18 December, 2010

आवारा मवेशियों से किसान परेशान

इस समय आवारा  मवेशी चौक चोराहो के अलावा किसानो की फसलो को नुकसान  पंहुचा रहे है. किसानो को आवारा मवेशियों के कारण बड़ी मुश्किलों  का सामना करना पड़ रहा है. इन आवारा  जानवरों से न केवल यातायात वाधित होता है बल्कि किसानो की फसलो को बड़ी मात्रा में नुकसान हो रहा है. राहगीरों को भी कई तरह की परेशानियों से रूबरू होना पड़ रहा है. कई बार तो इन आवारा मवेशियों के कारण बहुत से दोपहिया चालक इनसे टकराकर घायल हो चुके है. बावजूद इसके जिले की ग्राम पंचायतो की उदासीनता ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही जिसके कारण लोगो को दिन-प्रतिदिन ऐसी समस्याओ से दो -चार होना पड़ रहा है.
ग्रामीण क्षेत्रो में कांजी होस के रख रखाव में पंचायतो की रूचि न लेने से इस समय जिले भर के किसान परेशान है. अधिकांस पंचायतो द्वारा रूचि न लेने के कारण कांजी होस बदहाल स्थितियों में पहुच गयी है. इनमे यदि मवेशियों को बंद भी किया जाता है तो वहा भूसा पानी के अभाव में मवेशी ही हालात दयनीय हो जाती है.

 ग्रामीण अंचलो में अधिकांस जगहों पर आवारा मवेशियों के झुण्ड को बैठे या खड़े देखा जा सकता है. इन मवेशियों की सडको पर उपस्थिति के कारण जहा वाहन चलाने में दिक्कते आती है वही पैदल चलने वाले राहगीरों के चेहरों  पर भी इन मवेशियों की मुठभेड़ से चोटिल होने का भय साफ़ नजर आता है,.
रीठी जनपद मुख्यालय में ही देखा जाये तो कांजी  होस के महीनो से बंद होने के कारण आवारा  पशुओ के द्वारा फसल चोपट की जा रही है. पिछले महीने रीठी जनपद के  डांग गाँव में बाहर से आये आवारा मवेशियों से परसान किसानो ने मवेशियों का व्यापार करने वाले गिरोह को बुलाकर गाँव को आवारा पशुओ से मुक्त कराया.

इसी प्रकार ग्राम पंचायत मोहास, बांधा  की काजी होस भी वर्षों से बंद है. हासिल जानकारी के अनुसार मोहास काजी होस को बंद हुए महीनो हो गए और इसका सामान पंच, सरपंच तथा सचिव ने अपने-अपने घरो में रख लिया.
ग्राम पंचायत बंधा के कृष्ण कुमार पांडे ने बताया की हमारी ग्राम पंचायत में कांजी होस कागजो में तो चलू है लेकिन वास्तव में इस पंचायत में कांजी होस नहीं है. इसलिए आवर पशुओ को कांजी होस में डालने के लिए यहाँ के लोगो को हथकुरी या नितार्रा दूर दराज के लिए भटकना पड़ता है.
पंचायत में भी कांजी होस चालू न होने से ढेर सारे मवेशी को कम दामो पर कत्लखाने भेजे जाने की खबरे  भी आ रही है.
यही वजह है की जिले की ग्राम पंचायतो में आवारा मवेशियों की धमाचौकड़ी के कारण यहाँ के  किसानो का दिन का चैन और रातो की नीद गायब है.