08 January, 2011

मुझे अन्दर से तो डर लग रहा था

मेरी पहली हवाई यात्रा
ढाना सागर में आयोजित शिव पुराण में कथा श्रवण हेतु में एक दिन बाद पंहुचा. हमारे मित्र दीपक तिवारी जो द वीक साप्ताहिक पत्रिका के मध्य प्रदेश छतीसगढ़ के प्रमुख संबाददाता है, ने अपने गृह ग्राम ढाना  में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सप्त दिवसीय सत्संग का आयोजन किया.

वृन्दावन धाम से आये आचार्य व्रजपाल शुक्ल जी द्वारा शिव तत्व का मार्मिक विवेचन किया गया. इस कथा के श्रवण के लिए मध्य प्रदेश के कई बड़े प्रमुख पत्रकार एवं राजनेता  भी पहुचे.

शिव वारात का नजारा तो देखने लायक था.  भूत प्रेत, पिसाच, लंगड़े-लूले तथा बिलकुल सच का साप लटकाए हुए इन बरातियो को देख श्रोता भाव विभोर रह गए और या द्रश्य  शिव की वास्तविक बारात का चित्रण कर रहे थे.

ब्रह्म नगरी ढाना  में सत्तर प्रतिशत ब्रह्मण निवास करते है.
यहाँ पर चिम्स कंपनी द्वारा पायलटो के प्रशिक्षण हेतु ट्रेनिंग सेंटर भी खुल गया है. हमारे निवास के ऊपर से दिन भर उड़ने वाले छोटे विमान देख कौतूहल होता था.
2011 की सुबह दीपक तिवारीजी  ने इन विमानों को उड़ते देख मुझसे पूछा की क्या इसमें घूमना चाहते हो ? मैंने तत्काल अपनी इच्छा जताई



फिर इस दो सीट वाले विमान में घूमने का अवसर मिला. केरल के एक प्रशिक्षु पायलट द्वारा यह विमान उड़ाया जा रहा था. चूकी यह छोटा विमान है इसलिए जब भी झटके लगते तो दिल में अजीब सी हलचल होती. एक मीठी हलचल ह्रदय में उतरने तक चलती रही.

हवा में पहुचने पर पायलट ने मुझसे पूछा - सर कैसा महसूस कर रहे हो  ? यद्यपि मुझे अन्दर से तो डर लग रहा था लेकिन प्रगट में मैंने अपनी हिम्मत न टूटने की बात को जताते हुए कहा की बहुत ही बढ़िया लग रहा है.

ठेकेदार द्वारा मनमानी

शासकीय भवनों के निर्माण में इस कदर भ्रस्टाचार व्याप्त है की ठेकेदार सिर्फ और सिर्फ अपना लाभ ही देख रहे है. सिविल ईन्जिनिअरिन्ग के नियम कायदों को ताक पर रख कर जिले में ठेकेदार निर्द्वंद होकर काम कर रहे है. कम समय में करोडपति बन्ने के चक्कर में आज की पीढी देश के साथ छलावा कर रही है और विकास को  भ्रस्टाचार निगल रहा है.

रीठी तहसील मुख्यालय में निर्माणाधीन तहसील भवन के निर्माण में ठेकेदार द्वारा हद दर्जे की मनमानी की जा रही है. पी डब्लू डी द्वारा ठेकेदार के माध्यम से बन रहे इस भवन में ठेकेदार का नाम, लागत आदि का बोर्ड नहीं लगाया गया है.





स्थल पर निकल रहे पत्थर को ही मजदूरों से तुड़वाकर दीवारे चुनवाई जा रही है. इसी घटिया पत्थर को बड़ी संख्या में मजदूर लगाकर तुडाई  कराई जा रही है. और फिर  इसी गिट्टी से बीम और नीव भरी जा रही है.

यहाँ लगने वाला लोहा घटिया स्तर का तथा इसके बीम में लगने वाले लोहे की स्पेसिंग भी अधिक की जा रही है जो सिसिल ईन्जिनिअरिन्ग के नियमो के विरुद्ध है.

यहाँ  काम कर रहे मजदूरों में बहुत से नाबालिग बच्चे भी काम कर रहे है जो की बाल मजदूरी अधिनियम का उपहास उड़ा रहा  है.

इस प्रकार तहसील  मुख्यालय में चल रहे इस भवन निर्माण कार्य में किये जा रहे गड़बड़ घोटाले  से पी डब्लू डी विभाग के ईन्जिनिअर और आला अधिकारियो को कोई लेना देना नहीं है क्योकि वे तो पहले ही लेकर बैठ गए है. जनता के पैसे को टेक्स के रूप में लादकर महगाई तो बढाई जा रही है लेकिन कटनी जिले में उसी पैसे से विकास के नाम पर चल रहे काम पर ध्यान देने की बजाय अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार खुली लूट मचाये है.
जनता की उदासीनता और मक्कार ठेकेदार तथा कुम्भ्करनी नीद में सो रहे कटनी जिला प्रशासन के चलते जिले में जमकर लूट और भ्रस्टाचार व्याप्त है.