20 June, 2011


ग्रामीणों के श्रमदान से सन 1965  में बनाए गए कटनी तहसील के बहोरिबंद जनपद का सिहुड़ी ताल आज कायाकल्प की बजाय ग्रामीण स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग उसी का दुश्मन बन गया है. आर ई एस द्वारा तालाब विस्तार के नाम पर पुरानी मेढ़ के ठीक बगल से नई मेढ़ का निर्माण कराया जा रहा है. नई  मेढ़ की  नीव तैयार करने के दौरान ही पुरानी मेढ़ से पानी का रिसाव शुरू हो गया है. ग्रामीणों का कहना है की विभाग द्वारा अनावश्यक तौर पर हस्तक्षेप करते हुए नई मेढ़ का निर्माण कराया जा रहा है जबकि पुरानी मेढ़ आगामी सैकड़ो वर्षो तक जस की तस बनी रहती
साठ के दशक में सिहुदी के ग्रामीणों ने स्थानीय आवश्यकताओं के मद्देनजर  करीब दस एकड़ की ढाल वाली शासकीय जमीन पर श्रमदान कर तालाब का निर्माण कराया था. जिसका अब तक पानी की उपलब्द्धता के आधार पर भरपूर उपयोग हो रहा था. सिहुड़ी के वर्तमान सरपंच गुलाब सिंह ठाकुर के परिजन तत्कालीन सरपंच टहल सिंह ठाकुर, कपूरचंद जैन, बाबूराम महतो, समेत हजारो ग्रामीणों  ने तालाब की मेढ़ में एक-एक लट्ठा मिट्टी डालकर तालाब निर्माण कराया था लेकिन आर ई एस द्वारा मुनाफा के चक्कर में बना बनाया तालाब का सत्यानाश किया जा रहा है. जनता ताल की मेढ़ के ठीक करीब से बन रही नीव के चलते पुरानी मेढ़ में सेध लग गई है. नई मेढ़ में पन्नी  बिछाकर काली मिट्टी डालने की बजाय रेत डालकर खानापूर्ति की जा रही है. यदि आगामी दिनों में तेज बारिश हो जाय तो जनता ताल की मेध पूरी तरह बह जाने की आशंका है.

14 June, 2011

पान बरेजों को उपलब्ध कराई हाईटेक तकनीक


पान बरेजों को उपलब्ध कराई हाईटेक तकनीक
अखिलेश उपाध्याय 
 87 कृषकों को पान खेती की हाईटेक सामग्री प्रदत्त
कटनी । राष्ट्रीय कृषि उद्यानिकी विकास योजनान्तर्गत जिले में पान बरेजों को हाईटेक तकनीक उपलब्ध कराई गई है। बरेजों को दीर्घकाल तक कायम रखने, पान की खेती तकनीकी से करने हेतु विविध सामग्री प्रदाय कर 87 पान उत्पादकों को लाभान्वित किया गया है।
    जिले के रीठी विकासखंड़ के अन्तर्गत खम्हरिया उद्यान रोपणी में गत दिनों कृषक पान उत्पादक मेला सम्पन्न हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री क्रांति चौधरी नें कृषकों को हाईटेक सामग्री प्रदान की। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत उपाध्यक्ष कुंवर सौरभ सिंह ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति सिंह, ओमकार मिश्रा, गौरीशंकर गोस्वामी, सरपंच घुघरा रसीद खांन, केपी गोस्वामी सहित पंचायत जन प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

    मुख्य अतिथि ने कृषक पान उत्पादक मेला में सामग्री वितरण कार्यक्रम को सम्बोधित किया। उन्होने कहा कि, कृषकों को जो सामग्री दी गई है। इसका भरपूर उपयोग करें। पान की खेती को उन्नत बनायें। जिससे वे समृद्ध हो सकेंगे। कार्यक्रम अध्यक्ष कुंवर सौरभ सिंह ने बिलहरी का पान बहुत मशहूर है। प्रदेश का यह पान उत्तरप्रदेश के प्रमुख शहरों के लिये निर्यात होता है। बिलहरी के पान की गुणवत्ता और स्वाद की प्रषंसा की।
उन्होने बता या कि, यहां के पान की महोवा, लखनऊ, कानपुर, मेरठ बल्कि आगे तक के शहरों में बहुत मांग है। पान की खेती को प्राकृतिक प्रकोप से बचाने और इसकी लागत में कमी लाने शासन ने तकनीकी सामग्री प्रदान की है। निश्चित रूप से इस तकनीक से कृषक हर विपरीत परिस्थितियों का सामना कर सकेंगे। वास्ताव में अब पान की खेती सुरक्षात्मक तरीके से हो सकेगी। बरेजों से पान का अधिक उत्पादन प्राप्त होगा। उत्पादन बढऩें से निर्यात की स्थिति बनेगी। जिससे पान उत्पादकों की आय में भी बढोत्तरी होगी। जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह ने भी पान उत्पादक कृषकों को हर संभव मदद दिलाने की बात कही। उन्होने ने कहा कि, पान बरेजो की खेती के लिये सरकार ने चिंतन किया है। जिसका परिणाम आपके सामने है। जो आज पान उत्पादकों की तकनीकी की मांग थी। उसी के अनुसार सामग्री प्रदाय की गई है। कृषक इस तकनीक को अवश्य इस्तेमाल करें। जिससे उनकी आमदनी अवश्य बढ़ेगी।
इस अवसर पर प्रभारी परियोजना अधिकारी, उद्यान एसएम पटेल ने बताया कि, पान की खेती को सुरक्षात्मक तरीके से करने हेतु तकनीकी उपलब्ध कराई गई है। इस तकनीक का किसानों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रायोगिक तौर पर शासन ने 75 प्रतिशत अनुदान सहायता पर किसानों को सामग्री उपलब्ध कराई है। इसमें किसानों को 25 प्रतिशत राशि लगानी पड़ी है। इस तरह से कुल 40 हजार रूपये की सामग्री में 30 हजार शासन द्वारा तथा 10 हजार रूपये किसान ने व्यय किये हैं। जिसमें 500 वर्ग मीटर ग्रीन नेट, 1 एचपी सीआरआई मोटर पंप फिटिंग सामग्री तथा 200 फीट पाईप सहित, स्प्रेयर पंप 1 नग 15 लीटर, कीटनाशक व फफूंद नाशक दवायें प्रदान की गई हैं। किसानों ने उक्त सामग्री का चयन स्वयं किया है। उसी के अनुसार ही तकनीकी सामग्री सुलभ कराई गई है।
इस दौरान खम्हरिया रोपणी उद्यान अधीक्षक आरएल नामदेव नें बताया कि, पान बरेजा किसानों की यह बहुप्रतीक्षित मांग बहुत दिन से शासन से रही है। अधिकारियों के भ्रमण करनें पर किसानों ने पान बरेजा खेती को तकनीक से करने का प्रस्ताव रखा था। जिसकी आज पूर्ति हो गई है। किसानों ने हर्ष व्याप्त है। किसानों ने भी तकनीकी से पान की खेती करने का संकल्प दोहराया है। कार्यक्रम का संचालन सहाग्रेड़-3 रविप्रसाद दुबे ने किया।     

05 June, 2011

अजाक थाना से न्याय का भरोषा उठा

कटनी/ समाज के गरीब और कमजोर वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले अनुसूचित जाती व जनजाति  वर्ग के लोगो पर अन्याय अत्याचार न हो तथा उन पर हुए जोर-जुल्म के खिलाफ प्रभावी  कार्रवाही की जाये, इसी उद्देश्य से शासन द्वारा प्रत्येक जिले में प्रथक से अजाक थाना संचालित है तथा थानों में अपने स्तर पर मामलो की जाँच पड़ताल के लिए पुलिस उप अधीक्षक व निरीक्षक स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गयी है. 

लेकिन यहाँ जिला मुख्यालय में संचालित अजाक थाना में शासन की उत्कृष्ट मंशा में  भ्रष्टाचार फल फूल रहा है. यहाँ रोजाना आने वाले आवेदनों को रख तो लिया जाता है लेकिन आरोपी से तालमेल  बनाकर मामला ले देकर निबटा दिया जाता है.
फलस्वरूप फरियादी को न्याय नहीं मिल पाता और उनका विश्वास डगमगा जाता है अपने ऊपर होने वाले हर तरह के अत्याचारों  की शिकायत लोग पुलिस से करते है लेकिन यदि पुलिस ही रिश्वतखोर और भ्रष्ट हो तो फिर पुलिस की शिकायत कहा करे, लोगो के कुछ समझ में नहीं आता.
अजाक थाने में साल भर में आये आवेदन और दर्ज हुए मामले तथा इन मामलो के निराकरण की जानकारी ली जाए तो सच्चाई खुद ब खुद सामने आ जायेगी. खबरे तो यहाँ तक है की अजाक थाना के पुलिस उप अधीक्षक का वाहन चालक पूरे मामलो में बिचौलिए  की भूमिका निभाता है. 

जब किसी के खिलाफ शिकायत आती है तो शिकायतकर्ता को न्याय मिलने का भरोषा दिलाकर उसे चलता कर दिया जाता है, उसी से आरोपी का संपर्क सूत्र मोबाईल नम्बर आदि ले लिया जाता है फिर चालक आरोपी से शिकायत के सम्बन्ध में चर्चा करता है. चर्चा के दौरान नरम  रूख अपनाते हुए साहब से मिलकर सब ठीक-ठाक करा देने का आश्वासन दिया जाता है. फिर नियत तिथि पर पेशी पर आये आरोपी से पहले चालक ही मिलता है और लेन देन की  चर्चा कर अपनी ओर से साहब से संपर्क साध लेता है.
इस तरह मामला दर्ज होने और आरोपी के विरुद्ध कार्रवाही हुए बगैर ही निबटा दिया जाता है. आश्चर्य की बात तो यह है की  शहरी तथा ग्रामीण थानों को समयसमय पर विभागीय वरिष्ठ अधिकारियो द्वारा निरीक्षण किया जाता है लेकिन अजाक थाने के निरिक्षण की किसी को फुर्सत नहीं है.