18 February, 2011

दलित आदिवासी को नहीं मिल रहे श्रमिक कार्ड


दलित आदिवासी को नहीं मिल रहे श्रमिक कार्ड
अखिलेश उपाध्याय

कटनी जिले में व्याप्त अराजकता के चलते नियम-कायदों को ताक पर रखकर काम हो रहा है. जिनका नाम गरीबी रेखा में होना चाहिए उनका कार्ड नहीं बना है और जो वास्तव में गरीब और पात्र है उन्हें  शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है.

रीठी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायतो में ऐसा ही कुछ हो रहा है. ग्राम पंचायत ढुढरी   के सचिव ने अपने माता-पिता को निराश्रित पेंसन योजना के लिए पात्र घोषित करवा लिया है और दोनों को प्रतिमाह निराश्रित पेंसन मिलने लगी है. सचिव ने अपनी पत्नी को भी आगनबाडी कार्यकर्त्ता नियुक्त करवा लिया है. माता-पिता की पेंसन, पत्नी तथा स्वयं की मानदेय राशी इन सभी लाभों को प्राप्त करने के बाद सचिव स्वयं निर्धन बने हुए है. उनका नाम गरीबी रेखा सूची में दर्ज है. इसके  अलावा  ढुढरी गाँव के कई पूजीपतियो को भी सचिव की वजह से निराश्रित पेंसन पाप्त हो रही है और वे गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे है.

शिकायत मिलने के बाद जिला पंचायत सी ई ओ शशिभूषन सिंह ने इसकी जाँच के आदेश रीठी जनपद सी ई ओ पंकज जैन को सौपी है. ग्रामीणों ने बताया की उन्होंने रोजगार गारंटी योजना के तहत सौ दिवस का काम पूरा कर लिया है और ग्राम पंचायत में सचिव ने उनका रिकार्ड प्रस्तुत नहीं किया है. और रिकार्ड उपलब्द्ध न होने के कारण निर्माण श्रमिको के पंजीयन कार्ड नहीं बनाए जा सके है. इससे उन्हें सरकारी  योजनाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है.

सी ई ओ जिला पंचायत से निर्माण मजदूरों ने पंजीयन करवाने की प्रार्थना की है ताकि  उनके जाब कार्ड बन सके.  ढुढरी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गाँव जालासुर, धरमपुरा, सगोड़ी के आदिवासी हरिजन श्रमिको ने सचिव द्वारा किये  जा रहे पक्षपात की जाँच भी चाही है.