20 December, 2011

नहीं बजती घंटी...

अपने गौरवपूर्ण इतिहास को समेटे रीठी का हाई स्कूल आज अपनी दुर्दशा पर स्वयं व्यथित है. अब भले ही इस विद्यालय जो उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा दे दिया गया हो लेकिन यह विद्यालय अब नाम मात्र का उत्कृष्ट है जबकि जब यह साधारण हायर सेकंडरी विद्यालय था तब यहाँ के शिक्षक और विद्यार्थी अपनी मेहनत और लगन से कम संसाधनों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे थे.
आज दिनांक २०.१२.२०११ को इस स्कूल की दुर्दशा को देख मुझे बड़ा दुःख हुआ. साधे दस बजे मै जब स्कूल परिषर में घुसहा तो पूरे मैदान में बच्चे कई समूहों में खड़े थे. प्रधानाचार्य का कही अत पता नहीं था. विद्यार्थियों से पूछने पर पता चला की इस समय परीक्षा चल रही है और परीक्षा का समय है सुबह १०.३० से

मै बहुत देर तक घंटी बजने की बात जोहता रहा
११.१५ पर कुछ हलचल सी होती दिखी. मास्टर हाथ में कापिया लेकर कमरों की और बढ़ रहे थे. मैंने देखा बच्चे धीरे-धीरे कमरों में जाकर अपनी जगह पर बैठ रहे थे क्योकि उनको परीक्षा की कापिया बाती जा रही थी.

लेकिन घंटी अभी भी नहीं बजी थी...और न ही प्रार्थना हुई थी.



बच्चो से पूछने पर पता चला की ऐसा तो इस स्कूल में हमेशा होता है. कभी कभी तो ११.३० पर प्रार्थना होती है

स्वयं प्रिंसिपल १२.०० बजे बस से पहुची. जब संस्था प्रमुख ही देर से पहुचेगा तो भला फिर स्टाफ के शिक्षक कैसे समय पर पहुचेगे.

रीठी उत्कृष्ट विद्यालय के हाल बेहाल है .