06 December, 2010

कपिलधारा कूप में अधिक व्यय की वसूली होगी

झारिया के जाने के बाद खुल रहे मामले
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना की उपयोजना कपिलधारा कूप योजना में पंचायतो द्वारा निर्धारित राशी से अधिक मनमाना खर्च करना अब महगा पड़ने वाला है. निर्धारित से अधिक खर्च की वसूली के लिए रीठी जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रीति सिंह ठाकुर के निर्देशानुसार एक-एक कुए की जानकारी एकत्रित की जाएगी. ताकि कुए में व्यय अधिक राशी की बसूली अधिकारी-कर्मचारी से जल्द ही की जा सके.

म न रे गा के तहत ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी  रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हितग्राहियों को कपिलधारा कूप योजना के तहत कुआ तैयार कर दिया जाता है. शुरुआत में एक कुए के लिए शासन द्वारा 41 हजार रूपये की राशी दी जाती थी. समय-समय पर इसमें वृद्धि होती  रही और 73000 ,  81000 , 91000 , 110000 , 116000 , 126000 होते हुए वर्तमान में कुए के लिए 140000 रूपये प्रदान किये जाते है. योजना शुरू होने के बाद से अभी तक लगभग 800 कुओ का निर्माण किया गया है. हर योजना की तरह कपिलधारा कूप योजना में भी जमकर धांधली और अनियमितता की गई. सरपंच और सचिवो ने निर्धारित राशी के मुकाबले 5 से लेकर 25 हजार रूपये तक अधिक खर्च कर दिए है.

होगी एक-एक कुए की जाँच
वास्तव में अधिक खर्च हुआ है या नहीं यह तो सरपंच और सचिव ही जाने लेकिन दस्तावेजो में तो यह स्पष्ट नजर आ रहा है और इसी के अनुसार राशी खर्च होना भी बताया जा रहा है. थोकबंद ऐसे मामले सामने आने पर जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह द्वारा एक-एक कुए के दस्तावेजो की जाँच एस डी ओ और उपयंत्रियो से करवाई जाएगी. निर्माण किये गए हर कुए की प्रशासकीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति,एस्टीमेट, मूल्यांकन पुस्तिका आदि का गहन निरिक्षण किया जाएगा.

जमकर हुई धांधली
जबकि अधिकारियो के  अनुसार जिन कुओ  में निर्धारित राशी से अधिक खर्च किया गया है उनमे ऐसी स्थिति में रिवाइज एस्टीमेट प्रस्तुत कर उसे मंजूर करवाना  पड़ता है और इसमें भी एक निर्धारित प्रतिशत तक ही राशी बढाई जा सकती है. रिवाईज एस्टीमेट को सक्षम अधिकारी  की मंजूरी मिलने के पश्चात् ही अधिक राशी व्यय की जा सकती है, मगर यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और सरपंच सचिव द्वारा अपने मन से अधिक राशी धड़ल्ले  से खर्च कर दी गई.

हो गया मूल्यांकन
मजे की बात यह है की ऐसी स्थितियों पर नजर रखने के लिए खासतौर से तैनात तकनीकी अमला भी इस पूरे मामले की ओर से आखे मूदे रहा. समय- समय पर हुए मूल्यांकन में उपयंत्रियो ने इस बात को पकड़ कर सरपंच सचिवो को हिदायत देना जरूरी समझा और न आला अधिकारियो को अवगत करवाना जरूरी समझा. यही कारण है की सरपंच सचिव बेपरवाह होकर मनमानी राशी खर्च करते रहे. अधिकारियो की उदासीनता के चलते ही अतिरिक्त व्यय की गई  राशी का भुगतान भी किया जा चुका है.

बड़ी संख्या में ऐसे कुए  भी है जिनमे अधिक राशी खर्च होने के बाद भी अभी तक काम पूर्ण ही नहीं हुआ है. बहुत सारे कुए ऐसे है जिनका काम भी पूरा  हो चुका और उपयोग में भी लिए जा रहे है मगर अभी तक उनकी सी सी जारी नहीं हुई.

 जल्द ही जाँच दल इसपर जाँच शुरू करने वाला है एवं संबंधितो को नोटिस  जारी करके रिकवरी शुरू की जाएगी. इस कार्य में जिस किसी ने भी गैरजिम्मेदारी पूर्ण कार्य किया है उसे बख्सा नहीं जाएगा. इसमें बहुत हद तक उपयंत्री  भी जिम्मेवार है क्योकि मूल्यांकन का कार्य उन्होंने ही  किया है और अधिक खर्च पर उन्हें ध्यान रख्हना  था.