27 November, 2010

भारत के प्रधानमंती या पराधीन मंत्री..........?

जब शिक्षिका ने छात्रो को जूतों की माला पहनाई

कटनी / शहर के एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका द्वारा छात्रो को जूते चप्पलो की माला पहनाने और उन्हें जूते सूघने की सजा देने का आरोप जाँच में सही पाया गया है.

दो सदस्यीय दीम द्वारा जाँच के बाद सौपी गई रिपोर्ट के आधार  पर जिला शिक्षा अधिकारी शशिबाला झा ने शनिवार को दोषी शिक्षिका को निलंबित करने के आदेश जारी किये गए . यह घटना तीन दिन पहले खिरहनी फाटक के पास  स्थित निषाद स्कूल में हुई थी.

जिसमे प्राथमिक शाला की प्रधानाध्यापिका अनुसुईया गौड़ ने बच्चो  को चप्पल जूते कक्षा  से बाहर न उतारने पर यह सजा सुनाई थी. इस कृत्य  से प्रताड़ित लगभग एक दर्जन छात्रो ने इसकी शिकायत अभिभावकों  से की थी. जिसके बाद स्कूल में जमकर हंगामा भी हुआ था.
पीड़ित  छात्र माया निषाद, शालू दुबे व अन्य ने बताया की पहले उन्हें चप्पल सूघने के लिए कहा गया और बाद में चप्पल की माला गले में पहनाई गई. जबकि दोषी पाई  गई प्रधानाध्यापिका ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

एक तरफ शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोड़ने के लिए करोडो रूपये खर्च कर रही है दूसरी तरफ ऐसे चंद शिक्षक बच्चो को शिक्षा से दूर कर शाला त्यागी बनाने की कोशिश में जुटे हुए है. इस बाकये ने पूरे शिक्षा विभाग को शर्मसार किया है.