12 December, 2010

सौ दिनों की बंदिश में लटकी मनरेगा योजना

केंद्र शासन द्वारा संचालित रोजगार गारंटी योजना में सौ दिनों की बंदिश होने के कारण ग्रामीण मजदूरों को काम के लिए भटकना पड़ता है. मजदूरों की कमी से काम अधूरे रह जाते है, जिसके कारण कार्य पूर्ण होने में विलम्ब होता है.

देश  में महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना को अधिनियम के रूप में लागू किया गया है. इस अधिनियम के तहत मजदूरों को रोजगार उपलब्द्ध कराया जाता है. इसके तहत ग्राम पंचायत के पंजीकृत परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन का कार्य प्रदान किया जाता है.

वितीय वर्ष में सौ दिन पूर्ण होने पर मजदूरों द्वारा अगले वित्ते वर्ष दी लिए मजदूरी के लिए इन्तजार करना पड़ता है. इस बीच उन्हें काम के लिए महानगरो एवं अन्य जगहों के लिए भटकना पड़ता है, जिससे उनके समक्ष रोजी-रोटी  की समस्या आ खडी  होती है.

गौरतलब है की प्रत्येक ग्राम में रोजगार गारंटी योजना के तहत पंजीकृत परिवारों की संख्या के अनुसार कार्यो का आवंटन किया जाता है, जिसमे कार्य नहीं करने वाले मजदूर भी शामिल होते है. इस तरह गाँव में काम करने वाले मजदूरों को मिलने वाली पारिश्रमिक से अधिक राशी मिलती है. लिहाजा वह राशी पंचायत के खाते में अतिरिक्त पड़ी रहती है. सौ  दिन के पूर्ण होने के पश्चात स्वीकृत काम कराने में पंचायत को भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.  अन्य स्थानों से मजदूरों का आना भी असंभव हो जाता है, जिसके कारण प्रारंभ किये गए कार्यअधूरे  हो जाते है.

ग्रामीण अंचलो के ऐसे परिवार जिन्हें हर समय काम की आवश्यकता होती है, उन्हें इस योजना का लाभ पूर्ण रूप से नहीं मिल पाता. यहाँ यह बताना लाजिमी होगा की 15 अक्टूबर के पश्चात काम प्रारंभ किया जाता है जो 15 जून तक जारी  रहता है. 15 जून के बाद कृषि कार्य शुरू होने के कारण मजदूर बेकाम हो जाते है. वही रोजगार गारंटी से मिलने वाले सौ दिन महज डेढ़ दो माह में मजदूरों द्वारा कार्य  पूर्ण कर लिया जाता है. शेष बचे समय में वे बेरोजगार हो जाते है, जिसके कारण पलायन की स्थिति भी निर्मित होती  है.

यह विसंगति महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना के नीतिनियांताओ द्वारा इस योजना के लागू  करते समय विचरना था.