29 September, 2011

आयरन और माफिया पर कसा शिकंजा

आयरन और माफिया पर कसा शिकंजा
अखिलेश उपाध्याय/कटनी 
कटनी जिले में माइनिंग उत्खनन में चल रहे खेल में जिले से लेकर प्रदेश स्टार के अधिकारी ओर राज नेता की मिली भगत है तभी तो यहाँ खुले आम नियमो की अवहेलना करके गैरकानूनी ढंग से उत्खनन किया जा रहा है  क्षमता से अधिक उत्खनन के चलते दो महीने पहले ही बंद कराई जा चुकी  जबलपुर जिले की 27  खदानों के बाद अब तक संचालित एक मात्र झीटी में चल रही माइंस पर कार्रवाई की गाज गिरना तय माना जा रहा है.  पेसिफिक एक्सपोर्ट्स बरगवा कटनी के नाम से स्वीकृत आयरन ओर माइंस  में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायत के बाद बीते बुधवार को जबलपुर व भोपाल के खनिज अधिकारियो ने दबिश देते हुए न केवल कई गंभीर अनियमितताए उजागर की बल्कि निजी भूमि पर 25  हजार तन पड़ा आयरन ओर भी बरामद दिया जो डंडी स्टेसन पर विशाखापत्तनम भेजे जाने के लिए रखा था. 
झीटी की माइंस कटनी के व्यवसाई जे पी अग्रवाल व प्रदीप  मित्तल द्वारा संचालित की जा रही है जिन पर देश व प्रदेश के कई दिग्गज हस्तियों का वरदहस्त है.

कटनी जिले की ढीमरखेडा  तहसील की सीमा से लगे सिहोरा तहसील के ग्राम झीटी के खसरा नंबर 412  ने करीब 26  हेक्टेयर क्षेत्र में पेसिफिक एक्सपोर्ट्स बरगवा कटनी के नाम से स्वीकृत आयरन ओर माईन्स में चल रहे गडबडझाले की शिकायतों व ग्रामीणों की आपत्ति तथा विधानसभा प्रश्नों की जाँच के मद्देनजर मध्य  प्रदेश शासन खनिज साधन विभाग मंत्रालय  भोपाल ने आदेश क्रमांक 16 -01 /11 /12 /1  दिनांक 21 .2 .11  के माध्यम से कार्यपालक संचालक खनिज निगम एस के मंडल के नेतृत्व में सात सदस्यीय उच्च स्तरीय जाँच दल का गठन किया था. समिति द्वारा की गई जाँच में भारी अनियमितता पायी गई व उत्खनन पर रोक की अनुशंसा करते हुए 28  जून 2011  को जाँच रिपोर्ट सचिव खनिज साधन विभाग को सौप दी गई जिसके बाद से यह रिपोर्ट धूल खा रही है. ऐसा लगती है सरकार अपने द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट अमल करने से परहेज कर रही है. लिहाजा फ़ाइल बस्ते में बंद है और उत्खनन दिन रात जारी है.

पेसिफिक  एक्सपोर्ट्स द्वारा 80 , 640  मीट्रिक टन का माइनिंग प्लान अनुमोदित कराया गया था लेकिन अक्टूबर 2010  से अप्रेल 11  तक महज 7  माह में 11  लाख 96  हजार मीट्रिक टन आयरन ओर का उत्खनन किया गया. वन एवं पर्यावरण सरक्षण हेतु ईआईऐ नोटीफिकेसन एवं 2006  के उल्लघन  के कारण पुनरीक्षित मात्रा के लिए पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त होने तक उत्खनन व परिवहन स्थगित रखने की अनुशंसा जाँच दल ने की है. साथ ही खनिज अधकारी जबलपुर की भूमिका  पर भी सवाल उठाये गए है. रिपोर्ट में कहा गया है की पेसिफिक  एक्सपोर्ट्स को मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति मिलने के पुर्व  ही खनिज अधिकारी ने पिटपास जारी कर दिए.
रिपोर्ट के मुताबिक 1  जून 2010  को भारतीय खान ब्यूरो ने लीज होल्डर के मूल प्लान के मुताबिक 4  लाख 2 हजार 128  मीट्रिक टन का रिजर्व दर्शाकर 80 ,640  टन प्रतिवर्ष का प्लान अनुमोदित किया लेकिन अचानक खनिज रिजर्व 33  गुना 1  करोड़ 23  लाख टन दर्शाकर पेसिफिक एक्सपोर्ट्स ने पुनरीक्षित प्लान प्रस्तुत कर 27  लाख टन प्रतिवर्ष की अनुमति चाही.
 इतनी विसंगतियों के बावजूद आईबीएम ने माइनिंग प्लान को अनुमोदित कर दिया जबकि पुनरीक्षित माइनिंग प्लान के लिए पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त नहीं की गई. पुनरीक्षित मात्रा के लिए स्टाम्प ड्यूटी व पंजीयन शुल्क का पुनर्निर्धारण किया जाना था जो अभी तक नहीं किया गया. जिससे शासन को राजस्व क्षति हुई सचिव मध्य प्रदेश शासन खनिज साधन विभाग द्वारा कलेक्टर को जारी निर्देश के तहत स्वीकृत से अधिक क्षमता का उत्खनन करने वाली जबलपुर जिले की लगभग 27  खदाने बंद हो चुकी है. किन्तु पेसिफिक झीटी पर प्रशासन की मेहरवानी बरस रही है.
वन विभाग की आपत्ति को भी किया दरकिनार
सिहोरा तहसील अंतर्गत ग्राम झीटी में संचालित माइंस को अस्सी हजार मीट्रिक टन वार्षिक उत्खनन की अनुमति प्रदान के गई थी लेकिन माइंस संचालक द्वारा केवल छेह माह में ही बारह लाख टन आयरन ओर का उत्खनन करा लिया गया. इतना ही नहीं माइंस स्वीकृत होने के पूर्व ही  माइंस संचालको के हाथ में पिट पास आ गए थे. माइंस संचालको द्वारा शासन को 52  ग्रेड की दर से 48  रूपये प्रति टन की रायल्टी चुकाई जा रही जबकि निकला जा रहा आयरन और 58  से 62  प्रतिशत ग्रेड वाला है जिसकी रताक्ती  78  रुप्ये प्रति टन बंटी है. इस तरह रायल्टी चोरी की जा रही है. इसके अलावा वन सरंक्षक जबलपुर द्वारा चिन्हित की गई वन भूमि में खुलेआम नियमो को ताक पर रखकर उत्खनन कराया जा रहा है ओर वन विभाग की आपत्ति को भी दरकिनार कर दिया गया है.

28 September, 2011

कलेक्टर ने टोपी पहनने से किया इनकार

नहीं मिली टोपी पहनाने  की अनुमति
धरने पर बैठे इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्य 
अखिलेश उपाध्याय / कटनी 

इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्यों द्वारा भ्रष्टाचार के विरोध में स्टेशन चौराहे से  एक रैली कलेक्ट्रेट के  लिए निकाली गई. इंडिया अगेंस्ट करप्शन ग्रुप के लोगो ने जब कलेक्ट्रेट में विभाग प्रमुखों को टोपी पहनाने की ईजाजत मांगी तो उन्हें ओमती  नहीं मिली . कलेक्टर एम् सेल्वेंद्रण ने भी टोपी पहनने से इंकार कर दिया. इधर टोपी पहनाने आये इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्य इस बात से बिफर पड़े और कलेक्ट्रेट द्वारा  पर धरने पर बैठ गए. हलाकि यह गाँधीटोपी  गाँधीवादी तरीके से आन्दोलन का रास्ता सिखाती है लेकिन फौरी तौर पर इंडिया अगेंस्ट करप्शन के लोग काफी आक्रोशित दिख रहे थे.

क्या है मामला
टोपी का यह मामला दरअसल तब शुरू हुआ तब कलेक्टर से मिलने इंडिया अगेंस्ट करप्शन ग्रुप के लोग पहुचे इन लोगो ने पहले तो  यहाँ एक ज्ञापन दिया आठ ही कलेक्टर को टोपी भी भेट की जिसे उन्होंने लेने से इनकार कर दिया. यही नहीं इंडिया अगेंस्ट करप्शन ग्रुप के सदस्य धरने पर बैठ गए.


नहीं दी जा सकती अनुमति 
इस मसले पर कलेक्टर एम् सेल्वेंद्रण ने कहा की ग्रुप के कुछ लोग उनसे मिलने आये थे. ग्रुप के सदस्य विभाग प्रमुखों को टोपी भेट करना चाहते थे. लेकिन सरकारी नियमो के कारण इस तरह की अनुमति नही दी जा सकती. सदस्यों को बताया गया की विभागों में अधिकारी से मिलने अथवा बात करने या ज्ञापन देने पर कोई पाबन्दी नहीं लेकिन टोपी आदि भेट कर्णकरने  की अनुमति नहीं दी जा सकती.

अवैध उत्खनन पर शिकंजा

अवैध उत्खनन पर शिकंजा
प्रशासन ने नहीं दी खनिज विभाग को छापामारी की जानकारी 
अखिलेश उपाध्याय / कटनी 

कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर छापामारी करते हुए अधिकारियो ने शनिवार के रात चका  के पास एक खदान से तीन जे सी बी मशीन, दो ट्रक, आठ मोटरसाईकिले  जब्त की है. इसके साथ ही उत्खनन कर रहे लगभग एक दर्जन मजदूरों को हिरासत  में लिया है. आरोप है की यहाँ पर अनाधिकृत रूप से उत्खनन किया जा रहा था.

कार्रवाई के समय मौके पर लगभग एक सैकड़ा लोग मोजूद  थे जो अँधेरे का फायदा उठा कर भागने में कामयाब रहे. फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है की उत्खनन कौन  करा था. कार्रवाही  को लेकर प्रशासन ने पूरी गोपनीयता भी बरती थी. इसकी सूचना न तो खनिज विभाग क दी गई और न ही शहर के तीनो थानों को भनक लगी.. पुलिस लाइन में पदस्थ अधिकारियो  को योजनाबद्ध तरीके से देर रात बुलाया गया और निजी गाडियों से उत्खनन स्थल  पर छापामारी  के निर्देश दिए गए. कार्रवाई पूरी होने के बाद खनिज विभाग को आगे की जाँच का जिम्मा सौपा गया है.

छापामार दल में शामिल अधिकारियो ने बताया की यहाँ पर अवैध रूप से आयरन ओर का उत्खनन किये जाने की जानकारी लम्बे समय से मिल रही थी. छापामारी को सफल बनाने के लिए पहले स्थल के सम्बन्ध मेपूरी जानकारी  एकत्र की गई थी. मुख्य आरोपियों को पकड़ने की फुलप्रूफ योजना बनाई गई थी लेकिन वे भागने में सफल रहे.

 दल ने स्थल से तीन जे सी बी मशीन सहित ट्रक क्रमांक 21  एच  0460 , ट्रक एम् पि 21  एच 0599  व आठ मोटर साइकिले बरामद की है. पकडे गए मजदूरों  ने बतया की उन्हें दैनिक मजदूरी के आधार पर काम में लगाया था. जाँच में  जुटे विभागीय  अधिकारियो ने मामलो की गंभीरता को देखते हुए जाँच शुरू कर दी है. 

जिला प्रशासन द्वारा देर रात छापमाई की  गई. छापामारी में पकडे गए वाहनों व आरोपियों के बयान दर्ज कर मामले की जाँच की जा रही है. अभी तक उत्खनन करने वालो का पता नहीं लग पाया है. जाँच के बाद ही सरे तथ्य सामने आ सकेगे.   - जे के सोलंकी, खनिज अधिकारी, कटनी 

काफी समय से अवैध उत्खनन की सूचना मिल रही थी. पहले भी पकड़ने के प्रयास किये गए थे लेकिन किन्ही कारणों से सफलता नहीं मिल रही थी. उत्खनन स्थल से मिले वाहनों को जब्त कर प्रकरण की जाँच कराई जा रही है  - एम् शेल्वेंद्रण नामदेव, कलेक्टर कटनी 


रेल में बढ़ रही वारदातों से यात्रियों में दहशत

रेल में बढ़ रही वारदातों से यात्रियों में  दहशत 

अखिलेश उपाध्याय 
कटनी 

सुरक्षित यात्रा कराना रेल प्रशासन के लिए अब टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. आये दिन कही यात्री चोरी का शिकार होते है  तो कही जहरखुरानी का. लगातार बढ़ती जा रही वारदातों से न सिर्फ रेलवे की साख गिरती जा रही है बल्कि यात्रियों के जहन में भी रेल में यात्रा के दौरान दहशत का माहौल बना रहता है. इन दिनों  बढ़ रही जहरखुरानी की वारदाते आर पी ऍफ़ सहित जी आर पी तक के लिए चिंता  का विषय बनी हुई है.

रेलवे प्रशासन जहरखुरानी से  बचने  के लिए हर प्लेटफार्म पर लगातार यात्रियों ko  आगाह करने के लिए  उद्घोषणा के माध्यम से सचेत करता है की किसी भी अनजान व्यक्ति से किसी प्रकार का खाने का सामन न ले. बावजूद इसके यात्री अनजान यात्रियों  का आसानी से विश्वास कर लेता है. खाने पीने की वस्तुए लेकर खाता है  और जहरखुरानी का शिकार हो जाता है.

अभी हाल ही में लगातार घटी इन घटनाओं ने रेल प्रशासन की नीद हराम कर रखी है आईये जाने कैसे और क्या हुआ यात्रियों के साथ


केश नंबर एक 


19  अगस्त को रीठी के कछारखेरा  गाँव के निवासी प्रशांत परोहा अपनी  बहन  को लेकर रेवांचल एक्सप्रेस से भोपाल जा रहे थे. उनके सहयात्री ने उनसे मित्रता बढाई और फिर सागर में काफी पिलाई. वह दोनों भाई बहन को काफी पिलाने की जिद कर रहा था लेकिन बहन नित्या ने काफी पीने से मना कर दिया. यह सब रात चार बजे हुआ. उसके बाद नित्या अपनी ऊपर वाली बर्थ पर सो गयी और जब वह भोपाल में जागी तो अपने भाई को नीचे वाली बर्थ पर बेसुध पाया. पहले तो उसने सोचा की  वह सो रहा है. लेकिन बहुत जगाने के बाद भी जब वह नहीं जगा तो फिर जी आर पी की मदद से उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया जहा गहन ईलाज के बाद बीस घंटे के बाद प्रशांत  को होश आया.
यहाँ भी चोर मोबाइल, पर्ष, पांच हजार रूपये, ऐ टी एम् लेकर भाग गया.



केश नंबर दो 


जौनपुर निवासी विजय प्रजापति भुसावल पैसेंजर से 22  सितम्बर को भुसावल से कटनी तक की यात्रा कर रहा था. इसी दौरान उससे ट्रेन  में दो यात्रियों ने जान-पहचान बढाई और किसी स्टेशन में  चाय लाकर पिलाई. चाय पीने के बाद से वह बेहोश हो गया. भुसावल ट्रेन चौपन की ओर जा रही थी तब वह बेहोशी की हालत में एन के जे ट्रेक पर गिर गया उसे ऑटो चालको ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहा पर उसने होश  आने के बाद अपने साथ हुई जहारखुरानी की जानकारी जी आर पी को दी. उसने बताया की चाय पीने के बाद वह बेहोश हुआ और  उसके करीब चार हजार रूपये चोरी हो गए.


केश नंबर तीन 


21  सितम्बर को गोंडवाना एक्सप्रेस के जनरल कोच में हजरत निजामुद्दीन  से झासी तक की  यात्रा कर रहे टीकमगढ़ जिले के हरपुरा गाँव के निवासीभैया लाल लोधी व उसका साथी अर्धबेहोशी की हालत में जबलपुर स्टेशन में उतारे गए जहा से कटनी आकर जी आर पि को जानकारी दी. यात्रियों ने बताया की पलवल स्टेशन से उनकी बोगी में दो यात्री चढ़े थे. धीरे-धीरे जान पहचान बढाई और चाय पिला दी, उसके बाद वे दोनों बेहोश हो गए. उनके पास  करीब 29  हजार रूपये थे जो की चोर ले गए.

केश नंबर चार 
छत्तीसगढ़ के सरगुजा निवासी छबिनाथ पिता तिलकराम 12  सितम्बर को दयोदय एक्सप्रेस  के जनरल कोच में जयपुर से कटनी की यात्रा कर रहे थे. सफ़र के दौरान ही उनके मुह के सामने तीन-चार बार कपडा हिलाया गया जिसके बाद वे बेहोश हो गए. ट्रेन के कटनी पहुचने पर उहे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. उनके पास 15  हजार रूपये थे जो चोरो ने पार कर दिए.




कुछ इस तरह से होती है वारदात


ट्रेनों में जहरखुरानी  का शिकार करने वाला गिरोह सबसे पहले यह तय करता है किसे शिकार बनाना है फिर उसी यात्री के आस-पास बैठकर उसके बोलचाल को देखर उसी के जैसा व्यवहार करने लगते है. धीरे-धीरे यात्री को विशवास हो जाने के बाद चाय या फिर बिस्किट खिलाई जाती है. यात्री भी विशवास में आकर बिस्किट या चाय ले लेता है इसके बाद वह बेहोश होने लगता है. चाय व बिस्किट के अलावा सेव में इंजेक्शन के माध्यम से बेहोशी का रसायन डालकर रूमाल सुंघा कर भी जहरखुरानी की वारदातों को अंजाम दिया जाता है.

इनका कहना है - 


रेल पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में विशेष स्क्वाड का गठन किया गया है. साथ ही गोपनीय जाँच की जा रही है. प्लेटफार्म व ट्रेनों में गश्त बढाई गई है.
                                               - अजीत सिंह बघेल, टी आई जी आर पी 

ट्रेनों में बढ़ रही जहरखुरानी को बारदातो के मद्देनजर सुरक्षा व्यस्था बढाई गई. इसमें बगैर बर्दी के जवान ट्रेनों व स्टेशन में निगाह  रख रहे है. प्रभावित ट्रेनों में गश्त बधाई गई है . डाग स्क्वाड से चेकिंग कराई जा रही है. जनरल  कोच में विडियोग्राफी कराई जाती है ताकि वारदात के बाद आरोपी को पकड़ने में मदद मिल सके साथ ही स्टेशन में ट्रेन आने के दौरान उद्घोषणा भी कराई जाती है की अनजान व्यक्ति से खाने -पीने का सामान न ले.
                                           - संदीप सिंह ठाकुर, रेल सुरक्षा प्रभारी 


जहरखुरानी के सम्बन्ध में टीम का गठन किया जा रहा है. बहुत जल्द टीम का गठन होगा. हलाकि इस तरह की घटनाओं के मामले राजकीय रेल पुलिस  (जी आर पी) थानों में दर्ज होते है लेकिन आर पी ऍफ़ भी मामलो की जाँच कर रोकने का प्रयास करती है
                                            - प्रवीण सिंह गहलोत, इन्स्पेक्टर यात्री सुरक्षा 



पंचायती राज व्यस्था के असफल होने का जीता जागता उदहारण

जब बाराती   कोल जनपद पंचायत सदस्य रीठी के रैपुरा से दो वर्षो पूर्व चुना  गया  तो उसे बड़ी उम्मीदे  थी की अब वह अपना  तथा अपने क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा. अभी साइकिल पंचर की दूकान चलाकर अपना उदर-पोषण कर रहे बाराती कोल को अब अपने क्षेत्र में अपने मतदाताओं से किये गए वादे निभा पाना बड़ा कठिन है.
मुंडी बाई 

मुंडी बाई का घर एवं बच्चे 

बाराती कोल अपने घर में 

मुंडी बाई  का घर 
दूसरी बार  जनपद सदस्य बनने के बाद बाराती को क्षेत्र के लोगो ने फूल माला  पहनाकर स्वागत किया था और उसे रीठी  से अपने गाँव तक लेकर आये थे.


सदस्य बनने के बाद वह प्रतिदिन रीठी जनपद कार्यालय जो उसके घर से बीस किलोमीटर दूर है जाता था और अपने क्षेत्र में विकास के लिए जनपद सी ई ओ से गिडगिडाता  रहा.


उसने जनपद में होने वाली सभी मीटिंग में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जो की जनपद सी ई ओ रीठी ने ली. बाराती ने बताया की मैंने अपने क्षेत्र के लोगो की मागो के लिए जनपद से लेकर जिला सी ई ओ तथा कलेक्टर तक दौड़ लगाईं लेकिन कोई फायदा न हुआ.


बाराती कोल अपनी साईकिल दुकान पर 
लगातार दो वर्षो से इस क्षेत्र से जनपद सदस्य चुनने के बाद इस आदिवासी सदस्य को दुःख है की वह अपने क्षेत्र में आज तक कोई काम न करा सका. जबकि बाराती को जनपद सदस्य बनने के बाद केवल बारह सौ रूपये का मासिक मानदेय मिलता है जिसे वह  जनता की सभी समस्याओं के लिए जनपद से लेकर जिला तक दौड़ लगाने में खर्च कर देता है . लेकिन वह कहता है की रीठी  जनपद जाने का मतलब सौ रूपये का खर्च बस के किराए  और चाय नाश्ते में ही खर्च हो जाता है.

पंचर सुधारते हु बाराती 
अपने खपरैल घर में रहे रहे बाराती कोल को अब पंचायती राज व्यवस्था से मोह भंग हो चूका है . दो बच्चो के पिता ने बताया की वह प्रतिदिन सौ रूपये अपनी साइकिल पंचर की दूकान से अपने परिवार के उदर पोषण के लिए कमा  लेता है.

अपने चुनाव जीतने के लिए बाराती ने अपने रिश्तेदारों से कर्ज लिया था जिसे वह आज तक चूका  रहा है. जब लोग उससे क्षेत्र में विकास कराने की बात करते है तो वह कहता है की आप जनपद सी ई ओ से  संपर्क करे जो अपनी मन मर्जी से काम करने के लिए जाने जाते है और उनकी कोई बात नहीं सुनते है .

आज सबको पता है की पंचायती राज सिस्टम एक छलावा है, बराती ने कहा, यह तो केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए है जो हर एक काम सेंक्सन करने के लिए कमीशन लेते है. इनका फिक्स कमीशन होता है बगैर कमीशन के कोई काम ही नहीं होते.

बाराती ने बताया की वह अपनी दो एकड़ खेती से घर चलाता है और अपने मतदाताओ से संपर्क में रहता है क्योकि उसके अधिकांस मतदाता साइकिल का प्रयोग करते है.

इसी प्रकार मुंडी बाई कोल जो की बाराती  के साथ ही जनपद सदस्य चुनी गयी अब वह भी इस तंत्र से तंग आ चुकी है. आदिवासी महिला इन दिनों रैपुरा के पास बनने वाली एक चिमनी फेक्टरी में दिहाड़ी का काम कर रही है मुंडी को लगता है की वह जनपद की कोई भी मीटिंग में न जाए क्योकि इन मीटिंग का कोई भी अर्थ नहीं निकलता है.

मुंडी बाई ने बताया की उसके पास स्वयं का घर भी नहीं है और न ही खेती है. मुंडीबाई ने बताया की  यदि मै और मेरा पति एक  हफ्ता तक काम न करे तो फिर हमें रोटी के लाले पड़ जाते है. मुंडी बाई का पति कटनी में मिस्त्री  के रूप में मजदूरी करता है.  कमाल की बात तो यह है  इस जनपद सदस्य का आज तक बी पी एल का कार्ड भी नहीं बनाया गया जबकि उसने कई बार आवेदन दिया.

बाराती की तरह मुंडी बाई भी अपने जनपद सदस्य के पद से संतुष्ट नहीं है. मुंडी बाई ने कहा की मै पंचायती राज व्यस्था के जमीनी स्तर पर असफल होने का जीता जागता उदहारण हूँ .

27 September, 2011

प्रवीण तिवारी का निधन

कटनी 
रीठी जनपद के ग्राम तिलगवा निवासी पंचायत सचिव प्रवीण तिवारी का जबलपुर के अस्पताल में ईलाज के दौरान गत दिवस निधन  हो गया. उनके निधन के समाचार से तिलागावा व आसपास के ग्रामीण अंचल सहित कटनी में भी शोक व्याप्त हो गया. 


श्री तिवारी तिलगवा के प्रतिष्ठित पूर्व  सरपंच ब्रह्मदत्त तिवारी के सुपुत्र थे. उनकी अन्त्येष्टी गृह ग्राम में हुई.

26 September, 2011

अतिउत्साही प्रेस अधिकारी ने सी एम् का पी आर बिगाड़ दिया


26  सितम्बर की शाम को मध्य प्रदेश के गवर्नर के सम्मान में भोज हुआ. इस सरकारी भोज में आमंत्रित अधिकारी, मंत्री और चुनिन्दा  बीस पत्रकारों को ही बुलाया गया .

सी एम् के यहाँ नव नियुक्त प्रेस अधिकारी जो सयुंक्त संचालक के पद पर काम कर रहे है, ने भोपाल के केवल बीस पत्रकारों को बुलाकर बाकी के श्रेष्ठ और जयेष्ट पत्रकारों की लोबी को अप्रसन्न किया है 
ऐसा लगता है प्रदेश सरकार में अबके प्रेस सलाहकार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह उन्हें ले डूबेगे जो चुनिन्दा संपादको से प्रेस वार्ता  के बाद बेकफुट पर आ गए. 
भूपेन्द्र गौतम जो पहले इंदौर में पदस्थ थे वे  मुख्यमंत्री के नजदीक आने के हर तरह के हथकंडे पहले से ही अपनाते रहे है पूर्व में  जहा वे पदस्थ थे वहा  भी  सी एम् की खबरों वाले अखबारों को सी एम् को दिखाने  से नहीं चूकते थे. अंततः अपनी चाटुकारिता के चलते वे सी एम् कार्यालय पहुच ही  गए. 
अब लगता है वे शिवराज सिंह को ले डूबेगे...?
भूपेन्द्र गौतम कार्यक्रमों  में सी एम् से अपनी नजदीकिया दिखाने के लिए जानबूझकर बार-बार कान में जाकर कुछ कहते है. दरअसल वह भीड़ को यह बताना चाहते है की मुख्यमंत्री के एक मात्र वही नजदीक  है. उनकी इस हरकत से समूचा सचिवालय और जनसंपर्क परेशान है.
इनको न तो समाचारों की समझ है और न ही भोपाल के  पत्रकारों की पहचान. मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री  का जनसंपर्क कार्यालय कुछ इसी गैरजिम्मेदार अंदाज में इस समय चलाया जा रहा है. 
अगर राकेश श्रीवास्तव की बात करे तो वे भी उद्योग  विभाग में उद्यमिता करके  आई ऐ एस बने है और  इसके पहले इन्दोर कलेक्टर रहे
इन्ही दोनों ने मिलकर भोपाल के बीस पत्रकारों की सूची बनायी और प्रमुख पत्रकारों को छोड़   दिया. 
इस कार्यक्रम में बड़े पत्रकारों के अलावा बड़े वाले पत्रकारों को ही बुलाया गया.
पत्रकारों के साथ इस भेदभाव से उनमे असंतोष है. जब सी पी आर महोदय से फ़ोन पर बात करने की कोशिश की गयी तो वे अपना मोबाइल स्विच आफ किये हुए थे. 
इस सम्बन्ध में एक पत्रकार  ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी माँगी है जिसमे निम्न सवाल पूछे गए है -
1  राज्यपाल महोदय के सम्मान में आयोजित भोज में कुल  कितने लोगो को आमंत्रण दिया गया और इसमें कितने लोग  पहुचे ?
2   भोपाल के पत्रकारों की सूची किसने तय की ?
3    इस कार्यक्रम में कुल कितना खर्च हुआ ?
अमूमन अब तक की परंपरा में सभी श्रेष्ठ पत्रकारों को बुलाया जाता रहा है जबकि इसमें टाईम्स आफ इंडिया और दैनिक भास्कर जैसे समूह के पत्रकारों  और अन्य  बड़े बेनर के खबरचियो को भी नहीं बुलाया गया.
 अब जब प्रश्न उठ रहे है तो जनसंपर्क कमिश्नर फिर मुह लुकाते क्यों घूम रहे है ?
असल में भूपेन्द्र गौतम नाम के व्यक्ति को पता ही नहीं है की भोपाल में कितने पत्रकार है और किसे तवज्जो देना चाहिए किसे नहीं.
 ऐसे में फिर ख़ाक मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री का पी आर बनेगा ...? सी एम् के प्रेस अधिकारी पी आर बनाने की जगह बिगाड़ने पर तुले है और राज्यपाल के सम्मान में दिए गए इस भोज से आक्रोशित पत्रकार अगर अपनी पर आ गए तो शिवराज सरकार के लिए बहुत भारी पड़ेगा.

21 September, 2011

ईनीनियरिंग के छात्र ने किया रोजगार गारंटी में काम !!!

 महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण अंचलो में पलायन रोकने और रोजगार प्रदान कराने का एक अनूठा कार्यक्रम है. विश्व के किसी भी देश में इस तरह की अभिनव योजना को आज तक लागू नहीं किया गया है.  लेकिन  इसका लाभ वास्तव में जिन गरीबो को मिलना चाहिए क्या उन्हें मिल पा रहा है, यह एक बड़ा सवाल है.

मनरेगा योजना से अब लोगो का मोह भंग हो चुका है उसका मुख्य कारण  इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार है. कटनी जिले में इस योजना में तो जमकर चूना लगाया जा रहा है यदि कोई लाभान्वित हो रहा है तो वह है सरपंच और सचिव. जो कभी साइकिल पर चलते थे वे आज चार पहिये में चल रहे है इनकी आय से अधिक संपत्ति का व्योरा लेने वाला न तो कोई जनप्रतिनिधि है और न ही जनता.

बुधवार  को रीठी में आयोजित रोजगार गारंटी योजना समस्या निवारण शिविर एक असफल कार्यक्रम रहा जिसमे जनता की मौजूदगी बिलकुल नहीं थी क्योकी  इस शिविर के बारे में कोई भी प्रचार प्रसार नहीं किया गया था.
 फिर भी खानापूर्ति के लिए लगाए गए इस शिविर में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला आया  जिसमे अधिकारी कर्मचारी बगले झाकते नजर आये. ग्राम पंचायत घनिया के प्रशांत परोहा ने आपने आवेदन में  जो सवाल पूछे उसपर कोई भी अधिकारी संतोषप्रद उत्तर न दे सके.


प्रशांत परोहा निवासी ग्राम कछार खेडा   पंचायत घनिया ने अपने आवेदन में उनके तथा उनके परिवार के लोगो के नाम से रोजगार गारंटी योजना में कार्य दर्शाकर तत्कालीन सरपंच, सचिव द्वारा राशि के आहरण का आरोप लगाया.
आवेदक ने अपनी शिकायत की पुष्टि में नेट से निकाले दस्तावेज भी सलग्न किये थे.


इन दस्तावेजो में कुछ इस प्रकार से राशी निकालने का विवरण था

प्रशांत परोहा की माँ शशि परोहा जो शिक्षा गारंटी शाला कछार खेडा  में अध्यापन कार्य कर रही थी उनके नाम से 9  दिनों के मजदूरी, प्रशांत की बहन हर्षिता  जो इस समय ईन्जीनीयरिंग कर रही है को भी 9  दिन, स्वयं प्रशांत के नाम से 11  दिनों की मजदूरी की राशी निकाली गयी है जबकि वर्ष 2008  में प्रशांत जबलपुर में खालसा ईन्जीनीयरिंग कालेज का छात्र  था. 


गौरतलब है की परोहा परिवार को आज तक जाब कार्ड नहीं दिया गया है और न ही उनके परिवार ने कभी भी पंचायत से काम की मांग की. फिर भी उनके नाम से विधिवत राशी का  आहरण कर लिया गया.


 प्रशांत का कहना है की उपस्थित अधिकारी कर्मचारियों ने जो मस्टररोल की प्रतिया दिखाई वे अधूरी थी.


 शिविर में उपस्थित कर्मचारी बरगलाते रहे और नेट की जानकारी को  गलत फीडिंग दर्शा रहे थे.. जबकि आवेदक  का कहना है की आज सारी दुनिया नेट पर निर्भर है, आनलाइन सारा काम हो  रहा है और नेट से विद्यार्थियों की मार्कशीट भी स्वीकार की जा रही है तो फिर मनरेगा की फीडिंग को कैसे  गलत बता रहे  है. 


और यदि यह जानकारी गलत है तो फिर नेट पर फीडिंग करने वाले  कर्मचारी को उसके परिवार के नाम कैसे पता चल गए...?


प्रशांत ने बताया की उसकी पंचायत  के ऐसे सैकड़ो नाम है जिनने कभी काम नहीं किया और उनके नाम से  भी पैसा  निकाला गया है. इसके पहले भी प्रशांत ने दिसंबर 2009 को मनरेगा के वेबसाईट पर आनलाइन शिकायत करी थी और इस सम्बन्ध में कटनी  कलेक्टर शेल्वेंद्रण व जिला पंचायत सी ई ओ शशि भूषण सिंह से मिला  था तथा इन जिम्मेदार अधिकारियों ने उसे आश्वाशन दिया था लेकिन बड़े आश्चर्य की बात है की   अठारह माह के  बाद भी  इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.


जिले की प्रशासनिक व्यस्था से छुब्ध प्रशांत ने कहा की अगर अब भी उसे न्याय न मिला तो वह जनता को जागरूक करेगा और रोजगार गारंटी में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ जन आन्दोलन भी करेगा.


 फिलहाल उसने जनहित याचिका लगाने का  मन बना लिया है.


 केजरीवाल से प्रभावित प्रशांत ने कहा की एक पढ़े लिखे व्यक्ति को केजरीवाल बनने में जयादा समय नहीं लगेगा.
फिलहाल भरष्ट तंत्र से आक्रोशित  प्रशांत ने अंत में यही कहा...धन्य है कटनी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था...?

16 September, 2011

कुपोषण ने ली बच्चे की जान



सरकार द्वारा  कुपोषण समाप्त करने के लिए भले ही तरह तरह की योजनाये  चलाई जा रही हो  और देश की भावी पीढी को कुपोषण मुक्त करने प्रशासन द्वारा पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है लेकिन समस्या  जस की तस बनी हुई है.


कागजी आकड़ो के खेल में प्रशासन सरकार को भले ही गुमराह कर ले लेकिन कटनी जिले के ग्रामीण अंचलो में आज भी कुपोषण से बच्चो की मौते हो रही है और हमेशा की तरह ऐसे मामलो को हमेशा की तरह प्रशासन दबा देता है.


ऐसा ही एक मामला रीठी जनपद पंचायत के ग्राम हथकुरी का है जहा सुदामा साहू का 11 माह का बच्चा चन्दन कुपोषण के चलते मौत की नीद सो गया. और इस मामले को हमेशा की तरह रफा-दफा कर दिया गया. 


सूत्रों के मुताबिक सुदामा साहू का बच्चा चन्दन  पैदा होने के बाद से ही कुपोषण का शिकार  था. आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वह बच्चे का ईलाज कराने  में असमर्थ था. और इसी के चलते बच्चा चल बसा


इस सम्बन्ध में ग्रामीणों का कहना है की महिला बाल विकास द्वारा चलाये जा रहे  आगनवाडी  केंद्र में भी पोषण आहार की व्यस्था है लेकिन यहाँ का आगनवाडी केंद्र खुलता ही नहीं जाहिर है ऐसे में बच्चो के लिए आने वाला पोषण आहार भला बच्चो को कैसे मिल सकेगा.


रीठी महिला बाल विकास के इससे गैरजिम्मेवार तरीको के कारण यहाँ का पोषण आहार खुले आम दुकानों पर बेच दिया जाता है जिसे यहाँ दूध व्यवसायी उसे खरीदकर भेस को खिलाते है. पिछले दिनों इसी सम्बन्ध में रीठी थाने में एक शिकायत भी हुई थी लेकिन पुलिस ने ले दे कर मामला निबटा दिया था


कुपोषण से हुई मौत कई सवाल छोड़ गई ? क्या रीठी में चल रहे एन आर सी केंद्र में इन बच्चो की सूचना नहीं रही और अगर रहती है तो फिर उन्हें ईलाज के लिए भर्ती क्यों नहीं किया जाता . रीठी में चल रहे एन आर सी केंद्र में भी जमकर भ्रष्टाचार व्याप्त है. ऐसा पता चला है की यहँ बच्चो को आने वाले खर्च में फर्जी बिल लगाकर आहरण कर लिया जाता है. हमेशा दुगुने का बिल बना कर यहाँ भी लूट मची है.


गौरतलब है की जिला प्रशासन लाख दावे करे की वह कुपोषण ख़त्म करने के लिए बच्चो को ढूढ़ ढूढ़ कर ईलाज करवा रहा है लेकिन चन्दन की मौत ने उनके सारे दावे झूठे साबित कर दिए है. 

15 September, 2011

अब एम् डी एम् में देना होगा हिसाब


चाहे आगनवाडी केंद्र हो या फिर शैक्षणिक संस्थाए, सभी में बच्चो को पोषण देने के लिए बनी मध्यान्ह भोजन योजना लापरवाही की भेट चढ़ गयी है. ख़ास बात यह है की भोजन परोसने में भले ही दिखावा हो रहा हो लेकिन भुगतान के लिए हाजिरी देकर समूहों को लाभ पहुचाने में कसर नहीं छोडी जाती.


ग्रामीण क्षेत्र में मध्याह्न भोजन वितरण की जिमीदारी समूहों को सौपी गयी है. इनमे से अधिकांश समूह मानक के अनुरूप खान नहीं बनाते. बताया जाता है की कटनी जिले के छहों जनपदों के दर्जनों समूहों पर अनियमितताओं के आरोप लग चुके है. इसके बाद समूहों को केवल नोटिस देकर छोड़ दिया गया.


रिव्यू मिशन के अंतर्गत होने वाले समीक्षा में समूहों को दी जाने वाली राशी से लेकर बच्चो तक पहुचने वाले भोजन की गुणवत्ता भी परखी जायेगी. इसकी उचित निगरानी होने से समूहों की मनमानी पर लगाम लग सकेगी.


स्वशाहायत समूहों के लिए धन कमाने का साधन बनी मध्याह्न भोजन योजना में खर्चे की लगाम कसी जाने की खबरे आ रही है. केंद्र सरकार द्वारा करी जा रही विशेष मोनिटरिंग के दौरान सभी जिलो को भोजन पर खर्च होने वाली पाई-पाई का हिसाब बताना होगा. केंद्र द्वारा शुरू किये रिव्यू मिशन के अंतर्गत अगले कुछ दिनों में मोनिटरिंग टीम आने वाली है


गौरतलब है की केंद्र द्वारा शुरू किये गए रिव्यू मिशन के सम्बन्ध में निर्देश देने और एम् डी एम् की प्रगति जानने के लिए 5 और 6 सितम्बर को भोपाल में बैठक आयोजित की गई थी.


बैठक में मध्याह्न भोजन की प्रदेश प्रभारी जयश्री कियावत ने सभी जिलो के अधिकारियो को निर्देशित किया था की केंद्र शासन के निरीक्षण दल द्वारा सभी संभागीय  मुख्यालय पर जाकर  भोजन का औचक जायजा लिया जाएगा.


जिसमे दीवार पर मीनू लिखा है की नहीं, माताओं का रोस्टर और निरिक्षण पंजी, टोल फ्री नंबर का  अंकन, एम् डी एम् की राशी का आवंटन सही है की नहीं, भोजन बनाने वाले रसोईयों का चिन्हांकन आदि जानकारिया लीजायेगी.. कमिया पाए जाने पर भोजन वितरण करने वाले समूह को अयोग्य घोषित कर सम्बंधित अधिकारियो के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी.


कौन सी जानकारी मागी जायेगी
भारतीय खाद्य निगम को खाद्यान्न की लागत  राशी के भुगतान की अगस्त तक का हिसाब
1 अप्रेल 2010 से 31 मार्च 2011 तक का उपयोगिता प्रमाणपत्र
वर्तमान वित्त वर्ष में चिन्हाकित रसोईये और  उनको दी गई राशी का विवरण
डाईट द्वारा दिए गए मूल्यांकन की जानकारी
भोजन पकाने के लिए शालाओं को वितरति की गई लागत राशी का तिथिवार विवरण
एम् डी एम् प्रभारी  टास्क मेनेजर क्वालिटी   मोनिटारो द्वारा किये गए भ्रमण की जानकारी
प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में उपयोग किये गए खाद्यान्न की जानकारी

08 September, 2011

धमाके पर धमाके.


 देश का ऐसा कोई भाग नहीं जहा के लोग महफूज हो ...  और हमारी सरकार घायल और मरने वाले के परिवारवालों को मुआवजा देकर अपनी जवावदेही से मुक्त हो जाती है  और  फिर देश के गृह मंत्री और प्रधानमंत्री का रटारटाया बयान देता है ... जांच टीका गठन... और जांच कब और क्या आती है यह देश की जनता को नहीं बताया जाता या बताया भी जाता है तब तक लोग दाल-रोटी के चक्कर में सब कुछ भूल जाते है...

समाचार चेनलो और अखबारों में तीन चार  दिन की खबर... फिर सब ज्यो का त्यों चलने लगता है ... हमारे देश की सरकार को आम नागरिको  की बिलकुल  भी चिंता  नहीं है तभी तो उसे इस कामन मेन की जरा भी फ़िक्र नहीं है और सरकार की सेहत पर जरा सा भी फर्क नहीं पड़ता...

घायलों को अस्पताल देखने लाल बाती में देश के मंत्री नाटक करने क्यों पहुचते है? और इससे उस मरीज के परिजन ही परेशानी में पड़ जाते है जिन्हें घायल की तीमारदारी भी नहीं करने दी जाती....क्या मुआवजा और नकली दुःख व्यक्त करने से मृतक के परिवारवालों का दुःख बाटा जा सकता है...?
अखबारों में बड़े-बड़े लेख, टेलीविसन पर मातमी धुन, सोसल साईट्स फेसबुक, ट्विट्टर और आर्कुट पर अपनी संवेदना जताने तथा मोमबत्तिय   जलाने से क्या पीड़ित के परिवार का दुःख कम किया जा सकता है...
आज हमारी संवेदनाये मर गयी है. आज जो दुःख किसी मृतक के परिजनों पर आया है कल हम पर भी आ सकता है. इस देश में हम भी सुरक्षित नहीं है...

और हमारे नेता इसमें भी अपनी राजनैतिक रोटिय सेकते नजर आते है. विपक्ष को मौका मिल जाता है सरकार को घेरने का...
क्या कभी देश में हुए आतंकी हमले या धमाके का समाधान निकला है...? और अगर धोखे से कोई उग्रवादी पकड़ा भी जाता है तो क्या देश की जनता के खून की होली खेलने वालो को कभी सजा मिली और मिली भी तो कब और कितनी...?

देश की जनता कब तक और ऐसे धमाके झेलेगी ...? क्या भारतीयों की जान की कोई कीमत नहीं है जो चाहे जब भाजी मूली की तरह काट दिए जाते है.... आखिर यह कभी रुकेगा...?

07 September, 2011

प्रदेश में शुरू होगी एयर टैक्सी सेवा



भोपाल। मध्य प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए चल रही कोशिशों के बीच एयर-टैक्सी सेवा की शुरुआत होने जा रही है। भोपाल से पहली एयर टैक्सी सात सितम्बर को उड़ान भरेगी।

मध्य प्रदेश आने वाले पर्यटकों को राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा सुविधाएं दिलाने के मामले में पूरे देश में विशिष्ट पहचान बना चुका है। जल, थल तथा वायु के सभी क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के क्रम में प्रदेश में पहली बार एयर-टैक्सी की शुरुआत हो रही है।

पहले चरण में यह सेवा भोपाल-इंदौर, भोपाल-ग्वालियर, भोपाल-जबलपुर, इंदौर-ग्वालियर और इंदौर-जबलपुर के बीच शुरू होगी। इन शहरों के बीच सुबह और शाम को एयर-टैक्सी चलेंगी।

एयर-टैक्सी सेवा का शुभारम्भ 7 सितम्बर को राजा भोज विमान तल से होगा। पर्यटन विकास निगम का दावा है कि इस हवाई सेवा के प्रारम्भ होने के साथ ही देश के पर्यटन मानचित्र पर एयर-टैक्सी द्वारा आवागमन की सुविधा उपलब्‍ध करवाने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन जाएगा।

दूसरे चरण में ग्वालियर-जबलपुर के बीच में डेली लाइट चलेंगी, जिससे कुछ और पर्यटन-स्थल इस सेवा से जुड़ जाएंगे। इनमें सतना, खजुराहो, पचमढ़ी, वल्लभगढ़ और कान्हा शामिल हैं। 

कागजों में अटके सीसीटीवी कैमरे


 आतंकियों के निशाने पर चल रहे दिल्ली उच्च न्यायालय में आखिर कब सीसीटीवी कैमरे लगेंगे यह सोचनीय विषय है। हैरानी वाली बात यह है कि तीन वर्षो में इस काम की कागजी प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो पाई है, जबकि तीन महीने में इस कार्य के लिए टेंडर डालने की प्रक्रिया पूरी करनी थी। 

    कहना गलत न होगा कि आज अगर सीसीटीवी कैमरे लगे होते तो दहशतगर्द बुधवार को धमाका करने की न सोचते और अगर करते भी तो जांच एजेंसियां आसानी से उनके गिरेबां तक पहुंच जातीं। कुछ ऐसी ही बात 25 मई को उठी थी जब हाईकोर्ट गेट के बाहर बम धमाका हुआ था।

     पूरे मामले पर नजर डालें तो लगभग तीन वर्ष पहले दिल्ली हाईकोर्ट परिसर व उसके विभिन्न गेटों पर 32 सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर काम शुरू हुआ था। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कैमरे लगाने वाली कंपनियों के आपसी विवाद के चलते कैमरों के दामों पर सहमति नहीं बन पाई और तीन बार टेंडर निरस्त किए गए। 

    25 मई 2011 बम धमाके के बाद सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना में फिर तेजी आई लेकिन जून में दिल्ली पुलिस ने इस योजना पर काम कर रहे लोक निर्माण विभाग को बताया कि 32 की जगह 49 कैमरे लगाने की जरूरत है, जिस पर फिर नए सिरे से योजना पर काम शुरू हुआ। अब इस योजना पर लगभग 60 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। 
इस बाबत लोक निर्माण विभाग के निदेशक (कार्य)  कहते हैं कि सीसीटीवी कैमरे के लिए जून में टेंडर प्रक्रिया का काम पूरा हो गया था। मगर दिल्ली पुलिस ने 17 अतिरिक्त कैमरे लगाने की मांग रखी। जिस पर पूरी योजना पर नए सिरे से काम करना पड़ा है। योजना के अब फिर से टेंडर कॉल किए गए हैं। टेंडर की प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी चुकी है। नौ सितंबर को इसकी तकनीकी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

     दिल्ली बार काउंसिल के चेयरमैन का कहना है कि हमने हाईकोर्ट परिसर के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की थी परंतु अब तक दिल्ली पुलिस ने कुछ नहीं किया। उन्होने कहा कि हाईकोर्ट के बाहर और अंदर सुरक्षा देना पुलिस की जिम्मेदारी है। अगर गेट के पास ब्लास्ट हुआ है तो उसे भी हाईकोर्ट पर हुआ ब्लास्ट ही माना जाएगा। ऐसे में पुलिस यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकती है कि बाहर के हिस्से पर पुलिस का नियंत्रण नहीं है

संसद में गृहमंत्री ने कबूली चूक की बात

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि दिल्ली आतंकवादी गुटों के निशाने पर है। संसद के दोनों सदनों में बुधवार को गृहमंत्री ने स्वीकार किया कि दिल्ली पुलिस की क्षमता बढ़ाने तथा हाई अलर्ट जारी होने के बावजूद यह दुखद घटना हुई। दिल्ली हाईकोर्ट के गेट पर हुए बम विस्फोट की निंदा करते हुए चिदंबरम ने कहा कि सरकार दोषियों का पता लगाने तथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए कृत संकल्प है।

पुलिस को सुदृढ़ बनाने के प्रयास किए जा रहे
चिदंबरम ने बुधवार को संसद के दोनों सदनों में इस आतंकी घटना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संसद सत्र के दौरान तथा कुछ अन्य मौकों पर दिल्ली में हाई अलर्ट जारी किया जाता है। इस साल जुलाई के दौरान दिल्ली पुलिस को कुछ संगठनों से मिली धमकियों से संबंधित खुफिया सूचना दी गई थी। चिदंबरम ने लोकसभा में कहा कि इस विस्फोट के पीछे किस आतंकवादी संगठन का हाथ है इस बारे में फिलहाल कुछ भी नहीं कहा जा सकता। लेकिन सरकार इस जघन्य अपराध में शामिल लोगों को पकड़कर उन्हें सजा दिलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। गृहमंत्री ने कहा कि पिछले कई वर्षों से दिल्ली पुलिस को सुदृढ़ बनाने के प्रयास किए जा रहे है।

पदाधिकारियों के साथ विचारविमर्श किया
उन्होंने सदन और देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि कि हमें दृढ़ निश्चयी और संगठित रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हम आतंकियों से कभी नहीं डरेंगे। उन्होंने घटना में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना तथा घायलों के प्रति सहानुभूति जताई। चिदंबरम ने सदन को भरोसा दिया कि घायलों का बेहतर इलाज कराया जाएगा। चिदंबरम ने राज्यसभा में कहा कि वह अपराह्न एक बजे दिल्ली उच्च न्यायालय गए थे तथा उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ विचारविमर्श किया।

विकिलीक्स के अनुसार अमेरिकी अधिकारी जानते थे

अमेरिकी अधिकारी काफी समय से जानते थे कि भारत में हमलों के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने कई आतंकवादी संगठन बना रखे हैं। विकिलीक्स ने अमेरिका के केबल संदेश के हवाले से इस बात का खुलासा किया है। विकिलीक्स द्वारा जारी केबल संदेश के अनुसार अमेरिकी अधिकारी जानते थे कि 1993 के मुंबई हमलों के मुख्य आरोपी और अंडरवर्ल्ड सरगना दाउद इब्राहिम का सहयोगी टाइगर मेमन के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से रिश्ते हैं।

ISI ने बना रखे हैं कई आतंकी संगठन
केबल संदेश में अमेरिकी अधिकारी यह कह रहे हैं कि भारत में हमलों को अंजाम देने के लिए आईएसआई ने कई आतंकी संगठन बना रखे हैं, इन संगठनों ने दिल्ली के कनॉट प्लेस, लाजपत नगर और देश के कई हिस्सों में हमलों को अंजाम दिया। इसी तरह का एक आतंकी संगठन जिसे आईएसआई ने बना रखा है, जम्मू एंड कश्मीर इसलामिक फ्रंट है, इसका मुख्य ठिकाना काठमांडू में है। इस संगठन ने भारत में हमलों को अंजाम देने के लिए हमलावर और हथियार उपलब्ध कराने के लिए काठमांडू ठिकाने को नोडल प्वाइंट बना रखा है। इस काम में यह संगठन काठमांडू स्थिति कश्मीरी उद्योगपतियों से मदद लेता है। जम्मू एंड कश्मीर इसलामिक फ्रंट के सरगना जावेद कारवाह काठमांडू में अपना कारपेट का व्यवसाय चलाते हैं।

आईएसआई और टाइगर मेमन कर रहे हैं निर्देशित
यह बात केबल संदेश में किसी और ने नहीं बल्कि भारत स्थित तत्कालीन अमेरिकी राजदूत फ्रेंक विजनर ने कही है। 8 जुलाई 1997 के इस केबल संदेश में कहा गया है कि इस संगठन को पाकिस्तान से आईएसआई और टाइगर मेमन निर्देशित कर रहे हैं। इनका पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बिलाल बेग से संपर्क है, जो मुजफ्फराबाद के नजदीक आईएसआई की आर्थिक मदद से भारत में हमलों को अंजाम देने के लिए आतंकी शिविर चला रहा है।

हमलों के लिए काठमांडू बेस का इस्तेमाल
कहा जा रहा है कि भारत में लोक सभा चुनाव के पहले दिल्ली में हमलों के लिए आईएसआई के एक फारुक नाम के कर्नल ने बिलाल बेग और टाइगर मेमन को निर्देश दिए, इन दोनों से फारुक ने कहा कि हमलों के लिए काठमांडू बेस के लतीफ और जावेद कारवाह की मदद लें। 21 मई 1996 को इस आतंकी संगठन ने दिल्ली के लाजपत नगर में हमला किया, जिसमें 13 लोग मारे गए और 40 घायल हुए। केबल संदेश के अनुसार इस हमले में इस्तेमाल आरडीएक्स काठमांडू से भारत पहुंचा।

नोट कांड में कुलस्ते-भगौरा के साथ खड़ी हुई भाजपा



     नोट के बदले वोट मामले को संसद में उजागर करने वाले अपने दो पूर्व सांसदों को जेल भेजे जाने को लेकर भाजपा ने आक्रामक रुख अपना लिया है। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने तिहाड़ जेल जाकर दोनों पूर्व सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते व महावीर भगौरा से मुलाकात कर साफ किया कि पार्टी पूरी तरह उनके साथ है। स्वराज ने सांसदों को घूस देने वालों व इसे उजागर करने वालों पर एक ही मापदंड अपनाने को दुर्भाग्यपूर्ण व अलोकतांत्रिक करार देते हुए कहा कि भाजपा इस लड़ाई को पूरी ताकत से लड़ेगी।
 
  भाजपा ने इस मामले को पूरी ताकत के साथ संसद में भी उठाने का फैसला किया था। उसके शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी ने लोकसभा में खुद मोर्चा संभालते हुए प्रश्नकाल स्थगित करने को नोटिस भी दिया था। आडवाणी कभी-कभार किसी बहुत बड़ी घटना पर ही इस तरह के नोटिस देते हैं। मगर चूंकि दिल्ली हाईकोर्ट में बम विस्फोट की घटना से सारा माहौल ही बदल गया, इसलिए आडवाणी ने इस मामले पर जोर नहीं दिया। हालांकि विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इस मामले में न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद अपने दोनों पूर्व सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते व महावीर भगौरा से मुलाकात कर साफ किया कि पार्टी पूरी ताकत के साथ उनके साथ खड़ी है। 

    सुषमा के साथ लोकसभा में पार्टी के उप नेता गोपीनाथ मुंडे व सांसद अनंत कुमार भी थे। सुषमा ने कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सांसदों की खरीद फरोख्त करने वालों व इस मामले को उजागर करने वालों को एक ही मापदंड पर तौला जा रहा है

05 September, 2011

ट्रेन पटरी से उतरी

-अखिलेश उपाध्याय 

बिलासपुर से चलकर भोपाल को जाने वाली यात्री पैसेंजर गाडी नंबर 1८२३५ डाउन सलैया  स्टेसन के पास पटरी से उतार गईहासिल जानकारी के अनुसार रोज की तरह सोमवार की सुबह भी ट्रेन अपने निर्धारित समय पर रीठी स्टेसन से गुजारीलेकिन यह ट्रेन सलैया स्टेसन पर प्लेटफार्म पर जाने वाली लूप लाइन पर पहुची ही थी की उसके दो डिब्बे पटरी से उतार गए.

एंजिन से तीसरे और चौथे नंबर की बोगी क्रमांक ९४८४१९ एवं १०८४५४ पटरी से नीचे उतार गई .

इस सम्बन्ध में ट्रेन में यात्रा कर रहे राजनारायण शुक्ल जो अनूपपुर से यात्रा कर रहे थे ने बताया की कटनी से जब ट्रेन चली तो उसमे खडखडाहट की आवाज  रही थी जो सलैया पहुचते-पहुचते और तेज हो गयीऔर जैसे ही ट्रेन लूप लाइन पर आयी वैसे ही हमारी बोगी एक धडाम की आवाज के साथ नीचे उतार गयी.

एक अन्य यात्री प्रमोद मिश्र ने बताया की जब ट्रेन पटरी से नीचे उतरी उस समय बर्थ पर सो रहे तथा अन्य यात्री डिब्बे के अन्दर ही गिर गए. इस रेल दुर्घटना में आधा सैकड़ा से ज्यादा लोग घायल हुए है जबी किसी के जान माल के हानि की सूचना नहीं मिली है

सुबह आठ बजे यह हादसा हुआ लेकिन रेलवे का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पंहुचा जबकि सलैया और समाप् के अमगवा ग्राम वासियों ने तत्काल पहुचकर यात्रियों को प्राथमिक उपचार और पानी आदि की व्यस्था करी

घायल व्यक्तयो में मालती विश्वकर्मा, राजेश विश्वकर्मा, वंदना सैनी, अनूप खटीक, श्याम सेन, महेश उपाध्याय, कमलेश सेन, अनीता रायकवार, किरण, और ऐसे आधा सैकड़ा यात्रिओ के घायल होने की सूचना है. 

घटना स्थल पर देखने पर ऐसा लगता है जैसे फिश प्लेट के नाट खुल गए थे जिससे यह हादसा हुआ. लगभग दो बजे इन डिब्बो को उठाकर यार्ड में रखा गया तब जाकर ट्रेन आगे रवाना हुई