08 October, 2011

चैनलों पर लगाम लगाने तैयार सरकार

देश में आए दिन बढ़ते समाचार चैनलों की संख्या रोकने के लिए केंद्र सरकार ऐसा उपाय करने जा रही जिसमें समाचार चैनलों के लिए 75 करोड़ और गैर समाचार चैनलों के लिए 15 करोड़ रुपये तक फीस बढ़ाने का प्रस्ताव है। इस समय न्यूज चैनलों के लिए फीस तीन करोड़ और गैर समाचार चैनलों के लिए फीस डेढ़ करोड़ रुपये है। कुछ ऐसे भी प्रस्ताव हैं जिसके मुताबिक न्यूज चैनलों के लिए इंट्री फीस 20 करोड़ और नॉन न्यूज चैनलों के लिए 5 करोड़ रुपये रखा गया है।

देश में न्यूज चैनलों की बाढ़ रोकने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपलिंकिंग नीति और डाउनलिंकिंग नीति में संशोधन का प्रस्ताव किया है। यह प्रस्ताव शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने दो प्रस्ताव तैयार किया है। एक प्रस्ताव ऐसा है जिससे छोटे उद्यमी प्रसारण क्षेत्र में कदम रखने की सोच भी नहीं सकेंगे। उसका लाभ बड़े उद्योगपतियों को मिल सकता है।

इस प्रस्ताव के अनुसार न्यूज चैनल की अपलिंगिंक/ डाउनलिंकिंग की अनुमति लेने वालों से फीस के तौर पर 75 करोड़ रुपये पहले चैनल के लिए और दूसरे, तीसरे आदि अगले चैनल के लिए 15 करोड़ रुपये प्रत्येक चैनल वसूल किए जाएंगे। नॉन न्यूज चैनल के लिए पहले चैनल के लिए 15 करोड़ रुपये और उसके बाद के चैनलो के लिए पांच करोड़ रुपये फीस रखने का प्रस्ताव है। दूसरा प्रस्ताव, न्यूज चैनलों के लिए 20 करोड़ रुपये और बाद के चैनलों के लिए 5 करोड़ रुपये प्रति चैनल फीस लेने का है। जबकि नॉन न्यूज चैनल के लिए पांच करोड़ रुपये पहले चैनल के लिए और ढाई करोड़ दूसरे चैनल के लिए लिये जाएंगे। प्रस्ताव पर अंतिम फैसला कैबिनेट करेगी।