08 December, 2010

फर्जी मूल्यांकन कर निकला पैसा

सामने आ रही अनियमितता
म न रे गा के कार्यो में व्याप्त भ्रस्टाचार एवं लापरवाह अधिकारी कर्मचारी पर अंकुश लगाने की दिशा में जनपद पंचायत अध्यक्ष रीठी श्रीमती प्रीति सिंह ठाकुर इस समय विगत वर्षों में विकास कार्यो का लेखा जोखा लेने पंचायत के भ्रमण पर है. इसी सिलसिले में भ्रमण के दौरान अध्यक्ष को अनेको अनियमितताए देखने को मिल रही है.

इस समय रीठी जनपद पंचायत अध्यक्ष के कार्य कलाप से क्षेत्रीय जनता में विश्वास जाग्रत हुआ है एवं अब ग्रामीण उन्हें अपनी समस्याओं  एवं विकास कार्यो में हुए भ्रस्टाचार की शिकायत करने लगे  है जिनपर अध्यक्ष द्वारा तत्काल मौके पर पहुच कर जाँच पड़ताल की जा रही है.

ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत कैना में म न रे गा के अंतर्गत  कराये गए काम का प्रकाश में आया. ग्रामीणों ने एक शिकायत में बताया की इस पंचायत में बड़ा तालाब एवं बंधान विस्तारीकरण  का कार्य डहरिया नाला से स्टाप डेम का निर्माण हेतु म न रे गा के तहत स्वीकृत हुए थे लेकिन सरपंच, सचिव द्वारा कार्य  नहीं कराया गया एवं उपयंत्री बी बी गुप्ता  एवं सहायक यंत्री उद्दे  द्वारा फर्जी मूल्यांकन कर आहरण कर लिया गया है.

इस सम्बन्ध में जब जनपद अध्यक्ष द्वारा शिकायत की जाँच की गई तो शिकायत सही पाई गई और सरपंच एवं सचिव से डेढ़-डेढ़ लाख रूपये की बसूली कर राशी जमा कराई गई है

लेकिन मजेदार बात यह की म न रे गा का कार्य देख  रहे उपयंत्री श्री बी बी गुप्ता द्वारा मूल्यांकन करके इन दोनों कार्यो का पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है.

अध्यक्ष ने उपयंत्री के इस फर्जी मूल्यांकन की  लिखित शिकायत संभागायुक्त श्री प्रभात पराशर, कलेक्टर, एस दी एम्  को की है अपने पत्र में अध्यक्ष ने लिखा  है की सरपंच सचिव से राशी बसूलने का मतलब है की उपयंत्री  एवं सहायक यंत्री द्वारा फर्जी मूल्यांकन कर दोनों कार्यो की लगभग साढ़े आठ लाख की राशी का आहरण कर गबन किया गया है.

इसके पूर्व भी कटनी कलेक्टर एम् एशेल्वेंद्र को जाँच प्रतिवेदन की प्रति लगाकर इस सम्बन्ध में एक महीना पहले भी शिकायत की थी लेकिन उनके द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई इसलिए पुनः इन प्रमाणित तथ्यों के आधार पर अध्यक्ष ने सम्बंधित उपयंत्री  एवं सहायक यंत्री के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करने के लिए लिखा है. 

आस्था से खिलवाड़ करते मोबाइल

आज के आधुनिक  युग में भी अंधविश्वास लोगो का पीछा नहीं छोड़ रहा है. इतना ही नहीं इसका तरीका भी आधुनिक होता जा रहा है. आस्था की आड़ में भावनात्मक सन्देश भेजकर किसी स्थान विशेष का प्रचार प्रसार या अपना कारोबार बढ़ाने के लिए कंपनिया  एस एम् एस का माध्यम अपना रही है. खास बात यह है की शिक्षित  और समाज के जिम्मेदार लोग  भी इस अन्धविश्वास में उलझ जाते है.

पेशे से शिक्षक राकेश कोरी ने बताया की उनके पास भी एक नए नंबर से एस एम् एस आया जिसमे सन्देश के साथ लिखा था की आप भी कम से कम दस लोगो को तो यह एस एम् एस भेजे अन्यथा अनिष्ट हो जायेगा.
उन्होंने कहा की कई लोग भय और अन्धविश्वास के कारण अन्य लोगो को भी एस एम् एस करके समय  और पैसा तो बर्बाद करते ही है साथ ही दूसरो  को भी भ्रमित कर देते है.

'जय माँ शेरावाली' यह सन्देश वैष्णो देवी जम्मू से चलकर आया है.इस सन्देश को  नौ लोगो को भेजो तो 48 घंटे के अन्दर तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी. लेकिन इस श्रंखला को तोड़ने पर  आपके साथ कुछ अनिष्ट भी हो सकता है. इसलिए इसे अवश्य नौ  लोगो को भेज देना.

हुनमान के इन 6 नामो को 12 लोगो को भेजो अंजनी पुत्र, पवनपुत्र, रामदूत, बजरंगबली, महाबली, इस शनिवार तक अच्छी  खबर मिलेगी. श्रद्धा और आस्था से भरे ऐसे  मैसेज आजकल हर मोबाइल उपयोगकर्ता के इनबाक्स में आते ही रहते है.

कई लोग पूरी आस्था के साथ इन्हें दूसरे लोगो तक पहुचाते भी है. इस उम्मीद के साथ शायद उनके ऐसा करने से उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाए, उनकी इस आस्था  का कोई गलत फायदा उठा रहा है और उनकी इन भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है.

कभी शिर्डी से, कभी रामेश्वर से, कभी अमरनाथ आदि और भी अन्य  पवित्र स्थलों  से भक्तो द्वारा भेजे जाने वाली मुरादो को पूर्ण करने वाले इन मैसेज में मनोकाम पूर्ण करने के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रूप से श्रंखला तोड़ने पर कुछ गलत होने की चेतावनी भी रहती है. इसके  चलते लोग कुछ गलत न हो जाए इस डर से यह मैसेज अपने मित्रो, रिश्तेदारी को भेज देते  है ताकि वे किसी दैवीय कोप से बचे रहे.

इस विषय पर बहोरिबंद निवासी राजेन्द यादव ने बताया की पहले पोस्टकार्ड के मध्यम से आस्था से भरे हुए ऐसे सन्देश लोगो द्वारा भेजे जाते थे. जिनमे भी इश्वर की स्तुति उपरांत पूर्ण होने वाली मनोकामना के उल्लेख के साथ भी ऎसी अप्रत्यक्ष धमकी रहती थी लेकिन अब उन पोस्टकार्ड की जगह मोबाइल के इन भक्ति मैसेज ने ले ली है, जिसके चलते मनोकामना पूर्ण होने एवं बड़ा पुन्य लाभ कमाने की चाहत ने मोबाइल पर ऐसे संदेशो की बाढ़ सी ला दी है. जो लोगो में एक झूठी आस तो बांधते ही है वही इस तरह के मैसेज से तकनीक का गलत उपयोग भी हो रहा है.

आस्था  के खिलवाड़ में यह कोई नई बात नहीं है. सूचनाक्रांति के इस युग में मोबाइल का उपयोग किया जाने लगा है तो पहले पत्रों के मध्यम से यह होता था. कोई पोस्टकार्ड इस्तेमाल करता था तो चिट्ठी-पत्री को मध्यम बनाताथा. मौजूदा समय में मोबाइल जैसे महत्वपूर्ण उपकरण को और भी कई ऎसी बातो के लिए दुरूपयोग किया जा रहा है जिससे समाज में विकृति फ़ैल  रही है. आस्था के मामले में लोग एक दूसरे को भ्रमित कर रहे है.

धार्मिक संदेशो का यह फलसफा कुछ देर के लिए तो खुशिया देने वाला होता है. इस पर विचार किया जाए तो निश्चित ही भेजने वाले को इसकी अहमियत समझ आ जायेगी. लोगो की आस्था से जुड़े ये सन्देश मजाक के पर्याय बन रहे है. अपने फायदे या फिर लाभ के लिए इनका इस्तेमाल करने वाले लोग या फिर यह कंपनियों की सुनियोजित चाल है  जिसका इस्तेमाल करने लोग बाज नहीं आ रहे है.

युवाओं में यह चलन ख़ास होता जा रहा है, कुछ देर की हंसी, मजाक के लिए धार्मिक आस्थाओं को ताक पर रख रहे युवा ऐसे संदेशो को भेजकर तो आनंदित  होते है लेकिन स्वाभाविक तौर पर देखा जाए तो युवा आधुनिकता की होड़ में यह भूल जाते है की वे खुद अपनी धार्मिक भावनाओ को संदेशो के मध्यम से व्यक्त कर रहे . इस संदेशो को भेजने वालो की धारणा भी जाहिर तौर पर पता लग जाती है वे अपने आराध्य को पूजने के बजाये उन्हें मजाकिया रूप से पेश कर रहे है.ये खुद भेजने वाले  की संकुचित सोच का नतीजा होते है.

साईं वावा, दुर्गा  माँ, भगवान् गणेश, शंकर, हनुमान, राम आदि के नाम  से आने वाले मैसेज को पढने के बाद लोगो के मन में भ्रम जरूर बैठ जाता है, जिसके चलते वह अपने इस अन्धविश्वास के नाम दस या बीस मैसेज तो लोगो को भेज ही देते है. यह कहना है जगदीश पटेल का जिनके अनुसार इस तरह के सन्देश लोगो को भ्रमित करते है तो वही लोगो के अन्धविश्वास को भी बढ़ाते है. क्योकि जो लोग इन मैसेज को ट्रांसफर नहीं करते है और उनके साथ कुछ बुरा हो जाता है तो वह उस घटना को इन्ही संदेशो का दुष्परिणाम मानते है.
गेहू खरीदी में ५६ लाख का घोटाला
किसानो को लाभ पहुचाने उनका अनाज समर्थन मूल्य में खरीदने की सरकारी व्यस्था पर सहकारी समितिया और बैंक प्रबंधक मिली भगत कर इसका लाभ व्यापारियों को दिलाने पर आमादा है. व्यापारियों को गेहू खरीद कर किसानो के फर्जी नामो से चेक जारी कर उसका भुगतान करने के लगभग 56 लाख रूपये के घोटाले का एक मामला कुठला पुलिस थाने में दर्ज हुआ है.

जिसमे कटनी सहकारी बैंक प्रबंधक हुब्बीलाल पटेल, कन्हावारा चाका सहकारी समिति प्रबंधक राधाकृष्ण मिश्र, नारायण सेन, समिति सेवक लखन साहू सहित एक दर्जन लोगो के विरुद्ध धारा 420 , 467 , 468 भा दंड विधान के तहत मामला कायम कर जाँच में लिया गया है. नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंधक संजय सिंह भी नियमो को नजरअंदाज कर कार्य करने  के आरोप जाँच के दौरान सामने आ रहे बताये गया है.

इस पूरे मामले में कैल्वारा हरदुआ खरीदी केंद्र जाँच के प्रमुख बिन्दुओ  में से एक है. जून माह में एक बेयर हाउस में छापे में अनलोड हो रहा 520 बोरा गेहू संदेह पर जब्त किया गया था. वेयर हाउस संचालक ने गेहू मालिको के नाम खाद्य विभाग की पूछताछ के दौरान बताये  थे.

 विभागीय स्तर पर जाँच जारी ही थी की कैल्वारा हरदुआ खरीदी केंद्र में उपज बेचने वाले कृषको ने खाद्य विभाग को शिकायत दी की खरीदी में तीन रूपये प्रति बोरा कमीशन लिया जा रहा है व उसके नाम से गलत चैक जारी हुए है.

जाँच के दौरान कटनी सहकारी बैंक प्रबंधक हुब्बीलाल पटेल से पूछताछ के बाद बैंक से 55  लाख रूपये में वे चेक जप्त किये गए जिन्हें  कन्ह्वारा चाका सहकारी समिति के प्रबंधक राधा  कृष्ण मिश्र ने कृषको के नाम से जारी किया था  और बैंक ने उसका भुगतान भी कर दिया.
खरीदी केंद्र के क्रश्नो से पूछताछ के दौरान पता चला की 15  कृषको के नाम से तीन हजार 232  क्विंटल गेहू की फर्जी खरीदी की गई  थी. किसानो ने बताया  की कुछ किसानो से दस क्विंटल  तक गेहू खरीदा गया, उनके नाम से 40 -50  क्विंटल  गेहू खरीदने सम्बन्धी चैक जारी हुए. ऐसे फर्जी किसानो के नाम भी सामने आये है जिनके नाम से सौ दो सौ बोरा गेहू खरीदी दर्शाकर  चेक  जारी किये गया  है.

खाद्य विभाग ने कलेक्टर एम् सेल्वेंदारण के समक्ष जब यह समूचा  घोटाला प्रस्तुत किया तो उनके निर्देश पर खाद्य विभाग ने कुठला थाने में शिकायत दर्ज कराई है.

इस सम्बन्ध में खाद्य अधिकारी श्री चौबे ने बताया की इस सारे घोटाले में सहकारी बैंक प्रबंधक की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योकि उनके द्वारा ही फर्जी किसानो के नाम पर एकाउंट खोलकर सहकारी समिति द्वारा जारी चेको का भुगतान किया गया. यह जाँच का विषय है की बैंक प्रबंधक ने किन-किन लोगो को फर्जी भुगतान किया.

कलेक्टर एम् सेल्वेंद्रण ने  बताया की मेरे समक्ष सहायक आयुक्त सहकारिता  व खाद्य अधिकारी द्वारा की गई जाँच रिपोर्ट आई थी और मैंने उन्हें मामला दर्ज करने के निर्देश दिए है और शीघ्र ही आरोपियों  के विरुद्ध कार्रवाई होगी.

जिन किसानो  के नाम से समर्थन  मूल्य पर फर्जी खरीदी हुई वे है -  प्रेम सिंह  (खडोला) - 400 क्विंटल हरदुआ समिति, हिम्मत सिंह (खडोला)-410 क्विंटल कैल्वारा कला समिति, हिम्मत सिंह ( खडोला)-225  क्विंटल  हरदुआ समिति , गुलाब सिंह (चनेहती) - 247  क्विंटल  कैल्वाराकाला समिति, प्रेम सिंग ( चनेहती) - 200  क्विंटल  कैल्वारा कला समिति, गुलाब सिंह ( चनेहती) - 190  क्विंटल  कैल्वारा कला.