08 October, 2011

करोडो की राशी विभागीय अधिकारी और ठेकेदार डकार गए

पी डब्लू डी विभाग कटनी द्वारा आये दिन भ्रष्टाचार अखबारों में छपते रहते है लेकिन  कलेक्टर तथा जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते जिले के बड़े से बड़े भ्रष्टाचार के मामले ठन्डे बस्ते में डाल दिए जाते है. यहाँ जन सुनवाई में की गई शिकायत में गरीब को न्याय मिला ऐसा एक भी उदहारण नहीं मिलता. ऐसा ही एक मामला रीठी तहसील में  पिछले एक साल से कई बार प्रशासन के सामने उजागर किया गया लेकिन उनकी खामोशी उनके भी इस खेल में शामिल होने के सवाल पर मुहर लगाती है.


कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग संभाग कटनी के अंतर्गत उपसंभाग दो  कटनी के अधीन निर्माडाधीन  मोहास-लालपुरा-बरजी- पाली मार्ग एवं मोहस -कठोतिया-गोदना  मार्ग में लोक निर्माण विभाग द्वारा यह कार्य ठेकेदारी प्रथा से कराया जा रहा है जिसमे इन दोनों सडको के निर्माण में गंभीर अनियमितताए की गई है. एस्टीमेट के प्रावधान से हटकर कार्य किया गया है इसमें ठेकेदार एवं विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री एच  एल वर्मा तथा ठेकेदार के पार्टनर निलंबित सहायक यंत्री रामखिलावन कुम्हार जो कटनी सभाग में संलग्न है के साथ मिलकर इस कार्य को कराया जा रहा है.


जबकि इस कार्य की निर्माण एजेंसी  लारेंस लायर एवं भाग्यश्री  को  बनाया गया है. जब विभागीय अधिकारी ही ठेकेदार के साथ मिलकर ठेके के काम  करेगे तो कार्य की गुडवत्ता  एवं कार्य कहा तक सही होगा. जाहिर है इस पूरे सड़क निर्माण में बहुत सारे सवाल क्षेत्रीय जनता द्वारा किये जा  रहे है. इस सम्बन्ध में अखिलेश उपाध्याय ने एक लिखित शिकायत के माध्यम से शासन से जाँच की मांग की है और पंद्रह दिनों के अन्दर जाँच न होने पर धरने पर बैठने की चेतावनी दी है 








यदि इन दोनों सडको के निर्माण कार्य में निम्न बिन्दुओ पर जाँच करी जावे तो स्थिति स्पष्ट हो जायेगी की इस कार्य में किस हद तक अनियमितताए करके शासकीय धन का दुरूपयोग किया गया है -


1   कंस्ट्रक्सन आफ एम्बार्कमेंट  में सेलेक्टेड सोइल या अप्रूव्ड   सोइल का उपयोग किया जाना था जिसकी सी बी आर ग्रेटर देन पांच होनी चाहिए थी लेकिन ठेकेदार एवं विभाग के अधिकारियो ने मिलकर लोकल  सोइल एवं ब्लेक काटन सोइल का उपयोग किया है जो प्राकल्लन  के प्रावधान अनुसार गलत है इसमें वाइब्रेटर रोलर का उपयोग नहीं किया गया है तथा  लोकल सोइल का उपयोग कर सेलेक्टेड सोइल का भुगतान किया है जो अनियमितता की श्रेणी में आता है.


2   जी  एस बी कार्य में ग्रेडिंग नंबर थ्री   का मटेरियल उपयोग किया जाना चाहिए था लेकिन इनके द्वरा लोकल मुरुम का उपयोग किया गया है. मानक स्तर  की जी  एस बी मटेरियल का उपयोग नहीं किया गया है. प्राक्कलन के अनुसार जी  एस बी की थिकनेस 300  मिलीमीटर होना चाहिए था लेकिन ठेकेदार द्वारा विभाग की मिलीभगत से 150  एम् एम् थिकनेस की मुरुम डाली गई है और भुगतान 300   एम् एम् थिकनेस का लिया गया है  इसमें ठेकेदार एवं विभाग द्वारा मिलकर शासकीय  राशी का दुरूपयोग कर अनियमितता की गई है.


3   मार्ग चौडीकरण में ग्रेडिंग नम्बर वन  डब्लू बी एम् में 45  से 90  एम् एम् साइज की मेटल का उपयोग किया जाना चाहिए था लेकिन ठेकेदार द्वारा 150  से 200  एम् एम् साइज के पत्थरो के बोल्डरो का उपयोग किया गया है जो एस्टीमेट के प्रावधानों के विपरीत है जिससे कार्य की गुडवत्ता प्रभावित  हुई है.


4   मार्गो में ग्रेडिंग नंबर टू  के दो कोट दिए जाने का प्रावधान प्राक्कलन में लिया गया है लेकिन एक ही कोट ग्रेडिंग टू  किया गया है जो 0 .075   मीटर की थिकनेस का है और 0 .15  मीटर की थिकनेस को एम् बी में चढ़ाकर  भुगतान किया गया है. मुख्य अभियंता (मध्य क्षेत्र)पी डब्लू डी  जबलपुर द्वारा विगत दिनों मार्ग का निरीक्षण किया गया था, निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता ने डब्लू बी एम् के ग्रेडिंग नमबर टू में माप पुस्तिका में दर्ज की गई थिकनेस से कम थिकनेस पाई  थी जिसका उल्लेख श्री दुबे मुख्य अभियंता ने अपने  निरीक्षण प्रतिवेदन में उल्लेख किया है जो स्वयमेव जाँच है. इस प्रकार यह अनियमितता भ्रष्टाचार की श्रेणी में आती है.


5   मार्ग के जिन स्थानों पर सी सी मार्ग का कार्य कराया जाना था उसमे सबसे पहले प्राक्कलन के प्रावधानों के अनुसार डब्लू बी एम् ग्रेडिंग नंबर 3  के सिंगल कोट किया जाना प्रस्तावित है लेकिन इसमें भी डब्लू बी एम् ग्रेडिंग नंबर 3  कर  सी सी मार्ग का निर्माण कर दिया गया एवं ग्रेडिंग नंबर 3  का भुगतान कर उतनी राशी का आहरण किया है जो गलत है. 


6   सी सी मार्ग  निर्माण के दौरान  सी सी कार्य करने से पूर्व मार्ग की साफ़ सफाई कर प्लास्टिक बिछाई जाती है और उसके बाद एम् टेन  कंक्रीट  से 100   एम् एम् थिकनेस की कंक्रीट फिर एम् 40   ग्रेड की कंक्रीट से 225  एम् एम् थिकनेस की कंक्रीट की जानी चाहिए थी जो प्राक्कलन के प्रावधान में है लेकिन ठेकेदार द्वारा बिना मार्ग की साफ़ सफाई कराये, बिना प्लास्टिक बिछाए एम् 10  की कंक्रीट जो 150  एम् एम् थिक में 40  एम् एम् मेटल से कार्य किया गया है एवं इसके ऊपर एम् 40  ग्रेड की कंक्रीट जो एम् 20  से 70  एम् एम् थिकनेस से कराया गया है, सी सी मार्ग के दोनों किनारों पर दिखावे के लिए एम् 20  की कंक्रीट से किनारे भर दिया  है जिसकी थिकनेस 220  एम् एम् दिख रही है. 
अतः पूरे मार्ग की थिकनेस 220  एम् एम् की गई है और 0 .10  एम् टेन एवं 1 .20  एम् 40  ग्रेड की कंक्रीट का माप दर्ज कर भुगतान लिया गया है जो अनियमितता की श्रेणी में आता है. इसकी  उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए. यह कार्य विलेज पोर्सन में किया गया है. बरजी गाँव में चल रहे कार्य का पंचनामा भी बनाया गया 


7   डब्लू बी एम् के कार्य हेतु जो भी मेटल प्रयोग की जा रही है वह कच्ची गिट्टी है इसमें कली गिट्टी का उपयोग किया जाना था लेकिन कली गिट्टी के स्थान पर कच्ची गिट्टी का उपयोग किया गया है तथा ग्रेड तू, थ्री में डब्लू बी एम् कार्य में युसिंग स्क्रीनिंग  टाइप  बी ( 11 .2  एम् एम् एग्रीगेट ) से किया जाना था लेकिन ऐसा न करेक मुरूम से डब्लू बी एम् किया गया अहै और भुगतान युसिंग स्क्रीनिंग  टाइप  बी ( 11 .2  एम् एम् एग्रीगेट ) लिया गया है जो अधिक है अतः इसमें भी कार्य में गंभीर लपर वाही और भ्रष्टाचार किया गया है.


8   इन दोनों मार्गो में जितनी भी पुलिया बनाई गई है उसमे हेन्ड ब्रोकन 40  एम् एम् एवं 60  एम् इम् साइज की मेटल का उपयोग किया गया है जो काली  एवं क्रेसर गिट्टी नहीं है जबकि एस्टीमेट के प्रावधान के अनुसार 40  एम् एम् डाउन क्रेसर मेटल का उपयोग किया जाना चाहिए था लेकिन ठेकेदार ने अधिकारियो की मिलीभगत से ऐसा नहीं किया तथा पुलियों में यु/एस एवं डी/एस पर एप्रोन बनाने एवं पिचिंग का प्रावधान है लेकिन ऐसा नहीं किया गया और अपनी मनमर्जी के अनुसार उपयंत्री  बी पी तिवारी एवं सहायक यंत्री आर वाय  तिवारी से माप दर्ज कराकर फर्जी भुगतान किया है जो अनियमितता की श्रेणी में आता है.