14 January, 2011

भूमि हीनो को पट्टे मिले जमीन नहीं

अखिलेश उपाध्याय / कटनी  
सरकार हरिजन आदिवासियों के उत्थान के लिए कितनी भी योजनाये और सुविधाए लागू कर दे लेकिन वास्तविकता की धरातल  पर इस समाज के लोग अभी भी पीड़ित और शोषित है. कटनी जिले में भू माफियाओं के मकडजाल में फस कर हिरजन आदिवासी अपनी जमीन गवा चुके है ऐसा ही एक खुलासा बहोरिबंद तहसील में प्रकाश में आया है.

पीड़ित आदिवासियों का आरोप है की दिल्ली की एक निजी कंपनी से साठगाठ  कर राजस्व अधिकारियो ने गरीबो के हक़ की  लगभग दो सौ एकड़ से अधिक जमीन कंपनी के हवाले कर दी है. सात साल पहले मध्य प्रदेश सरकार की योजना के तहत कौड़िया तथा आसपास के 159 भूमिहीन आदिवासियों को सरकारी जमीनों के पट्टे दिए गए थे.

इन गरीबो के हाथ में आवंटन के कागज़ तो थमा दिए गए लेकिन सात साल में कभी उन्हें जमीन के दर्शन नहीं कराये गए. आज भी गरीब आदिवासी पट्टा लिए अपनी जमीन तलाश रहे है किन्तु इनको जमीन अभी तक भी नहीं मिल सकी है.

पीड़ित आदिवासियों ने बताया इ 2003 में पट्टा देने के बाद अधिकारियो ने न तो कभी जमीन का सीमांकन किया और न ही मौके पर जाकर जमीन बताई. जिससे सरकारी रिकार्ड में वे भूमि के मालिक तो हो गए लेकिन वास्तव में वे अब भी भूमिहीन है.

ग्रामीणों का आरोप है की उनके हिस्से की जमीन दिल्ली  से यहाँ  आकर प्लांटेसन  कर रही एक कंपनी को बेच दी गयी है. पट्टा हासिल करने वाले ग्रामीणों के मुताबिक कुछ लोगो ने अधिकारियो से मिल कर आवंटित जमीन से अधिक पर कब्ज़ा जमा लिया है जबकि लोगो के पास एक इंच जमीन तक नहीं है.

पट्टाधारियों  की सूची में शामिल बड़े कोल, सुखराई, शिवका, दशरथ, भिरचैया, कन्छेदी, बैसाखू, परदेशी, शिवप्रसाद, सुकरू सहित अन्य ने बताया की पटवारी से लेकर तहसीलदार तक के पास कई बार जमीन देने की मांग की जा चुकी है. अधिकारी उन्हें टाल देता है. प्रत्येक भूमिहीन को अधिकतम दो हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी. जो  लगभग 101 हेक्टेयर के आसपास होती है. इसमें से कुछ ने जैसे-तैसे अपनी जमीन ढूढ़ कर उस पर कब्ज़ा कर लिया लेकिन अधिकांश लोग आज तक अपनी जमीन प्राप्त नहीं कर सके.

पीड़ित आदिवासियों के मुताबिक सरकारी रिकार्ड में दर्ज खसरा नंबर की जमीन मौके पर उपलब्द्ध नहीं है. गायब हुई जमीन किसके कब्जे में इसका पता राजस्व अमला भी नहीं  लगा पा रहा है

यह बड़े आश्चर्य की बात है की इतने बड़े घोटाले को अंजाम देने वालो के विरुद्ध आज तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई स्पष्ट रूप से जिले के आला अधिकारी इसमें लिप्त है.