21 September, 2011

ईनीनियरिंग के छात्र ने किया रोजगार गारंटी में काम !!!

 महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण अंचलो में पलायन रोकने और रोजगार प्रदान कराने का एक अनूठा कार्यक्रम है. विश्व के किसी भी देश में इस तरह की अभिनव योजना को आज तक लागू नहीं किया गया है.  लेकिन  इसका लाभ वास्तव में जिन गरीबो को मिलना चाहिए क्या उन्हें मिल पा रहा है, यह एक बड़ा सवाल है.

मनरेगा योजना से अब लोगो का मोह भंग हो चुका है उसका मुख्य कारण  इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार है. कटनी जिले में इस योजना में तो जमकर चूना लगाया जा रहा है यदि कोई लाभान्वित हो रहा है तो वह है सरपंच और सचिव. जो कभी साइकिल पर चलते थे वे आज चार पहिये में चल रहे है इनकी आय से अधिक संपत्ति का व्योरा लेने वाला न तो कोई जनप्रतिनिधि है और न ही जनता.

बुधवार  को रीठी में आयोजित रोजगार गारंटी योजना समस्या निवारण शिविर एक असफल कार्यक्रम रहा जिसमे जनता की मौजूदगी बिलकुल नहीं थी क्योकी  इस शिविर के बारे में कोई भी प्रचार प्रसार नहीं किया गया था.
 फिर भी खानापूर्ति के लिए लगाए गए इस शिविर में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला आया  जिसमे अधिकारी कर्मचारी बगले झाकते नजर आये. ग्राम पंचायत घनिया के प्रशांत परोहा ने आपने आवेदन में  जो सवाल पूछे उसपर कोई भी अधिकारी संतोषप्रद उत्तर न दे सके.


प्रशांत परोहा निवासी ग्राम कछार खेडा   पंचायत घनिया ने अपने आवेदन में उनके तथा उनके परिवार के लोगो के नाम से रोजगार गारंटी योजना में कार्य दर्शाकर तत्कालीन सरपंच, सचिव द्वारा राशि के आहरण का आरोप लगाया.
आवेदक ने अपनी शिकायत की पुष्टि में नेट से निकाले दस्तावेज भी सलग्न किये थे.


इन दस्तावेजो में कुछ इस प्रकार से राशी निकालने का विवरण था

प्रशांत परोहा की माँ शशि परोहा जो शिक्षा गारंटी शाला कछार खेडा  में अध्यापन कार्य कर रही थी उनके नाम से 9  दिनों के मजदूरी, प्रशांत की बहन हर्षिता  जो इस समय ईन्जीनीयरिंग कर रही है को भी 9  दिन, स्वयं प्रशांत के नाम से 11  दिनों की मजदूरी की राशी निकाली गयी है जबकि वर्ष 2008  में प्रशांत जबलपुर में खालसा ईन्जीनीयरिंग कालेज का छात्र  था. 


गौरतलब है की परोहा परिवार को आज तक जाब कार्ड नहीं दिया गया है और न ही उनके परिवार ने कभी भी पंचायत से काम की मांग की. फिर भी उनके नाम से विधिवत राशी का  आहरण कर लिया गया.


 प्रशांत का कहना है की उपस्थित अधिकारी कर्मचारियों ने जो मस्टररोल की प्रतिया दिखाई वे अधूरी थी.


 शिविर में उपस्थित कर्मचारी बरगलाते रहे और नेट की जानकारी को  गलत फीडिंग दर्शा रहे थे.. जबकि आवेदक  का कहना है की आज सारी दुनिया नेट पर निर्भर है, आनलाइन सारा काम हो  रहा है और नेट से विद्यार्थियों की मार्कशीट भी स्वीकार की जा रही है तो फिर मनरेगा की फीडिंग को कैसे  गलत बता रहे  है. 


और यदि यह जानकारी गलत है तो फिर नेट पर फीडिंग करने वाले  कर्मचारी को उसके परिवार के नाम कैसे पता चल गए...?


प्रशांत ने बताया की उसकी पंचायत  के ऐसे सैकड़ो नाम है जिनने कभी काम नहीं किया और उनके नाम से  भी पैसा  निकाला गया है. इसके पहले भी प्रशांत ने दिसंबर 2009 को मनरेगा के वेबसाईट पर आनलाइन शिकायत करी थी और इस सम्बन्ध में कटनी  कलेक्टर शेल्वेंद्रण व जिला पंचायत सी ई ओ शशि भूषण सिंह से मिला  था तथा इन जिम्मेदार अधिकारियों ने उसे आश्वाशन दिया था लेकिन बड़े आश्चर्य की बात है की   अठारह माह के  बाद भी  इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.


जिले की प्रशासनिक व्यस्था से छुब्ध प्रशांत ने कहा की अगर अब भी उसे न्याय न मिला तो वह जनता को जागरूक करेगा और रोजगार गारंटी में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ जन आन्दोलन भी करेगा.


 फिलहाल उसने जनहित याचिका लगाने का  मन बना लिया है.


 केजरीवाल से प्रभावित प्रशांत ने कहा की एक पढ़े लिखे व्यक्ति को केजरीवाल बनने में जयादा समय नहीं लगेगा.
फिलहाल भरष्ट तंत्र से आक्रोशित  प्रशांत ने अंत में यही कहा...धन्य है कटनी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था...?