17 January, 2011

मरीजो की जान जोखिम में

कटनी
घरेलू गैस की कमी से आम भारतीय तो लगभग वर्ष भर ही जूझता रहता है लेकिन ठंडी के मौसम में परेशानी कुछ अधिक ही बढ़ जाती है. इसका कारण  शादी समारोह सहित नाश्ते की दुकानों पर एल पी जी  सिलेंडरो की खपत बढ़ना है. लेकिन इन दिनों रोगियों के लिए लगे एम्बुलेंस वाहन में भी बेधड़क इन एल पी जी गैस  सिलिंडरो का उपयोग हो रहा है
जिले में सर्दी का मौसम आते ही आम नागरिको की मुश्किलें बढ़ जाती है. एक तरफ महगाई की मार तो दूसरी तरफ गैस एजेंसियों द्वारा उपभोक्ताओं को एक-एक महीने  बाद गैस सिलेंडर उपलब्द्ध हो रही है जिससे  आम आदमी तो बिलकुल पिसा जा रहा है.

ऐसा नहीं है की प्रशासन को इस बात की खबर न हो प्रशासन द्वारा इस विसंगति को रोकने के लिए अभियान भी छेड़ा जाता है लेकिन गैस की कालाबाजारी में मिलने वाले मोटे कमीशन  के कारण गैस का अवैध कारोबार रुक  नहीं सका है. प्रशासन को लाभ इस हद तक पहुचा दिया जाता है की अभी तक तो लाल सिलेंडर चार पहिये के वाहन एवं होटलों में इस्तेमाल किये जा रहे थे लेकिन अब एम्बुलेंस में भी इन खतरनाक सिलिंडरो का उपयोग किया जाने लगा है. मरीजो की जान जोखिम में ड़ाल एम्बुलेंस संचालको द्वारा घरेलू गैस से एम्बुलेंस का सञ्चालन हो रहा है.

यह एक सामान्य सी  बात है की एम्बुलेंस को देख  तत्काल अस्पताल पहुचाने के लिए इस वाहन को कोई भी कही पर नहीं रोकता और बिना किसी रोक-टोक के एम्बुलेंस को जाने दिया जाता है.

अब तक स्कूल वैन एवं टेक्सियो में एल पी जी  सिलिंडरो का उपयोग किया जा रहा था और ऐसा करके वाहन मालिक मोटा  मुनाफा कमा रहे थे. अपने साथियो के मोटे मुनाफे को देखते हुए एम्बुलेंस चालाक भी ऐसा करने लगे है. घरेलू गैस पेट्रोल एवं डीजल से सस्ती पड़ती है, इसलिए एम्बुलेंस चालाक इसका इस्तेमाल कर रहे है.

जबकि एल पी जी गैस सिलिंडरो से संचालित हो रही एम्बुलेंस में जाना मरीजो के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. इस गैस से चलने वाले वाहनों में गर्मी अधिक रहती है, साथ ही गैस लीक होने का खतरा भी बना रहता है. यदि कही धोके से गैस लीक होती है तो मरीज को सास लेने में तकलीफ आ सकती है और ऐसी विषम परिस्थिति में मरीज असहाय एक और गंभीर हादसे का शिकार कभी भी हो सकता है.