05 June, 2011

अजाक थाना से न्याय का भरोषा उठा

कटनी/ समाज के गरीब और कमजोर वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले अनुसूचित जाती व जनजाति  वर्ग के लोगो पर अन्याय अत्याचार न हो तथा उन पर हुए जोर-जुल्म के खिलाफ प्रभावी  कार्रवाही की जाये, इसी उद्देश्य से शासन द्वारा प्रत्येक जिले में प्रथक से अजाक थाना संचालित है तथा थानों में अपने स्तर पर मामलो की जाँच पड़ताल के लिए पुलिस उप अधीक्षक व निरीक्षक स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गयी है. 

लेकिन यहाँ जिला मुख्यालय में संचालित अजाक थाना में शासन की उत्कृष्ट मंशा में  भ्रष्टाचार फल फूल रहा है. यहाँ रोजाना आने वाले आवेदनों को रख तो लिया जाता है लेकिन आरोपी से तालमेल  बनाकर मामला ले देकर निबटा दिया जाता है.
फलस्वरूप फरियादी को न्याय नहीं मिल पाता और उनका विश्वास डगमगा जाता है अपने ऊपर होने वाले हर तरह के अत्याचारों  की शिकायत लोग पुलिस से करते है लेकिन यदि पुलिस ही रिश्वतखोर और भ्रष्ट हो तो फिर पुलिस की शिकायत कहा करे, लोगो के कुछ समझ में नहीं आता.
अजाक थाने में साल भर में आये आवेदन और दर्ज हुए मामले तथा इन मामलो के निराकरण की जानकारी ली जाए तो सच्चाई खुद ब खुद सामने आ जायेगी. खबरे तो यहाँ तक है की अजाक थाना के पुलिस उप अधीक्षक का वाहन चालक पूरे मामलो में बिचौलिए  की भूमिका निभाता है. 

जब किसी के खिलाफ शिकायत आती है तो शिकायतकर्ता को न्याय मिलने का भरोषा दिलाकर उसे चलता कर दिया जाता है, उसी से आरोपी का संपर्क सूत्र मोबाईल नम्बर आदि ले लिया जाता है फिर चालक आरोपी से शिकायत के सम्बन्ध में चर्चा करता है. चर्चा के दौरान नरम  रूख अपनाते हुए साहब से मिलकर सब ठीक-ठाक करा देने का आश्वासन दिया जाता है. फिर नियत तिथि पर पेशी पर आये आरोपी से पहले चालक ही मिलता है और लेन देन की  चर्चा कर अपनी ओर से साहब से संपर्क साध लेता है.
इस तरह मामला दर्ज होने और आरोपी के विरुद्ध कार्रवाही हुए बगैर ही निबटा दिया जाता है. आश्चर्य की बात तो यह है की  शहरी तथा ग्रामीण थानों को समयसमय पर विभागीय वरिष्ठ अधिकारियो द्वारा निरीक्षण किया जाता है लेकिन अजाक थाने के निरिक्षण की किसी को फुर्सत नहीं है.