09 October, 2011

योजनान्तर्गत करोडो रूपये खर्च फिर भी ग्रामो की दशा नहीं बदली

समग्र स्वच्छता अभियान के तहत केंद्र की योजन में देश के समस्त  ग्रामो को स्वच्छ बनाने के लिए समग्र स्वच्छता के नाम से एक अभिनव योजन चालू की गई थी लेकिन यह योजना भी भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गयी कटनी जिले के प्रस्तावित और घोषित निर्मल ग्रामो में ग्रामीणों  को खुले में शौच जाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के तमाम प्रयासों के बावजूद परिणाम  निराशाजनक ही रहे है.

योजनान्तर्गत करोडो रूपये खर्च  करने के बाद भी इन निर्मल ग्रामो की दशा और दिशा दोनों जस की तस है. गांवो  को स्वच्छ बनाने शुरू की गई केंद्र सरकार की निर्मल ग्राम योजना जिले के एकभी  गाँव की तस्वीर नही बदल सकी है. गंदगी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जकड़ी पंचायतो को कागजो में निर्मल घोषित तो कर दिया गया लेकिन हकीकत में स्वच्छता कही नजर नहीं आती.

हद तो यह है की योजना की अहम् शर्त प्रत्येक घर और सरकारी भवन में शौचालय की उपलब्धता  का उपयोग कर पूरी नहीं होती. बावजूद इसके ऐसी पंचायते निर्मल गाँव के रूप में न केवल दर्ज है बल्कि सरकार से मिलने वाले प्रोत्साहन राशी का लाभ भी उठा चुकी है. इसके आलावा समग्र स्वच्छता अभियान के तहत प्रत्येक निर्मल गाँव पर चार लाख व अन्य योजनाओं के तहत भी इतनी ही राशी खर्च की  जा चुकी है.

जिले की कुल 407  पंचायतो में से अब तक 25  पंचायतो को निर्मल ग्राम पुरस्कार से नवाजा जा चूका है. वर्ष 2007 -08   में 10  गांवो को और 09 -10  में 15  गाँवों को निर्मल ग्राम घोषित किया गया था. जिनके बडवारा तहसील की  लखाखेरा , खिरहनी, विजय राघव गढ़  की काँटी, बहोरिबंद की खिराहानी, कटनी की पडरिया आदि पंचायते शामिल है.

किसी भी पंचायत को निर्मल ग्राम घोषित करने के लिए केंद्र सरकार नेजो मापदंड  तय कर रखे है. उसमे सबसे अनिवार्य शर्त प्रत्येक घर  में शौचालय का निर्माण और उपयोग होना जरूरी है. इसके अलावा उस ग्राम में पकी सड़के , नालिया, जल मल निकासी के प्रबंध, कूड़ा, करकट के निपटान की व्यस्था, नालो के पास सोकपिट और स्कूल तथा आगन वाड़ी  भवनों में शौचालय की व्यस्था आदि शामिल है.

जिन गांवों को अब तक निर्मल ग्राम घोषित किया गया है उनमे से अधिकांश गाँवों में अब भी लोग खुले में शौच के लिए जाते है. साथ ही सरकारी भवनों में शौचालय या तो बने ही नहीं या बनने के बाद अनुपयोगी हो गए है. किसी भी गाँव में पक्के नाले का निर्माण नहीं हुआ और सफाई के कोई इंतजाम नहीं है. गन्दा पानी सडको पर फैला रहता है जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए है.


निर्मल गाँव घोषित होने वाली पंचायत को केंद्र की और से प्रोत्साहन देने का प्रावधान है. दो हजार जनसँख्या वाले गाँव को एक लाख दिया जाता है. इसमें अधिक जनसँख्या होने पर उसी अनुपात में राशी बढ़ती जाती है जो अधिकतम पाँच लाख तक हो सकती है. प्रोत्साहन राशी दो किश्तों में मिलती है. पचास फीसदी की  पहली किश्त निर्मल ग्राम घोषित होने  पर व दूसरी किश्त अन्य  शर्ते पूरी होने पर दी जाती है. 


कटनी जिले की अब तक पुरष्कृत निर्मल ग्राम पंचायते 
जनपद बडवारा - बम्होरी, जगुआ, खिरहनी, लाखाखेरा,
बहोरीबंद - बहोरीबंद, डिहुता, खिरहनी, स्लीमनाबाद, सुपेली, तेवरी
धीमार्खेदा - खामा, पाली, महनेर, सिमरिया,
कटनी - गुलवारा, कटंगी कला, पडरिया
रीठी - गुर्जीकला, हरद्वार, मुहास, सैदा
विजय राघव गढ़ - चैघरा, देवरकला, देवरी माझागावा