01 December, 2010

आत्महत्या के मजबूर हो रहे किसान

कटनी / पिछले तीन सालो से लगातार सूखे की मार झेल रहे किसानो की हालत दयनीय हो गई है. जिले के किसान साहूकारों और सहकारी बैंको के कर्ज के दलदल में गले तक डूब गए है. अफसरशाही और दलाली के चलते केंद्र एवं राज्य सरकार की कर्ज माफ़ी योजनाओं का लाभ भी किसानो को नहीं मिल पा रहा है. बैंक किसानो को वर्षों पुराने रिणों की वसूली का नोटिस भेज कर किसानो की फजीहत किये है. इस समय विद्युत् मंडल हजारो के बकाया बिलों की अदायगी न होने  पर किसानो को जेल भेजे जाने की धमकी दे रहे है. इस सबसे स्थिति इतनी विकट हो गई है की किसानो के पास आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है.

कर्ज और बकाया बिजली के  बिलों के इस दुश्चक्र में फसे एक किसान ने बीती 29 -30 नबम्बर की दरम्यानी रात आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. कृषक गुलजार सिंह गोंड की आत्महत्या की जाँच कराये जाने के बजाये प्रशासन और पुलिस अब उसकी मौत पर लीपा पोती का प्रयास कर रही है.

कटनी जिले की बडवारा विधानसभा के अंतर्गत आने वाले ग्राम अमकुही हरदी  निवासी 45 वर्षीय कृषक गुलजार सिंह गोंड ने 29 नवम्बर की रात अपने खेत की मेढ़ पर स्थित  नीम के पेड़   में रस्सी का फंदा डालकर फांसी लगा ली थी. सुबह पेड़  से लटकती गुलजार सिंह की लाश सबसे पहले उसकी पत्नी  ने देखी कुछ ही देर में पूरे गाँव में गुलजार सिंह द्वारा आत्महत्या किये जाने की खबर फ़ैल गई और पूरा गाँव उसके घर पहुच गया.

 बताया गया की गुलजार सिंह को 25 हजार से अधिक का बिल विद्युत् मंडल द्वारा उसे दिया गया था. गुलजार सिंह की स्थिति ऐसी नहीं थी की वह 25 हजार  का बिजली का बिल अदा कर पाता. बिल माफ़ करने के लिए गुलजार सिंह अधिकारियो के चक्कर लगाता रहा पर उसे कोई राहत नहीं प्रदान की गई उलटे विद्युत् मंडल के अधिकारी कर्मचारी बिजली बिल जल्द जमा नहीं करने की स्थिति में उसे जेल भेज देने की धमकी देते रहे.

कहा तो यह तक जा रहा है की पुलिस के द्वारा भी बकाया बिल की अदायगी के लिए उसे धमकाया जाता रहा है. इन्ही हालातो से तंग आकर गुलजार सिंह ने अपना जीवन समाप्त करने का फैसला कर लिया और फांसी के फंदे में झूलकर  अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली.

इस सम्बन्ध में मृतक के पुत्र होशियार सिंह का कहना है  जब से बिल आया तब से ही पिताजी परेशान थे. दो दिन पहले बिल जमा करने की बात को लेकर पुलिस वाले घर आये  थे और गाली गलौज करते हुए मेरे पिता को जेल भेजने की धमकी दे रहे थे. पुलिस वालो की धमकी  के कारण ही मेरे पिता ने फांसी लगा ली.

वही मृतक की पत्नी श्याम बाई ने बताया की सुबज जब मै खेत गई तब मैंने उन्हें पेड़  पर लटकता देखा. कुछ दिन पहले पच्चीस हजार का बिल आया था. बिल आने के बाद से ही पुलिस वाले उसे जेल भेजने की धमकी दे रहे थे. रात को खेत आने से पहले भी उसने अपनी परेशानी का जिक्र किया था.

 जबकि उमरियापान थाना प्रभारी ऐ एस आई  एस के झारिया का कहना है की किसान बिल के कारण परेशान था. इस मामले से पुलिस का कोई लेना देना नहीं था. पुलिस ने उसे कभी धमकी नहीं दी थी  विधुत विभाग के कर्मचारी खाकी वर्दी पहनते है हो सकता है उन्होंने ही बिल अदा करने को लेकर उससे कुछ कहा हो.

कृषक की आत्महत्या के इस मामले को न तो क्षेत्रीय विधायक ने गंभीरता से लिया न ही प्रशासन ने. पुलिस ने भी मात्र औपचारिकता निभाते हुए 174 के तहत मर्ग कायम किया है. जिले में किसान द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने की यह पहली घटना नहीं है इसके पहले भी कई किसान कर्ज से तंग आकर आत्महत्या कर चुके है. यह बात सरकार ने भी विधानसभा  में स्वीकार की है कि  प्रदेश  में किसानो के आत्महत्या  की घटनाएं बाद  रही है. इसके बावजूद बैंको के कर्ज और भारी भरकम विद्युत् विलो से किसानो को राहत दिलाने कोई कदम नहीं उठाये जा रहे.

किसानो को राहत दिलाने की बजाय राज्य सरकार गौरव दिवस जैसे आयोजनों में करोडो रूपये खर्च कर विरोधियो  को अपनी शक्ति का एहसास दिला रही है. आखिर किसानो के हित की बात करने वाला प्रदेश में कौन है....?