22 October, 2011

खाद और बीज के लिये लुट रहे किसान

शासन के वेयर हाऊस खाली, व्यापारी उठा रहे बेजा फायदा
अपनी जि मेदारी से मुंह मोड़ रहा कृषि विभाग
बहोरीबंद,यभाप्र। रबी सीजन की बोनी का समय शुरू हो चुका
है पर किसानों को न खाद मिल रही न बी। राज्य विपणन संघ के
वेयर हाऊस खाली पड़ हैं। सहकारी समितियों के भंडार ग्रहों से भी
किसानों को बैरंग लौटाया जा रहा है। कृषि विभाग ने भी हाथ खड़े
कर खाद बीज उपल ध करा पाने में अपनी असमर्थता प्रकट कर
दी है। खाद बीज संकट के लिये कांग्रेस प्रदेश की भाजपा को दोषी
ठहरा रही तो भाजपा नेता केन्द्र सरकार को इस संकट के लिये
जि मेदार ठहरा रहे। ऐसे में किसान निजी खाद, बीज विक्रेताओं से
मंहगे दामों पर खाद बीज खरीदने के लिये मजबूर हो गये हैं।
खरीफ और रबी के मौसम में बोनी के लिये जरूरत के अनुसार
खाद और बीज उपल ध कराने की जि मेदारी राज्य सरकार की है॥
सरकार कृषि विभाग एवं वृहताकार सहकारी समितियों के माध्यम
से किसानों को खाद बीज उपल ध कराती है पर पिछले कुछ सालों
से राज्य सरकार अपनी इस जि मेदारी का सही तरीके से निर्वाह नहीं
कर पा रही जिसका फायदा खाद बीज का विक्रय करने वाले निजी
व्यवसायी उठा रहे। हैरत की बात है कि सरकारी वेयर हाउस और
सरकारी समितियों के भंडार ग्रह तो खाद- बीज से खाली पड़े रहते
हैं पर व्यापारियों के पास सभी प्रकार की खाद और बीज का पर्याप्त
भंडार है। कृषि विभाग द्वारा बहोरीबंद तहसील क्षेत्र में तीन दर्जन से
अधिक व्यापारियों को खाद, बीज और कीटनाशक औषधियों के
लायसेंस प्रदान किये गये हैं। इनमें बहोरीबंद मु यालय में चार, बंधी
में तीन, कुआं में दो, छपरा में दो तथा चरगवां, सिंदूरसी, देवरी,
कौडिय़ा और इमलिया में एक- एक लायसेंसी केन्द्र है जहां से खाद,
बीज और कीटनाशक औषधियों की बिक्री की जाती है। यहां यह
भी उल्लेखनीय है कि निजी व्यापारियों को खाद, बीज अथवा
कीटनाशक में से किसी एक चीज की बिक्री का ही लायसेंस दिया
गया है पर यहां एक ही व्यापारी के यहां खाद बीज, कीटनाशक सब
एक साथ बिकता है।
चना 5 हजार िंवटल
रबी मौसम में किसान जहां गेहूं की बोनी कर रहे वहीं बहुत से
किसान गेहूं के अलावा चने की बोनी भी कर रहे। चने के बीज की
कीमत शासन द्वारा 2950 रूपये प्रति िंवटल तय की गई है। कृषि
विभाग किसानों को चने का बीज उपल ध नहीं करा पा रहा मजबूरी
में किसानों को व्यापारियों से चने का बीज खरीदना पड़ रहा।
किसानों की मजबूरी का भरपूर फायदा उठाते हुये व्यापारी किसानों
को 2950 रूपये की जगह पांच हजार रूपये िंवटल तक चने का
बीज दे रहे । कृषि विभाग सब कुछ जान कर भी अनजान बना
हुआ है वहीं प्रशासन भी व्यापारियों की इस मुनाफाखोरी पर अंकुश
नहीं लगा रहा।
डीएपी हजार रूपये बोरी
बताया गया कि खाद और बीज की खरीदी में किसानों को शासन
की ओर से छूट प्रदान की जाती है पर ये व्यापारी शासकीय छूट की
राशि भी हड़प कर लेते हैं और किसानों को शासन द्वारा निर्धारित
कीमत से अधिक कीमत पर खाद और बीज की बिक्री करते हैं।
डीएपी की एक बोरी की कीमत 736 रूपये निर्धारित है पर किसानों
से एक हजार रूपये प्रति बोरी दाम वूसल किये जा रहे । किसानों
को सबसे ज्यादा जरूरत डीएपी खाद की है इसी कारण इसकी मांग
सबसे ज्यादा है। इसी का फायदा व्यापारी उठा रहे।
खाद नकली, बीज घटिया होने की आशंका
पिछले साल सहकारी समितियों और निजी व्यापारियों से खरीदी गई
खाद नकली निकली थी तथा बीज भी घटिया साबित हुये थे जिस
कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। इस बार भी खाद
और बीज को लेकर किसान आशंकित हैं। किसानों को चिंता है कि
अगर निजी व्यापारियों से मंहगे दामों पर खरीदी गई खाद इस बार
भी नकली और बीज घटिया निकले तो या होगा। किसानों ने कृषि
विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि निजी व्यापारियों द्वारा
बेची जा रही खाद तथा बीज के अलावा अमानक स्तर की
कीटनाशक औषधि की भी जांच की जाये।