18 May, 2011

आर टी आई ने खोली पोल

कभी पश्चिमी पकिस्तान से शरणार्थी के  रूप में आये सिंधी  कटनी के टिकुरी केम्प (जो अब माधव नगर के नाम से जाना जाता है) में बसाए गए थे. उस समय के  लगभग उनीस सौ परिवारों की संख्या जो अब हजारो में पहुच चुकी है यही लोग अब कटनी के मूल निवासियों के लिए सर का दर्द बन गए है. 
कटनी में आये इन सिंधियो ने पुनर्वास और नजूल अधिकारियो की साठ गाठ से बिना फूटी कौड़ी चुकाए पुनर्वास के लिए बारह शीटो से आरक्षित की गयी 399 .98 एकड़ में से लगभग दो सौ एकड़ भूमि पर अतिक्रमण कर लिया है. जिस पर आवासीय भवन कम और व्यावसायिक रूप में अधिक उपयोग हो रहा है. 
जाहिर है इससे सरकार को प्रीमियम और वार्षिक भू भाटक के रूप में एक अरब से अधिक की क्षति हुई है. सरकारी जमीन को हड़पने का यह संभवतः मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा मामला होगा 
पुनर्वास की यह जमीन उन 1711 पत्तो के अतिरिक्त है जो  1672 रिफुजी परिवारों को सन 1975 से 1995 ले बीच  आवंटित किये जा चुके है. अतिक्रमित भूमि का नियमानुसार आवंटन  कर यदि बाजार मूल्य से प्रीमियम और भू भाटक वसूल किया जाता तो सरकारी खजाने में एक अरब से अधिक की राशी जमा होती.
इस जमीन पर अतिक्रमण के लिए नजूल  और पुनर्वास विभाग के अधिकारी व जिला प्रशासन बराबर जिम्मेदार है. आज भी राजनैतिक  सरक्षण से यह सिलसिला रुका नहीं है बल्कि कब्ज़ा होता ही जा रहा है . और अधिकारी चुप बैठे सब नजारा देख रहे है. कभी कभार छोटी-मोटी कार्रवाई हुई लेकिन अतिक्रमण हटाने की व्यापक योजना नहीं बनी.
नक़्शे व बिजली कनेक्शन दिए गए
कब्जे की जमीन पर अधिकांश भवन नगर निगम से बिना नक्शा पास कराये बने है. कुछ को तो नगर निगम ने बिना स्वामित्व  नक़्शे भी पास कर दिए है. विद्युत् मंडल द्वारा दिए गए बिजली के कनेक्शन भी जाँच के दायरे में है. इन कालोनियों के विकास पर निगम ने अब तक पानी की टंकी, सड़क, नाली  व अन्य मूलभूत सुविधाओं पर करोडो रूपये अलग से फूक दिए है.
आर टी आई ने खोली पोल
नियमानुसार पुनर्वास भूमि के व्यावसायिक उपयोग पर प्रतिबन्ध है.बावजूद इसके माधवनगर में अतिक्रमण की गयी सैकड़ो एकड़ जमीन में से अधिकांश पर दाल  मिल चल रही है. 
आर टी आई के तहत मागी गयी एक जानकारी में जनूल और पुनर्वास विभाग ने कुल 83 मिलो की सूची दी है जिनमे से अधिकांश ने पट्टे के अलावा अवैध रूप से अतिक्रमण कर बगैर नक्शा पास कराये निर्माण करा लिया है. 
इस सूची के मुताबिक महामाया दाल मिल ने 2100 वर्गफीट, वैष्णो दाल मिल ने 7800 वर्गफीट, सुखसागर इंडस्ट्रीज ने 69600 वर्गफीट, बालाजी रैस्मिल 15000 , संदीप दालमिल 11004 , गोविन्द इंडस्ट्रीज 928 , अर्जुनदास किशनचंद 6754 , रामनानी ट्रेडिंग 376 , माधव इंडस्ट्रीज 7151 , देवकी इन्दास्त्रर्ज 7162 , किशनचंद थावार्दास 40000 , गुकुल इंडस्ट्रीज 16974 , असे इंडस्ट्रीज 100 , राजकमल इंडस्ट्रीज 16974 , गुरुनानक इंडस्ट्रीज 6223 , संत्राम्दास करमचंद 16101 , आरके इन्तार्प्रैजेज 69500 , श्रीचंद संत्राम्दास 23000 , लक्ष्मी आइल एंड रैस्मिल 60800 , सतगुरु प्रोडक्ट्स 22900 , तारा शक्ति प्रोडक्ट्स 39240 , नेचाल्दास दालमिल 16500 , प्रीतम राईस एंड दाल मिल 50499 , ॐ इंडस्ट्रीज 31474 , गुरुनानक दास मिल 1929 , राहुल ट्रेडर्स 12213 , राजेश कुमार घनश्यामदास 8723 , कन्हैयालाल नेवाद्राम 5400 , तुलसी इंडस्ट्रीज 18000 , सुखसागर इंडस्ट्रीज 10036 , अनिल इंडस्ट्रीज 89000 , सुखसागर 10036 , हीरा दालमिल 21581 , प्रभुदास पंजाय्न्मल 30000 , जय भवानी दालमिल 13000 , इन्द्र इंडस्ट्रीज 5400 , संजय इंडस्ट्रीज 1080 , शुभम ट्रेडर्स 17000 , ईश्वर इंडस्ट्रीज 4800 , ॐ पल्सेस दाल मिल 2850 , माँ भवानी दल मिल 1500 , हीरानंद प्रीतमदास 17190 , अमृत अनाज भण्डार 9000 , विजय पल्सेस दल मिल 7614 , अनमोल इंडस्ट्रीज 3996 , सोनू ट्रेडिंग रैस्मिल 5536 , दुर्गेश इंडस्ट्रीज 14110 , होलाराम गोकलदास 5000 , कमल इंडस्ट्रीज 14400 , राजेश इन्दार्कुमार 11727 , संजय कुमार 6540 , अमर इंडस्ट्रीज 1625 , अमर ज्योति दल मिल 26100 , पी एम् दल युद्योग ने 9150 , रामेश्वर इंडस्ट्रीज 15800 और श्रीराम पल्सेस ने 7000 वर्ग फिट भूमि पर अतिक्रमण किया है.