19 January, 2011

बढ़ते भ्रष्टाचार से पत्रकारिता के मूल्यों पर संकट

कटनी / अखिलेश उपाध्याय
दिनांक 19 जनवरी 2011 को सुरम्य पार्क कटाए घाट में कटनी प्रेस क्लब द्वारा बढ़ते भ्रष्टाचार से पत्रकारिता के मूल्यों पर संकट विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का जन किया गया. इस अवसर पर पत्रकारिता जगत की जानीमानी हस्तियों के साथ मुडवारा विधायक, कलेक्टर एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने इस ज्वलंत विषय पर अपना-अपना द्रष्टिकोण रखा.

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय एकता परिषद् उपाध्यक्ष वरिष्ठ  पत्रकार रमेश शर्मा ने बड़े ही सरल और सहज शब्दों में कहा की भ्रष्टाचार नैतिकता, आध्यात्मिकता एवं आत्म निर्भरता पर देश में एक करोड़ से अधिक लोग प्रवचन देते है फिर भी भारत पूरे विश्व में भरष्टाचार के मामले में तीसरे नंबर पर है, जो मूलरूप से चिंता का विषय है. वर्तमान में मीडिया की छवि को कैसे उठा सकते है यह मूल प्रश्न है. जिस तरह नकली नोट प्रचलित होकर बाजार से असली नोट को बाहर कर रहे है उसी तरह नकली पत्रकार इस  पेशे में आकर असली पत्रकारों को बाहर करने में लगे हुए है. श्री शर्मा ने कहा की आज भी जो पत्रकारिता बची है वह उन पेतीश प्रतिशत पत्रकारों की वजह से बची हुई है क्योकि वे अपने काम में लगे रहते है और उन्हें बाहरी दुनिया तक की फुर्सत नहीं मिलती है.

पत्रकार दिनेश चन्द्र वर्मा ने अपने विचारो में बढ़ते भ्रष्टाचार से पत्रकारिता के मूल्यों पर संकट विषय की अपने तर्कों के आधार पर व्याख्या की उन्होंने तीन स्तंभों में फैले भ्रष्टाचार पर विस्तार से प्रकाश डाला उसके बाद चौथे स्तम्भ में फैलते भ्रष्टाचार को उच्च स्तर से पनपने की स्वीकारोक्ति करते हुए कहा की उच्च स्तर पर
बैठे लोगो की मानवीय संवेदनाये नहीं है.

गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान अध्यक्ष ओ पी हयारण एवं वरिष्ठ पत्रकार एवं डायरेक्टर धर्मेश्वर नागरिक बैंक भोपाल मनमोहन कुरापा एवं स्थानी पत्रकार नन्दलाल सिंह
ने विचार गोष्ठी को गति देते हुए कहा की पत्रकारिता अपने मूल्यों से भटक रही है यह भटकाव उच्च स्तर से निचले स्तर तक पहुच रहा है. घटनाओं के प्रति सम्बेदनाये नहीं बची है. आज के
दौर में दो चार मौतों पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं होती है.

आज अखबार केवल शहर केन्द्रित हो गए है. इनमे  गांवो की घटनाओं का समावेश नहीं होता है. पत्रकारिता की खबरे गाँव से ही निकलती है इसलिए इस ओर पत्रकारों को अपना ध्यान देना चाहिए.

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह ने पत्रकारिता के मूल्यों के संकट पर अपने ओजस्वी विचारो में कहा की मुझे जिला स्तर पर दुःख होता है की पत्रकारों में व्यवसायिक दक्षता नहीं है. वे ऐसे सवाल करते है जिनसे कोई लेना देना नहीं  होता. जबकि उस खबर के कारणों पर बात होई चाहिए. पत्रकारों को भारतीय अधिनियम की धाराओं का ज्ञान होना चाहए इन सबके अभाव में पत्रकारिता दिशाहीन हो रही है. उन्होंने इस बात पर बल किया की व्यवसायिक दक्षता अकेले पत्रकारिता में नई वरन हर पेशे में होनी चाहिए.

कलेक्टर एम् शेल्वेंद्रण ने कहा की कम से कम ऐसे लोग है जिन्होंने अपने बीच पनप  रही बुराई के सम्बन्ध में एक विचारगोष्ठी रखी. उन्होंने कहा की ऐ एस पी साहब ने प्रशासन की ओर से अपना पक्ष  रखा है जिससे मै सहमत हूँ मै यह भी स्वीकार  करता हूँ की कानून पुराना है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तो सोच बदल रही है. नए लोग नए अवसर प्रदान कर रहे है. पहले माह भर में दस से पंद्रह लोग ही समस्याए दर्ज करा पाते थे आज एक जिले में प्रत्येक सप्ताह 150 से अधिक शिकायते दर्ज होती है.

पूर्व महापौर संदीप जायसवाल ने कहा की चाहे सत्ता हो या प्रशासनिक व्यस्था जब व्यक्ति उस पर बैठता है तो वह मनमर्जी के निर्णय लेता है. निर्णय की स्वतंत्रता के चलते वह सही गलत का भान नहीं कर पाता है . आजादी के बाद से आज तक अंग्रेजो के समय के कानून है जो निर्णायक है उनकी भूमिका का दायरा बना दिया जाए तो भ्रटाचार पर अंकुश लग सकता है.

इस अवसर पर कटनी प्रेस क्लब की ओर से तमाम पदाधिकारी एवं सदस्यगड़ एवम बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे.

17 January, 2011

शिवराज की बहने और भांजी अब अस्पताल में सुरक्षित नहीं

शिवराज सरकार  एक ओर संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना, लाडली लक्ष्मी योजना एवं प्रोत्साहन राशी देकर लोगो का शासकीय अस्पतालों से जो मोह भंग हुआ है उस विशवास को दुबार कायम करने की कोशिस कर रही है लेकिन  ऐसा लगता है की शिवराज की बहने और भांजी  अब अस्पताल में सुरक्षित नहीं है क्योकि सरकारी कर्मचारी की अंतरात्मा म़र चुकी है. उनमे संवेदनाये बची ही नहीं है.

इसी प्रकार का एक दर्दनाक हादसा सोमवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी में घटित हुआ जब ग्राम पंचायत करहिया नंबर एक की आदिवासी  महिला की नवजात बच्ची को अस्पताल के प्रसूति वार्ड में एक बिलौटे ने बुरी तरह लहू लुहान कर दिया.

गोरी बाई आदिवासी पति सुरेश सुरक्षित प्रसव के लिए सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र रीठी में भर्ती हुई. रविवार को उसने एक स्वस्थ बच्ची  को जन्म दिया. सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन सोमवार की शाम लगभग चार बजे  एक बिलौटे ने बच्ची  को बुरी तरह जख्मी कर दिया जिसमे उसकी दाई आँख पर पंजा मारा और उसका दाया गाल  और आँख बुरी से प्रभावित हो गए.

इस हादसे के बाद से जननी गोरीबाई रोटी बिलखती रही लेकिन इस अबला माँ की पुकार सुनाने वाला कोई नहीं था. चीख पुकार सुनकर अस्पताल के कर्मचारी बिलौटे को पकड़ने में लग गए जबकि इस घायल नवजात को बचाने में कोई भी नहीं आया.

मीडिया की दखलंदाजी के अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया.
इस ह्रदय विदारक घटना से रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूति वार्ड में उपस्थित माताओं के कलेजे मुह को आ गए. वहा  उपस्थित जननियो ने बताया की दिन भर बिलौटा चक्कर लगाता रहता है  और इस अव्यवस्था के लिए अस्पताल प्रबधन जिम्मेदार है. वार्ड बॉय, स्वीपर, चोकीदार, स्टाफ नर्स कोई भी अपनी ड्यूटी पर नहीं मिलता.

 पूरे अस्पताल में एक मात्र नर्स को छोड़कर कोई भी नहीं मिला. जननी वार्ड में महिलाओं ने कहा की बगैर किसी व्यवस्था  के उनको तीन दिन तक इस अस्पताल में भर्ती रखा जाता है. इससे अच्छा  हो की उनको एक दिन बाद ही इस नरक से छुट्टी मिल जाए.

ड्यूटी पर मिली नर्स से जब उसका नाम पूछा तो बड़े ही अभद्र लहजे में उसने अपना नाम बताने से इनकार कर दिया. उसने कहा की आपको नाम से क्या करना आप तो स्टाफ नर्स ही लिख देना. बाद में अपने कमरे में आराम फरमा  रहे बी एम् ओ डाक्टर गुलाब तिवारी ने बताया की बच्चे की आँख पर मामूली घाव है फिर भी तीन दिन तक आब्जर्वेसन पर रखा है उसके बाद ही कुछ कह सकते है.

अस्पतालों में व्याप्त  अराजकता का यह जीता जागता उदहारण है. ड्यूटी पर तैनात नर्ष शोभना अपना नाम नहीं बताना चाहती अस्पताल के कर्मचारियों के होसले इसलिए  भी बुलंद रहते है क्योकि सी एम् ओ और जनप्रतिनिधियों को  महीने का कमीशन लेकन सारी अव्यवस्थाओ को अनदेखी कर देते है.
ऐसा नहीं है की यह रीठी अस्पताल में कोई पहली घटना है अभी पंद्रह बीस दिनों  पहले ही एक और नवजात पर बिल्ली हमला कर चुकी है फिर भी अस्पताल प्रबंधन अपनी कुम्भ्करनी नीद से नहीं जगा.
क्या अस्पताल प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और ऐसे दरवाजे लगवाये जायेगे जो खोलने पर स्वतः ही बंद हो जाते है? खिड़की दरवाजो पर मजबूत जाली लगाई जायेगी ?
दरवाजे पर स्टाफ का कोई जिम्मेदार कर्मचारी तैनात रहेगे?

या फिर अपने बच्चे की जान गवाने के लिए गरीब माताए अपने नौनिहालों को इसी तरह कुत्ते बिल्ली से नोचते हुए देखकर भी चुप रहेगे ?
क्या अस्पताल के कर्मचारी बाहर बैठकर इसी तरह ठहाके लगते हुए चाय की चुस्की का आनंद लेकर अपनी ड्यूटी पूरी करते रहेगे?
कभी इन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी ?

मरीजो की जान जोखिम में

कटनी
घरेलू गैस की कमी से आम भारतीय तो लगभग वर्ष भर ही जूझता रहता है लेकिन ठंडी के मौसम में परेशानी कुछ अधिक ही बढ़ जाती है. इसका कारण  शादी समारोह सहित नाश्ते की दुकानों पर एल पी जी  सिलेंडरो की खपत बढ़ना है. लेकिन इन दिनों रोगियों के लिए लगे एम्बुलेंस वाहन में भी बेधड़क इन एल पी जी गैस  सिलिंडरो का उपयोग हो रहा है
जिले में सर्दी का मौसम आते ही आम नागरिको की मुश्किलें बढ़ जाती है. एक तरफ महगाई की मार तो दूसरी तरफ गैस एजेंसियों द्वारा उपभोक्ताओं को एक-एक महीने  बाद गैस सिलेंडर उपलब्द्ध हो रही है जिससे  आम आदमी तो बिलकुल पिसा जा रहा है.

ऐसा नहीं है की प्रशासन को इस बात की खबर न हो प्रशासन द्वारा इस विसंगति को रोकने के लिए अभियान भी छेड़ा जाता है लेकिन गैस की कालाबाजारी में मिलने वाले मोटे कमीशन  के कारण गैस का अवैध कारोबार रुक  नहीं सका है. प्रशासन को लाभ इस हद तक पहुचा दिया जाता है की अभी तक तो लाल सिलेंडर चार पहिये के वाहन एवं होटलों में इस्तेमाल किये जा रहे थे लेकिन अब एम्बुलेंस में भी इन खतरनाक सिलिंडरो का उपयोग किया जाने लगा है. मरीजो की जान जोखिम में ड़ाल एम्बुलेंस संचालको द्वारा घरेलू गैस से एम्बुलेंस का सञ्चालन हो रहा है.

यह एक सामान्य सी  बात है की एम्बुलेंस को देख  तत्काल अस्पताल पहुचाने के लिए इस वाहन को कोई भी कही पर नहीं रोकता और बिना किसी रोक-टोक के एम्बुलेंस को जाने दिया जाता है.

अब तक स्कूल वैन एवं टेक्सियो में एल पी जी  सिलिंडरो का उपयोग किया जा रहा था और ऐसा करके वाहन मालिक मोटा  मुनाफा कमा रहे थे. अपने साथियो के मोटे मुनाफे को देखते हुए एम्बुलेंस चालाक भी ऐसा करने लगे है. घरेलू गैस पेट्रोल एवं डीजल से सस्ती पड़ती है, इसलिए एम्बुलेंस चालाक इसका इस्तेमाल कर रहे है.

जबकि एल पी जी गैस सिलिंडरो से संचालित हो रही एम्बुलेंस में जाना मरीजो के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. इस गैस से चलने वाले वाहनों में गर्मी अधिक रहती है, साथ ही गैस लीक होने का खतरा भी बना रहता है. यदि कही धोके से गैस लीक होती है तो मरीज को सास लेने में तकलीफ आ सकती है और ऐसी विषम परिस्थिति में मरीज असहाय एक और गंभीर हादसे का शिकार कभी भी हो सकता है.

14 January, 2011

ग्रामीण घर मालिको को अपने घरो के स्वामित्व के प्रमाण पत्र प्रदान किये जायेगे.

शासन के नए नियमानुसार अब ग्रामीण घर मालिको को अपने घरो के स्वामित्व के प्रमाण पत्र प्रदान किये जायेगे. इस प्रमाणपत्र के आधार पर ग्रामीणों को अपने घरो की गारंटी पर भी ऋण प्राप्त हो सकेगा. ज्ञातव्य है की अभी तक गावो में भले ही ग्रामीणों के विशाल आवास हो लेकिन इन पुश्तैनी या नवीन घरो के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उनके पास नहीं होते थे. जिससे वे इनके आधार पर ऋण आदि प्राप्त नहीं कर पाते थे.

शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार ग्रामो में स्थित आबादी भूमि पर बने घरो को राजस्वा पुस्तिका में दर्ज कर अब ग्रामीण गृह स्वामियों को इस आशय के प्रमाण पत्र प्रदान किये जायेगे. इन प्रमाण पत्रों के आधार पर किसान ग्रामो में स्थित अपने घरो के वैधानिक स्वामी माने जायेगे और इसी आधार पर इन्हें इन घरो पर ऋण भी प्राप्त हो सकेगे.

प्रमाण पत्रों पर मिल सकेगा ऋण
ग्रामो में निवासरत ग्रामीण अपने भू खंड पर आवास निर्माण करने अथवा अर्ध्पक्के या कच्चे मकान का जीर्णोद्धार या उन्नयन करने के लिए किसी बैंक या ऋण प्रदायकर्ता संत्स्था से आवास ऋण लेना चाहते है उन्हें आवास ऋण प्राप्त करने ए लिए ऐसे प्रमाण पत्र पर्याप्त रहेगे ऐसे धारक को प्रमाण पत्र उपलब्द्ध करने के उद्देश्य से निम्न प्रक्रिया निर्धारित की गई है
निम्न दस्तावेज होगे जमा
आवेदक को प्रमाण पत्र के लिए तीन प्रतियों में तहसीलदार को आवेदन कराना होगा. जिसके साठ भूखंड की चतुर्सीमा का विवरण क्षेत्रफल सहित नजरी नक्षा भी प्रस्तुत करना होगा. आवेदक के साठ आवेदक को अपनी स्वहस्ताक्षरित दो फोटो लगाना होगी. इसके अलावा आवेदक के पास भूखंड के अधिकार के सम्बन्ध में यदि कोई दस्तावेज या प्रमाण हो तो वह भी आवेदन के साठ लगाया जाए.

निर्देश में बताया गया है की आवेदक उस ग्राम का खातेदार या शिल्पी है तो यह प्रमाण भी वह उपलब्द्ध कराये.

यह विवरण भी है आवश्यक
आवेदक को २ अक्टूबर १९५९ को आधार तिथि मानते हुए प्रशाधीन भूखंड या आवास के धर्नाधिकार को प्रमाणित करने हेतु उत्तरजीविता क्रम के विवरण भी प्रस्तुत करना होगे. इसके अलावा भूखंड या आवास किसी हस्तांतरण विलेख के आधार पर प्राप्त किया है तो ऐसे हस्तांतरण विलेह की स्वहताक्षारित प्रमाणित छायाप्रति और हस्तान्तारानकर्ता के धारणाधिकार के सम्बन्ध में भी विवरण देना होगा.

इससे एक तो ग्रामीणों को अपने घरो पर वैधानिक अधिकार प्राप्त होगा दूसरे वे इसे प्रमाण पत्र के आधार पर बैंको से ऋण भी प्राप्त कर सकेगे

वृक्षारोपण में करोडो रुपया डकरा

पत्थरो में वृक्षारोपण
महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना के पैसे को ठिकाने लगाने के लिए कटनी जिले के अधिकारियो ने ग्राम पंचायतो को पैसा पानी की तरह बाटा और फिर पलटकर यह भी नहीं देखा की इस पैसे से किये गए काम की उपयोगिता सार्थक भी रही या फिर यह  पैसा व्यर्थ हे बह गया

विगत दिनों जनपद पंचायत रीठी की अध्यक्ष प्रीति सिंह ने अपने निरीक्षण में जनपद पंचायत रीठी में पूर्व में कराये गए वृक्षारोपण पर आश्चर्य जताया. इस वृक्षारोपण की विशेषता है की इसे पत्थरो पर किया गया जो सारा का सारा पैसा व्यर्थ चला गया है.




इन तस्वीरो को देख कर आप भी दंग रह जायेगे. रीठी जनपद पंचायत में इसी तरह से वृक्षारोपण करके सी ई ओ सुरेश झारिया के ज़माने में करोडो रुपया डकरा  गया है.

नव वर्ष में शादियों की धूम

कुवारे नवयुवको एवं नवयुवतियो के लिए वर्ष 2011 खुशनुमा रहेगा, इस वर्ष शादी के अच्छे खासे शुभ मुहूर्त है. जनवरी से दिसंबर तक 49 मुहूर्त है. पंडित इन्द्रपाल शुक्ल,   ने बताया की मलमास 15 जनवरी संक्रांति से समाप्त हो रहा है, 16 जनवरी से विवाह की शुभ तिथिया आरम्भ होगी.

बाजारों में खरीदी  के लिए अभी से ही चहल-पहल दिखाई देने लगी है किराना, कपडा व बर्तन सहित सभी व्यापारियों द्वारा अपना स्टाक पूर्ण कर रखा गया है. उम्मीद है की वर्ष 2011 सभी के लिए अनुकूल रहेगा वही दूसरी ओर शीत लहर से फसलो पर पड़े प्रभाव से शादियों की खरीदी मुख्यरूप से ग्रामीण किसानो  की खरीदी  में फीकापन होने की उम्मीद की जा रही है

जनवरी से मार्च  तक अधिकतर शादिया शहरी क्षेत्रो में है, इससे बाजारों में थोड़ी चहल-पहल रहेगी. ग्रामीण क्षेत्रो के विवाह अप्रेल-मई में अधिक रहेगे. फरवरी-मार्च की शादियों के बीच में बोर्ड व सेमेस्टर परीक्षा होने से विद्यार्थी  को मौज मस्ती का अवसर नहीं मिल सकेगा.

मलमास समाप्त, शुभ कार्य प्रारंभ
पंडित इन्द्रपाल शुक्ल ने बताया की 15 जनवरी 2011 से धनु मलमास समाप्त हो रहा है, मकर राशी में सूर्य के आने से 16 जनवरी से गृह-प्रवेश, विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ होगे. जनवरी से दिसंबर तक कुल 49 शुभ मुहूर्त है. सर्वाधिक शुभ मुहूर्त मई-जून में 98 व 19 दिन दिन रहेगे.

15 मार्च से 14 अप्रेल तक मीन का सूर्य होने से एक माह तक विवाह कार्य बंद रहेगे, उसके पश्चाप 11 जुलाई से देवशयनी एकादशी से शुभ कार्यो पर रोक चार माह के लिए लगेगी, जो पुनः देव प्रबोधनी एकादशी 6   नवम्बर 2011 दिन  रविवार से ख़त्म होगी. उसके बाद सभी शुभ कार्य प्रारंभ होगे.

भूमि हीनो को पट्टे मिले जमीन नहीं

अखिलेश उपाध्याय / कटनी  
सरकार हरिजन आदिवासियों के उत्थान के लिए कितनी भी योजनाये और सुविधाए लागू कर दे लेकिन वास्तविकता की धरातल  पर इस समाज के लोग अभी भी पीड़ित और शोषित है. कटनी जिले में भू माफियाओं के मकडजाल में फस कर हिरजन आदिवासी अपनी जमीन गवा चुके है ऐसा ही एक खुलासा बहोरिबंद तहसील में प्रकाश में आया है.

पीड़ित आदिवासियों का आरोप है की दिल्ली की एक निजी कंपनी से साठगाठ  कर राजस्व अधिकारियो ने गरीबो के हक़ की  लगभग दो सौ एकड़ से अधिक जमीन कंपनी के हवाले कर दी है. सात साल पहले मध्य प्रदेश सरकार की योजना के तहत कौड़िया तथा आसपास के 159 भूमिहीन आदिवासियों को सरकारी जमीनों के पट्टे दिए गए थे.

इन गरीबो के हाथ में आवंटन के कागज़ तो थमा दिए गए लेकिन सात साल में कभी उन्हें जमीन के दर्शन नहीं कराये गए. आज भी गरीब आदिवासी पट्टा लिए अपनी जमीन तलाश रहे है किन्तु इनको जमीन अभी तक भी नहीं मिल सकी है.

पीड़ित आदिवासियों ने बताया इ 2003 में पट्टा देने के बाद अधिकारियो ने न तो कभी जमीन का सीमांकन किया और न ही मौके पर जाकर जमीन बताई. जिससे सरकारी रिकार्ड में वे भूमि के मालिक तो हो गए लेकिन वास्तव में वे अब भी भूमिहीन है.

ग्रामीणों का आरोप है की उनके हिस्से की जमीन दिल्ली  से यहाँ  आकर प्लांटेसन  कर रही एक कंपनी को बेच दी गयी है. पट्टा हासिल करने वाले ग्रामीणों के मुताबिक कुछ लोगो ने अधिकारियो से मिल कर आवंटित जमीन से अधिक पर कब्ज़ा जमा लिया है जबकि लोगो के पास एक इंच जमीन तक नहीं है.

पट्टाधारियों  की सूची में शामिल बड़े कोल, सुखराई, शिवका, दशरथ, भिरचैया, कन्छेदी, बैसाखू, परदेशी, शिवप्रसाद, सुकरू सहित अन्य ने बताया की पटवारी से लेकर तहसीलदार तक के पास कई बार जमीन देने की मांग की जा चुकी है. अधिकारी उन्हें टाल देता है. प्रत्येक भूमिहीन को अधिकतम दो हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी. जो  लगभग 101 हेक्टेयर के आसपास होती है. इसमें से कुछ ने जैसे-तैसे अपनी जमीन ढूढ़ कर उस पर कब्ज़ा कर लिया लेकिन अधिकांश लोग आज तक अपनी जमीन प्राप्त नहीं कर सके.

पीड़ित आदिवासियों के मुताबिक सरकारी रिकार्ड में दर्ज खसरा नंबर की जमीन मौके पर उपलब्द्ध नहीं है. गायब हुई जमीन किसके कब्जे में इसका पता राजस्व अमला भी नहीं  लगा पा रहा है

यह बड़े आश्चर्य की बात है की इतने बड़े घोटाले को अंजाम देने वालो के विरुद्ध आज तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई स्पष्ट रूप से जिले के आला अधिकारी इसमें लिप्त है.

आम आदमी का जीना मुश्किल

महगाई कम करे सरकार
केंद्र सरकार महगाई रोकने के लिए प्रयास करने की बात तो कर रही है पर ऐसा होता कही नजर नहीं आ रहा है. महगाई के कारण आम आदमी को जीना दुश्वार होता जा रहा है. केंद्र सरकार से आम आदमी के हित में अपेक्षा है की वह बैठको की नौटंकी छोड़ महगाई को कम करने के लिए सार्थक प्रयास करे.

देश के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री  पी चिदंबरम, कृषि मंत्री शरद पवार आदि ने महगाई को कम करने के लिए बैठक को आयोजित किया. बैठक आयोजन से सभी को उम्मीद थी की देश के शीर्स्थ नेता आम आदमी को हलाकान कर रहे इस मसले पर गंभीरता से विचार कर कोई ऐसे उपाय तलाशेगे जिनसे लोगो  को महगाई से राहत मिलेगी. हुआ उल्टा सभी नेता यह कहते हुए बाहर आ गए की महगाई कम करने के बारे में कोई निर्णय नहीं हो पाया.

यह देश के लोगो के साथ मजाक जैसा हुआ. इस गंभीर मसले पर ऐसा कहना वास्तव में देश के आम गरीब आदमी की आशाओं  को तोड़ देना ही है. यू पी ऐ  सरकार के घटक आपस में ही उलझ कर लोगो का ध्यान बाटने का प्रयास कर रहे है. जो सरकार चला रहा है महगाई पर नियंत्रण उसी के हाथ में है.

वास्तव में एक दूसरे पर दोषारोपण तो अपना दामन बचाने की कोशिश है. पिछले  दिनों जिस तरह के गंभीर आर्थिक घोटाले सामने  आये है वे शर्मनाक है उन घोटालो के लिए दोषी लोगो पर कार्रवाई करने से इसलिए बचा जा रहा है क्योकि घोटालो में कुछ ऐसे नाम शामिल है जो नहीं चाहते की उनका नाम सामने आये.

दाल, गेहू, तेल और यहाँ तक की प्याज, लहसुन के दाम भी आसमान को छू रहे है ऐसे में आम आदमी का जीना मुश्किल हो रहा है उस पर ईधन गैस और पेट्रोल और डीजल के दाम  बढ़ने की आशंका  आम आदमी को दहशत में डाल रही है.

13 January, 2011

कंप्यूटर समर्थित शिक्षा में करोडो का घोटाला

कटनी / शिक्षा के गुणात्मक सुधार के लिए मध्य प्रदेश शासन की एक पहल है - "हेड स्टार्ट कार्यक्रम". प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रो  में सूचना प्रोद्योगिकी के ज्ञान के अंतर को समाप्त करते हुए हेड स्टार्ट कार्यक्रम शैक्षणिक संसाधनों में संवृद्धि करने वाला एक कार्यक्रम है. इस कार्यक्रम के अंतर्गत मल्टीमिडिया रिच लेसन के माध्यम से बच्चो को सीखने की ऐसी परिस्थितियों का निर्माण किया जाता है, जिसमे बच्चो में स्वयं एवं मिलजुलकर सीखने की प्रवृत्ति का विकास हो, जिससे सीखना प्रभावी और स्थाई हो सके. राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा विषय-वस्तु आधारित शैक्षणिक कार्यक्रम की सी डी उपलब्द्ध करयी जाती है.

लेकिन कटनी जिले में इस योजन पर करोडो का खर्च तो किया गया है लेकिन धरातल पर जिले के विद्यार्थियों के साथ खुलेआम छलावा किया गया है. यह खुलासा आर टी आई एक्टविस्ट मनोज तिवारी को सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत दिए गए दस्तावेजो में हुआ है 

दिए गए दस्तावेजो में  राज्य शिक्षा केंद्र के पत्र क्रमांक/आई ई सी/ हेड स्टार्ट/ 2005  4567  भोपाल दिनांक 21 .09 .2005 के अनुसार हेड स्टार्ट कार्यक्रम में किये जाने वाले कार्यक्रम के वारे में विस्तार से सभी जिला परियोजना समन्वयक को लिखा गया है इस पत्र में लिखा है की जन शिक्षा केंद्र स्तर पर हेड स्टार्ट कार्यक्रम की मानिटरिंग हेतु निर्देश प्रसारित किये गए इस पत्र में स्पष्ट लिखा है की हेड स्टार्ट जनशिक्षा केंद्र में मुख्य रूप  से संचालित होने वाली गतिविधिया होगी -
कंप्यूटर समर्थित शिक्षा, पुस्तकालय गतिविधि, विज्ञान क्लब.

फर्जी आकडे प्रस्तुत किये
कंप्यूटर समर्थित शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शासन के जो निर्देश थे उनमे-
जिज्ञासा में वृद्धि
स्वयं करके सीखने का अवसर
परस्पर एक दूसरे में समूह के माध्यम से सीखना
विभिन्न स्तर के बच्चो को अपनी स्तरानुसार सीखने के अवसर
स्वयं का मूल्यांकन करने का अवसर
कंप्यूटर  के माध्यम से सीखने को प्रोत्साहन
गलती सुधारने का अवसर
स्राजन्शीलता का विकास
इन सब उद्देशो का पालन कटनी जिले के किसी भी हेड स्टार्ट केंद्र में नहीं किया गया

कक्ष व्यस्था
हेड स्टार्ट कक्ष में न्यूनतम निम्नानुसार व्यस्थाए होनी चाहिए-
कक्ष में तीन कम्यूटर रखने के लिए टेबिल या सीमेंट का प्लेटफार्म
प्रत्येक कम्यूटर के सामने  तीन-तीन बच्चो के बैठने के लिए लगभग 10 -12 मोल्डेड प्लास्टिक के स्टूल
विभिन्न पुस्तकालय कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रदत्त पुस्तके, शैक्षणिक सामग्री
दरी (बच्चो द्वारा कंप्यूटर रहित गतिविधि करने के लिए), व्हाईट बोर्ड, पिन अप बोर्ड.
उक्त नियमो का कही पर भी पालन नहीं किया गया और न ही किसी हेड स्टार्ट केंद्र में यह व्यस्था ही है.

पुस्तकालय गतिविधि
प्रत्येक हेड स्टार्ट  केंद्र में पुस्तकालय की स्थापना की गई है एवं इसे हेड स्टार्ट  के साथ जोड़ा गया है. भौतिक सत्यापन करने पर किसी भी केंद्र में यह व्यस्था नहीं मिली  यह सिर्फ कागजो में चलने वाली योजना बनकर रह गयी है.
क्या थे  इस गतिविधि के  उद्देश्य -
बच्चो में पथ्य पुस्तकों के अलावा अन्य पुस्तके पढने की आदत डालना
बच्चो को सुन्दर, रोचक पुस्तके सहजता से मिल सके
बच्चो में छिपी हुई रचनात्मक क्षमताओं के उजागर होने का मौका

पुस्तकालय गतिविधि की मुख्य गतिविधिया
भित्ति पत्रिका (बाल न्यूज़ पेपर), गोष्ठी, परिचर्चा, पुस्तकालय की पुस्तकों का आदान प्रदान, पुस्तकों से सम्बंधित गतिविधिया

पुस्तकालय गतिविधि का क्रियान्वयन
विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हेड स्टार्ट  जनशिक्षा केंद्र  में स्थापित पुस्तकालय को पुस्तके प्रदान की गई है एवं इस वर्ष नॅशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली के सहयोग से पाठक मंच भी हेड स्टार्ट  जनशिक्षा केन्द्रों में प्रारंभ किया गया था.  इस प्रकार प्रत्येक हेड स्टार्ट केंद्र पर पर्याप्त संख्या में बच्चो के लिए पुस्तके उपलब्द्ध है. लेकिन क्या कभी भी बच्चो को इन पुस्तकों को पढने के लिए उपलब्द्ध कराया जाता है  ?

विज्ञान क्लब की स्थापना
प्रत्येक हेड स्टार्ट  जनशिक्षा केंद्र में उपलब्द्ध कंप्यूटर की क्षमताओं का अधिक से अधिक  उपयोग सुनिश्चित करने के लिए पाठ्य सहगामी क्रियाओं के साथ कंप्यूटर का प्रयोग किया जाना चाहिए. कंप्यूटर के उपयोग से जानकारियों का एकत्रीकरण, विश्लेषण एवं प्रतुतिकरण की दक्षता का विकास होगा. जिससे की बच्चे वैज्ञानिक एवं तर्कपूर्ण विधियों से सोचने के लिए प्रेरित होगे.
विज्ञान क्लब के उद्देश्य-
विधार्थियों एवं शिक्षको में वैज्ञानिक द्रष्टिकोण विकसित करना
विद्यार्थियों और समाज में विवेकपूर्ण और वैज्ञानिक सोच विकसित करना
प्रतिदिन की समसयाओ को हल करने के लिए वैज्ञानिक विधि के उपयोग की आदत डालना
जानकारियों का संग्रहण, संगठन, प्रक्रिया और पुनः प्राप्ति के कौशलो का विकास करना
वैज्ञानिक जानकारियों के प्रस्तुतीकरण के कौशल विकसित करना
सभी क्षेत्रो में गुणवत्तापूर्ण जानकारियों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी  के उपयोग को बढ़ावा देना

विज्ञानं क्लब के लक्ष्य
विद्यार्थियों में वैज्ञानिक द्रष्टिकोण   के विकास के लिए प्रत्येक हेड स्टार्ट  जनशिक्षा केंद्र में विज्ञान क्लब की स्थापना की गई है. इसके अंतर्गत कंप्यूटर की मदद से निम्नलिखित गतिविधिया की जा सकती है -
डेटा बेस निर्माण-जानकारियों का संग्रहण, संगठन, प्रक्रिया और पुनः प्राप्ति के कौशलो का विकास
वैज्ञानिक जानकारियों के प्रस्तुतीकरण के कौशल विकसित करना
साइंस प्रोजेक्ट्स से सम्बंधित रिपोर्ट बनाना
विज्ञान क्लब पत्रिका प्रकाशन
विभिन्न ग्राफ/ चित्र/सारणी के प्रिंट निकालकर विज्ञान प्रयोग  शाला में प्रदर्शित करना
सभी क्षेत्रो में गुणवत्तापूर्ण जानकारियों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना

12 January, 2011

शिवराज सरकार में सरकारी अमला निरुन्कुश

गरीब मेला शिविर कटनी जिले के गरीबो के उपहास का केंद्र बन गए  है. यहाँ की रीठी जनपद  में आयोजित गरीब मेला की श्रंखला में अभी तक रीठी, बडगांव, कमोरी, बिलहरी, हरद्वारा, बख्लेटा और इस बुधवार को बांधा ग्राम पंचायत में मेला तो लगा लेकिन बड़े दुःख और आश्चर्य की बात है की इन गरीब मेला शिविरों में आज तक जिले का एक भी आला अधिकारी नहीं पंहुचा.

दिनांक 12 जनवरी 2011 को आयोजित रीठी जनपद की ग्राम पंचयत बांधा में आयोजित गरीब मेला शिविर में पंचायत इन्स्पेक्टर तिग्नाथ को छोड़कर कोई भी अधिकारी नहीं पहुचा. स्वयं जनपद पंचायत रीठी के सी ई ओ पंकज जैन नदारद मिले फिर दूसरो की क्या बात की जाए. सी ई ओ खजुराहो सांसद जीतेन्द्र सिंह बुंदेला के भ्रमण कार्यक्रम में व्यस्त थे.

सांसद के भ्रमण को जिला प्रशासन गंभीरता से ले रहा है और गरीबो के लिए लगने वाले इन शिविरों में अधिकारियो की अनुपस्थिति गरीबो के साथ मजाक नहीं तो और क्या है....

इन गरीब शिविरों में कलेक्टर, एस डी एम्, जिला पंचायत सी ई ओ, एडिसनल कलेक्टर, तहसीलदार, आर आई कोई भी किसी भी शिविर में नहीं पहुचा. यह इस बात को स्पष्ट करता है की शिवराज सरकार में सरकारी अमले को भय नाम की बात है ही नहीं. प्रशासन की उदासीनता और इनका मनमान आचरण कटनी जिले में राजनेताओं और प्रशासन की मिली भगत को चरितार्थ करता है.


आखिर इन गरीब मेला शिविरों को क्यों आयोजित किया गया ?
गरीबो को  कटनी जिले के राजनेता  और प्रशंसनिक अधिकारी कब तक छलते रहेगे ?
 यहाँ की जनता को जाग्रत करने वाला मसीहा कब आएगा ?

कटनी जिला प्रशासन चुपचाप कमीशनखोरी में लिप्त है और यहाँ के जनप्रतिनिधि स्वार्थ की भावना से ऊपर उठ कर सोच ही नहीं पाते.....

साठ हजार पौधों पर तुषार का असर

कटनी जिले की रीठी तहसील अधिकांश फसल पाला  से प्रभावित हुई है. तुषार से अरहर की 40 से 50 प्रतिशत फसले, मटर की 25 से 30 प्रतिशत, मसूर की 25 से 35 प्रतिशत, चने की 10 से 25 प्रतिशत, राय-सरसों एवं अलसी की पांच से दस प्रतिशत फसले प्रभावित हुई है. शीतलहर एवं पाला से प्रभावित फसलो की तबाही से किसान चिंतित है.

इस पाला से शासकीय निकुंज खम्हरिया (घुघरा) भी अछूता नहीं रहा. यह कहना है राधेलाल नामदेव, ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी  का. नामदेव के मुताबिक इस वर्ष उन्होंने नर्सरी में एक लाख आम के पौधे तैयार किये थे जिसमे से लगभग साठ हजार पौधों पर तुषार का असर हुआ है.

एक और ग्रामीण  उद्यान विस्तार अधिकारी बी पी झारिया ने बताया की बड़े परिश्रम से इन आम के पौधों को तैयार किया गया था लेकिन इस बार पडी अधिक ठण्ड ने इन पौधों को बुरी तरह झुलसा दिया है. अब इन पौर्धो को बचाने के लिए इनमे पानी लगाकर यूरिया का छिडकाव किया गया है.

उद्यान प्रभारी नामदेव ने बताया की घुघरा नर्सरी के नाम से प्रसिद्द शासकीय संजय निकुंज खम्हरिया (घुघरा) में फलदार पौधे एवं वृक्षों की नर्सरी है जहा विभागीय योजना एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पौधों को तैयार किया जाता है. यहाँ से न केवल जिले के किसानो को बल्कि इस वर्षः जिला पंचायत सी ई ओ शहडोल को एक लाख उनतीस हजार रूपये के विभिन्न प्रकार के फलदार पौधे दिए गए.

इस नर्सरी में आवला की बनारसी और चकिया क़िस्म के चालीस वृक्ष लगे है जिनकी फल्सल  देखकर दिल खुश हो जाता है.

इसी प्रकार इस नर्सरी में सिन्दूर के पौधे भी तैयार किये गए है.

10 January, 2011

मध्य प्रदेश शासन लोक निर्माण विभाग कटनी में बैठे आला अधिकारी चैन की बंशी बजा रहे है तभी तो उन्हें क्षेत्र में सच्चे जनप्रतिनिधि की जानकारी तक नहीं है. ऐसा ही एक नजारा विगत दिनों  देखने में आया.

बात है तिलगवा-बाधा-मगरधा (सात किलोमीटर) रोड  के भूमिपूजन की. इस भूमि पूजन में लगाए गए शिलालेख में पी डब्लू डी विभाग के कर्मचारियों ने या तो अनदेखी कर दी है या फिर ठेकेदार ने अपनों को खुश करने के लिए सोच समझकर यह भी ध्यान नहीं रखा की कौन जनप्रतिनिधि है और कौन नहीं.

इस शिलालेख में जो नाम लिखे गए है उनमे विधायक निशीथ पटेल के अलावा दूसरे लोगो के नाम समझ से परे है. इसमें  नरेद्र राय ब्लाक कांग्रेस कमिटी अध्यक्ष, जगदीश प्रसाद पाण्डेय विधायक प्रतिनिधि, कैलाश वर्मा सरपंच बिलहरी, सुदीप तिवारी एडवोकेट, सतेन्द्र सिंह भदोरिया विशिष्ट अतिथि की उपस्थिति में दिनांक 08 .01 .2011 दिन शनिवार को यह भूमि पूजन संपन्न हुआ.

पी डब्लू डी विभाग या ठेकेदार शायद भूल गया सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद पंचायत अध्यक्ष, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष, जनपद सदस्य को. गौरतलब है की वर्तमान में बिलहरी की सरपंच आशा वर्मा है न की कैलाश वर्मा और जितने भी नाम लिखे गए है वे सभी या तो ठेकेदार के करीबी व्यक्ति है या फिर विधायक के इर्द गिर्द रहने वाले लोग है.

पी डब्लू डी विभाग के इंजिनियर लगता है स्थल पर निरीक्षण करने नहीं आते क्योकि इतनी बड़ी गलती क्षेत्रीय जनता के गले नहीं उतर रही. लोगो में आक्रोश है की आखिर ठेकेदार द्वारा लगाया गया यह शिलालेख गलत व्यक्तियों के नाम के साथ क्यों  और कैसे लगाया गया ?

रोजगार गारंटी में बाल मजदूर काम कर रहे

ग्राम पंचायतो द्वारा नहीं रखे जाते रिकार्ड
महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना के तहत केंद्र सरकार कितनी भी पारदर्शिता लाने की कोशिश करे लेकिन लालफीताशाही सरकार के सारे फरमानों को दरकिनार कर अपने चहेतों को उपकृत करके लाभ कमा रहे है.

जनपद पंचायत रीठी में पिछले पंचवर्षीय कार्यकाल में इस कदर भ्रष्टाचार हुआ है की शायद ही प्रदेश के किसी अन्य जनपद में ऐसा भ्रस्टाचार हुआ हो.वर्ष 2009 -10 में आयी मूलभूत तथा बारहवे वित्त की राशी पूर्व सी ई ओ झारिय और जनपद के कर्मचारियों ने मिल बाट कर हजम कर ली और सरपंच सचिव को इस बात का पता तक नहीं चला.

इस रहस्य से पर्दा तब उठा जब जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह ने अपने जनसंपर्क कार्यक्रम में जनपद पंचायत रीठी की पंचायतो में पूर्व में आयी राशी एवं कराये गए कार्यो का स्थल पर भौतिक सत्यापन किया.अपने सघन दौरे के अंतर्गत जब प्रीति सिंह ग्राम पंचायत बिरुहली पहुची और जनता के सामने सचिव दिनेश पटेल से पूछा तब सचिव ने  बताया की चालीस हजार की राशी जो हेंड पम्प की मरम्मत में तथा पुताई एवं साफ़ सफाई में जो राशी दिखाई गयी है उस राशी को उसने आहरित ही नहीं किया.

आश्चर्य जनक तथ्य है की जब सचिव को विगत वर्ष आयी मूलभूत और बारहवे वित्त की राशी का पता ही नहीं है तो फिर यह राशी गयी कहा. जानकार सूत्रों की माने तो फरवरी मार्च में पूर्व सी ई ओ सुरेश झारिया एवं जनपद के कर्मचारियों की मिलीभगत से यह राशी निकाल ली गई है यदि प्रारंभिक स्तर पर आकड़ो पर जाए तो यह राशी तीस लाख के लगभग की है जो एक गंभीर अनियमितता का खुलासा करता है.

अपने जनसंपर्क में रीठी अध्यक्ष को रोजगार गारंटी योजना में ढेर सारी अनियमितताए मिली. महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना के अधिनियम 9 .1 के अनुसार ग्राम पंचायत मुख्यालय में आवेदन पंजीयन रजिस्टर, रोजगार कार्ड रजिस्टर, रोजगार रजिस्टर, सम्पदा रजिस्टर,  मस्टर रोल प्राप्ति रजिस्टर, शिकायत रजिस्टर रखा होना चाहिए. लेकिन इन पंजियो का या तो संधारण ही नहीं किया जाता और यदि किया भी जाता है तो फिर उन्हें ग्राम पंचायत मुख्यालय में नहीं रखा जाता.

रीठी जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह ने रोजगार गारंटी अधिनियम की न केवल जनपद बल्कि जिले स्तर  पर इसकी धज्जिया उडाये जाने पर चिंता जताई. उन्होंने कहा की रोजगार गारंटी अधिनियम में स्पष्ट उल्लेख है  की मस्टर रोल की एक प्रति सार्वजनिक निरीक्षण के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत तथा कार्यक्रम अधिकारी के कार्यालय रखी जायगी जो की नहीं रखी जाती. रोजगार गारंटी अधिनियम के नियम 9 .3 की कंडिका 9 .3 .3 में स्पष्ट उल्लेख है की जिला कार्यक्रम समन्वयको को एक शिकायत रजिस्टर रखना होगा. कार्यक्रम अधिकारी को अपने कार्यालय में एक शिकायत पेटी भी रखनी चाहिए और नियमित अंतराल पर उसे खुद खोलना चाहिए. शिकायत पेटी ऐसी जगह पर होनी चाहिए जहा लोग आसानी से उसमे अपनी शिकायते डाल सके. इसमें यह भी लिखा है की शिकायत पेटियों से प्राप्त होने वाली शिकायतों को भी शिकायत रजिस्टर में दर्ज किया जाना चाहिए.





अपने औचक निरीक्षण में रीठी जनपद अध्यक्ष जब ग्राम पंचायत सिमरा-1 में चल रहे नवीन तालाब के कार्य स्थल पर पहुची तो वहा मस्टर में 48 लोगो की हाजिरी भारी गयी थी जबकि मौके पर  मेट को मिलाकर 43 मजदूर काम करते मिले. इन मजदूरों में पांच बाल मजदूर भी मिले कुछ तो अध्यक्ष का वाहन देख कर भाग गए.

प्रीति सिंह ने उपस्थित मेट को स्पष्ट निर्देश दिए की भविष्य में बाल मजदूरों को काम पर न लगाये.

08 January, 2011

मुझे अन्दर से तो डर लग रहा था

मेरी पहली हवाई यात्रा
ढाना सागर में आयोजित शिव पुराण में कथा श्रवण हेतु में एक दिन बाद पंहुचा. हमारे मित्र दीपक तिवारी जो द वीक साप्ताहिक पत्रिका के मध्य प्रदेश छतीसगढ़ के प्रमुख संबाददाता है, ने अपने गृह ग्राम ढाना  में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सप्त दिवसीय सत्संग का आयोजन किया.

वृन्दावन धाम से आये आचार्य व्रजपाल शुक्ल जी द्वारा शिव तत्व का मार्मिक विवेचन किया गया. इस कथा के श्रवण के लिए मध्य प्रदेश के कई बड़े प्रमुख पत्रकार एवं राजनेता  भी पहुचे.

शिव वारात का नजारा तो देखने लायक था.  भूत प्रेत, पिसाच, लंगड़े-लूले तथा बिलकुल सच का साप लटकाए हुए इन बरातियो को देख श्रोता भाव विभोर रह गए और या द्रश्य  शिव की वास्तविक बारात का चित्रण कर रहे थे.

ब्रह्म नगरी ढाना  में सत्तर प्रतिशत ब्रह्मण निवास करते है.
यहाँ पर चिम्स कंपनी द्वारा पायलटो के प्रशिक्षण हेतु ट्रेनिंग सेंटर भी खुल गया है. हमारे निवास के ऊपर से दिन भर उड़ने वाले छोटे विमान देख कौतूहल होता था.
2011 की सुबह दीपक तिवारीजी  ने इन विमानों को उड़ते देख मुझसे पूछा की क्या इसमें घूमना चाहते हो ? मैंने तत्काल अपनी इच्छा जताई



फिर इस दो सीट वाले विमान में घूमने का अवसर मिला. केरल के एक प्रशिक्षु पायलट द्वारा यह विमान उड़ाया जा रहा था. चूकी यह छोटा विमान है इसलिए जब भी झटके लगते तो दिल में अजीब सी हलचल होती. एक मीठी हलचल ह्रदय में उतरने तक चलती रही.

हवा में पहुचने पर पायलट ने मुझसे पूछा - सर कैसा महसूस कर रहे हो  ? यद्यपि मुझे अन्दर से तो डर लग रहा था लेकिन प्रगट में मैंने अपनी हिम्मत न टूटने की बात को जताते हुए कहा की बहुत ही बढ़िया लग रहा है.

ठेकेदार द्वारा मनमानी

शासकीय भवनों के निर्माण में इस कदर भ्रस्टाचार व्याप्त है की ठेकेदार सिर्फ और सिर्फ अपना लाभ ही देख रहे है. सिविल ईन्जिनिअरिन्ग के नियम कायदों को ताक पर रख कर जिले में ठेकेदार निर्द्वंद होकर काम कर रहे है. कम समय में करोडपति बन्ने के चक्कर में आज की पीढी देश के साथ छलावा कर रही है और विकास को  भ्रस्टाचार निगल रहा है.

रीठी तहसील मुख्यालय में निर्माणाधीन तहसील भवन के निर्माण में ठेकेदार द्वारा हद दर्जे की मनमानी की जा रही है. पी डब्लू डी द्वारा ठेकेदार के माध्यम से बन रहे इस भवन में ठेकेदार का नाम, लागत आदि का बोर्ड नहीं लगाया गया है.





स्थल पर निकल रहे पत्थर को ही मजदूरों से तुड़वाकर दीवारे चुनवाई जा रही है. इसी घटिया पत्थर को बड़ी संख्या में मजदूर लगाकर तुडाई  कराई जा रही है. और फिर  इसी गिट्टी से बीम और नीव भरी जा रही है.

यहाँ लगने वाला लोहा घटिया स्तर का तथा इसके बीम में लगने वाले लोहे की स्पेसिंग भी अधिक की जा रही है जो सिसिल ईन्जिनिअरिन्ग के नियमो के विरुद्ध है.

यहाँ  काम कर रहे मजदूरों में बहुत से नाबालिग बच्चे भी काम कर रहे है जो की बाल मजदूरी अधिनियम का उपहास उड़ा रहा  है.

इस प्रकार तहसील  मुख्यालय में चल रहे इस भवन निर्माण कार्य में किये जा रहे गड़बड़ घोटाले  से पी डब्लू डी विभाग के ईन्जिनिअर और आला अधिकारियो को कोई लेना देना नहीं है क्योकि वे तो पहले ही लेकर बैठ गए है. जनता के पैसे को टेक्स के रूप में लादकर महगाई तो बढाई जा रही है लेकिन कटनी जिले में उसी पैसे से विकास के नाम पर चल रहे काम पर ध्यान देने की बजाय अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार खुली लूट मचाये है.
जनता की उदासीनता और मक्कार ठेकेदार तथा कुम्भ्करनी नीद में सो रहे कटनी जिला प्रशासन के चलते जिले में जमकर लूट और भ्रस्टाचार व्याप्त है.

07 January, 2011

जनपद का घेराव

मध्याह्न भोजन चलाने वाले समूहों में इस समय जमकर लूट मची है. चोरी छुपे कभी अध्यक्ष बदल दिया जाता है तो  कभी सचिव. ऐसी ही परेशानियों से पीड़ित रीठी में विगत दिनों 125 समूहों ने रीठी में जनपद का घेराव कर दिया और उन्होंने अपने लिखित ज्ञापन में सी ई ओ से ऐ डी ओ खरे द्वारा ग्रेडिंग करने के बदले में पैसा बसूले जाने की शिकयत की.

बहाव  खान भरतपुर के नेतृत्व में एकत्रित  हुए इन समूहों ने जमकर नारेबाजी और जुलुश प्रदर्शन किया. बहाव  खान ने आरोप लगाया है की गणेश स्व सहायता समूह तिघरा काला से चार  हजार रूपये, बड़ी माता स्व सहायत समूह बख्लेता से चार सौ रूपये, राधा स्व सहायता समूह ईमलिया से पाच सौ रूपये, मालती बाई स्व सहायता समूह अमगवा से एक हजार रूपये, आदर्श स्व सहायता समूह रूड्मूद से एक हजार रूपये डंके की चोट पर यह कहकर लिया गया है की रूपये दोगे तो ग्रेडिंग होगी और यदि नहीं होगी तो ग्रेडिग  नहीं होगी.


गौर तालाब है की पैसा लेकर भी ऐ डी ओ खरे ने लोगो का काम नहीं किया है. . अपनी शिकायत में बहब खान  ने लिखा है की ऐ डी ओ खरे ने ग्रेडिंग के नाम पर खुलेआम रूपये लिए  है है जिससे सभी समूहों की महिलाये परेशान है.
रीठी जनपद के अंतर्गत आने वाली सभी स्व सहायत समूहों के अध्यक्ष सचिवो को परेशान कर ऐ डी ओ खरे द्वारा खुले आम लूट मची है.

रीठी में बहाब खान के नेतृत्व में इस जंगी प्रदर्शन ने एक बात तो स्पष्ट कर दी है की अब क्षेत्र की जनता अपने अधिकार और कर्तव्य तथा भ्रस्टाचार के विरुद्ध एकजुट होकर शंखनाद तो जरूर कर दिया है.

अजाक्स संघ के अध्यक्ष बने

अजाक्स संघ के अध्यक्ष बने

विगत दिनों हुए मध्य प्रदेश हिरजन आदिवासी (अजाक्स) संघ के चुनाव संपन्न हुए जिसमे रीठी ब्लोक के अध्यक्ष पद के लिए मदन लाल अहिरवार (स्वस्थ्य विभाग रीठी) को चुना गया. श्री मदन लाल कुशवाहा के ब्लाक अध्यक्ष चुने जाने पर अजाक्स जिला अध्यक्ष कटनी, विभाग के कर्मचारी, मित्रो ने बधाई   दी है.