10 October, 2011

स्वास्थ्य विभाग को इलाज की दरकार

अखिलेश उपाध्याय / कटनी

अम्रतलाल साहू

आज सुबह देवरी के अम्रतलाल साहू जब अपने पुत्र का ईलाज कराने  रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुचे तब तक दस बज चूका था. लेकिन जब वे अन्दर पहुचे तो उन्हें रोगी कल्याण की पर्ची कटाने वाली खिड़की बंद मिली उन्होंने जब डाक्टर के बारे में पता लगाया तो वह तीन में से कोई भी डाक्टर न मिला 
शाहनगर जनपद के अतार्हाई गाँव से रीठी इलाज के लिए आयी  छोटी बाई पति प्रेमलाल चोधरी अपने घाव पर मरहम पट्टी कराने पहुची थी  और वह तो सुबह आठ बजे अस्पताल पहुच गयी थी 
आनंद चोधरी 
बडगांव से आयी पार्वती बाई  अपनी बेटी लक्ष्मी  को लेकर रीठी अस्पताल पहुची थी उसकी बच्ची को सियार ने काटा था
रीठी के आनंद सुबह नो बजे से डाक्टर के इन्तजार में बैठा था दरअसल उसे  खून की जाँच की रिपोर्ट चाहिए थी और डाक्टर के अभाव में कर्मचारी चाय पान के लिए निकल गए थे 
सिंघिया का  रमेश उल्टी दस्त से पीड़ित था वह  सुबह सात बजे से अस्पताल में बैठा था 


बी एम् ओ तो ट्रेनिंग पर गए है ऐसा वह उपस्थित स्टाफ ने बताया अभी पिछले हफ्ते भी जब इसी तरह से शिकायत आयी थी तब भी अस्पताल में कोई भी डाक्टर नहीं था तब भी नवानी बी एम् ओ ट्रेनिंग पर ही गए थे. और डाक्टर गुलाब तिवारी जो पूर्व में यहाँ बी एम् ओ रह चुके है  हमेशा नदारद रहते है अपना पद जाने के बाद से उन्हें रीठी अस्पताल से कोई मोह नहीं रह गया है  हाल ही में जुलाई से एक नए डाक्टर राम गोपाल गुप्ता की नियुक्ति की गई है और वे होम्योपेथिक डाक्टर बताये जाते है और कमाल की बात है की उनके दर्शन आज तक नहीं हो सके है और जब इस छोटे से कसबे में एलोपेथिक और आयुर्वेदिक दवाओं के अलावा अन्य दवाये मिलती ही नहीं है तो फिर इन होम्योपेथिक डाक्टर का क्या मतलब है...?

बारह बजे तक डाक्टर नहीं आये 
बी एम् ओ की दुर्सी भी खाली 
















जब अस्पताल में घुस ही गए थे तो फिर एक-एक करके सभी कमरों पर नजर  गयी. नी सुरक्षा वार्ड की हालत हो बड़ी दयनीय है वहा बिजली गुल हो  जाने के बाद नवप्रसूता गर्मी और मच्छर से संघर्ष करती मिलती है. आखिर क्या करे गरीबी और चौदह सौ रूपये का लोभ जो है.
जननी वार्ड के हाल बेहाल 









इस वार्ड में भर्ती शुष्मा यादव निवासी मढ़ा देवरी, प्रीती ठाकुर निवासी कुदरी , मुन्नी बाई आदिवासी निवासी अतरहाई, जनपद शाहनगर जिला पन्ना, जनकु आदिवासी निवासी करहिया, प्रेमा चोधरी निवासी खुहरी इन सभी ने बताया की उन्हें पोष्टिक आहार में कल शाम को केवल एक बार ही बिस्किट का छोटा पैकेट दिया गया था और सुबह शाम मिलने वाला दूध दोपहर को भोजन दूध के साथ ब्रेड इनको कभी नहीं दी जाती. यह सब यहाँ तीन दिनों से भारती प्रसूताओ ने बताया. 

जननी ने बताया नहीं मिलता पौष्टिक आहार 


जब यह जानकारी मागी गई की जननी को यह सुविधा क्यों नहीं दी जाती तो कर्मचारी बगले झाकने लगे और जिम्मेदार अधिकारी इसका जबाव देगे कहकर अपना पल्ला झड लिया. खैर लेखाधिकारी   नीतेश अग्रवाल ने बताया की जननी को पोष्टिक आहार प्रदान करने के लिए शारदा बरी एवं पापड स्वसहायता समूह पटोहा के खाते में पैसा जमा कर दिया जाता है. 



जननी वार्ड में एक दीवार में टीवी लगा था पूछने पर प्रसूताओ ने बताया की उनने तो इसे कभी चलते हुए देखा ही नहीं है. 


इस समय क्षेत्र में बीमारिया अपने चरम पर है जिनमे फेलसीफेरम, वैवेक्स, के मरीज ज्यादा ही मिल रहे है  लेकिन इस अस्पताल का जनरल वार्ड खाली है जबकि यहाँ के प्राइवेट डाक्टरों के यहाँ मरीजो का टाटा लगा रहता है असल में इस अस्पताल में डाक्टर आराम फरमाना चाहते है इसलिए कोई भी मरीज आया झट से उसे कटनी के लिए रेफर कर दिया और स्वयं मुख्यालय से नदारद रहते है 

जानकार सूत्रों की माने तो मलेरिया के  रक्त के स्लाइड की जाँच में कोई शुल्क नहीं लिया जाता लेकिन बहुत से मरीजो ने बताया की  उनसे तीस रपये  बतौर फीस बसूले जाते है और मलेरिया किट  से जाँच karne पर साठ रूपये लिए  जाते है जबकि अस्पताल में ही बोर्ड लगा है की मलेरिया की जाँच के कोई भी पैसे नहीं लगेगे.

दीन दयाल अन्त्योदय उपचार मद में आयी दवाओं को रीठी के दो दवा वेक्रेताओ को  पूर्व के बी एम् के द्वारा चोरी छुपे बेचा जाता रहा है और यह सिलसिला अभी भी जारी है   यदि रीठी की दवा दुकानों पर छापा डाला जावे तो निश्चित ही अस्पताल के दीं दयाल मद से आयी दवाये यहाँ मिल जावेगी...?

खिड़की खुलने तथा डाक्टर का इन्तजार करते लोग 

इलाज के लिए गरीब इस तरह यहाँ से वह भटकते रहे 
दूर दराज से आयी महिलाए बच्चे भटकते रहे