09 February, 2011

शौचालय बना नमूना

जनपद पंचायत रीठी के ग्राम रैपुरा में कराये गए निर्माण कार्यो में धांधली के आरोप ग्रामीणों ने लगाये है. बताया गया की समग्र स्वच्छता अभियान के तहत शासकीय माध्यमिक शाला के बगल से बनाये गए सामुदायिक शौचालय के निर्माण के दौरान अनियमितताओं को अंजाम दिया गया है. रैपुरा की स्वच्छता समिति के माध्यम से बनाए गए सामुदायिक  शौचालय की लागत बीस हजार रूपये बताई गई लेकिन वास्तविक हालत पर नजर डाले तो शौचालय निर्माण उससे काफी कम लागत से बना प्रतीत होता है.

गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग और मनमाने  तौर तरीके से शौचालय का निर्माण कराते हुए महज खाना पूर्ती निभाने के स्पष्ट प्रमाण मिल रहे है. सरकार द्वारा गाँव के विकास  के लिए प्रदान की जाने वाली राशी से विकास करने की बजाय कार्यो की लीपापोती करते हुए जिम्मेदार अमला अपनी जेबे गर्म करने की कवायद में जुट जाता है और यह क्रम जो जारी हुआ है उससे विकास कार्यो में पलीता लगना स्वाभाविक है. समिति अध्यक्ष सुनीता बाई तथा पंचायत  सचिव द्वारा उक्त राशी आहरित  करते हुए उसका बंदरबाट  कर लिया गया और कार्य की ओर गौर करे तो शौचालय बतौर नमूना साबित हो रहा है जिसे देखकर ही निर्माण कार्य के दौरान हुई धाधली उजागर हो रही है.

निर्माण की ड्राइंग के अनुसार इसमें टाइल्स लगनी थी वह भी नहीं  लगाईं गई है. सबसे मजेदार बात जो सामने आयी है वह यह है की शौचालय में लेट्रिन सीट भी उल्टी लगाई गई है जिससे  साफ़ जाहिर होता है की अकुशल श्रमिको से कार्य पूरा कराया गया है. सूत्रों की माने तो इसी ग्राम पंचायत में सामुदायिक भवन का भी निर्माण कराया जा रहा है जिसके लिए सात लाख की शासकीय राशी जारी की गई है.


जहा सामुदायिक शौचालय बनाये जाने के समय अनियमितताओ की ईट लगाईं गई वही अब सामुदायिक भवन के निर्माण की नीव भी भ्रष्टाचार के बल  पर खडी की जा रही है. रीठी जनपद सदस्य बाराती कोल ने जानकारी  में बताया की सामुदायिक भवन के निर्माण में शासकीय  निर्देशों व नियमो की धज्जिया उड़ाते हुए भर्राशाही पूर्वक कार्य कराया जा रहा है. घटिया  सामग्री व गुणवत्ताहीन मशाला उपयोग में लाये जाने के अलावा निर्माण कराये जा रहे भवन में बनने वाले शौचालय में भी ड्राइंग की उपेक्षा की जा रही है और अपने  तरीके से मनमानी पूर्वक भवन निर्माण का कार्य सम्पादित क्या जा रहा है. उपयंत्री  द्वार मौके  पर  मुआयना न करने से ठेकेदार  धांधली को अंजाम दे रहा है. ग्रामीणों के अनुसार शासकीय राशी का दुरूपयोग करने व निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की शिकायते कई बार सम्बंधित अधिकारियो  से करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई.

इस सम्बन्ध में रीठी जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रीति सिंह का कहना है की - जनपद सदस्य बाराती कोई द्वारा जब इस आशय की जानकारी दी गई  और मौके का मुआयना कराया गया तो  शिकायत सही पाई गई है मै इस सम्बन्ध में कलेक्टर  को शिकायत प्रेषित करूगी.

घर-घर में दस्तक देंगे मेहमान

भारत की जन्गड़ना , २०११ के तहत आज 9 फरवरी से जनसँख्या गाड़ना कार्य की शुरूआत कर दी गई. जन्गड़ना का यह कार्य 28  फरवरी तक चलेगा और इस दौरान प्रगड़क घर घर जाकर जन्गड़ना  संबंधी जानकारी और आकडे एकत्रित करेगे.

जन्गड़ना  2011 का द्वितीय चरण बुधवार से प्रारंभ हो गया है. इस राष्ट्रीय महा कार्यक्रम के तहत बुधवार को कटनी शहर के गड्मान्य नागरिको की जन्गड़ना  के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया.
जिले में जन्गड़ना  कार्य की शुरूआत आज प्रगड़क  द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, जन प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधकारियो के परिवार अनुसूची की पूर्ती कर की गई. प्रगड़क  द्वारा जन्गड़ना  संबंधी जरूरी जानकारी हासिल की और परिवार अनुसूची प्रपत्र की पूर्ती की. इस अवसर पर उन्हें पुष्प गुच्छ भेट किये गए

केवल औपचारिकता के लिए है कार्यालय

बेरोजगारों को रोजगार दिलाने वाला जिला रोजगार पंजीयन कार्यालय अपना अस्तित्व खोता जा रहा है. एक ज़माना था जब इस कार्यालय के बिना नौकरिया मिलना मुश्किल हुआ करती थी. लेकिन आज इस कार्यालय का मतलब केवल और केवल बेरोजगारों के पंजीयन तक ही सीमित रह गया है.
जिला रोजगार कार्यालय कटनी में एक वर्ष में हजारो की संख्या में पंजीयन तो होते है लेकिन कभी किसी बेरोजगार को इसकी मदद से नौकरी मिली हो ऐसा खुशनसीब ढूढ़ पाना मुश्किल है.

वर्तमान में शासन के नियमानुसार किसी भी बेरोजगार को कही भी रोजगार के लिए  आवेदन करने से पूर्व अपना पंजीयन कराना  अनिवार्य हो गया है. इस मजबूरी के कारण बेरोजगारों को इस कार्यालय तक आना पड़ता है. वर्ना अब इस कार्यालय की कोई उपयोगिता नहीं रह गयी है.

एक ज़माना था जब किसी भी विभाग में कोई भी नई भर्ती होती थी तो उसकी सबसे पहले सूचना आवेदकों को जिला रोजगार कार्यालय से मिला करती थी, लेकिन अब इस प्रकार की सूचनाये समाचार पत्रों एवं अन्य प्रकार से बेरोजगारों तक पहुच जाती है. बेरोजगारों के पंजीयन से लेकर नियुक्ति तक में प्रत्येक व्यक्ति की सहायता करने वाला यह कार्यालय सहायता तो इन दिनों भी करता है, मगर इसकी सहायता छोटे स्तर तक ही सिमट  कर रह गयी है.

इस सम्बन्ध में जीतेन्द्र राजपूत का कहना है - मैंने जिला कार्यालय में इसलिए पंजीयन कराया है  क्योकि शासन के ऐसे नियम है की बिना रोजगार संख्या के कही पर भी आवेदन मान्य नहीं होता है.

पंकज जैन का कहना है - ऐसा सुना है की यहाँ से नौकरी मिलने में सहायता मिलती है लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता. मुझे नौकरी के लिए कई विभागों में आवेदन करना है इसलिए पंजीयन कराया  है.

मदन तिवारी ने बताया - यहाँ पर पंजीयन करने के बाद नौकरी की अपेक्षा करने में कोई समझदारी नहीं है, लेकिन नौकरी के लिए पंजीयन कराना आवश्यक है अतः पंजीयन कराया है.

अजीत सिंह का कहना है - रोजगार पंजीयन की आवश्यकता किसी भी आवेदन में आवश्यक होती है. आवश्यकता को देखते हुए पंजीयन को जीवित बनाए रखना आवश्यक है.