14 January, 2011

ग्रामीण घर मालिको को अपने घरो के स्वामित्व के प्रमाण पत्र प्रदान किये जायेगे.

शासन के नए नियमानुसार अब ग्रामीण घर मालिको को अपने घरो के स्वामित्व के प्रमाण पत्र प्रदान किये जायेगे. इस प्रमाणपत्र के आधार पर ग्रामीणों को अपने घरो की गारंटी पर भी ऋण प्राप्त हो सकेगा. ज्ञातव्य है की अभी तक गावो में भले ही ग्रामीणों के विशाल आवास हो लेकिन इन पुश्तैनी या नवीन घरो के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उनके पास नहीं होते थे. जिससे वे इनके आधार पर ऋण आदि प्राप्त नहीं कर पाते थे.

शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार ग्रामो में स्थित आबादी भूमि पर बने घरो को राजस्वा पुस्तिका में दर्ज कर अब ग्रामीण गृह स्वामियों को इस आशय के प्रमाण पत्र प्रदान किये जायेगे. इन प्रमाण पत्रों के आधार पर किसान ग्रामो में स्थित अपने घरो के वैधानिक स्वामी माने जायेगे और इसी आधार पर इन्हें इन घरो पर ऋण भी प्राप्त हो सकेगे.

प्रमाण पत्रों पर मिल सकेगा ऋण
ग्रामो में निवासरत ग्रामीण अपने भू खंड पर आवास निर्माण करने अथवा अर्ध्पक्के या कच्चे मकान का जीर्णोद्धार या उन्नयन करने के लिए किसी बैंक या ऋण प्रदायकर्ता संत्स्था से आवास ऋण लेना चाहते है उन्हें आवास ऋण प्राप्त करने ए लिए ऐसे प्रमाण पत्र पर्याप्त रहेगे ऐसे धारक को प्रमाण पत्र उपलब्द्ध करने के उद्देश्य से निम्न प्रक्रिया निर्धारित की गई है
निम्न दस्तावेज होगे जमा
आवेदक को प्रमाण पत्र के लिए तीन प्रतियों में तहसीलदार को आवेदन कराना होगा. जिसके साठ भूखंड की चतुर्सीमा का विवरण क्षेत्रफल सहित नजरी नक्षा भी प्रस्तुत करना होगा. आवेदक के साठ आवेदक को अपनी स्वहस्ताक्षरित दो फोटो लगाना होगी. इसके अलावा आवेदक के पास भूखंड के अधिकार के सम्बन्ध में यदि कोई दस्तावेज या प्रमाण हो तो वह भी आवेदन के साठ लगाया जाए.

निर्देश में बताया गया है की आवेदक उस ग्राम का खातेदार या शिल्पी है तो यह प्रमाण भी वह उपलब्द्ध कराये.

यह विवरण भी है आवश्यक
आवेदक को २ अक्टूबर १९५९ को आधार तिथि मानते हुए प्रशाधीन भूखंड या आवास के धर्नाधिकार को प्रमाणित करने हेतु उत्तरजीविता क्रम के विवरण भी प्रस्तुत करना होगे. इसके अलावा भूखंड या आवास किसी हस्तांतरण विलेख के आधार पर प्राप्त किया है तो ऐसे हस्तांतरण विलेह की स्वहताक्षारित प्रमाणित छायाप्रति और हस्तान्तारानकर्ता के धारणाधिकार के सम्बन्ध में भी विवरण देना होगा.

इससे एक तो ग्रामीणों को अपने घरो पर वैधानिक अधिकार प्राप्त होगा दूसरे वे इसे प्रमाण पत्र के आधार पर बैंको से ऋण भी प्राप्त कर सकेगे

वृक्षारोपण में करोडो रुपया डकरा

पत्थरो में वृक्षारोपण
महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना के पैसे को ठिकाने लगाने के लिए कटनी जिले के अधिकारियो ने ग्राम पंचायतो को पैसा पानी की तरह बाटा और फिर पलटकर यह भी नहीं देखा की इस पैसे से किये गए काम की उपयोगिता सार्थक भी रही या फिर यह  पैसा व्यर्थ हे बह गया

विगत दिनों जनपद पंचायत रीठी की अध्यक्ष प्रीति सिंह ने अपने निरीक्षण में जनपद पंचायत रीठी में पूर्व में कराये गए वृक्षारोपण पर आश्चर्य जताया. इस वृक्षारोपण की विशेषता है की इसे पत्थरो पर किया गया जो सारा का सारा पैसा व्यर्थ चला गया है.




इन तस्वीरो को देख कर आप भी दंग रह जायेगे. रीठी जनपद पंचायत में इसी तरह से वृक्षारोपण करके सी ई ओ सुरेश झारिया के ज़माने में करोडो रुपया डकरा  गया है.

नव वर्ष में शादियों की धूम

कुवारे नवयुवको एवं नवयुवतियो के लिए वर्ष 2011 खुशनुमा रहेगा, इस वर्ष शादी के अच्छे खासे शुभ मुहूर्त है. जनवरी से दिसंबर तक 49 मुहूर्त है. पंडित इन्द्रपाल शुक्ल,   ने बताया की मलमास 15 जनवरी संक्रांति से समाप्त हो रहा है, 16 जनवरी से विवाह की शुभ तिथिया आरम्भ होगी.

बाजारों में खरीदी  के लिए अभी से ही चहल-पहल दिखाई देने लगी है किराना, कपडा व बर्तन सहित सभी व्यापारियों द्वारा अपना स्टाक पूर्ण कर रखा गया है. उम्मीद है की वर्ष 2011 सभी के लिए अनुकूल रहेगा वही दूसरी ओर शीत लहर से फसलो पर पड़े प्रभाव से शादियों की खरीदी मुख्यरूप से ग्रामीण किसानो  की खरीदी  में फीकापन होने की उम्मीद की जा रही है

जनवरी से मार्च  तक अधिकतर शादिया शहरी क्षेत्रो में है, इससे बाजारों में थोड़ी चहल-पहल रहेगी. ग्रामीण क्षेत्रो के विवाह अप्रेल-मई में अधिक रहेगे. फरवरी-मार्च की शादियों के बीच में बोर्ड व सेमेस्टर परीक्षा होने से विद्यार्थी  को मौज मस्ती का अवसर नहीं मिल सकेगा.

मलमास समाप्त, शुभ कार्य प्रारंभ
पंडित इन्द्रपाल शुक्ल ने बताया की 15 जनवरी 2011 से धनु मलमास समाप्त हो रहा है, मकर राशी में सूर्य के आने से 16 जनवरी से गृह-प्रवेश, विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ होगे. जनवरी से दिसंबर तक कुल 49 शुभ मुहूर्त है. सर्वाधिक शुभ मुहूर्त मई-जून में 98 व 19 दिन दिन रहेगे.

15 मार्च से 14 अप्रेल तक मीन का सूर्य होने से एक माह तक विवाह कार्य बंद रहेगे, उसके पश्चाप 11 जुलाई से देवशयनी एकादशी से शुभ कार्यो पर रोक चार माह के लिए लगेगी, जो पुनः देव प्रबोधनी एकादशी 6   नवम्बर 2011 दिन  रविवार से ख़त्म होगी. उसके बाद सभी शुभ कार्य प्रारंभ होगे.

भूमि हीनो को पट्टे मिले जमीन नहीं

अखिलेश उपाध्याय / कटनी  
सरकार हरिजन आदिवासियों के उत्थान के लिए कितनी भी योजनाये और सुविधाए लागू कर दे लेकिन वास्तविकता की धरातल  पर इस समाज के लोग अभी भी पीड़ित और शोषित है. कटनी जिले में भू माफियाओं के मकडजाल में फस कर हिरजन आदिवासी अपनी जमीन गवा चुके है ऐसा ही एक खुलासा बहोरिबंद तहसील में प्रकाश में आया है.

पीड़ित आदिवासियों का आरोप है की दिल्ली की एक निजी कंपनी से साठगाठ  कर राजस्व अधिकारियो ने गरीबो के हक़ की  लगभग दो सौ एकड़ से अधिक जमीन कंपनी के हवाले कर दी है. सात साल पहले मध्य प्रदेश सरकार की योजना के तहत कौड़िया तथा आसपास के 159 भूमिहीन आदिवासियों को सरकारी जमीनों के पट्टे दिए गए थे.

इन गरीबो के हाथ में आवंटन के कागज़ तो थमा दिए गए लेकिन सात साल में कभी उन्हें जमीन के दर्शन नहीं कराये गए. आज भी गरीब आदिवासी पट्टा लिए अपनी जमीन तलाश रहे है किन्तु इनको जमीन अभी तक भी नहीं मिल सकी है.

पीड़ित आदिवासियों ने बताया इ 2003 में पट्टा देने के बाद अधिकारियो ने न तो कभी जमीन का सीमांकन किया और न ही मौके पर जाकर जमीन बताई. जिससे सरकारी रिकार्ड में वे भूमि के मालिक तो हो गए लेकिन वास्तव में वे अब भी भूमिहीन है.

ग्रामीणों का आरोप है की उनके हिस्से की जमीन दिल्ली  से यहाँ  आकर प्लांटेसन  कर रही एक कंपनी को बेच दी गयी है. पट्टा हासिल करने वाले ग्रामीणों के मुताबिक कुछ लोगो ने अधिकारियो से मिल कर आवंटित जमीन से अधिक पर कब्ज़ा जमा लिया है जबकि लोगो के पास एक इंच जमीन तक नहीं है.

पट्टाधारियों  की सूची में शामिल बड़े कोल, सुखराई, शिवका, दशरथ, भिरचैया, कन्छेदी, बैसाखू, परदेशी, शिवप्रसाद, सुकरू सहित अन्य ने बताया की पटवारी से लेकर तहसीलदार तक के पास कई बार जमीन देने की मांग की जा चुकी है. अधिकारी उन्हें टाल देता है. प्रत्येक भूमिहीन को अधिकतम दो हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी. जो  लगभग 101 हेक्टेयर के आसपास होती है. इसमें से कुछ ने जैसे-तैसे अपनी जमीन ढूढ़ कर उस पर कब्ज़ा कर लिया लेकिन अधिकांश लोग आज तक अपनी जमीन प्राप्त नहीं कर सके.

पीड़ित आदिवासियों के मुताबिक सरकारी रिकार्ड में दर्ज खसरा नंबर की जमीन मौके पर उपलब्द्ध नहीं है. गायब हुई जमीन किसके कब्जे में इसका पता राजस्व अमला भी नहीं  लगा पा रहा है

यह बड़े आश्चर्य की बात है की इतने बड़े घोटाले को अंजाम देने वालो के विरुद्ध आज तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई स्पष्ट रूप से जिले के आला अधिकारी इसमें लिप्त है.

आम आदमी का जीना मुश्किल

महगाई कम करे सरकार
केंद्र सरकार महगाई रोकने के लिए प्रयास करने की बात तो कर रही है पर ऐसा होता कही नजर नहीं आ रहा है. महगाई के कारण आम आदमी को जीना दुश्वार होता जा रहा है. केंद्र सरकार से आम आदमी के हित में अपेक्षा है की वह बैठको की नौटंकी छोड़ महगाई को कम करने के लिए सार्थक प्रयास करे.

देश के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री  पी चिदंबरम, कृषि मंत्री शरद पवार आदि ने महगाई को कम करने के लिए बैठक को आयोजित किया. बैठक आयोजन से सभी को उम्मीद थी की देश के शीर्स्थ नेता आम आदमी को हलाकान कर रहे इस मसले पर गंभीरता से विचार कर कोई ऐसे उपाय तलाशेगे जिनसे लोगो  को महगाई से राहत मिलेगी. हुआ उल्टा सभी नेता यह कहते हुए बाहर आ गए की महगाई कम करने के बारे में कोई निर्णय नहीं हो पाया.

यह देश के लोगो के साथ मजाक जैसा हुआ. इस गंभीर मसले पर ऐसा कहना वास्तव में देश के आम गरीब आदमी की आशाओं  को तोड़ देना ही है. यू पी ऐ  सरकार के घटक आपस में ही उलझ कर लोगो का ध्यान बाटने का प्रयास कर रहे है. जो सरकार चला रहा है महगाई पर नियंत्रण उसी के हाथ में है.

वास्तव में एक दूसरे पर दोषारोपण तो अपना दामन बचाने की कोशिश है. पिछले  दिनों जिस तरह के गंभीर आर्थिक घोटाले सामने  आये है वे शर्मनाक है उन घोटालो के लिए दोषी लोगो पर कार्रवाई करने से इसलिए बचा जा रहा है क्योकि घोटालो में कुछ ऐसे नाम शामिल है जो नहीं चाहते की उनका नाम सामने आये.

दाल, गेहू, तेल और यहाँ तक की प्याज, लहसुन के दाम भी आसमान को छू रहे है ऐसे में आम आदमी का जीना मुश्किल हो रहा है उस पर ईधन गैस और पेट्रोल और डीजल के दाम  बढ़ने की आशंका  आम आदमी को दहशत में डाल रही है.