19 January, 2011

बढ़ते भ्रष्टाचार से पत्रकारिता के मूल्यों पर संकट

कटनी / अखिलेश उपाध्याय
दिनांक 19 जनवरी 2011 को सुरम्य पार्क कटाए घाट में कटनी प्रेस क्लब द्वारा बढ़ते भ्रष्टाचार से पत्रकारिता के मूल्यों पर संकट विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का जन किया गया. इस अवसर पर पत्रकारिता जगत की जानीमानी हस्तियों के साथ मुडवारा विधायक, कलेक्टर एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने इस ज्वलंत विषय पर अपना-अपना द्रष्टिकोण रखा.

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय एकता परिषद् उपाध्यक्ष वरिष्ठ  पत्रकार रमेश शर्मा ने बड़े ही सरल और सहज शब्दों में कहा की भ्रष्टाचार नैतिकता, आध्यात्मिकता एवं आत्म निर्भरता पर देश में एक करोड़ से अधिक लोग प्रवचन देते है फिर भी भारत पूरे विश्व में भरष्टाचार के मामले में तीसरे नंबर पर है, जो मूलरूप से चिंता का विषय है. वर्तमान में मीडिया की छवि को कैसे उठा सकते है यह मूल प्रश्न है. जिस तरह नकली नोट प्रचलित होकर बाजार से असली नोट को बाहर कर रहे है उसी तरह नकली पत्रकार इस  पेशे में आकर असली पत्रकारों को बाहर करने में लगे हुए है. श्री शर्मा ने कहा की आज भी जो पत्रकारिता बची है वह उन पेतीश प्रतिशत पत्रकारों की वजह से बची हुई है क्योकि वे अपने काम में लगे रहते है और उन्हें बाहरी दुनिया तक की फुर्सत नहीं मिलती है.

पत्रकार दिनेश चन्द्र वर्मा ने अपने विचारो में बढ़ते भ्रष्टाचार से पत्रकारिता के मूल्यों पर संकट विषय की अपने तर्कों के आधार पर व्याख्या की उन्होंने तीन स्तंभों में फैले भ्रष्टाचार पर विस्तार से प्रकाश डाला उसके बाद चौथे स्तम्भ में फैलते भ्रष्टाचार को उच्च स्तर से पनपने की स्वीकारोक्ति करते हुए कहा की उच्च स्तर पर
बैठे लोगो की मानवीय संवेदनाये नहीं है.

गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान अध्यक्ष ओ पी हयारण एवं वरिष्ठ पत्रकार एवं डायरेक्टर धर्मेश्वर नागरिक बैंक भोपाल मनमोहन कुरापा एवं स्थानी पत्रकार नन्दलाल सिंह
ने विचार गोष्ठी को गति देते हुए कहा की पत्रकारिता अपने मूल्यों से भटक रही है यह भटकाव उच्च स्तर से निचले स्तर तक पहुच रहा है. घटनाओं के प्रति सम्बेदनाये नहीं बची है. आज के
दौर में दो चार मौतों पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं होती है.

आज अखबार केवल शहर केन्द्रित हो गए है. इनमे  गांवो की घटनाओं का समावेश नहीं होता है. पत्रकारिता की खबरे गाँव से ही निकलती है इसलिए इस ओर पत्रकारों को अपना ध्यान देना चाहिए.

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह ने पत्रकारिता के मूल्यों के संकट पर अपने ओजस्वी विचारो में कहा की मुझे जिला स्तर पर दुःख होता है की पत्रकारों में व्यवसायिक दक्षता नहीं है. वे ऐसे सवाल करते है जिनसे कोई लेना देना नहीं  होता. जबकि उस खबर के कारणों पर बात होई चाहिए. पत्रकारों को भारतीय अधिनियम की धाराओं का ज्ञान होना चाहए इन सबके अभाव में पत्रकारिता दिशाहीन हो रही है. उन्होंने इस बात पर बल किया की व्यवसायिक दक्षता अकेले पत्रकारिता में नई वरन हर पेशे में होनी चाहिए.

कलेक्टर एम् शेल्वेंद्रण ने कहा की कम से कम ऐसे लोग है जिन्होंने अपने बीच पनप  रही बुराई के सम्बन्ध में एक विचारगोष्ठी रखी. उन्होंने कहा की ऐ एस पी साहब ने प्रशासन की ओर से अपना पक्ष  रखा है जिससे मै सहमत हूँ मै यह भी स्वीकार  करता हूँ की कानून पुराना है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तो सोच बदल रही है. नए लोग नए अवसर प्रदान कर रहे है. पहले माह भर में दस से पंद्रह लोग ही समस्याए दर्ज करा पाते थे आज एक जिले में प्रत्येक सप्ताह 150 से अधिक शिकायते दर्ज होती है.

पूर्व महापौर संदीप जायसवाल ने कहा की चाहे सत्ता हो या प्रशासनिक व्यस्था जब व्यक्ति उस पर बैठता है तो वह मनमर्जी के निर्णय लेता है. निर्णय की स्वतंत्रता के चलते वह सही गलत का भान नहीं कर पाता है . आजादी के बाद से आज तक अंग्रेजो के समय के कानून है जो निर्णायक है उनकी भूमिका का दायरा बना दिया जाए तो भ्रटाचार पर अंकुश लग सकता है.

इस अवसर पर कटनी प्रेस क्लब की ओर से तमाम पदाधिकारी एवं सदस्यगड़ एवम बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे.