19 February, 2011

बिन बिजली सब सून

-बिन बिजली सब सून-
अखिलेश उपाध्याय

बिजली की समस्या अब ग्रामीण क्षेत्रो में सबसे बड़ा सिरदर्द बनकर सामने आ रही है. बिजली न मिलने से गाँव अन्धकार में डूबे है. हालात यह है की ग्रामीण क्षेत्र में निवास कर रहे ग्रामीणों को चौबीस घंटे में मात्र चार घंटे बिजली मिल पा रही है. बिजली ने काम धंधे चौपट करने के साथ ही बच्चो की पढाई पर भी विपरीत असर डाला है. ग्रामीण अब बिजली को लेकर आन्दोलन की राह पर उतरने के लिए विवश है.

हालत यह है की चौबीस घंटे में बिजली सुबह छेह बजे आती है और दस बजे चली जाती है इसके बाद फिर बिजली नहीं आती. चौबीस घंटे में बीस घंटे बिजली न मिल पाने के कारण बच्चो की पढ़ाई लिखाई चौपट हो गयी है.  अम्गावा के कमलेस सेन ने बताया की विगत बीस दिनों से ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली नहीं मिल रही है. जिसके कारण गाँव वालो को तकलीफों का सामन करना पद रहा है.
गुर्जी, सलैया, डांग, सिम्दारी, गोदान, बडगांव, तिघरा, करहिया, खमरिया, बर्यारपुर, कैमोरी, बाँधा, तिलागावा, नितार्रा आदि रिती जनपद के समस्त गोनो में यही हाला है. उस पर इस महीने बिजली के उपभोक्ताओं को इस माह पंद्रह सौ रूपये से कम के बिल नहीं दिया गए है. जब लोगो को बिजली ही नहीं मिलती फिर भला भरी भरकम बिल कैसी दिए जा रहे है ?

सबसे बड़ी दुर्दशा विद्यार्थियों की है जिनके सर पर परीक्षाये है ऐसे में भला  बिजली के बिना कैसे बच्चे अपनी पढ़ाई करे. एक तो सोसाइटी  से मिलने वाला केरोसिन पहले ही होटल और दलालों को ब्लेक कर दिया जाता है जो बाद में पच्चीस से तीस रूपये लीटर में बेचते है फिर भला गरीब के बच्चे कैसे पढ़े ?