19 October, 2011

आठवीं तक के बच्चों को सजा से मुक्ति


आठवीं तक के बच्चों को सजा से मुक्ति 
शिकायत मिली तो शिक्षक पर होगी कार्रवाई 

 स्कूल चाहे सरकारी हो या फिर प्राईवेट, कक्षा आठवी तक के बच्चों को अब सजा नहीं दी जाएगी।
राज्य शिक्षा केन्द्र के नए आदेशों से शिक्षक बच्चों को शारीरिक दंड नहीं दे सकेंगे। यदि फिर भी ऐसा होता है तो शिक्षक पर तो कार्रवाई होगी ही प्राईवेट स्कूलों की मान्यता खतरे में पड़ सकती है, साथ ही स्कूल यदि सरकारी हुआ तो उस स्कूल के प्राचार्य को भी लेने के देने पड़ सकते हैं।  दरअसल नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद कक्षा आठवी तक के बच्चों को शारीरिक दंड दिए जाने पर स ती से रोक लगाई गई है।


निर्देशों के बावजूद प्रदेश के कई जिलों से इस तरह की शिकायतें सामने आने के बाद राज्य शिक्षा केन्द्र ने कड़ी नाराजगी जताई है और जिला शिक्षा अधिकारियों को इन घटनाओं पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, हालांकि पिछले कुछ समय के दौरान कटनी जिले में तो इस तरह की कोई घटना सामने नहीं आई है, फिर भी निर्देश
जारी करने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी को इन घटनाओं पर न केवल पैनी निगाह रखी होगी व रन संबंधित अमले को इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए भी निर्देश जारी करना होगा। स्कूलों में शिक्षकों द्वारा छात्रों से अभद्र व्यवहार और मारपीट के रूप में कड़ी सजा दिए जाने की घटनाएं जब- तब सामने आती रहती है। इसमे कईयों बार बड़ी घटनाएं भी प्रकाश में आ चुकी है। हालांकि अब पहले जैसा समय भी नहीं रहा। पहले होमवर्क नहीं करके लाने पर छात्र को शिक्षक की डांट के लिए तैयार रहना पड़ता था और कभी-  कभी सजा भी मिलती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। खासकर  कक्षा आठवी तक के बच्चों को शिक्षक शारीरिक दंड नहीं दे सकेंगे। 


आयु त ने जताई नाराजगी
यह व्यवस्था लागू होने के बाद भी कई जिलों के स्कूलों में शारीरिक दंड दिए जाने की शिकायतें राज्य शिक्षा केन्द्र को मिल रही थी। इसमें कुछ निजी स्कूलों के नाम भी शामिल थे। इस पर राज्य शिक्षा केन्द के आयुक्त मनोज झालानी ने कड़ी नाराजगी जताई।  प्राचार्य भी होंगे जि मेदार  आयु त ने कहा कि किसी भी सूरत में शारीरिक दंड की घटनाओं को नजरंदाज न किया जाए। किसी भी स्कूल में यदि ऐसी शिकायत पाई जाती है, तो संबंधित शिक्षक  पर कार्रवाई करने के साथ स्कूल के खिलाफ भी ए शन लिया जाए। इसमें सरकारी स्कूल में शिक्षक के साथ  प्राचार्य को भी ऐसी घटना के लिए जि मेदार माना जाएगा और शिक्षक और प्राचार्य दोनों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 


मान्यता भी खतरे में 
निजी, सीबीएसई व अनुदान प्राप्त स्कूलों में यदि इस तरह घटनाएं सामने आती है तो शिक्षक व शाला प्रमुख
पर कार्रवाई के अलावा स्कूल की मान्यता पर भी गाज गिरेगी। आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि जिन स्कूलों के बारे
में ऐसी शिकायतें मिली हैं, वहां पर इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति  न हो। 



अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम के कारण लगी रोक 
केन्द्र सरकार द्वारा पिछले साल अनिवार्य व मु त शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया था। अधिनियम के कारण इस साल से शारीरिक दंड पर पूर्णत: रोक के आदेश जारी किए गए थे। अब उक्त अधिनियम के तहत आठवीं तक के बच्चों को किसी भी प्रकार से शारीरिक दंड नहीं दिया जा सकता।