29 September, 2011

आयरन और माफिया पर कसा शिकंजा

आयरन और माफिया पर कसा शिकंजा
अखिलेश उपाध्याय/कटनी 
कटनी जिले में माइनिंग उत्खनन में चल रहे खेल में जिले से लेकर प्रदेश स्टार के अधिकारी ओर राज नेता की मिली भगत है तभी तो यहाँ खुले आम नियमो की अवहेलना करके गैरकानूनी ढंग से उत्खनन किया जा रहा है  क्षमता से अधिक उत्खनन के चलते दो महीने पहले ही बंद कराई जा चुकी  जबलपुर जिले की 27  खदानों के बाद अब तक संचालित एक मात्र झीटी में चल रही माइंस पर कार्रवाई की गाज गिरना तय माना जा रहा है.  पेसिफिक एक्सपोर्ट्स बरगवा कटनी के नाम से स्वीकृत आयरन ओर माइंस  में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायत के बाद बीते बुधवार को जबलपुर व भोपाल के खनिज अधिकारियो ने दबिश देते हुए न केवल कई गंभीर अनियमितताए उजागर की बल्कि निजी भूमि पर 25  हजार तन पड़ा आयरन ओर भी बरामद दिया जो डंडी स्टेसन पर विशाखापत्तनम भेजे जाने के लिए रखा था. 
झीटी की माइंस कटनी के व्यवसाई जे पी अग्रवाल व प्रदीप  मित्तल द्वारा संचालित की जा रही है जिन पर देश व प्रदेश के कई दिग्गज हस्तियों का वरदहस्त है.

कटनी जिले की ढीमरखेडा  तहसील की सीमा से लगे सिहोरा तहसील के ग्राम झीटी के खसरा नंबर 412  ने करीब 26  हेक्टेयर क्षेत्र में पेसिफिक एक्सपोर्ट्स बरगवा कटनी के नाम से स्वीकृत आयरन ओर माईन्स में चल रहे गडबडझाले की शिकायतों व ग्रामीणों की आपत्ति तथा विधानसभा प्रश्नों की जाँच के मद्देनजर मध्य  प्रदेश शासन खनिज साधन विभाग मंत्रालय  भोपाल ने आदेश क्रमांक 16 -01 /11 /12 /1  दिनांक 21 .2 .11  के माध्यम से कार्यपालक संचालक खनिज निगम एस के मंडल के नेतृत्व में सात सदस्यीय उच्च स्तरीय जाँच दल का गठन किया था. समिति द्वारा की गई जाँच में भारी अनियमितता पायी गई व उत्खनन पर रोक की अनुशंसा करते हुए 28  जून 2011  को जाँच रिपोर्ट सचिव खनिज साधन विभाग को सौप दी गई जिसके बाद से यह रिपोर्ट धूल खा रही है. ऐसा लगती है सरकार अपने द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट अमल करने से परहेज कर रही है. लिहाजा फ़ाइल बस्ते में बंद है और उत्खनन दिन रात जारी है.

पेसिफिक  एक्सपोर्ट्स द्वारा 80 , 640  मीट्रिक टन का माइनिंग प्लान अनुमोदित कराया गया था लेकिन अक्टूबर 2010  से अप्रेल 11  तक महज 7  माह में 11  लाख 96  हजार मीट्रिक टन आयरन ओर का उत्खनन किया गया. वन एवं पर्यावरण सरक्षण हेतु ईआईऐ नोटीफिकेसन एवं 2006  के उल्लघन  के कारण पुनरीक्षित मात्रा के लिए पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त होने तक उत्खनन व परिवहन स्थगित रखने की अनुशंसा जाँच दल ने की है. साथ ही खनिज अधकारी जबलपुर की भूमिका  पर भी सवाल उठाये गए है. रिपोर्ट में कहा गया है की पेसिफिक  एक्सपोर्ट्स को मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति मिलने के पुर्व  ही खनिज अधिकारी ने पिटपास जारी कर दिए.
रिपोर्ट के मुताबिक 1  जून 2010  को भारतीय खान ब्यूरो ने लीज होल्डर के मूल प्लान के मुताबिक 4  लाख 2 हजार 128  मीट्रिक टन का रिजर्व दर्शाकर 80 ,640  टन प्रतिवर्ष का प्लान अनुमोदित किया लेकिन अचानक खनिज रिजर्व 33  गुना 1  करोड़ 23  लाख टन दर्शाकर पेसिफिक एक्सपोर्ट्स ने पुनरीक्षित प्लान प्रस्तुत कर 27  लाख टन प्रतिवर्ष की अनुमति चाही.
 इतनी विसंगतियों के बावजूद आईबीएम ने माइनिंग प्लान को अनुमोदित कर दिया जबकि पुनरीक्षित माइनिंग प्लान के लिए पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त नहीं की गई. पुनरीक्षित मात्रा के लिए स्टाम्प ड्यूटी व पंजीयन शुल्क का पुनर्निर्धारण किया जाना था जो अभी तक नहीं किया गया. जिससे शासन को राजस्व क्षति हुई सचिव मध्य प्रदेश शासन खनिज साधन विभाग द्वारा कलेक्टर को जारी निर्देश के तहत स्वीकृत से अधिक क्षमता का उत्खनन करने वाली जबलपुर जिले की लगभग 27  खदाने बंद हो चुकी है. किन्तु पेसिफिक झीटी पर प्रशासन की मेहरवानी बरस रही है.
वन विभाग की आपत्ति को भी किया दरकिनार
सिहोरा तहसील अंतर्गत ग्राम झीटी में संचालित माइंस को अस्सी हजार मीट्रिक टन वार्षिक उत्खनन की अनुमति प्रदान के गई थी लेकिन माइंस संचालक द्वारा केवल छेह माह में ही बारह लाख टन आयरन ओर का उत्खनन करा लिया गया. इतना ही नहीं माइंस स्वीकृत होने के पूर्व ही  माइंस संचालको के हाथ में पिट पास आ गए थे. माइंस संचालको द्वारा शासन को 52  ग्रेड की दर से 48  रूपये प्रति टन की रायल्टी चुकाई जा रही जबकि निकला जा रहा आयरन और 58  से 62  प्रतिशत ग्रेड वाला है जिसकी रताक्ती  78  रुप्ये प्रति टन बंटी है. इस तरह रायल्टी चोरी की जा रही है. इसके अलावा वन सरंक्षक जबलपुर द्वारा चिन्हित की गई वन भूमि में खुलेआम नियमो को ताक पर रखकर उत्खनन कराया जा रहा है ओर वन विभाग की आपत्ति को भी दरकिनार कर दिया गया है.