05 February, 2011

दान क दोहन

दान का दोहन

देश व प्रदेश में विख्यात हड्डी जोड़ने वाले हनुमान  मंदिर मुहांस में प्रत्येक मंगल एवं शनिवार को हजारो श्रद्धालु पहुचते है. हड्डी रोगियों को तत्काल फायदा होने से दिल खोलकर रूपये, सोना, चांदी लोग दान कर जाते है लेकिन मुहास मंदिर में आने वाली बेनामी चढ़ोतरी   का हिसाब-किताब यहाँ के सर्व्हाराकार पंडा पुजारी व दलालों के बीच होने से इस सार्वजनिक मंदिर का लाभ सर्वजन हिताय न होकर स्वयं हित के लिए हो रहा है. अतिक्रमण हटाने के लिए कोर्ट एवं कलेक्टर कोर्ट के फैसले हो चुके है और पब्लिक  ट्रस्ट घोषित  कराने के लिए पेशी पर पेशी देकर मामला अटकाया जा रहा है.

अभिलेख में सुधार कराने की मांग
अतिक्रमण हटाने एवं पब्लिक ट्रस्ट घोषित कर कलेक्टर के अधीन मंदिर कराने के पक्षधर ग्रामवासियों ने एस डी एम् कटनी को हाल में भेजे शिकायती पत्र में उल्लेख किया है की श्री हनुमान  महाराज मंदिर के नाम रजिस्टर्ड जमीन जिसका खसरा नंबर 154 /2 , 154 /3 एवं रकवा क्रमांक 0 .40 एवं 0 .15 हेक्टेयर है. उक्त भूमि पर राजस्व अभिलेख में लम्बे समय से सर्व्हाराकर  में नाम अश्विनी कुमार दुबे दर्ज है. शासन के निर्देशानुसार सर्व्हाराकर का नाम हटवाकर प्रबंधक कलेक्टर कटनी के नाम दर्ज कराया जाये एवं अभिलेख दुरुस्त कराये जाए.

ग्रामीणों ने लगाया आरोप
ग्रामीणों का आरोप है की विधायक निधि से 25 अप्रेल 2008 को बाहर से आये श्रधालुओ के रुकने की निधि को देखते हुए यात्री सुविधा के लिए विधायक निधि पांच लाख की लागत से निर्मल भवन का निर्माण कराया गया था. लेकिन उक्त मानस भवन में प्राथमिक कक्षा पहली से पाचवी तक व्यक्तिगत लाभार्जन के लिए  लगाई जा रही है. जिससे बाहर से आये यात्री दर-दर भटकते है.

भूमि पर अवैध अतिक्रमण
गौरतलब है की जो भी मंदिर वहा स्थापित भगवान् के नाम दर्ज होते है उसका प्रबंधन नियमानुसार कलेक्टर होता है. इस मामले में दिलचस्प पहलू यह है की सर्व्हाराकर अश्विनी कुमार दुबे ने न्यायलय चतुर्थ व्यवहार न्यायाधीश वर्ग कटनी, न्यायलय प्रथम अपर न्यायलय अतिरिक्त जिला न्यायाधीश एवं न्यायलय कलेक्टर कटनी में मामला दायर किया और अतिक्रमित जमीन को खरीदी हुई बताया जबकि तीनो न्यायलय में यह साबित हो चुका  है की सार्वजनिक भूमि पर अवैध अतिक्रमण है और अतिक्रमण हटाने के आदेश भी दिए जा चुके है या यू कहे की सर्व्हारकार  तीनो जगह हार गए और उन्हें वाद व्यय भी अदा करना पड़ा है.

अतिक्रमण हटाने की मांग
ग्रामीणों ने इन तीन कोर्टो  एवं चार दिसंबर 2009 एस डी एम् कटनी द्वारा अनाधिकृत कब्ज़ा हटाये जाने के निर्देश दिए जाने संबंधी आदेश का स्मरण कराते हुए इस भूमि के प्रबंधक कलेक्टर है. उक्त भूमि पर कुछ लोगो द्वारा स्थायी  एवं अस्थाई अनधिकृत रूप से कब्ज़ा कर लिया गया है एवं अभी भी इस जमीन पर कब्ज़ा होता जा रहा है. जिला प्रशासन के अधिकारियो को अनेको बार सूचित करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है. यह इस बात की ओर संकेत करती है की राजस्व विभाग से अधिकारियो की मिली भगत से यह सब खेल खेला जा रहा है.

कौन करेगा सालो की बेनामी संपत्ति क हिसाब
पब्लिक ट्रस्ट घोषित कराने एवं कलेक्टर के अधीन मंदिर की व्यवस्था  कराने के लिए मुहास के ग्रामवासी लम्बे अरसे से शिकवे शिकायते कर रहे है. आस्थावान लोगो का दर्द है की प्रत्येक मंगल व शनिवार को हजारो आखे यहाँ देखती है की यहाँ लक्ष्मी की कोई कमी नहीं है इन दो दिनों  में लाखो रूपये चढ़ावा के रूप में आते  है लेकिन उक्त चढ़ावा कहा रखा जाता है?, किसका हिस्सा रहता  है? इस बारे में जनता जनार्दन को कोई जानकारी नहीं है. जिससे प्रतीत हो रहा है की सर्व्हाराकर, पंडा, पुजारी एवं सक्रिय दलाल करोडपति बने जा रहे है

अब सवाल उठता है की इसका लेखा जोखा सरकारी तौर पर क्यों नहीं रखा जा रहा है?