28 December, 2011

रीठी में लोकायुक्त का छापा

अन्ना का असर देश में दिखने लगा है. अब भ्रष्टाचारियो की खैर नहीं. देश के लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ न केवल बोल रहे है बल्कि रिश्वतखोरों को भ्रष्टाचार विरोधी संगठनों में शिकायत करके रंगे हाथो पकड़ा रहे है
ऐसा ही एक मामला रीठी तहसील में लोकायुक्त की टीम ने छापा मारकर स्वास्थ्य विभाग के एकानुतेंत को रंगे हाथो पकड़ा. जबलपुर लोकायुक्त के दल ने रीठी सामुदय्की स्वास्थ्य केंद्र में नर्ष के पद पर कार्यरत उमा यादव की शिकायत पर लेखपाल एस के बनर्जी को रीठी स्टेट बेंक के सामने ही रंगे हाथो रिश्वत लेते पकड़ लिया.
लोकायुक्त टीम का नेतृत्व कर रहे डी इस पी ऍन एस धुर्वे ने बताया की उमा यादव ने लोकायुक्त को शिकायत की थी की उससे एकाउटेंट मुखर्जी ने काम कराने के एवज में ८५ हजार रूपये की मांग की. अनुनय विनय करने पर मुखर्जी से पचास हजार में मामला तय हुआ
तय कार्यक्रम के मुताबिक आज उमा यादव को बीस हजार रूपये पहली किश्त के रूप में देने थे. जब नर्स लेखापाल को पैसे दे रही थी तभी लोकायुक्त की टीम ने मुखर्जी को रंगे हाथो दबोच लिया.




हासिल जानकारी के अनुसार उमा यादव जबसे स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ हुई तबसे उनका एरियास बकाया था. लम्बी लड़ाई के बाद उमा के खाते में ५.९० लाख रूपये बतौर एरियास आया. एरियास के मामले को निबटाने तथा अपना हिस्सा माग रहे लेखापाल मुखर्जी उमा के पीछे पड़े थे व वे अपना कमीह्सन मांग रहे थे .
लेकिन जो राशी मुखर्जी उमा सिस्टर से माग रहे थे वह बहुत ज्यादा थी. अंत में आपने वादे के मुताबिक आज जब उमा बेंक में रिश्वत का बीस हजार रूपये देने पहुची उसी समय पहले से तैनात लोकायुक्त टीम ने मुखर्जी को धर दबोचा.
लोकायुक्त दल में डी इस पी ऍन एस धुर्वे, इन्पेक्टर मधुरेश पचोरी, शैलेन्द्र गोहिल, नंदलाल धुर्वे, जाहर सिंह आरक्षक, रामजी, राकेश आरक्षक ड्राइवर, पी डब्लू डी एस डी ओ जे के तिवारी, बी डी घोष ऐ डी सहकारिता विभाग

23 December, 2011

अ हरिजन आदिवासी छात्रावासों के हाल-बेहाल
कटनी । जिले के बतीस अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्रावासों में स्थिति दिनों दिन बद् से बद्तर होती जा रही। इन छात्रावासों में रहने वाले छात्र छात्राओं को न तो भरपेट भोजन मिलता है न ही उनकी अन्य सुविधाओं का
ध्यान रखा जाता है। छात्रावासों में छात्र छात्राओं की फर्जी उपस्थिति दर्शाकर शासन से मिलने वाले बजट में हेराफेरी की जाती है। इन छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने आदिम जाति कल्याण विभाग के उच्चाधिकारियों तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इन छात्रावासों की जांच किये जाने की मांग की है।

एक जानकारी में बताया गया कि बहोरीबंद तहसील के अंतर्गत स्लीमनाबाद में कस्तूरबा गांधी छात्रावास संचालित है। जो केवल छात्राओं के लिये है इसके अलावा बाकल में बालिका छात्रावास है जिसका संचालन सर्वशिक्षा अभियान के तहत किया जाता है। बहोरीबंद तहसील मु यालय में कन्या छात्रावास है खण्डस्तरीय इस छात्रावास का संचालन राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा
अभियान के तहत किया जाता है बहोरीबंद में ही अनुसूचित जाति छात्रावास, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास एवं अनुसूचित जाति जनजाति बालिका छात्रावास भी संचालित है। कूडऩ एवं बचैया में भी छात्रावास संचालित है इन सभी छात्रावासों में कमोबेश एक जैसी स्थिति है। जानकारी में बताया गया कि इन छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं भोजन के लिये 750 रूपये मासिक प्रत्येक छात्र-छात्रा के हिसाब से राशि प्रदान की जाती है। इसकी आधी राशि भोजन में खर्च नहीं की
जाती। रोटी तो कभी कभी नसीब होती है दाल एवं स जी भी अत्यंत घटिया स्तर की रहती है। छात्र-छात्राओं द्वारा इसकी शिकायत किये जाने पर उन्हें छात्रावास से बाहर कर देने की धमकी दी जाती है।

इसी तरह रिती तहसील के जालासुर आदिवासी आश्रम शाला की हालत भी बड़ी दयनीय है. यहाँ पचास सीटर छात्रावास में पांच आलू दो प्याज की सब्जी banaayee जा रही थी.नीची के chitr में पचास सीटर हास्टल के नज़ारे आप स्वयं देख सलते है



भोजन के अलावा छात्र छात्राओं को तेल, साबुन, चाय-नाश्ता, आदि के लिये अलग से राशि प्रदान की जाती है। यहां एक साबुन का उपयोग पूरे छात्रावास के छात्र-छात्राओं को करना पड़ता है। शिकायत में यह भी बताया गया कि छात्रावासों में प्राय: आसपास के ग्रामों में रहने वाले बच्चों को रखा जाता है। दूरदराज के ग्रामीण अंचलों से आने वाले बच्चों को यहां प्रवेश नहीं दिया जाता। आस-पास के ग्रामों के बच्चों को छात्रावासों में रखे जाने के पीछे मंशा यही रहती है कि अधिकांश छात्र शाला के बाद अपने घरों में चले जाते है। प्राय: शनिवार को सभी छात्र अपने घर चले जाते है जो सोमवार को वापस आते है। छात्रावासों के संचालन एवं व्यवस्था की जि मेदारी वार्डन, चौकीदार, pradhaan रसोईया एवं सहायक रसोईया आदि की होती है पर इनके द्वारा अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया जाता। छात्रावास में जितने छात्र-छात्राऐं उपस्थित रहते है। उनसे कहीं अधिक की उपस्थिति दर्ज कर हिसाब किताब में हेराफेरी की जाती है। उच्च अधिकारियों द्वारा यहां मॉनीटरिंग के लिये मॉनीटरों की niyuktee की गई है पर वे कभी यहां जांच पड़ताल के लिये नहीं आते। कभी कोई जांच हुई भी तो वह मात्र दिखावे की कार्यवाही रहती है। छात्र छात्राओं के अभिभावकों ने जिला कले टर समेत आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक एवं जिला शिक्षा अधिकारी से इन छात्रावासों में व्याप्त अनियमि ाओं की जांच किये जाने तथा दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही किये जाने की मांग की गई

20 December, 2011

गरीबों की योजनाओं का लाभ अमीरों को

बहोरीबंद जनपद क्षेत्र की 79 ग्राम पंचायतों में नव बर माह तक गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों की सं या 25 हजार तक पहुंच गई है। ये 25 हजार परिवार गरीबी रेखा की सूची में शामिल है। बताया गया कि गरीबी रेखा की सूची में शामिल इन परिवारों में से आधे से भी ज्यादा परिवार ऐसे है जो गरीबी रेखा के दायरे में नहीं आते। बावजूद इसके वे गरीब बनकर
शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा रहे। जबकि ऐसे हजारों गरीब परिवार है जो पात्र होने के बावजूद गरीबी रेखा की सूची में शामिल नहीं किये गये। एक शिकायत में बताया गया कि ग्राम पंचायतों में सरपंच एवं सचिवों द्वारा अपने चहेतों लोगों का नाम गरीबी रेखा सूची में दर्ज करा दिया जाता है।

राजस्व एवं अन्य विभागों के अधिकारी, कर्मचारी जिन्हें गरीबी रेखा सूची तैयार करने की जि मेदारी सौंपी जाती है वे बिना किसी जांच पड़ताल अथवा भौतिक सत्यापन के ही सरपंच सचिवों की सिफारिश के आधार पर परिवारों का नाम गरीबी रेखा सूची में दर्ज कर लेते हैं शिकायत में यह भी बताया गया कि अगर गरीबी रेखा सूची का वास्तव में निष्पक्ष तरीके से भौतिक सत्यापन
किया जाये तो ऐसे सैकड़ों लोग मिलेंगे जिनके पास न केवल प के मकान है बल्कि दुपहिया, चार पहिया वाहन एवं ट्रे टर भी है। उनके नाम पर कई- कई एकड़ जमीन भी है जहां वे कृषि कार्य करते है। राज्य शासन द्वारा गरीबी रेखा सूची में आपात्रों के नाम पाये जाने पर उनके विरूद्ध पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कराने तक के निर्देश जिला कले टरों को दिये गये थे।
कले टर की ओर से कटनी में भी उ त आशय के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये थे पर अधिकारियों ने उ त आदेशों का पालन नहीं किया। जिसके कारण आज भी जनपद क्षेत्र में हजारो गरीब नागरिक शासन की योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित है उनकी जगह स पन्न लोग अपात्र होते हुये भी गरीबों के लिये संचालित योजनाओं का लाभ उठा रहे है। क्षेत्रवासियों का
कहना है कि प्रत्येक पंचायत की गरीबी रेखा सूची का भौतिक सत्यापन किया जाये तथा अधिकारी कर्मचारी मौके पर जाकर जांच कर्रें। ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

अब तक नहीं बनी थी सड़क

गौण खनिज की राशि से होगा निर्माण
जनपद पंचायत रीठी में विकास की धारा में एक और कड़ी जोड़ते हुए जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रीति सिंह ने ग्राम पंचायत रैपुरा में सीसी रोड का भूमिपूजन किया। वर्ष 2010-11 के लिए आवंटित गौण खनिज की राशि से ढाई लाख की लागत से रैपुरा में यह सड़क बन रही है। भूमि पूजन में एकत्रित ग्रामीणों में से एक राम गरीब सेन ने बताया कि आज तक इस ग्राम में सांसद, विधायक एवं जनपद निधि से कोई भी विकास कार्य नहीं कराए गए हैं। जनपद अध्यक्ष ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा
अर्चना करते हुए गेती चलाकर भूमि पूजन किया।


इस अवसर पर जनपद सदस्य बाराती कोल, मुंडी बाई, रामचरण चौधरी, सरपंच सुधाकर मिश्रा, सुखीलाल, बाबूलाल चौधरी, रामदयाल कोल, कल्लू चौधरी, झुल्लूराम सेन, श्यामलाल कोल, मिट्ठूलाल कोल, लाल दाहिया, अनिल परौहा, रघुनाथ कोल आदि उपस्थित रहे।

तीन महीने से नहीं मिली पेंशन
उपस्थित ग्रामीणों ने जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह को बताया कि उन्हें तीन महीनों से पेंशन नहीं मिली है। पेंशन की समस्या को लेकर भारी तादाद में वृद्ध महिलाए एवं पुरूष सभी की एक ही मांग थी कि पेंशन समय पर यों नहीं दी जा रही। जनपद अध्यक्ष
प्रीति सिंह ने रीठी सीईओ एवं जिला पंचायत सीईओ से तत्काल चर्चा कर पेंशन भुगतान करने का आश्वासन दिया

नहीं बजती घंटी...

अपने गौरवपूर्ण इतिहास को समेटे रीठी का हाई स्कूल आज अपनी दुर्दशा पर स्वयं व्यथित है. अब भले ही इस विद्यालय जो उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा दे दिया गया हो लेकिन यह विद्यालय अब नाम मात्र का उत्कृष्ट है जबकि जब यह साधारण हायर सेकंडरी विद्यालय था तब यहाँ के शिक्षक और विद्यार्थी अपनी मेहनत और लगन से कम संसाधनों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे थे.
आज दिनांक २०.१२.२०११ को इस स्कूल की दुर्दशा को देख मुझे बड़ा दुःख हुआ. साधे दस बजे मै जब स्कूल परिषर में घुसहा तो पूरे मैदान में बच्चे कई समूहों में खड़े थे. प्रधानाचार्य का कही अत पता नहीं था. विद्यार्थियों से पूछने पर पता चला की इस समय परीक्षा चल रही है और परीक्षा का समय है सुबह १०.३० से

मै बहुत देर तक घंटी बजने की बात जोहता रहा
११.१५ पर कुछ हलचल सी होती दिखी. मास्टर हाथ में कापिया लेकर कमरों की और बढ़ रहे थे. मैंने देखा बच्चे धीरे-धीरे कमरों में जाकर अपनी जगह पर बैठ रहे थे क्योकि उनको परीक्षा की कापिया बाती जा रही थी.

लेकिन घंटी अभी भी नहीं बजी थी...और न ही प्रार्थना हुई थी.



बच्चो से पूछने पर पता चला की ऐसा तो इस स्कूल में हमेशा होता है. कभी कभी तो ११.३० पर प्रार्थना होती है

स्वयं प्रिंसिपल १२.०० बजे बस से पहुची. जब संस्था प्रमुख ही देर से पहुचेगा तो भला फिर स्टाफ के शिक्षक कैसे समय पर पहुचेगे.

रीठी उत्कृष्ट विद्यालय के हाल बेहाल है .

03 December, 2011

एसीसी से परेशान कलहरा के ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

कटनी विजयराघवगढ़ जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कलहरा के पंच सरपंच एवं ग्रामीणों ने एसीसी उद्योग से
संबंधित समस्याओं का निराकरण नहीं किये जाने पर आगामी 7 दिस बर से धरना आंदोलन की चेतावनी दी है इस संबंध में
सरपंच एवं ग्रामीणों द्वारा एक ज्ञापन गत दिवस जिला कले टर को सौंपा गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ज्ञापन में कहा गया है कि कलहरा ग्राम की खसरा नं. 21 की जो भूमि चरोखर के मद में दर्ज थी उसमें एसीसी द्वारा अवैध उत्खनन कराया जा रहा पर साथ ही पत्थर गिटटी डालकर भूमि को नष्ट किया जायेगा। कलहरा के मु य मार्ग पर कंपनी के भारी वाहन गुजरते है जिससे धूल मिटटी आदि उड़ती है तथा गांव में प्रदूषण की समस्या पैदा हो गई है। कन्वेयर बैल्ट के नीचे तारों की बाड़ लगा देने से ग्रामीणों एवं मवेशियों का पहाड़ों की ओर आवागमन पर रोक लग गई है। सड़क से लगे पहाड़ी नाले पर मिट्टी डालकर नाला
अवरूद्ध कर दिया गया । जिसके कारण बारिश का पानी सड़क पर बहता है। ग्रामीण मार्ग पर भारी वाहनों के चलने से शासन द्वारा तैयार किया गया मार्ग अवरूद्ध हो रहा। कंपनी द्वारा उत्खनन के दौरान हैवी लास्टिंग कराई जाती है। जिससे ग्रामीणों के मकानों को क्षति पहुंच रही साथ ही जल स्तर भी नीचे जा रहा। ग्रामीणों ने उ त समस्याओं के निराकरण की मांग करते हुये कहा है कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं किया जाता तो ग्रामीणआगामी 7 दिस बर से धरने पर बैठेंगे जिसकी सारी जि मेदारी शासन प्रशासन एवं एसीसी उद्योग की होगी