वचा पर नुकसान पहुचाते है. तब जब इनकी मात्रा शरीर में बढ़ने लगे प्रारंभिक दौर में इसका असर नहीं पड़ता लेकिन केमिकल युक्त सब्जियों के ज्यादा उपयोग से धीरे-धीरे इनका प्रभाव बढ़ने लगता है.
प्रशासन द्वारा केमिकलो के हो रहे उपयोग पर अभी तक न कार्रवाई की गई है और न ही कोई जाँच. खास बात तो यह है की जाँच करने वाले आला अफसरों और कर्मचारी ही इन सब्जियों का  उपयोग कर रहे है जो एक लापरवाही का जीता  जगता उदहारण है.

यदि शीघ्र ही इन खतरनाक एवं जहरीले रसायनों एवं नकली सामग्री पर प्रतिबन्ध नहीं लाया गया तो इंसानों की प्रजाति पर ही  खतरे मडराने लगेगे.

मार्बल खदान में घायल की मौत को सड़क दुर्घटना बताया

कटनी / स्लिम्नाबाद थाना अंतर्गत ग्राम निमास निवासी एक 29  वर्षीय युवक को लक्ष्मी मार्बल खदान में गंभीर रूप से जख्मी होने के बाद गतदिवस गंभीरावस्थ में कचहरी चौक स्थित एमजीएम  अस्पताल में दाखिल किया गया था जहा उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई.
युवक स्लिम्नाबाद क्षेत्र की लक्ष्मी मार्बल कंपनी में  इलेक्ट्रीसियन था तथा उसकी यह हालत मार्बल कंपनी की शाखा  राधिका माइंस की खदान में काम करते समय मशीन में फसने से हुई थी लेकिन अस्पताल पहुचाने  वालों ने अस्पताल प्रबंधन को यह बताया की युवक सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ है. बहरहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला जाच में लिया है.
इस सम्बन्ध में प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम निमास निवासी 29 वर्षीय बब्बू पिता राममिलन झारिया ग्राम khdara    स्थित लक्ष्मी मार्बल कंपनी की शाखा राधिका माइंस  में  इलेक्ट्रीसियन था. बताया जाता है की खदान के अन्दर किसी मशीन में सुधार कार्य  करते समय ही बब्बू उसमे फसकर गंभीर रूप से घायल हो गया. जिसके बाद माइंस प्रबंधन ही उसे कचहरी चौक स्थित एमजीएम अस्पताल लेकर आया लेकिन उसने अस्पताल प्रबंधन को यह जानकारी दी की बब्बू किसी सड़क हादसे का शिकार हुआ है तथा उसको यह चोटे सड़क दुर्घटना में आई है.
बताया जाता है की एम्जीएम अस्पताल में उपचार के दौरान बब्बू की मौत हो गई तो माइंस प्रबंधन वहा से भाग खड़ा हुआ.  वैसे यह पहला मौका नहीं है जब स्लिम्नाबाद मार्बल कंपनी में  हुए किसी भी हादसे को माइंस प्रबंधन ने सड़क दुर्घटना बनाने की कोशिश की है बल्कि इसके पूर्व भी ऎसी कई घटनाएं प्रकाश में आ चुकी है. जिसमे माइंस के अन्दर हुई दुर्घटनाओं को माइंस प्रबंधन ने सड़क दुर्घटना बता दिया है.
बहरहाल पुलिस ने शवपरिक्षण कराते हुए मार्ग कायम किया है.