08 November, 2011

आर टी आई एक्टिविस्ट को मिली धमकी

पि डब्लू डी विभाग में चल रही मनमानी


कटनी जिले में पि डब्लू डी विभाग में चल रही मनमानी का यदि प्रमाण देखना हो तो इस समय रीठी तहसील में चल रहे सड़क निर्माण कार्य को देखकर भ्रष्टाचार का अंदाजा लगाया जा सकता है. ने सूचना के अधिकार में प्राप्त जानकारी में यह खुलासा किया है.
इस खुलासे के बाद से बौखलाए ठेकेदार ने जान से मानरे की धमकी मुझे दी है.

maamla kuchh इस prakar है -

कार्यपालन यंत्री लो.नि.वि. संभाग कटनी के अंतर्गत उपसंभाग क्रमांक . 2 कटनी के अधीन निर्माणाधीन मोहास-कठौतिया-गोदाना मार्ग तथा मोहस बरजी पाली मार्ग में लोक निर्माण विभाग द्वारा ठेकेदारी प्रथा से हो रहा है। इस मार्ग में ढेर सारी अनियमितताएं की जा रही हैं। प्राक्कलन (एस्टीमेट) के प्रावधान से हटकर कार्य किया गया है इसमें ठेकेदार एवं विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री एच.एल. वर्मा जो की ठेकदार के पार्टनर लोकायुक्त में रेड हेन्देद पकडे जाने पर निलंबित सहायक यंत्री रामखिलावन कुम्हार के मित्र हैं, जो कटनी संभाग में संलग्र है दोनों मिलकर इस कार्य को करा रहे है. इस कार्य को लारेंस लायर निर्माण एजेंसी एवं भाग्यश्री एजेंसी को निर्माण एजेंसी बनाया गया है.
जब अखिकारी ही ठेकेदार के साथ मिलकर ठेकेदारी करेगे तो कार्य की गुणवत्ता एवं कार्य कहा तक सहीं होगा इस पर प्रश्रचिन्ह लगता है। अत: उपरोक्त मार्गों में निम्र बिन्दुओं पर जांच की मांग आर टी आई अक्तिविस्त अखिलेश उपाध्याय ने की है -
1 कन्सट्रक्सन आफ एमबाकर्मेन्ट में सेलेक्टेड या एप्रूव्ड स्वायल का उपयोग किया जाना था जिसकी सी बी आर ग्रेटर देन पाँच होनी चाहिए थी लेकिन ठेकेदार एवं विभाग के अधिकारियों ने मिलकर लोकल स्वायल एवं ब्लेक काटन स्वायल का उपयोग किया है जो प्राक्कलन के अनुसार गलत हैं इसमें वाइब्रेटर रोलर का उपयोग नहीं किया गया है इस कार्य में स्थानीय स्वायल का उपयोग कर सिलेक्टेल स्वायल का भुगतान किया है जो अनियमितता की श्रेणी में आता है।

2 जी एस बी कार्य में ग्रडिंग नं ।।। का मटेरियल उपयोग किया जाना चाहिए था लेकिन isme लोकल मुरूम का उपयोग किया गया है. मानक स्तर की जी एस बी मटेरियल का उपयोग नहीं किया गया है। प्राक्कलन के अनुसार जीएसबी की थिकनेस 300 एम एम होना चाहिए था लेकिन ठेकेदार द्वारा विभाग की मिलीभगत से मात्र 150 एम एम थिकनेस की मुरूम डाली गई है और भुगतान 300 एम एम थिकनेस का लिया गया है इसमें ठेकेदार एवं विभाग द्वारा मिलकर शासकीय राशि का दुरूपयोग कर अनियमितता की है।

3 मार्ग चौड़ीकरण में ग्रेडिंग नं. 1 डब्लू बी एम में 45 से 90 एम एम साइज की मेटल का उपयोग किया जाना चाहिए था लेकिन ठेकेदार द्वारा 150 से 200 एम एम साइज के पत्थरों-बोल्डरो का उपयोग किया गया है जिससे कार्य की गुद्वात्ता त्त प्रभावति होती है और जो प्राक्कलन के विपरीत है।

4 मार्गों में ग्रेडिंग नं. ।। को दो कोट किये जाने का प्रावधान प्राक्कलन में लिया गया है जबकी एक ही कोट ग्रेडिंग ।। का किया gya है जो 0.075 मी. की थिकनेस का है और 0.15 मी.की थिकनेस को एम बी में चढ़ाकर भुगतान किया गया है चीफ इंजीनियर (म.क्षे.) लो.नि.वि. जबलपुर द्वारा विगत दिनों मार्ग का निरीक्षण किया गया था निरीक्षण के दौरान चीफ इंजीनयिर ने डब्लू बी एम के ग्रेडिंग नं. ।। में माप पुस्तिका में दर्ज की गई थिकनेस से कम थिकनेस पाई थी जिसका उल्लेख श्री दुबे चीफ इंजीनियर द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है। जो स्वयमेव जाँच है अत: व्यापक स्तर पर अनियमितता की गई है जो भ्रष्टाचार की श्रेणी में आती है।

5 मार्ग में जिन स्थानों पर सी सी मार्ग का कार्य कराया जाना था उसमें सबसे पहले प्राक्क्लन के प्रावधान के अनुसार डब्लू बी एम ग्रेडिंग नं तीन की सिंगल कोट किया जाना प्रस्तावित है लेकिन बिना डब्लू बी एम ग्रेडिंग नं तीन किये सी सी मार्ग का निर्माण कर दिया गया एवं ग्रेडिंग नं तीन का भुगतान कर उतनी राशि का आहरण किया है।

इस संबंध में उपयंत्री श्री तिवारी को मझगंवा ग्राम के निवासियों ने फोने पर सूचना देकर अनियमितता की मौखिक शिकायत की तथा मौके पर श्री तिवारी पहुंचे और जांच का आश्वासन भी दिया तथा कहा की सी सी उखड़वाकर दूसरी बनवा देंगे लेकिन फिर पलटकर उनने कोई सुध न ली ।

6 सी सी मार्ग निर्माण के दौरान सी सी कार्य करने से पूर्व मार्ग की साफ-सफाई कर प्लास्टिक बिछाई जाती है और उसके बाद एम 10 कंक्रीट से 100 एम एम थिकनेस की कंक्रीट फि र एम 40 ग्रेड की कंक्रीट से 225 एम एम थिकनेस की कंक्रीट जो प्राक्कलन के प्रावधान में है लेकिन ठेकेदार द्वारा बिना मार्ग की साफ सफाई कराये , बिना प्लास्टिक बिछाए एम 10 की कंक्रीट जो 150 एम एम थिकंस में 40 एम एम मेटल से कार्य किया गया है एवं इसके ऊपर एम 40 ग्रेडकी कंक्रीट जो एम 20 से 70 एम एम थिकनेस से कराया गया है सी सी मार्ग के दोनेांकिनारों पर दिखाने के लिए एम 20 की कंकीत से किनारे भर दी है जिसकी थिकनेस 220 एम एम दिख रही है अत: पूरी कंक्रीट मार्ग की थिकनेस 220 एम एम की गई है और 0.10एम-10 एम एवं 0.20 एम-एम 40 ग्रेड की कंक्रीट का माप दर्ज कर भुगतान लिया गया है जो अनियमितता की श्रेणी में आता है। यह कार्य गाँव में किया गया है।

7 डब्लू बी एम के कार्य हेतु जो भी मेटल प्रयोग की जा रही है वह कच्ची गिट्टी है इसमें कलि गिट्टी का उपयोग किया जाना था लेकिन कलि गिट्टी के स्थान पर कच्ची गिट्टी का उपयोग किया गया है औरकलि गिट्टी के रेट का भुगतान किया गया है तथा ग्रेड ।।, ।।। में डब्लू बी एम कार्य में यूसिंग स्क्रीनिंग टाइप बी (11.2 एम एम एग्रीगेट) से किया जाना था लेकिन ऐसा न करके मुरूम से डब्लू बी एम किया गया है और भुगतान यूसिंग स्क्रीनिंग टाइप बी (11.2 एम एम एग्रीगेट) का लिया गया है जो अधिक है। इसमें रोड निर्माण के बगल से निकले पत्थ्ररों से गिट्टी तुड़वाई गई है जिससे राजस्व की छति हुई है।

8 इन मार्गो में जितनी भी पुलिया बनाई गई है उसमें हेण्ड ब्रोकन 40 एम एम एवं 60 एम एम साइज की मेटलका उपयोग किया गया है जो कलि गिट्टी एवं क्रेसर गिट्टी नहीं है जबकि प्राक्कलन के प्रावधान के अनुसार 40 एम एम डाउन क्रेसर मेटल का उपयोग किया जाना चाहिए था लेकिन ठेकेदार ने ऐसा नहीं किया तथा पुलियों में अपर साइड एवं डाउन साइड पर एप्रान बनाने एवं पिचिंग का प्रावधान है और वह भी नहीं किया गया है और अपनी मनमर्जी के अनुसार उपयंत्री श्री बी पी तिवारी एवं सहायक यंत्री श्री आर वाय तिवारी से माप दर्ज कराकर फ र्जी भुगतान किया है जो अनियमितता की श्रेणी में आता है।

9 बड़ा मेटल जो ग्रेडेशन में नहीं है उसका प्रयोग किया जा रहा है।

10 स्क्रीनिंग नहीं डाली जा रही एवं उस पर रोलर भी नहीं चलाया गया है

11 मेटल की क्रशिंग वेल्यू निर्धारित मापदण्ड से कम है।

१२ किसानो के खेतो की उपजाऊ जमीन खोदकर मिट्टी सडक़ निर्माण में लगाई जा रही है जबकि इन किसानो की अनुमति भी नहीं ली गई है।

धमकी मिलने के बाद डी जी पी को लिखा पत्र -


इस कार्य में क्षेत्र के किसानो की बिना अनुमति जमीन खोदकर मिट्टी सडक़ निर्माण में डाली गई है। किसानो के खेतों में लगभग दस फु ट गड्ढे कर दिए हैं। न तो किसानो के ट्रेक्टर और न ही जानवर खेत तक पहुच पा रहे हैं। सडक़ निर्माण में इसी तरह की कई गड़बडिय़ां करी गई हैं जिसकी शिकायत किसानो की तरफ से की गई थी.
जाँच से बौखलाए ठेकदार एवं उसके व्यक्ति राम खिलावन कुम्हार द्वारा ग्राम करहिया में ग्रामीणों के समक्ष मेरे नाम का उल्लेख करते रते गाली गलौज एवं प्राणघातक हमला की धमकी दी गई। इसके पहले भी अन्य माध्यमों से भी धमकी भरा संदेश दिया गया।
कुम्हार द्वारा कहा गया की जब हम करोडो का ठेका ले सकते है तो हमारा विरोध करने वालो को ठिकाने लगाने में हमें कोई मुश्किल नहीं है.



पीडि़तकिसानो के नाम
1 श्रीमति जनक दुलारी अग्रवाल
2 ओमकार अग्रवाल
3 गनेश अग्रवाल
4 रामसनेही पटैल
5 मगना पटैल
6 भाकदु पटैल
7 चिक्कू पटैल, खाम
8 रमेश पटैल
9 सुरेश आदिवासी, करहिया
10 पुसउ पटैल खाम
11 गोकुल पटैल
12 हलकी बाई
13 गिरिजाबाई
14 दांदी पटैल
15 वीरचंद पटैल, पटेहरा सरपंच

07 November, 2011

पि डब्लू डी विभाग में चल रही मनमानी



कटनी जिले में पि डब्लू डी विभाग में चल रही मनमानी का यदि प्रमाण देखना हो तो इस समय रीठी तहसील में चल रहे सड़क निर्माण कार्य को देखकर भ्रष्टाचार का अंदाजा लगाया जा सकता है.

कार्यपालन यंत्री लो.नि.वि. संभाग कटनी के अंतर्गत उपसंभाग क्रमांक . 2 कटनी के अधीन निर्माणाधीन मोहास-कठौतिया-गोदाना मार्ग तथा मोहस बरजी पाली मार्ग में लोक निर्माण विभाग द्वारा ठेकेदारी प्रथा से हो रहा है। इस मार्ग में ढेर सारी अनियमितताएं की जा रही हैं। प्राक्कलन (एस्टीमेट) के प्रावधान से हटकर कार्य किया गया है इसमें ठेकेदार एवं विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री एच.एल. वर्मा जो की ठेकदार के पार्टनर लोकायुक्त में रेड हेन्देद पकडे जाने पर निलंबित सहायक यंत्री रामखिलावन कुम्हार के मित्र हैं, जो कटनी संभाग में संलग्र है दोनों मिलकर इस कार्य को करा रहे है. इस कार्य को लारेंस लायर निर्माण एजेंसी एवं भाग्यश्री एजेंसी को निर्माण एजेंसी बनाया गया है.
जब अखिकारी ही ठेकेदार के साथ मिलकर ठेकेदारी करेगे तो कार्य की गुणवत्ता एवं कार्य कहा तक सहीं होगा इस पर प्रश्रचिन्ह लगता है। अत: उपरोक्त मार्गों में निम्र बिन्दुओं पर जांच की मांग आर टी आई अक्तिविस्त अखिलेश उपाध्याय ने की है -
1 कन्सट्रक्सन आफ एमबाकर्मेन्ट में सेलेक्टेड या एप्रूव्ड स्वायल का उपयोग किया जाना था जिसकी सी बी आर ग्रेटर देन पाँच होनी चाहिए थी लेकिन ठेकेदार एवं विभाग के अधिकारियों ने मिलकर लोकल स्वायल एवं ब्लेक काटन स्वायल का उपयोग किया है जो प्राक्कलन के अनुसार गलत हैं इसमें वाइब्रेटर रोलर का उपयोग नहीं किया गया है इस कार्य में स्थानीय स्वायल का उपयोग कर सिलेक्टेल स्वायल का भुगतान किया है जो अनियमितता की श्रेणी में आता है।

2 जी एस बी कार्य में ग्रडिंग नं ।।। का मटेरियल उपयोग किया जाना चाहिए था लेकिन isme लोकल मुरूम का उपयोग किया गया है. मानक स्तर की जी एस बी मटेरियल का उपयोग नहीं किया गया है। प्राक्कलन के अनुसार जीएसबी की थिकनेस 300 एम एम होना चाहिए था लेकिन ठेकेदार द्वारा विभाग की मिलीभगत से मात्र 150 एम एम थिकनेस की मुरूम डाली गई है और भुगतान 300 एम एम थिकनेस का लिया गया है इसमें ठेकेदार एवं विभाग द्वारा मिलकर शासकीय राशि का दुरूपयोग कर अनियमितता की है।

3 मार्ग चौड़ीकरण में ग्रेडिंग नं. 1 डब्लू बी एम में 45 से 90 एम एम साइज की मेटल का उपयोग किया जाना चाहिए था लेकिन ठेकेदार द्वारा 150 से 200 एम एम साइज के पत्थरों-बोल्डरो का उपयोग किया गया है जिससे कार्य की गुद्वात्ता त्त प्रभावति होती है और जो प्राक्कलन के विपरीत है।

4 मार्गों में ग्रेडिंग नं. ।। को दो कोट किये जाने का प्रावधान प्राक्कलन में लिया गया है जबकी एक ही कोट ग्रेडिंग ।। का किया gya है जो 0.075 मी. की थिकनेस का है और 0.15 मी.की थिकनेस को एम बी में चढ़ाकर भुगतान किया गया है चीफ इंजीनियर (म.क्षे.) लो.नि.वि. जबलपुर द्वारा विगत दिनों मार्ग का निरीक्षण किया गया था निरीक्षण के दौरान चीफ इंजीनयिर ने डब्लू बी एम के ग्रेडिंग नं. ।। में माप पुस्तिका में दर्ज की गई थिकनेस से कम थिकनेस पाई थी जिसका उल्लेख श्री दुबे चीफ इंजीनियर द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है। जो स्वयमेव जाँच है अत: व्यापक स्तर पर अनियमितता की गई है जो भ्रष्टाचार की श्रेणी में आती है।

5 मार्ग में जिन स्थानों पर सी सी मार्ग का कार्य कराया जाना था उसमें सबसे पहले प्राक्क्लन के प्रावधान के अनुसार डब्लू बी एम ग्रेडिंग नं तीन की सिंगल कोट किया जाना प्रस्तावित है लेकिन बिना डब्लू बी एम ग्रेडिंग नं तीन किये सी सी मार्ग का निर्माण कर दिया गया एवं ग्रेडिंग नं तीन का भुगतान कर उतनी राशि का आहरण किया है।

इस संबंध में उपयंत्री श्री तिवारी को मझगंवा ग्राम के निवासियों ने फोने पर सूचना देकर अनियमितता की मौखिक शिकायत की तथा मौके पर श्री तिवारी पहुंचे और जांच का आश्वासन भी दिया तथा कहा की सी सी उखड़वाकर दूसरी बनवा देंगे लेकिन फिर पलटकर उनने कोई सुध न ली ।

6 सी सी मार्ग निर्माण के दौरान सी सी कार्य करने से पूर्व मार्ग की साफ-सफाई कर प्लास्टिक बिछाई जाती है और उसके बाद एम 10 कंक्रीट से 100 एम एम थिकनेस की कंक्रीट फि र एम 40 ग्रेड की कंक्रीट से 225 एम एम थिकनेस की कंक्रीट जो प्राक्कलन के प्रावधान में है लेकिन ठेकेदार द्वारा बिना मार्ग की साफ सफाई कराये , बिना प्लास्टिक बिछाए एम 10 की कंक्रीट जो 150 एम एम थिकंस में 40 एम एम मेटल से कार्य किया गया है एवं इसके ऊपर एम 40 ग्रेडकी कंक्रीट जो एम 20 से 70 एम एम थिकनेस से कराया गया है सी सी मार्ग के दोनेांकिनारों पर दिखाने के लिए एम 20 की कंकीत से किनारे भर दी है जिसकी थिकनेस 220 एम एम दिख रही है अत: पूरी कंक्रीट मार्ग की थिकनेस 220 एम एम की गई है और 0.10एम-10 एम एवं 0.20 एम-एम 40 ग्रेड की कंक्रीट का माप दर्ज कर भुगतान लिया गया है जो अनियमितता की श्रेणी में आता है। यह कार्य गाँव में किया गया है।

7 डब्लू बी एम के कार्य हेतु जो भी मेटल प्रयोग की जा रही है वह कच्ची गिट्टी है इसमें कलि गिट्टी का उपयोग किया जाना था लेकिन कलि गिट्टी के स्थान पर कच्ची गिट्टी का उपयोग किया गया है औरकलि गिट्टी के रेट का भुगतान किया गया है तथा ग्रेड ।।, ।।। में डब्लू बी एम कार्य में यूसिंग स्क्रीनिंग टाइप बी (11.2 एम एम एग्रीगेट) से किया जाना था लेकिन ऐसा न करके मुरूम से डब्लू बी एम किया गया है और भुगतान यूसिंग स्क्रीनिंग टाइप बी (11.2 एम एम एग्रीगेट) का लिया गया है जो अधिक है। इसमें रोड निर्माण के बगल से निकले पत्थ्ररों से गिट्टी तुड़वाई गई है जिससे राजस्व की छति हुई है।

8 इन मार्गो में जितनी भी पुलिया बनाई गई है उसमें हेण्ड ब्रोकन 40 एम एम एवं 60 एम एम साइज की मेटलका उपयोग किया गया है जो कलि गिट्टी एवं क्रेसर गिट्टी नहीं है जबकि प्राक्कलन के प्रावधान के अनुसार 40 एम एम डाउन क्रेसर मेटल का उपयोग किया जाना चाहिए था लेकिन ठेकेदार ने ऐसा नहीं किया तथा पुलियों में अपर साइड एवं डाउन साइड पर एप्रान बनाने एवं पिचिंग का प्रावधान है और वह भी नहीं किया गया है और अपनी मनमर्जी के अनुसार उपयंत्री श्री बी पी तिवारी एवं सहायक यंत्री श्री आर वाय तिवारी से माप दर्ज कराकर फ र्जी भुगतान किया है जो अनियमितता की श्रेणी में आता है।

9 बड़ा मेटल जो ग्रेडेशन में नहीं है उसका प्रयोग किया जा रहा है।

10 स्क्रीनिंग नहीं डाली जा रही एवं उस पर रोलर भी नहीं चलाया गया है

11 मेटल की क्रशिंग वेल्यू निर्धारित मापदण्ड से कम है।

१२ किसानो के खेतो की उपजाऊ जमीन खोदकर मिट्टी सडक़ निर्माण में लगाई जा रही है जबकि इन किसानो की अनुमति भी नहीं ली गई है।

03 November, 2011

कटनी . राज्य शिक्षा केन्द्र के निर्देश पर सर्व शिक्षा अभियान के तहत जिले के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। आरएसके ने कटनी जिले में 948 शौचालयों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की
है। इसमे प्राथमिक विद्यालयों में 639 और माध्यमिक विद्यालयों में 288 शौचालय शामिल है। उधर दूसरी तरफ आरएसके ने
स्वीकृति शौचालयों के निर्माण की प्रगति की जानकारी विभाग की पोर्टल पर दर्ज नहीं करने पर नाराजगी व्य त करते हुए
जिला परियोजना समन्वयक को प्रगति की जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों को खुले में शौच के लिए नहीं जाना पड़े, इसको ध्यान में रखते हुए सर्व शिक्षा अभियान के तहत जिले के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शौचालयों का निर्माण कराए जाने की योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत आरएसके से मिलने वाली राशि से प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। वर्ष
2009 से लेकर अब तक अधिकांश स्कूलों में इन शौचालयों का निर्माण कार्य कराया जा चुका है लेकिन शौचालय निर्माण
की प्रगति की जानकारी एजुकेशन पोर्टल पर अंकित नहीं की जा रही है। जानकारी के अनुसार राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर
मिशन संचालक ने जिला परियोजना समन्वयक को भेजे गए पत्र में कहा है कि सर्व शिक्षा अभियान से स्वीकृत शौचालय
निर्माण की प्रगति को पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।

इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में भी बार-बार यह निर्देशित किया गया था कि स्वीकृत शौचालय की प्रगति की जानकारी दी जाए लेकिन जिले द्वारा उ त जानकारी नहीं दी जा रही है। बताया जाता है कि वर्ष 2009-10 और वर्ष 2011-2012 में कटनी
जिले में प्राथमिक विद्यालयों में 632 शौचालय निर्माण का लक्ष्य दिया गया था, जिसमे आरएसके के पास एक भी शौचालय के निर्माण की जानकारी नहीं है, जबकि 118 शौचालयों की जानकारी लंबित है। अभी मिली स्वीकृति -डीपीसी इस संबंध में जब जिला परियोजना समन्वयक वीरेन्द्र पाण्डेय से बात की गई तो उनका कहना था कि आरएसके द्वारा जिले में 639 प्राथमिक विद्यालयों और 288 माध्यमिक विद्यालयों में शौचालय निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। आरएसके की स्वीकृति मिलने के बाद स्कूलों में जल्द ही यह निर्माण कार्य शुरू होंगे। संभावना है कि दिस बर के पहले इसको पूरा कर लिया जाएगा।