31 August, 2011

गणेशजी का पूजन सायंकाल के समय करना चाहिए


Blockquote-open.gif गणेशजी का पूजन सायंकाल के समय करना चाहिए। पूजनोपरांत दृष्टि नीची रखते हुए चंद्रमा को अर्ध्य देकर, ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा भी देनी चाहिए। Blockquote-close.gif
  • भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी ही गणेश चतुर्थी कहलाती हैं यों तो प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के पूजन और उनके नाम का व्रत रखने का विशिष्ट दिन है। श्री गणेश जी विघ्न विनायक हैं। ये देव समाज में सर्वोपरि स्थान रखते हैं।
  • भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय गणेशजी का जन्म हुआ था। भगवान गणेश बुद्धि के देवता हैं। गणेशजी का वाहन चूहा है। ऋद्धि व सिद्धि गणेशजी की दो पत्नियां हैं। इनका सर्वप्रिय भोग लड्डू हैं।
  • प्राचीन काल में बालकों का विद्या-अध्ययन आज के दिन से ही प्रारम्भ होता था। आज बालक छोटे-छोटे डण्डों को बजाकर खेलते हैं। यही कारण है कि लोकभाषा में इसे डण्डा चौथ भी कहा जाता है।
  • इस दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर सोने, तांबे, मिट्टी अथवा गोबर की गणेशजी की प्रतिमा बनाई जाती है। गणेशजी की इस प्रतिमा को कोरे कलश में जल भरकर, मुंह पर कोरा कपड़ा बांधकर उस पर स्थापित किया जाता है। फिर मूर्ति पर (गणेशजी की) सिंदूर चढ़ाकर षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए। गणेशजी को दक्षिणा अर्पित करके 21 लड्डूओं का भोग लगाने का विधान है। इनमें से 5 लड्डू गणेशजी की प्रतिमा के पास रखकर शेष ब्राह्मणों में बांट देने चाहिए। गणेश जी की आरती और पूजा किसी कार्य को प्रारम्भ करने से पहले की जाती है और प्रार्थना करते हैं कि कार्य निर्विघ्न पूरा हो।
  • गणेशजी का पूजन सायंकाल के समय करना चाहिए। पूजनोपरांत दृष्टि नीची रखते हुए चंद्रमा को अर्ध्य देकर, ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा भी देनी चाहिए।
  • इस प्रकार चंद्रमा को अर्ध्य देने का तात्पर्य है कि जहां तक संभव हो आज के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। क्योंकि इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से कलंक का भागी बनना पड़ता है। फिर वस्त्र से ढका हुआ कलश, दक्षिणा तथा गणेशजी की प्रतिमा आचार्य को समर्पित करके गणेशजी के विसर्जन का विधान उत्तम माना गया है।
  • गणेशजी का यह पूजन करने से विद्या, बुद्धि की तथा ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति तो होती ही है, साथ ही विघ्न-बाधाओं का भी समूल नाश हो जाता है।

  • इस सम्बन्ध में कथा 

  • एक बार भगवान शंकर स्नान करने के लिए कैलाश पर्वत से भोगावती नामक स्थान पर गए। उनके जाने के बाद पार्वती ने स्नान करते समय अपने तन के मैल से एक पुतला बनाया और उसे सतीव कर दिया। उसका नाम उन्होंने गणेश रखा। पार्वती जी ने गणेश जी से कहा- 'हे पुत्र! तुम एक मुद्गर लेकर द्वार पर जाकर पहरा दो। मैं भीतर स्नान कर रही हूं। इसलिए यह ध्यान रखना कि जब तक मैं स्नान न कर लूं,तब तक तुम किसी को भीतर मत आने देना। उधर थोड़ी देर बाद भोगावती में स्नान करने के बाद जब भगवान शिव जी वापस आए और घर के अंदर प्रवेश करना चाहा तो गणेशजी ने उन्हें द्वार पर ही रोक दिया। इसे शिवजी ने अपना अपमान समझा और क्रोधित होकर उसका सिर, धड़ से अलग करके अंदर चले गए। टेढ़ी भृकुटि वाले शिवजी जब अंदर पहुंचे तो पार्वती जी ने उन्हें नाराज़ देखकर समझा कि भोजन में विलम्ब के कारण महादेव नाराज़ हैं। इसलिए उन्होंने तत्काल दो थालियों में भोजन परोसकर शिवजी को बुलाया और भोजन करने का निवेदन किया। तब दूसरी थाली देखकर शिवजी ने पार्वती से पूछा-'यह दूसरी थाली किस के लिए लगाई है?' इस पर पार्वती जी बोली-' अपने पुत्र गणेश के लिए, जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है।' यह सुनकर शिवजी को आश्चर्य हुआ और बोले- 'तुम्हारा पुत्र पहरा दे रहा है? किंतु मैंने तो अपने को रोके जाने पर उसका सिर धड़ से अलग कर उसकी जीवन लीला समाप्त कर दी।' यह सुनकर पार्वतीजी बहुत दुखी हुईं और विलाप करने लगीं। उन्होंने शिवजी से पुत्र को पुनर्जीवन देने को कहा। तब पार्वती जी को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर उस बालक के धड़ से जोड़ दिया। पुत्र गणेश को पुन: जीवित पाकर पार्वती जी बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने पति और पुत्र को भोजन कराकर फिर स्वयं भोजन किया। यह घटना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को घटित हुई थी। इसलिए यह तिथि पुण्य पर्व के रूप में मनाई जाती है।

27 August, 2011

रहल - आजकल प्राय: यह उपलब्ध नहीं होती

  • भारत में 'रहल' प्राचीन समय से प्रयोग किया जाता रहा है। इसे सरल भाषा में 'पुस्तकाधार' भी कहा जाता है। कहीं कहीं पर रहल को 'रेहल' अथवा 'रिहन' भी कहा जाता है।
  • मुख्यत: इसका प्रयोग धार्मिक पुस्तकों के पठन पाठन के लिए किया जाता है। रामायणमहाभारतगीतापुराणकुरान आदि पुस्तकों का अध्ययन करते समय इसका प्रयोग सुविधा के लिए किया जाता है।
  • इस पर रख कर पढ़ने से पुस्तक सुरक्षित रहती है, क्योंकि भारी वा बड़ी पुस्तकों को हाथ में लेकर पढ़ने से असुविधा रहती है और पुस्तक के फटने का भी भय रहता है।
  • रहल की बनावट अंग्रेज़ी भाषा के X की भाँति होती है।
  • रहल प्राय: लकड़ी की बनी हुई होती है।
  • पहले रहल घर-घर में पायी जाती थी।
  • यह भाँति-भाँति की नक्काशी की हुई मिलती है।
  • आजकल प्राय: यह उपलब्ध नहीं होती किंतु तलाश करने पर आज भी कहीं कहीं दिख जाती है।  

26 August, 2011

कागजो में चल रहे मनारेगा के काम

  इस योजना को लेकर सरकार की गैरजिम्मेदारी हमेशा झलक आती है। इसी के चलते इस मद से सौ करोड रूपये इस वित्त वर्ष में कम कर दिए गए। अब कम आवंटन से बढी हुई जरूरते कैसे पूरी होंगी यह समझ से परे है। भारत का कायाकल्प करने में सक्षम इस योजना को लेकर सरकार गंभीर नहीं दिखती। 
  भारतीय परिप्रेक्ष्य में इस योजना से बेहतर शायद ही कोई योजना हो बल्कि पूरी दुनिया में शायद इस जैसी कोई योजना हो ? यह अगर ठीक से संचालित हो तो गरीबी मिटाने का महात्मा गांधी का सपना पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता। लेकिन योजना का दुखदायी पहलू  यह हक् कि यह कागजी तौर पर तो पूरी तरह सफल है लेकिन वास्तविक तौर पर नहीं। अभी देश के कई जिले ऐसे हैं जहां इस योजना से जुडी घोर अनियमितताएं सामने आ रही है। 
  खासकर लोग इसे अपनी अर्थव्यवस्था  में मजबूती लाने के उपाय की तरह देख रहे हैं लेकिन कई ऐसे भी हैं जिनका प्रयास है कि इसे पूरी तरह पंगु बना दिया जाए। ऐसा देखा गया है कि योजना में भृष्टाचार को सामनू लाने वाले कुछ जुझारू कार्यकर्ताओं की हत्या तक हुई ओर हत्यारों को पकडा भी नहीं जा सका।
  इस वित्त वर्ष में इसके लिए भले ही कम राशि का प्रावधान हो, फिर भी इसके लिए तय राशि ईमानदारी से खर्च की जाए तो हालात बदल सकते हैं। बस्तुतः योजना को ओर राशि की तो जरूरत है लेकिन इससे कही। अधिक जरूरी पारदर्शिता से इसके प्रावधानों को लागू करने की है। योजना को सुधारने के लिए सबसे जरूरी एक मजबूत शिकायत निवारण मशीनरी की स्थापना की है। 
  मौजूदा स्थिति में केन्द्र और राज्य सरकार इसके जवाबदेही संबंधी प्रावधानों को महत्व नहीं दे रही हैं। योजना बेरोजगारी, गरीबी और भुखमरी से रहात दिलाने में तभी कारगर हो सकती है जब इस पर अमल ठीक से हो और किसी किस्म की लापरवाही पाए जाने पर जुर्माने ओर दण्डित किए जाने जैसी व्यवस्था भी सुनिश्चित हो। अभी केवल गिने-चुने मामलों में ही जुर्माना तय किया गया है जबकि अनियमितता एवं लापरवाही के मामलों का अंबार लगा है। 
  मजदूरी के भुगतान में बिलंब पर मुआवजे का प्रावधान भले हो लेकिन इसका उल्लंघन खुद राज्य सरकारें कर रही है। नौकरशाह तो मनरेगा की  चाबी अपने हाथ में रखना चाहते हैं जो इस योजना  की मूल मंशा के ही खिलाफ है। योजना में कई सकारात्मक बातें निहित हैं किंतु इसे भ्रष्टाचार ओर अनियमितताओं से बचाए रचाना होगा। इस योजना से भ्रष्टाचार को दूर किया जा सके इसके लिए इसमें सारे प्रावधान हैं। बस इसे ठीक से लागू किया जाना चाहिए। किसी भी किस्म की अनियमितता पर कडी कार्रवाई होनी चाहिए।
  कामगारों के जाब कार्ड और उन्हें मिल रही मजदूरी की समय-समय पर जांच हो। समाज के जिस वर्ग के लिए यह योजना शुरू की गई थी, उसे इसका लाभ मिलना चाहिए। लोागों को अभी योजना की पूरी जानकारी ही नहीं है। वे नहीं जानते कि जाब कार्ड में नाम कैसे दर्ज कराए जाएं। तहसीलदार व सचिव तक पूरी जानकारी से अनभिज्ञ हैं। स्थिति बदलनी होगी। आखिर किसी भी अन्य विकास योजना की तरह इसका सबसे बडा दुश्मन भ्रष्टाचार ही है, इसे समझना होगा। केन्द्र सरकार की जिम्मेदारी केवल योजना के संबंध में घोषणाएं करने की ही नहीं है बल्कि जमीनी तौर पर नियमों का कितना पालन हो रहा है, यह भी देखने की बात  है।

पी डब्लू डी का घोटाला

  अखिलेश उपाध्याय

  रीठी/  कटनी जिले में चल रहे विकास कार्य की देखरेख करने वाला शायद कोई नही है तभी तो यहां चल रहे सड़क निर्माण के कार्य में खुलेआम भ्रष्टाचार किया जा रहा है। पी डब्लू डी विभाग के द्वारा बनाई जा रही इन सड़कों  में ठेकेदार के द्वारा मनमाने तरीके से काम कराया जा रहा है।
  जानकार सूत्रों की माने तो इस ठेके में इसलिए भी गैरजिम्मेदार तरीके से काम कराया जा  रहा है क्योंकि इसके मुख्य कर्ताधर्ता एक लोकायुक्त की जांच में 
फ से पी डब्लू डी विभाग के एस डी ओ हैं। कटनी पी डब्लू डी में पदस्थ कार्यपालन यंत्री की मिली भगत से यह सारा खेल खेला जा रहा है इसलिए ठेकेदार के हौसले बुलंद हैं। 
  इस सड़क के निर्माण में साईट इंजीनियर, टाइमकीपर कभी भी काम की देखरेख करने नजर नहीं आते । सड़क निर्माण निर्धारित मापदण्डों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है बल्कि ठेकेदार जैसे-तैसे काम को निबटा रहा है। एस्टीमेट के अनुरूप कार्य नहीं कराया जा रहा है। जी 2 का कोट नहीं किया गया है तथा सीबीबार का भी टेस्ट नहीं कराया गया है। साइड सोल्डर में सिलेक्टेड स्वाइल की जगह पर लोकल मिट्टी का प्रयोग किया गया है।
  सूचना के अधिकार में प्राप्त जानकारी के मुताबिक मोहास-कठोतिया-गोदाना मार्ग जिसकी लम्बाई चौदह किलोमीटर है जो कि कटनी-दमोह राज्य मार्ग क्रमांक के 36/6 से दाई ओर दूसरी ओर बडग़ांव-गोदाना मार्ग के कि.मी. 10/10 में मिलती है के कार्य में जमकर भ्रष्टचार किया जा रहा है। मोहास-कठोतिया-गोदाना मार्ग में कुल बारह पुल-पुलियों का निर्माण कार्य कराया जा रहा है जिनकी लागत 24.14 लाख है जो कि मापदण्डों के अनुरूप नहीं बनाया जा रहा हैं। 
   शासन की मंशा थी कि मोहास-पाली-बरजी रोड की कुल लागत 378.03 लाख रूपये है। इस योजना के पूर्ण होने पर बारह गाँवों की 15345 जनसंख्या को बारामासी यातायात उपलब्ध हो सकेगा तथा 
ग्रामवासियों को फ सल तथा अन्य पैदावार को मण्डी में जाने तथा स्वास्थ्य/स्कूल/कालेज तथा जिला मुख्यालय/दमोह, कटनी, जबलपुर जाने की सुविधा प्राप्त होगी। इस सड़क के बन जाने से मुहांस, पटेहरा, खाम, मझगवां, करहिया, कठौतिया, भदनपुर, सिमडारी, नयाखेड़ा, भेड़ा, 
गोदाना, बडग़ांव के ग्रामवासियों को लाभ मिलेगा। लेकिन सड़क की घटिया गुड़वत्ता के चलते इस सड़क का भवष्यि ज्यादा दिन तक नहीं रहेगा।
  इस सड़क के सीसी निर्माण में कहीं पर ऐक्सपेन्सन ज्वाइन्ट का प्रावधान नहीं किया गया है जबकि एस्टीमेट में स्पष्ट उल्लेख है। मझगवां ग्राम के जनता दल यू के ब्लाक अध्यक्ष खेमचंद विश्वकर्मा ने बताया कि मझगवां ग्राम से गुजरने वाली इस सड़क के निर्माण में सीसी रोड बनाते समय धूल और कचरा भरी गिट्टी का उपयोग किया गया है जो तस्वीरों में स्पष्ट नजर आ रहा है। डुअल बार और टाई राड को कहीं पर भी नहीं लगाया गया है। कान्ट्रेक्सन ज्वाइन्ट, एक्सपेन्सन ज्वाइन्ट का काम नहीं किया गया है। जीएसबी में एम 40 की गिट्टी का प्रयोग नहीं किया गया है बल्कि बगल के किसानों के खेतों की मि_ी खोदकर डाल दी गई है। किसानों के खेत से निकाली गई मिट्टी के लिए उनकी लिखित अनुमति भी नहीं ली गई है। विश्वकर्मा ने कहा कि विभाग के साईट इंजीनियर तथा अन्य उच्चाधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी पीडब्लूडी विभाग ने इस सड़क के निर्माण में लगे ठेकेदार को कोई नसीहत नहीं दी है इसलिए अब इस सारे प्रकरण की शिकायत सीटीई से की जाएगी और यदि वहां भी इन्साफ  न मिला तो कोर्ट की शरण ली जाएगी लेकिन ऐसे ठेकेदारों को सबक सिखाकर ही दम लेंगे। 

24 August, 2011

कैदी ने काटा अपना गुप्तांग

कटनी 
झिझरी उपजेल में बुधवार सुबह एक कैदी द्वारा अपना गुप्तांग काटने के मामला सामने आया है. जिला अस्पताल में कैदी का ईलाज किया जा रहा है
इस सम्बन्ध में प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह सवा छेह बजे के लगभग एक विचाराधीन कैदी 30 वर्षीय पहले ही तनावग्रस्त  सोनेलाल कोल की नजर नाली में पड़े ब्लेड के टुकड़े पर पडी. उसने उक्त धारदार ब्लेड का टुकड़ा उठाकर अचानक अपना गुप्तांग काट लिया, सोनेलाल लहूलुहान हो गया.
तुरंत ही जेल में तैनात पुलिस के जवान उसे लेकर जिला अस्पताल आये. शल्य क्रिया के बाद उक्त कैदी को अस्पताल में भारती कराया गया. अमरैया पार कैमोर निवासी सोनेलाल वल्द तुल्सीकोल नामक उक्त विचाराधीन कैदी धरा 379 , 380 , 25 आर्म्स धारा का वारंटी था. जिसे आठ माह पूर्व गिरफ्तार किया गया था. उसकी पत्नी अपने प्रेमी के साथ भाग गई थी. जिसके बाद से वह तनावग्रस्त हालत में था.

23 August, 2011

गाँव-गाँव शहर-शहर अन्ना की लहर

कटनी
अन्ना हजारे समर्थन मंच द्वारा पोस्ट आफिस तिराहा स्थल पर विगत दिनों अन्ना के समर्थन में धरना का आयोजन किया गया. राष्ट्र प्रेमी जानो ने नगर के सभी सामाजिक कार्य कर्ताओं के साथ मिलकर धरना आयोजित किया गया. इस धरने में हजारो में हजारो की तादाद में नगर एवं आसपास के ग्रामीण भी शामिल हुए.
अखिलेश उपाध्याय के सयोजन में यह धरना रखा गया. बच्चो से लेकर बुजुर्ग तक हाथ में झंडा लेकर अन्ना के समर्थन में नारे लगा रहे थे. जाती-पाती से परे हटकर हर सप्रदाय के लोगो नेजन लोकपाल के समर्थन में अपनी भागीदारी की