19 February, 2011

बच्चो में पनप रहा गुटखा शौक

विद्यार्थियों पर गुटखा पाउच संस्कृति जबरदस्त तरीके से हावी हो रही है. लुभावने विज्ञापन और फैशन के प्रभाव में लड़के ही नहीं, लडकिया भी तम्बाकू युक्त धीमा जहर गटक रही है. स्कूलों एवं कालेजो में रोजाना पाउचो का कचरा बड़ी मात्रा में निकल रहा है.

शहर ही नहीं अंचल में भी तम्बाकू युक्त गुटखा चबाना फैशन बनता जा रहा है. स्कूलों में भी गुटखा संस्कृति बढ़ती जा रही है. अब तो लडकियों में इसकी लत होना आम बात हो गई है. लोग बैठे बिठाए अनेक बीमारियों को दावत दे रहे है.

देखा जाए तो शहर की अपेक्षा  ग्रामीण क्षेत्र में गुटखा खाने  वाले बच्चो की संख्या तेजी से बढ़ रही है. स्कूल कक्षों के अलावा मैदानों में व कमरों के आसपास बिखरे रंग बिरंगे पाउच के खाली पाउच  हकीकत बाया कर रहे है. पालक बच्चो की इन हरकतों पर ध्यान नहीं देते है.

बिन बिजली सब सून

-बिन बिजली सब सून-
अखिलेश उपाध्याय

बिजली की समस्या अब ग्रामीण क्षेत्रो में सबसे बड़ा सिरदर्द बनकर सामने आ रही है. बिजली न मिलने से गाँव अन्धकार में डूबे है. हालात यह है की ग्रामीण क्षेत्र में निवास कर रहे ग्रामीणों को चौबीस घंटे में मात्र चार घंटे बिजली मिल पा रही है. बिजली ने काम धंधे चौपट करने के साथ ही बच्चो की पढाई पर भी विपरीत असर डाला है. ग्रामीण अब बिजली को लेकर आन्दोलन की राह पर उतरने के लिए विवश है.

हालत यह है की चौबीस घंटे में बिजली सुबह छेह बजे आती है और दस बजे चली जाती है इसके बाद फिर बिजली नहीं आती. चौबीस घंटे में बीस घंटे बिजली न मिल पाने के कारण बच्चो की पढ़ाई लिखाई चौपट हो गयी है.  अम्गावा के कमलेस सेन ने बताया की विगत बीस दिनों से ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली नहीं मिल रही है. जिसके कारण गाँव वालो को तकलीफों का सामन करना पद रहा है.
गुर्जी, सलैया, डांग, सिम्दारी, गोदान, बडगांव, तिघरा, करहिया, खमरिया, बर्यारपुर, कैमोरी, बाँधा, तिलागावा, नितार्रा आदि रिती जनपद के समस्त गोनो में यही हाला है. उस पर इस महीने बिजली के उपभोक्ताओं को इस माह पंद्रह सौ रूपये से कम के बिल नहीं दिया गए है. जब लोगो को बिजली ही नहीं मिलती फिर भला भरी भरकम बिल कैसी दिए जा रहे है ?

सबसे बड़ी दुर्दशा विद्यार्थियों की है जिनके सर पर परीक्षाये है ऐसे में भला  बिजली के बिना कैसे बच्चे अपनी पढ़ाई करे. एक तो सोसाइटी  से मिलने वाला केरोसिन पहले ही होटल और दलालों को ब्लेक कर दिया जाता है जो बाद में पच्चीस से तीस रूपये लीटर में बेचते है फिर भला गरीब के बच्चे कैसे पढ़े ?

18 February, 2011

मुख्यमंत्री ने दी 36 करोड़ की सौगात

मुख्यमंत्री ने दी 36 करोड़ की सौगात
कटनी अंत्योदय मेले की उपलब्धि, 88 हजार से ज्यादा लोग लाभान्वित


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में सबसे ज्यादा हमारी गरीब जनता बसती है इसलिये इनकी रोजी-रोटी, पढाई लिखाई, दुखः, बीमारी की चिन्ता सरकार की पहली प्राथमिकता में है। इसके चलते प्रदेश सरकार के आधे बजट पर गरीबों का हक है। मुख्यमंत्री ने यह आव्हान कटनी जिला मुख्यालय पर आयोजित अंत्योदय मेंला में किया। उन्होने इस जिला स्तरीय भव्य समागम के दौरान शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं व कार्यक्रमों के माध्यम से 36 करोड पांच लाख से अधिक राशि की सुविधाऐं, साधन 88 हजार 861 गरीब जरूरतमंद हितग्राहियों को सौंपें।


मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी गरीब के बच्चे अब पढाई से मोहताज नहीं रहेगें। इस साल से गरीब मजदूरों के बच्चों को पहली से 12 वीं तक छात्रवृत्ति दी जाएगी। प्रदेश सरकार कक्षा पहली से 12 वीं तक क्रमशः 50 से लेकर 400 रूपये तक छात्रवृत्ति देगी। प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चे गरीबों के पढ़ेंगे। जिसकी फीस की भरपाई मध्य प्रदेश सरकार करेगी। राज्य बीमारी सहायता योजना के अंतर्गत अब गरीबों को इलाज के लिए दो करोड से बढाकर यह सहायता 20 करोड रूपये कर दी गई है। इस योजना के तहत कलेक्टर एक लाख रूपये इलाज हेतु मंजूर कर सकेगें। अब हर गरीब को अंत्योदय उपचार से लेकर राज्य बीमारी सहायता योजना का लाभ हर हाल मे मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 50 सालों मे राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 में संशोधन नही हुआ। वर्तमान में प्रदेश सरकार ने इसके तहत संशोधन कर नये नियम लागू किये हैं। जिससे पाला प्रभावितों को पांच एकड की फसल मे यदि एक एकड भी फसल की क्षति हुई है तो नये संशोधन के तहत राहत राशि दी जाएगी। सरकार ने पाला राहत हेतु 900 करोड रूपये का आवंटन जारी किया है। उन्होने कहा कि मै आगामी दिनों में कभी भी किसी भी गांव में राहत राशि वितरण की समीक्षा कर सकता हूं। यदि कोई शिकायत मुझे मिलेगी तो ऐसे अधिकारी कर्मचारी मेरी सरकार में नौकरी नहीं कर सकेग। इसलिए अधिकारी कर्मचारियों से सरकार की अपेक्षा है कि वे किसान की फसल का सही आंकलन करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार से किसानों को गेहूं का समर्थन मूल्य 1600 रूपये करने की मांग की गई थी। किन्तु केन्द्र सरकार ने इस पर ध्यान नही दिया। प्रदेश सरकार किसान को गेहूं का समर्थन मूल्य पर 100 रूपये तथा 50 रूपये धान का बोनस देगी।


इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कटनी के विकास मे कोई कमी नहीं आएगी। यहां जन भावना के अनुरूप ही विकास किया जाएगा। इस मौके पर विधायक श्री गिरिराज किशोर पोद्दार ने कहा कि यहां की जनता ने मुख्यमंत्री से जो मांगा है वह उन्होने दिया है। आज कटनी विकास प्राधिकरण में अनेकों प्रमुख विकास योजनाऐं शामिल हैं। जिसमे बरगी नहर से कटनी को जल प्रदाय, ट्रांसपोर्ट नगर की लीज में बढोतरी, कटनी नदी पुल का निमार्ण की स्वीकृति, जैसे अनेक विकासीय मुद्दे जनहित में पूरे हुए होने जा रहे हैं।

इस अवसर पर प्रभारी मंत्री डॉ रामकृष्ण कुसमरिया, सांसद श्री जितेन्द्र सिंह बुंदेला, विधायक श्री मोती कश्यप, संभाग आयुक्त श्री प्रभात पाराशर, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री बी. मधु कुमार, कलेक्टर श्री एम सेल्वेन्द्रन, पुलिस अधीक्षक श्री मनोज शर्मा सहित ग्रामीण एवं नगरीय निकाय के जनप्रतिनिधिगण व जिला स्तरीय अधिकारी/कर्मचारी व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

दलित आदिवासी को नहीं मिल रहे श्रमिक कार्ड


दलित आदिवासी को नहीं मिल रहे श्रमिक कार्ड
अखिलेश उपाध्याय

कटनी जिले में व्याप्त अराजकता के चलते नियम-कायदों को ताक पर रखकर काम हो रहा है. जिनका नाम गरीबी रेखा में होना चाहिए उनका कार्ड नहीं बना है और जो वास्तव में गरीब और पात्र है उन्हें  शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है.

रीठी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायतो में ऐसा ही कुछ हो रहा है. ग्राम पंचायत ढुढरी   के सचिव ने अपने माता-पिता को निराश्रित पेंसन योजना के लिए पात्र घोषित करवा लिया है और दोनों को प्रतिमाह निराश्रित पेंसन मिलने लगी है. सचिव ने अपनी पत्नी को भी आगनबाडी कार्यकर्त्ता नियुक्त करवा लिया है. माता-पिता की पेंसन, पत्नी तथा स्वयं की मानदेय राशी इन सभी लाभों को प्राप्त करने के बाद सचिव स्वयं निर्धन बने हुए है. उनका नाम गरीबी रेखा सूची में दर्ज है. इसके  अलावा  ढुढरी गाँव के कई पूजीपतियो को भी सचिव की वजह से निराश्रित पेंसन पाप्त हो रही है और वे गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे है.

शिकायत मिलने के बाद जिला पंचायत सी ई ओ शशिभूषन सिंह ने इसकी जाँच के आदेश रीठी जनपद सी ई ओ पंकज जैन को सौपी है. ग्रामीणों ने बताया की उन्होंने रोजगार गारंटी योजना के तहत सौ दिवस का काम पूरा कर लिया है और ग्राम पंचायत में सचिव ने उनका रिकार्ड प्रस्तुत नहीं किया है. और रिकार्ड उपलब्द्ध न होने के कारण निर्माण श्रमिको के पंजीयन कार्ड नहीं बनाए जा सके है. इससे उन्हें सरकारी  योजनाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है.

सी ई ओ जिला पंचायत से निर्माण मजदूरों ने पंजीयन करवाने की प्रार्थना की है ताकि  उनके जाब कार्ड बन सके.  ढुढरी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गाँव जालासुर, धरमपुरा, सगोड़ी के आदिवासी हरिजन श्रमिको ने सचिव द्वारा किये  जा रहे पक्षपात की जाँच भी चाही है.

16 February, 2011

नहीं देख पायेगे मैच


नहीं देख पायेगे मैच
यु तो क्रिकेट बर्ल्ड कप का जूनून हर भारतीय के सर चढ़कर बोल रहा है पर शायद ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों के नसीब में बर्ल्ड कप के मैचो का सीधा प्रसारण देखना नहीं लिखा है क्योकि यहाँ दोपहर बारह बजे से शाम सात बजे तक मैराथन बिजली कटौती रहती होती है. अब यदि मैच दिन में हुए तो सिर्फ आरंभिक दो घंटे यानी दोपहर बारह बजे तक ही मैच देखना संभव होगा और बाकी का हाल अन्य शहरो में अपने परिचितों से मोबाइल पर ही जानना होगा, और यदि मैच दिन रात का हुआ तो भी देखने नहीं मिलेगा क्योकि रात को 9 .30  बजे के बाद फिर  से बिजली चली जाती है.

बिजली की इस बेरहम कटौती से खेलप्रेमी निराश है, लेकिन विद्युत् वितरण कंपनी के कटौती प्लान के आगे विवश भी है. क्योकि जो वितरण कंपनी विद्यार्थियों को पढने के लिए शाम 6  बजे से बिजली नहीं दे पा रही वह कंपनी खेल देखने के लिए भला क्यों बिजली  देगी ?

15 February, 2011

म न रे गा से होगा गौशालाओ का कायाकल्प

जिन गौशालाओ में कम से कम पचास पशुओ की देखरेख की जा रही है लेकिन ये गौशालाए सुविधाविहीन है ऐसी गौशाल संचालको को अच्छी खबर है. शासन ने कामधेनु उपयोजना शुरू की है जिसके तहत ग्राम पंचायत के माध्यम से रोजगार गारंटी योजना के तहत इन गौशालाओ का कायाकल्प  किया जा सकता है.

अभी ऐसी बहुत सी गौहालाये संचालित की जा रही है जिनमे  सुविधाए नहीं है. जिससे चाहकर भी गौशाला संचालक  ज्यादा पशुओ को नहीं रख पाते और पशु भी खुले परिसर   में ही बिचरते रहते है लेकिन अब इस योजना के तहत संचालक अल्प्नी इन  शालाओ को  सर्वसुविधा  युक्त बना सकते है.

रोजगार गारंटी से निर्माण
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के तहत इस योजना में काम कराये जायेगे जिसमे साठ फीसदी काम मजदूरों से कराना अनिवार्य होगा. इसके लिए ग्राम पंचायत निर्माण एजेंसी होगी. यदि किसी एनजीओ के माध्यम से भी निर्माण कार्य कराया जाएगा तो भी ग्राम पंचायत की देखरेख में ही निर्माण कार्य होगे.

पंचायत बनायेगी प्रस्ताव
कामधेनु उपयोजना के तहत  अपनी पंचायत में संचालित गौशाला  के विकास के लिए संचालको को ग्राम  पंचायत में आवेदन देकर प्रस्ताव तैयार कराना होगा. पांच लाख रूपये तक के निर्माण कार्य ग्राम पंचायत स्वीकृत कर सकेगी जो बाद में जनपद पंचायत पास  कर जिला पंचायत भेजेगी. जहा से गौशाला का मौका मुआयना कर प्रस्ताव को अनुमति दी जा सकेगी.

क्या-क्या होगा
इस योजना के अंतर्गत गौशाला में सड़क निर्माण, चारो तरफ बाउंड्री बाल  , पेयजल के लिए कूप या तालाब का निर्माण, गौशाला के लिए चारागाह का विकास, गोबर की खाद तैयार करने के लिए खंती, पशुओ के लिए शेड आदि का निर्माण  आदि कार्य कराये जा सकते है.

निर्माण राशी कितनी भी
गौशालाओ के विकास हेतु लागू की गई कामधेनु उपयोजना में राशी कितनी भी स्वीकृत की जा सकती है, इसके लिए मौके पर पहुचकर आकलन किया जाएगा. बस आवश्यकता है ग्राम पंचायते अपने क्षेत्र में चल रही गौशालाओ के विकास  के लिए पहल करे. प्राप्त आवेदनों पर प्रस्ताव बनाकर भेजे.

14 February, 2011

घटिया निर्माण की अब पोल खुल रही

बहोरिबंद
जनपद शिक्षा केंद्र के अंतर्गत ग्राम बडखेरा नीमखेडा में शासकीय प्राथमिक शाला का भवन घटिया निर्माण होने के कारण ढहाया जा रहा है. बताया गया है की आर ई एस विभाग के उपयंत्री की निगरानी में शाला भवन का निर्माण पालक शिक्षक संघ द्वारा कराया गया था. निर्माण के दौरान कार्य निर्धारित गुडवत्ता  के अनुरूप नही कराया गया. इस बात की शिकायत आर ई एस विभाग के अधिकारियो से की गई थी पर निर्माण कार्य के दौरान अधिकारियो ने इन शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया. उपयंत्री द्वारा मूल्यांकन कर दिए जाने के बाद राशी का भी भुगतान कर दिया गया.

विभागीय सूत्रों के अनुसार पूर्व में एस डी एम्  द्वारा भवन का निरीक्षण किये जाने के बाद इसे घटिया स्तर का पाया था तथा सम्बंधित उपयंत्री के विरुद्ध कार्रवाई किये जाने की अनुशंसा भी की थी. बावजूद इसके वरिष्ठ विभागीय अधिकारियो द्वारा सम्बंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई. अब शाला भवन ढहाए जाने के बाद यह मुद्दा फिर गरमा गया है, जानकारी  के अनुसार शाला भवन का निर्माण कार्य आर ई एस विभाग की निगरानी में ही कराया गया था. मूल्यांकन एवं अन्य कार्य भी आर ई एस विभाग द्वारा कराये गए थे. अब शाला भवन घटिया पाए जाने के बाद उसे ढहाए जाने के आदेश भी आर ई एस विभाग के एस डी एम् द्वारा जारी किये गए. जानकारों का कहना है की एस डी ओ शाला भवन ढहाए जाने की अनुशंसा एस डी एम् अथवा कलेक्टर से कर सकते है पर स्वयं आदेश जारी नहीं कर सकते पर यहाँ ऐसा नहीं हुआ. एस डी ओ के आदेश से ही शाला भवन धराशायी कर दिया गया है जिससे बच्चो के सामने  बैठने की समस्या पैदा हो गई है.

ग्राम बडखेरा नीम में यहाँ यह प्राथमिक शाला भवन बनाया गया था. उससे कुछ ही दूर पर सामुदायिक भवन का निर्माण भी आर ई एस की निगरानी में ही हुआ था. यह भवन भी चार -पांच साल में ही जर्जर नजर आने लगा है. इसके अलावा ग्राम  पिपरिया में प्राथमिक शाला भवन एवं माध्यमिक शाला भवन के अतिरिक्त कक्षों का निर्माण भी आर ई एस की देखरेख में कराया गया था. इन अतिरिक्त कक्षों की स्थिति यह है की इनकी छत क्रेक हो गई है. बारिश का पूरा पानी छत से कक्षों में टपकता है. देखने में ही भवन सालो पुराने  लगते है जबकि इनका निर्माण भी 2005 -2006 में कराया गया है. इनके अलावा अनेक जगह निर्माण कराये गए शासकीय भवनों की गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान लगाया जा रहा है.

क्षेत्रवासियों  के अनुसार जिला प्रशासन को चाहिए की ऐसे सभी शासकीय भवनों की जाँच की जाए एवं इनके निर्माण के दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियो के खिलाफ कार्रवाई जी जावे. वही इस सम्बन्ध में  विभागीय अधिकारी कोई भी जबाब नहीं देना चाहते.

प्रशासन कदम क्यों नहीं उठाता...?

प्रशासन कदम क्यों नहीं उठाता...?
अखिलेश उपाध्याय
 ग्राम पंचायतो में सचिव और प्रशासन की मिली भगत से सरपंच परेशान है. सचिवो की कार्यशैली से पीड़ित सरपंचो की सुनने वाला कोई नहीं है. शिकायत करने के बाद भी सचिवो के विरुद्ध कुछ भी कार्रवाही न होना जिला प्रशासन की लचर कर्य्शैसी की ओर संकेत करता है.  जिला पंचायत कटनी में व्याप्त  अनियमितताओं का दौर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है यही वजह है की यहाँ के जनप्रतिनिधियों का विस्वास अब प्रशासन से उठता जा रहा है.

   रीठी जनपद की ग्राम पंचायत इम्लाज के सचिव द्वारा पंचायत के विकास कार्यो में व्यवधान उत्पन्न कर दस प्रतिशत कमीशन मागने वावत और सम्बंधित जनपद में शिकायत करने के बावजूद किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई. इसके चलते इम्लाज सरपंच चंदाबाई चोधरी ने कलेक्टर एम् शेल्वेंद्रण को विगत दिवस एक ज्ञापन सौपा. जिसमे कहा गया की रीठी जनपद की ग्राम पंचायत इम्लाज में बीते दिसंबर माह से इम्लाज सचिव पद पर नियुक्त गाँव के ही बलराम सोनी द्वारा ग्राम में विकास कार्यो में व्यवधान उत्पन्न किया जाता है और पूर्व में हुए म न रे गा अंतर्गत विकास कार्यो के भुगतान करने के लिए मजदूरों के भुगतान करने में सचिव द्वारा भुगतान राशी में दस प्रतिशंत कमीशन मागा जाता है.
जिसकी शिकायत पूर्व में जनपद रीठी के सी ई ओ पंकज जैन से की गई लेकिन विभाग द्वारा किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं  की गई. विगत 6 माह से ग्राम पंचायत के विकास कार्य बंद पड़े है लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद जनपद सी ई ओ द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है और उनके द्वारा ग्राम सचिव का पक्ष लेकर दलित सचिव को अपमानित किया जाता है.

चंदाबाई ने कहा की आये दिन सचिव द्वारा मुझे धमकी दी जाती है की मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता और इस सम्बन्ध में जब मैंने थाने में शिकायत की तो पुलिस ने उल्टा मुझे धमकाया. अब ग्राम पंचायत में सारे विकास कार्य बंद पड़े है. चंदाबाई ने कलेक्टर से निवेदन किया है की पंचायत सचिव के विरुद्ध  न्यायिक कार्रवाही की जाए और  उसे इम्लाज ग्राम पंचायत से स्थानांतरण कर वहा किसी अन्य पंचायत सचिव की नियुक्ति की जाए.

पंचायत सचिवो की कार्यशैली से  न केवल इम्लाज बल्कि ऐसे बहुत से सरपंच और ग्रामीण है जो सचिवो से परेशान है और वे इन सचिवो से मुक्ति चाहते है. बकलेहता के सरपंच अजीत सिंह ने भी अपने ग्राम के सचिव को हटाने के लिए ग्राम पंचायत का प्रस्ताव जनपद सी ई ओ रीठी को कई महीने  पहले दिया था लेकिन आज तक इस पर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है. इसी प्रकार ग्राम पंचायत उमरिया की सचिव सुनीता यादव की कार्यशैली के कारण जनपद पंचायत रीठी के अनुमोदन के बाद भी जिला पंचायत कटनी द्वारा सचिव को नहीं हटाया गया.

इस विषय में बकलेहता सरपंच अजीत सिंह का कहना है की मुख्य कार्यपालन अधिकारी का दायित्व होता है की प्रत्येक ग्राम पंचायत में समन्वय बनाकर पंचायत में कार्य करवाने चाहिए लेकिन रीठी सी ई ओ को शिकायत करने के बाद भी उनके द्वारा कोई कार्रवाई न किया जाना उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है. अजीत सिंह  ने कहा की जिला पंचायत में पैसा ले देकर अपनी मर्जी का सचिव तत्काल बदल दिया जाता है लेकिन जो सरपंच पैसा देने में असमर्थ है वे ऐसे सचिवो को ढो रहे है. अधिकारियो की उदासीनता के कारण पंचायतो में विवाद की स्थिति हल नहीं की जाती और विकास के कार्य प्रभावित होते है.

आखिर भ्रष्ट और निष्क्रिय सचिवो को बदलने में प्रशासन कदम क्यों नहीं उठाता...?

12 February, 2011

अवैध उत्खनन का सिलसिला जारी


निर्माण कार्यो में नियमो की अनदेखी हो रही है.
कटनी जिले में खनिज सम्पदा का अवैध उत्खन किये जाने का सिलसिला अनवरत रूप से बना हुआ है लेकिन खनिज विभाग द्वारा हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेने और अवैध रूप से उत्खनन करने वालो के विरुद्ध कार्रवाई नहीं किये जाने के परिणामस्वरूप उत्खनन करने वाले शहर के आसपास स्थित क्षेत्रो से मिटटी, गिट्टी और मुरुम का उत्खनन करते हुए शासकीय भूमि को अपना निशाना बना रहे है, वही दूसरी ओर बिना रायल्टी के किये जा रहे उत्खनन से शासन के राजस्व को भी क्षति पहुच रही है.

खनिज विभाग की लापरवाही और उदासीनता के चलते अवैध उत्खनन करता  शहर के आसपास स्थित क्षेत्रो में ही बिना किसी अनुमति के खनिज सम्पदा का दोहन कर रहे है वरन पूरे जिले में इन उत्खननकर्ताओं द्वारा अवैध रूप से मिटटी, गिट्टी, रेट और मुरुम का उत्खनन और उसका परिवहन लगातार बना हुआ है. नदियों से भी रेत का अवैध उत्खन और उसका परिवहन बदस्तूर जारी है. जिले में खनिज सम्पदा के हो रहे इस अवैधानिक उत्खनन को रोके जाने के कोई कारगर प्रयास नहीं हो पाने से अवैध उत्खनन कर्ताओं के हौसले बढे हुए है और वह रात दिन अवैध रूप से उत्खनन कर मोटी कमाई में लगे है.

तिलगवा-बाधा-सुगवा मार्ग निर्माण और मोहास-बरजी-पाली मार्ग  निर्माण  में ठेकेदारों  द्वारा अवैध रूप से रोड के आस-पास स्थित सरकारी  और गैरसरकारी भूमि को अपना निशाना बनाया  जा रहा है.. यह सड़क निर्माण कार्य पी डब्लू डी विभाग द्वारा ठेके पर दिया गया है. निर्माडाधीन सड़को के किनारे से ठेकेदारों द्वारा मिटटी खोदकर लाई जा रही है. जबकि बाजार में एक ट्राली मिटटी की कीमत ढाई सौ से तीन सौ रूपये है.


स्पष्ट रूप से पी डब्लू डी विभाग के इंजिनीअर, सुपरवाइजर, एस डी ओ, ठेकेदार सब मिल बाट कर मौज उड़ा रहे है. घटिया स्तर की इस मिटटी से इस रोड की गुडवत्ता  पर सवालिया निशान लग रहा है. जबकि ठेकेदारों  को अच्छी मिटटी लाकर रोड पर डालने का प्रावधान है.





मोहास-बरजी-पाली रोड के निर्माण कार्य में तो जमकर नियमो की धज्जिया उडाई जा रही है. विगत दिनों ग्राम बरजी में सी सी रोड निर्माण में बगैर प्लास्टिक की पन्नी डाले, मसाला में गिट्टी की जगह रेत की छानन में बड़े छोटे पत्थर, कचरा, डालकर सीसी रोड का निर्माण कार्य किया जा रहा था. प्लेट वाइब्रेटर का भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है दिखावा मात्र के लिए यह मशीन रखी हुई है. इस रोड पर बनी पुलिया में अभी से दरार आ चुकी है. पुलिया निर्माण में बिना बेस के ह्युम पाइप डाल दिए गए है. सी सी रोड  के निर्माण में एक तो प्लास्टिक नहीं बिछाई गई और बिना झाडे ही धूल पर ही मसाला डाल कर सी सी रोड बनाई जा रही है.

स्थल पर पी डब्लू डी विभाग के कर्मचारियों का न मिलना ठेकेदार और विभाग की मिलीभगत के संकेत देता है. क्षेत्र में हो रहे विकास कार्य आजादी के तिरेसठ वर्षों के बाद हो रहे है और फिर निर्माण कार्य में बरती जा रही अनियमितता  और घटिया निर्माण से इस क्षेत्र में कब तक यह घटिया सड़क बनी रहेगी.....
 क्षेत्रीय जनता में इसी बात की चर्चा हो रही है.

11 February, 2011

हो सकता है म न रे गा में बदलाव

हो सकता है म न रे गा में बदलाव
पंचायती राज व्यस्था में ग्रामीण जनप्रतिनिधियों विशेषकर सरपंच, सचिव सहित नौकरशाहों के हाथ से आने वाले समय में महात्मा गाँधी  राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना की वर्तमान व्यवस्था  छिनकर उसमे परिवर्तन  आ सकता है. इस सुगबुगाहट से ही सरपंचो तथा नौकरशाहों में से अनेक के माथे में चिता की लकीरे गहराने लगी है.

    बीते  लम्बे समय से म न रे गा में कई प्रकार के भ्रष्टाचार  की खबरे गर्म होती रही है. जिसमे मागने पर काम देने वाली केंद्र की इस योजना को अन्य निर्माण कार्यो की भांति  निर्माण कार्य आधारित योजना को अन्य निर्माण कार्यो की भांति निर्माण कार्य आधारित योजना बनाने का प्रयत्न ज्यादा चर्चाओं में रहा है. हालाकि ऐसा करने के लिए जाब कार्डधारियो  द्वारा जाब मागने आदि की खानापूर्ति भी पूरी करा ली  जाती है. फिर धरातल पर मजदूर की जगह मशीनों से काम कराने व कागजी खानापूर्ति कर लेने की शिकायते दिल्ली स्तर पर पहुचने से इसमें परिवर्तन का आधार बनने  लगा है.
    इसके अलावा मध्यप्रदेश में विधायको को विधायक निधि रुपी मैचिंग ग्रांट के माध्यम से म न रे गा की राशी से काम कराने की छूट मिलने से भाजपा द्वारा इस योजना का अपने पक्ष में राजनीतिक दोहन करना भी उच्च स्तर पर शिकायतों का  केंद्र बना. यहाँ यह भी स्मरणीय है की केंद्र सरकार आधारित इस योजना में सांसदों को मैचिंग ग्रांट के रूप में सांसद निधि देकर काम कारने की छूट नहीं है. शिकायते तो उच्च स्तर पर यहाँ तक भी पहुची  की म न रे गा के कामो में दिन में तो काम मजदूरों से कराये जाते है व रात में मशीनों से काम कराया जाता है.
    अब ऐसी सम्भावना है की केंद्र सरकार जाब देने आधारित  इस योजना को अब पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप अर्थात पीपीपी के तहत लाने की तैयारी कर रही है. जिससे म न रे गा में घपले रोके न भी जा सके पर इसकी सम्भावना को कम तो किया जा सके. इसके लिए देश  में लागू की जा रही नई व्यस्था यू आई दी (यूनिक अईदेंत्फिकेशन नंबर) के आधार पर निजी क्षेत्र को प्रवेश कराया  जा सकता है. एक मोटा अनुमान है की इस नई संभावित व्यस्था पर शासन 2500 करोड़  रूपये से अधिक इस संभावना पर व्यय करेगी की नई व्यस्था से सरकार को 6000 करोड़ से अधिक की राशी की बचत हो सकेगी.
    कुछ ऐसी योजना बन रही है की नई व्यस्था के तहत बायोमीत्रिक्स आधारित यूनिक आइदेंतिफिकेशन नंबर प्रडाली लागू की जायेगे. जिसमे हाजिरी से लेकर काम का ब्यौरा, मस्टर रोल, जाब कार्ड्स के साथ भुगतान, मजदूर की उंगलियों के निशान के आधार पर ही होगा. इसके लिए बायोमीत्रिक्स मशीने लगाकर इन कार्यो के लिए  सम्बंधित कंपनी कर्मचारी तैनात करेगी. इन्ही सब कामो पर 2500 करोड़ रूपये से अधिक देश में व्यय आने की सम्भावना है.
    नयी संभावित व्यस्था में मजदूर के भुगतान पंजीकरण पर 75 रूपये, आधार जारी करने पर 35 रूपये, प्रत्येक  हाजिरी पर सवा रूपये तथा मजदूरों के लेन देन पर 25 पैसे सम्बंधित कंपनी को मिल सकेगे.
    हालाकि वर्तमान व्यस्था पूरी तरह या काफी हद तक बेहतर हो सही भी नहीं माना जा सकता. इसलिए व्यस्था को बेहतर बनाने के लिए उसमे सुधार की प्रक्रिया निरंतर चलती रहनी कहिये. इस द्रष्टि से म न रे गा में भुगतान  व्यस्था में परिवर्तन पर विचार अथवा कार्रवाई का आमतौर पर स्वागत किया जा रहा है. हा ऐसे संभावित परिवर्तन की सुगबुगाहट  के बाद इस योजना में लिप्त नौकरशाही तथा  सरपंचो में से कुछ जरूर चिंतिति हो उठे है. क्योकि नई व्यस्था में रास्ता निकलने व इससे पहले समझने में कितना समय लगता है नौकरशाह उतना ही एक स्थान  पर रुक पाते है. वही सरपंचो का कार्यकाल यही समझने तक समाप्ति पर आने लगता है. इसके चलते कही चिंता तो कही प्रसन्नता का वातावरण व्याप्त होने लगा है.
    वर्तमान व्यस्था में बैंक तथा डाकखानो में जाब कार्डधारियो के खाते खुले रहते है. यह भुगतान आम तौर पर इन खातो के माध्यम से ही होता है. परन्तु इन खातो में सब कुछ शत प्रतिशत सही होता हो इसका दावा कोई नहीं करता. इसी का कारण है की शिकायते प्रकाश में आने के बाद खाते से भुगतान व्यस्था में भी बदलाव पर विचार किया जा रहा है.
    सूत्रों  की माने तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की इस योजना के प्रति रूचि देखते हुए आगामी बजट में देशभर  के लिए म न रे गा पर 64 हजार करोड़ रूपये व्यय प्रस्तावित किया जा सकता है. जिसमे से 2500 करोड़ रूपये का व्यय इस नई व्यस्था पर प्रस्तावित किया जा सकता है. उल्लेखनीय है की इस वितीय वर्ष में देश भर में म न रे गा पर 41 हजार करोड़ रूपये व्यय होने का अनुमान है. वही देश भर के आकड़ो  को देखे तो म न रे गा में 11 करोड़ से अधिक मजदूर कार्यरत है जो संख्यात्मक आकड़ो के मुताबिक कई गुना अधिक हाजिरी देते है.
    शासन यदि नई व्यस्था लागू करना  ही चाहता है तो उसे इस कार्य में समाजसेवी संस्थाओं को योगदान लेना चाहिए क्योकि कंपनियों के उद्देश्य लाभ कमाने तक सीमित रहते है इससे म न रे गा की आत्मा पर ही चोट पहुच सकती है.

09 February, 2011

शौचालय बना नमूना

जनपद पंचायत रीठी के ग्राम रैपुरा में कराये गए निर्माण कार्यो में धांधली के आरोप ग्रामीणों ने लगाये है. बताया गया की समग्र स्वच्छता अभियान के तहत शासकीय माध्यमिक शाला के बगल से बनाये गए सामुदायिक शौचालय के निर्माण के दौरान अनियमितताओं को अंजाम दिया गया है. रैपुरा की स्वच्छता समिति के माध्यम से बनाए गए सामुदायिक  शौचालय की लागत बीस हजार रूपये बताई गई लेकिन वास्तविक हालत पर नजर डाले तो शौचालय निर्माण उससे काफी कम लागत से बना प्रतीत होता है.

गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग और मनमाने  तौर तरीके से शौचालय का निर्माण कराते हुए महज खाना पूर्ती निभाने के स्पष्ट प्रमाण मिल रहे है. सरकार द्वारा गाँव के विकास  के लिए प्रदान की जाने वाली राशी से विकास करने की बजाय कार्यो की लीपापोती करते हुए जिम्मेदार अमला अपनी जेबे गर्म करने की कवायद में जुट जाता है और यह क्रम जो जारी हुआ है उससे विकास कार्यो में पलीता लगना स्वाभाविक है. समिति अध्यक्ष सुनीता बाई तथा पंचायत  सचिव द्वारा उक्त राशी आहरित  करते हुए उसका बंदरबाट  कर लिया गया और कार्य की ओर गौर करे तो शौचालय बतौर नमूना साबित हो रहा है जिसे देखकर ही निर्माण कार्य के दौरान हुई धाधली उजागर हो रही है.

निर्माण की ड्राइंग के अनुसार इसमें टाइल्स लगनी थी वह भी नहीं  लगाईं गई है. सबसे मजेदार बात जो सामने आयी है वह यह है की शौचालय में लेट्रिन सीट भी उल्टी लगाई गई है जिससे  साफ़ जाहिर होता है की अकुशल श्रमिको से कार्य पूरा कराया गया है. सूत्रों की माने तो इसी ग्राम पंचायत में सामुदायिक भवन का भी निर्माण कराया जा रहा है जिसके लिए सात लाख की शासकीय राशी जारी की गई है.


जहा सामुदायिक शौचालय बनाये जाने के समय अनियमितताओ की ईट लगाईं गई वही अब सामुदायिक भवन के निर्माण की नीव भी भ्रष्टाचार के बल  पर खडी की जा रही है. रीठी जनपद सदस्य बाराती कोल ने जानकारी  में बताया की सामुदायिक भवन के निर्माण में शासकीय  निर्देशों व नियमो की धज्जिया उड़ाते हुए भर्राशाही पूर्वक कार्य कराया जा रहा है. घटिया  सामग्री व गुणवत्ताहीन मशाला उपयोग में लाये जाने के अलावा निर्माण कराये जा रहे भवन में बनने वाले शौचालय में भी ड्राइंग की उपेक्षा की जा रही है और अपने  तरीके से मनमानी पूर्वक भवन निर्माण का कार्य सम्पादित क्या जा रहा है. उपयंत्री  द्वार मौके  पर  मुआयना न करने से ठेकेदार  धांधली को अंजाम दे रहा है. ग्रामीणों के अनुसार शासकीय राशी का दुरूपयोग करने व निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की शिकायते कई बार सम्बंधित अधिकारियो  से करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई.

इस सम्बन्ध में रीठी जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रीति सिंह का कहना है की - जनपद सदस्य बाराती कोई द्वारा जब इस आशय की जानकारी दी गई  और मौके का मुआयना कराया गया तो  शिकायत सही पाई गई है मै इस सम्बन्ध में कलेक्टर  को शिकायत प्रेषित करूगी.

घर-घर में दस्तक देंगे मेहमान

भारत की जन्गड़ना , २०११ के तहत आज 9 फरवरी से जनसँख्या गाड़ना कार्य की शुरूआत कर दी गई. जन्गड़ना का यह कार्य 28  फरवरी तक चलेगा और इस दौरान प्रगड़क घर घर जाकर जन्गड़ना  संबंधी जानकारी और आकडे एकत्रित करेगे.

जन्गड़ना  2011 का द्वितीय चरण बुधवार से प्रारंभ हो गया है. इस राष्ट्रीय महा कार्यक्रम के तहत बुधवार को कटनी शहर के गड्मान्य नागरिको की जन्गड़ना  के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया.
जिले में जन्गड़ना  कार्य की शुरूआत आज प्रगड़क  द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, जन प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधकारियो के परिवार अनुसूची की पूर्ती कर की गई. प्रगड़क  द्वारा जन्गड़ना  संबंधी जरूरी जानकारी हासिल की और परिवार अनुसूची प्रपत्र की पूर्ती की. इस अवसर पर उन्हें पुष्प गुच्छ भेट किये गए

केवल औपचारिकता के लिए है कार्यालय

बेरोजगारों को रोजगार दिलाने वाला जिला रोजगार पंजीयन कार्यालय अपना अस्तित्व खोता जा रहा है. एक ज़माना था जब इस कार्यालय के बिना नौकरिया मिलना मुश्किल हुआ करती थी. लेकिन आज इस कार्यालय का मतलब केवल और केवल बेरोजगारों के पंजीयन तक ही सीमित रह गया है.
जिला रोजगार कार्यालय कटनी में एक वर्ष में हजारो की संख्या में पंजीयन तो होते है लेकिन कभी किसी बेरोजगार को इसकी मदद से नौकरी मिली हो ऐसा खुशनसीब ढूढ़ पाना मुश्किल है.

वर्तमान में शासन के नियमानुसार किसी भी बेरोजगार को कही भी रोजगार के लिए  आवेदन करने से पूर्व अपना पंजीयन कराना  अनिवार्य हो गया है. इस मजबूरी के कारण बेरोजगारों को इस कार्यालय तक आना पड़ता है. वर्ना अब इस कार्यालय की कोई उपयोगिता नहीं रह गयी है.

एक ज़माना था जब किसी भी विभाग में कोई भी नई भर्ती होती थी तो उसकी सबसे पहले सूचना आवेदकों को जिला रोजगार कार्यालय से मिला करती थी, लेकिन अब इस प्रकार की सूचनाये समाचार पत्रों एवं अन्य प्रकार से बेरोजगारों तक पहुच जाती है. बेरोजगारों के पंजीयन से लेकर नियुक्ति तक में प्रत्येक व्यक्ति की सहायता करने वाला यह कार्यालय सहायता तो इन दिनों भी करता है, मगर इसकी सहायता छोटे स्तर तक ही सिमट  कर रह गयी है.

इस सम्बन्ध में जीतेन्द्र राजपूत का कहना है - मैंने जिला कार्यालय में इसलिए पंजीयन कराया है  क्योकि शासन के ऐसे नियम है की बिना रोजगार संख्या के कही पर भी आवेदन मान्य नहीं होता है.

पंकज जैन का कहना है - ऐसा सुना है की यहाँ से नौकरी मिलने में सहायता मिलती है लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता. मुझे नौकरी के लिए कई विभागों में आवेदन करना है इसलिए पंजीयन कराया  है.

मदन तिवारी ने बताया - यहाँ पर पंजीयन करने के बाद नौकरी की अपेक्षा करने में कोई समझदारी नहीं है, लेकिन नौकरी के लिए पंजीयन कराना आवश्यक है अतः पंजीयन कराया है.

अजीत सिंह का कहना है - रोजगार पंजीयन की आवश्यकता किसी भी आवेदन में आवश्यक होती है. आवश्यकता को देखते हुए पंजीयन को जीवित बनाए रखना आवश्यक है.

05 February, 2011

दान क दोहन

दान का दोहन

देश व प्रदेश में विख्यात हड्डी जोड़ने वाले हनुमान  मंदिर मुहांस में प्रत्येक मंगल एवं शनिवार को हजारो श्रद्धालु पहुचते है. हड्डी रोगियों को तत्काल फायदा होने से दिल खोलकर रूपये, सोना, चांदी लोग दान कर जाते है लेकिन मुहास मंदिर में आने वाली बेनामी चढ़ोतरी   का हिसाब-किताब यहाँ के सर्व्हाराकार पंडा पुजारी व दलालों के बीच होने से इस सार्वजनिक मंदिर का लाभ सर्वजन हिताय न होकर स्वयं हित के लिए हो रहा है. अतिक्रमण हटाने के लिए कोर्ट एवं कलेक्टर कोर्ट के फैसले हो चुके है और पब्लिक  ट्रस्ट घोषित  कराने के लिए पेशी पर पेशी देकर मामला अटकाया जा रहा है.

अभिलेख में सुधार कराने की मांग
अतिक्रमण हटाने एवं पब्लिक ट्रस्ट घोषित कर कलेक्टर के अधीन मंदिर कराने के पक्षधर ग्रामवासियों ने एस डी एम् कटनी को हाल में भेजे शिकायती पत्र में उल्लेख किया है की श्री हनुमान  महाराज मंदिर के नाम रजिस्टर्ड जमीन जिसका खसरा नंबर 154 /2 , 154 /3 एवं रकवा क्रमांक 0 .40 एवं 0 .15 हेक्टेयर है. उक्त भूमि पर राजस्व अभिलेख में लम्बे समय से सर्व्हाराकर  में नाम अश्विनी कुमार दुबे दर्ज है. शासन के निर्देशानुसार सर्व्हाराकर का नाम हटवाकर प्रबंधक कलेक्टर कटनी के नाम दर्ज कराया जाये एवं अभिलेख दुरुस्त कराये जाए.

ग्रामीणों ने लगाया आरोप
ग्रामीणों का आरोप है की विधायक निधि से 25 अप्रेल 2008 को बाहर से आये श्रधालुओ के रुकने की निधि को देखते हुए यात्री सुविधा के लिए विधायक निधि पांच लाख की लागत से निर्मल भवन का निर्माण कराया गया था. लेकिन उक्त मानस भवन में प्राथमिक कक्षा पहली से पाचवी तक व्यक्तिगत लाभार्जन के लिए  लगाई जा रही है. जिससे बाहर से आये यात्री दर-दर भटकते है.

भूमि पर अवैध अतिक्रमण
गौरतलब है की जो भी मंदिर वहा स्थापित भगवान् के नाम दर्ज होते है उसका प्रबंधन नियमानुसार कलेक्टर होता है. इस मामले में दिलचस्प पहलू यह है की सर्व्हाराकर अश्विनी कुमार दुबे ने न्यायलय चतुर्थ व्यवहार न्यायाधीश वर्ग कटनी, न्यायलय प्रथम अपर न्यायलय अतिरिक्त जिला न्यायाधीश एवं न्यायलय कलेक्टर कटनी में मामला दायर किया और अतिक्रमित जमीन को खरीदी हुई बताया जबकि तीनो न्यायलय में यह साबित हो चुका  है की सार्वजनिक भूमि पर अवैध अतिक्रमण है और अतिक्रमण हटाने के आदेश भी दिए जा चुके है या यू कहे की सर्व्हारकार  तीनो जगह हार गए और उन्हें वाद व्यय भी अदा करना पड़ा है.

अतिक्रमण हटाने की मांग
ग्रामीणों ने इन तीन कोर्टो  एवं चार दिसंबर 2009 एस डी एम् कटनी द्वारा अनाधिकृत कब्ज़ा हटाये जाने के निर्देश दिए जाने संबंधी आदेश का स्मरण कराते हुए इस भूमि के प्रबंधक कलेक्टर है. उक्त भूमि पर कुछ लोगो द्वारा स्थायी  एवं अस्थाई अनधिकृत रूप से कब्ज़ा कर लिया गया है एवं अभी भी इस जमीन पर कब्ज़ा होता जा रहा है. जिला प्रशासन के अधिकारियो को अनेको बार सूचित करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है. यह इस बात की ओर संकेत करती है की राजस्व विभाग से अधिकारियो की मिली भगत से यह सब खेल खेला जा रहा है.

कौन करेगा सालो की बेनामी संपत्ति क हिसाब
पब्लिक ट्रस्ट घोषित कराने एवं कलेक्टर के अधीन मंदिर की व्यवस्था  कराने के लिए मुहास के ग्रामवासी लम्बे अरसे से शिकवे शिकायते कर रहे है. आस्थावान लोगो का दर्द है की प्रत्येक मंगल व शनिवार को हजारो आखे यहाँ देखती है की यहाँ लक्ष्मी की कोई कमी नहीं है इन दो दिनों  में लाखो रूपये चढ़ावा के रूप में आते  है लेकिन उक्त चढ़ावा कहा रखा जाता है?, किसका हिस्सा रहता  है? इस बारे में जनता जनार्दन को कोई जानकारी नहीं है. जिससे प्रतीत हो रहा है की सर्व्हाराकर, पंडा, पुजारी एवं सक्रिय दलाल करोडपति बने जा रहे है

अब सवाल उठता है की इसका लेखा जोखा सरकारी तौर पर क्यों नहीं रखा जा रहा है?

मध्याह्न भोजन की पूरे जिले में चल रही कमीशनखोरी


स्कूलों में मध्याह्न भोजन क ठेका संचालित करने को लेकर पहले भी ग्रामीण क्षेत्रो में कई बार विवाद की स्थितिया निर्मित हो चुकी है. मध्याह्न भोजन क ठेका संचालित करने से होने वाली कमाई के चलते चाहे नेता हो या फिर अधिकारी, हर कोई इसमें अपना  मुनाफा देख रहा है. जिला पंचायत द्वारा जहा मनमाने तरीके से इस व्यस्था को संचालित किया जा रहा है तो वही जनपद पंचायतो और ग्राम पंचायतो में भी कुछ इसी तरह का आलम है.

कटनी जिले की बडवारा जनपद पपंचायत  में भी पिछले एक अरसे से कुछ ऐसा ही हो रहा था, जिसका परिणाम कल सी ई ओ और पूर्व जनपद सदस्य के बीच हाथापाई के रूप में सामने आया. दरअसल नेता अपने  रौब के चलते इस व्यस्था को हथियाना  चाहते है तो अधिकारियो को भी इसमें भारी भरकम कमी नजर आ रही है. यही कारण है की जब जनपद सी ई ओ के सामने नेता जी की नहीं चली तो नौबत मारपीट तक जा पहुची. गौरतलब है की केंद्र  के निर्देश पर प्रदेश सभी स्कूल में बच्चो को दोपहर में मध्याह्न भोजन दिया जाता है. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने का  जिम्मा  जिला पंचायत द्वारा संचालित स्व सहायता समूहों को दिया गया है.

जिला पंचायत के निर्देश पर जनपद पंचायतो और ग्राम पंचायतो के माध्यम से स्व सहायता समूहों को मध्याह्न भोजन की व्यस्था सौपी गई है. इसके लिए स्व सय्हयता समूहों को बच्चो की निर्धारित संख्या के मान से राशी भी दी जाती है. कमीशनखोरी का यह खेल जिला पंचायत से होता हुआ ग्राम पंचायत में आकर ठहरता है. इस मामले में भी  कुछ ऐसा ही हुआ . जिला पंचायत ने बडवारा जनपद के अंतर्गत ग्राम बसाड़ी में संचालित शासकीय स्कूल में मध्याह्न भोजन का  ठेका संचालित करने  की अनुमति गायत्री स्व सहायता समूह को दी थी लेकिन इस समूह की शिकायतों के मद्देनजर जनपद पंचायत बडवारा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दयाशंकर सिंह ने गायत्री स्व सहायता समूह का ठेका निरस्त करते हुए गाँव के ही एक दूसरे सरस्वती स्व सहायता समूह को इस व्यस्था को संचालित करने का ठेका दे दिया. सी ई ओ के इस आदेश के बाद जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रंजीता  सिंह के पति एवं पूर्व जनपद सदस्य बसंत सिंह  ने सी ई ओ से शिकायत की.

बताया  जाता है की इस बात को लेकर सी ई ओ और बसंत सिंह के बीच गर्मागर्म बहस हो गई और नौबत हतापाई तक पहुच गई. इस घटना से जनपद कार्यालय में हडकंप मच गया. घटना के बाद बडवारा थाने पहुचे बसंत ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई . पुलिस ने उनका डाक्टरी मुलाहिजा करवाया. इसके बाद सी ई ओ दयाशंकर सिंह भी थाने पहुचे और घटना  की शिकायत की.

सी ई ओ की रिपोर्ट पर मामला दर्ज किया पुलिस ने
बडवारा पुलिस ने जनपद पंचायत बडवारा में कल दोपहर हुई मारपीट के मामले में मुख्य कार्पालन अधिकारी दयाशंकर सिंह के साथ शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट करने के मामले में बसंत सिंह के विरुद्ध धारा 353 , 332 के तहत मामला दर्ज किया है. बडवारा पुलिस ने बताया  की पूर्व जनपद सदस्य बसंत द्वारा की गई शिकायत की जाँच की जा रही है.

घटना के विरोध में लामबंद हुए सी ई ओ
बडवारा जनपद पंचायत कार्यालय में कल दोपहर सी ई ओ के साथ हुई मारपीट के विरोध में पूरे जिले के सी ई ओ लामबंद हो गए  है. जिले के विजयराघवगढ़, रीठी, कटनी, ढीमर खेडा , बहोरीबंद जनपद पंचायत के मुख्य कर्यपालन अधिकारियो ने आज सयुक्त कलेक्टर ऐ वी सिंह व बडवारा सी ई ओ दयाशंकर सिंह के साथ कलेक्ट्रेट  पहुचकर कलेक्टर एम् शेल्वेंद्रण को एक ज्ञापन सौपा और आरोपी बसंत सिंह की गिरफ्तारी की मांग की. ज्ञापन में कहा गया है की रंजीता सिंह जिला पंचायत सदस्य है लेकिन शासकीय कार्यालयों और बैठको में उनके पति बसंत सिंह जाते है . जो की नियम विरुद्ध है. इस अवसर पर विजय रह्गाव गढ़  सी ई ओ श्रीमती बसन्ती दुबे, रीठी सी ई ओ पंकज जैन, कटनी सी ई ओ अनुराग मोदी, ढीमर खेडा  सी ई ओ एम् एस सियाम  व बहोरिबंद सी ई ओ के के रैकवार उपस्थि रहे.