28 September, 2011

कलेक्टर ने टोपी पहनने से किया इनकार

नहीं मिली टोपी पहनाने  की अनुमति
धरने पर बैठे इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्य 
अखिलेश उपाध्याय / कटनी 

इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्यों द्वारा भ्रष्टाचार के विरोध में स्टेशन चौराहे से  एक रैली कलेक्ट्रेट के  लिए निकाली गई. इंडिया अगेंस्ट करप्शन ग्रुप के लोगो ने जब कलेक्ट्रेट में विभाग प्रमुखों को टोपी पहनाने की ईजाजत मांगी तो उन्हें ओमती  नहीं मिली . कलेक्टर एम् सेल्वेंद्रण ने भी टोपी पहनने से इंकार कर दिया. इधर टोपी पहनाने आये इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्य इस बात से बिफर पड़े और कलेक्ट्रेट द्वारा  पर धरने पर बैठ गए. हलाकि यह गाँधीटोपी  गाँधीवादी तरीके से आन्दोलन का रास्ता सिखाती है लेकिन फौरी तौर पर इंडिया अगेंस्ट करप्शन के लोग काफी आक्रोशित दिख रहे थे.

क्या है मामला
टोपी का यह मामला दरअसल तब शुरू हुआ तब कलेक्टर से मिलने इंडिया अगेंस्ट करप्शन ग्रुप के लोग पहुचे इन लोगो ने पहले तो  यहाँ एक ज्ञापन दिया आठ ही कलेक्टर को टोपी भी भेट की जिसे उन्होंने लेने से इनकार कर दिया. यही नहीं इंडिया अगेंस्ट करप्शन ग्रुप के सदस्य धरने पर बैठ गए.


नहीं दी जा सकती अनुमति 
इस मसले पर कलेक्टर एम् सेल्वेंद्रण ने कहा की ग्रुप के कुछ लोग उनसे मिलने आये थे. ग्रुप के सदस्य विभाग प्रमुखों को टोपी भेट करना चाहते थे. लेकिन सरकारी नियमो के कारण इस तरह की अनुमति नही दी जा सकती. सदस्यों को बताया गया की विभागों में अधिकारी से मिलने अथवा बात करने या ज्ञापन देने पर कोई पाबन्दी नहीं लेकिन टोपी आदि भेट कर्णकरने  की अनुमति नहीं दी जा सकती.

अवैध उत्खनन पर शिकंजा

अवैध उत्खनन पर शिकंजा
प्रशासन ने नहीं दी खनिज विभाग को छापामारी की जानकारी 
अखिलेश उपाध्याय / कटनी 

कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर छापामारी करते हुए अधिकारियो ने शनिवार के रात चका  के पास एक खदान से तीन जे सी बी मशीन, दो ट्रक, आठ मोटरसाईकिले  जब्त की है. इसके साथ ही उत्खनन कर रहे लगभग एक दर्जन मजदूरों को हिरासत  में लिया है. आरोप है की यहाँ पर अनाधिकृत रूप से उत्खनन किया जा रहा था.

कार्रवाई के समय मौके पर लगभग एक सैकड़ा लोग मोजूद  थे जो अँधेरे का फायदा उठा कर भागने में कामयाब रहे. फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है की उत्खनन कौन  करा था. कार्रवाही  को लेकर प्रशासन ने पूरी गोपनीयता भी बरती थी. इसकी सूचना न तो खनिज विभाग क दी गई और न ही शहर के तीनो थानों को भनक लगी.. पुलिस लाइन में पदस्थ अधिकारियो  को योजनाबद्ध तरीके से देर रात बुलाया गया और निजी गाडियों से उत्खनन स्थल  पर छापामारी  के निर्देश दिए गए. कार्रवाई पूरी होने के बाद खनिज विभाग को आगे की जाँच का जिम्मा सौपा गया है.

छापामार दल में शामिल अधिकारियो ने बताया की यहाँ पर अवैध रूप से आयरन ओर का उत्खनन किये जाने की जानकारी लम्बे समय से मिल रही थी. छापामारी को सफल बनाने के लिए पहले स्थल के सम्बन्ध मेपूरी जानकारी  एकत्र की गई थी. मुख्य आरोपियों को पकड़ने की फुलप्रूफ योजना बनाई गई थी लेकिन वे भागने में सफल रहे.

 दल ने स्थल से तीन जे सी बी मशीन सहित ट्रक क्रमांक 21  एच  0460 , ट्रक एम् पि 21  एच 0599  व आठ मोटर साइकिले बरामद की है. पकडे गए मजदूरों  ने बतया की उन्हें दैनिक मजदूरी के आधार पर काम में लगाया था. जाँच में  जुटे विभागीय  अधिकारियो ने मामलो की गंभीरता को देखते हुए जाँच शुरू कर दी है. 

जिला प्रशासन द्वारा देर रात छापमाई की  गई. छापामारी में पकडे गए वाहनों व आरोपियों के बयान दर्ज कर मामले की जाँच की जा रही है. अभी तक उत्खनन करने वालो का पता नहीं लग पाया है. जाँच के बाद ही सरे तथ्य सामने आ सकेगे.   - जे के सोलंकी, खनिज अधिकारी, कटनी 

काफी समय से अवैध उत्खनन की सूचना मिल रही थी. पहले भी पकड़ने के प्रयास किये गए थे लेकिन किन्ही कारणों से सफलता नहीं मिल रही थी. उत्खनन स्थल से मिले वाहनों को जब्त कर प्रकरण की जाँच कराई जा रही है  - एम् शेल्वेंद्रण नामदेव, कलेक्टर कटनी 


रेल में बढ़ रही वारदातों से यात्रियों में दहशत

रेल में बढ़ रही वारदातों से यात्रियों में  दहशत 

अखिलेश उपाध्याय 
कटनी 

सुरक्षित यात्रा कराना रेल प्रशासन के लिए अब टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. आये दिन कही यात्री चोरी का शिकार होते है  तो कही जहरखुरानी का. लगातार बढ़ती जा रही वारदातों से न सिर्फ रेलवे की साख गिरती जा रही है बल्कि यात्रियों के जहन में भी रेल में यात्रा के दौरान दहशत का माहौल बना रहता है. इन दिनों  बढ़ रही जहरखुरानी की वारदाते आर पी ऍफ़ सहित जी आर पी तक के लिए चिंता  का विषय बनी हुई है.

रेलवे प्रशासन जहरखुरानी से  बचने  के लिए हर प्लेटफार्म पर लगातार यात्रियों ko  आगाह करने के लिए  उद्घोषणा के माध्यम से सचेत करता है की किसी भी अनजान व्यक्ति से किसी प्रकार का खाने का सामन न ले. बावजूद इसके यात्री अनजान यात्रियों  का आसानी से विश्वास कर लेता है. खाने पीने की वस्तुए लेकर खाता है  और जहरखुरानी का शिकार हो जाता है.

अभी हाल ही में लगातार घटी इन घटनाओं ने रेल प्रशासन की नीद हराम कर रखी है आईये जाने कैसे और क्या हुआ यात्रियों के साथ


केश नंबर एक 


19  अगस्त को रीठी के कछारखेरा  गाँव के निवासी प्रशांत परोहा अपनी  बहन  को लेकर रेवांचल एक्सप्रेस से भोपाल जा रहे थे. उनके सहयात्री ने उनसे मित्रता बढाई और फिर सागर में काफी पिलाई. वह दोनों भाई बहन को काफी पिलाने की जिद कर रहा था लेकिन बहन नित्या ने काफी पीने से मना कर दिया. यह सब रात चार बजे हुआ. उसके बाद नित्या अपनी ऊपर वाली बर्थ पर सो गयी और जब वह भोपाल में जागी तो अपने भाई को नीचे वाली बर्थ पर बेसुध पाया. पहले तो उसने सोचा की  वह सो रहा है. लेकिन बहुत जगाने के बाद भी जब वह नहीं जगा तो फिर जी आर पी की मदद से उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया जहा गहन ईलाज के बाद बीस घंटे के बाद प्रशांत  को होश आया.
यहाँ भी चोर मोबाइल, पर्ष, पांच हजार रूपये, ऐ टी एम् लेकर भाग गया.



केश नंबर दो 


जौनपुर निवासी विजय प्रजापति भुसावल पैसेंजर से 22  सितम्बर को भुसावल से कटनी तक की यात्रा कर रहा था. इसी दौरान उससे ट्रेन  में दो यात्रियों ने जान-पहचान बढाई और किसी स्टेशन में  चाय लाकर पिलाई. चाय पीने के बाद से वह बेहोश हो गया. भुसावल ट्रेन चौपन की ओर जा रही थी तब वह बेहोशी की हालत में एन के जे ट्रेक पर गिर गया उसे ऑटो चालको ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहा पर उसने होश  आने के बाद अपने साथ हुई जहारखुरानी की जानकारी जी आर पी को दी. उसने बताया की चाय पीने के बाद वह बेहोश हुआ और  उसके करीब चार हजार रूपये चोरी हो गए.


केश नंबर तीन 


21  सितम्बर को गोंडवाना एक्सप्रेस के जनरल कोच में हजरत निजामुद्दीन  से झासी तक की  यात्रा कर रहे टीकमगढ़ जिले के हरपुरा गाँव के निवासीभैया लाल लोधी व उसका साथी अर्धबेहोशी की हालत में जबलपुर स्टेशन में उतारे गए जहा से कटनी आकर जी आर पि को जानकारी दी. यात्रियों ने बताया की पलवल स्टेशन से उनकी बोगी में दो यात्री चढ़े थे. धीरे-धीरे जान पहचान बढाई और चाय पिला दी, उसके बाद वे दोनों बेहोश हो गए. उनके पास  करीब 29  हजार रूपये थे जो की चोर ले गए.

केश नंबर चार 
छत्तीसगढ़ के सरगुजा निवासी छबिनाथ पिता तिलकराम 12  सितम्बर को दयोदय एक्सप्रेस  के जनरल कोच में जयपुर से कटनी की यात्रा कर रहे थे. सफ़र के दौरान ही उनके मुह के सामने तीन-चार बार कपडा हिलाया गया जिसके बाद वे बेहोश हो गए. ट्रेन के कटनी पहुचने पर उहे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. उनके पास 15  हजार रूपये थे जो चोरो ने पार कर दिए.




कुछ इस तरह से होती है वारदात


ट्रेनों में जहरखुरानी  का शिकार करने वाला गिरोह सबसे पहले यह तय करता है किसे शिकार बनाना है फिर उसी यात्री के आस-पास बैठकर उसके बोलचाल को देखर उसी के जैसा व्यवहार करने लगते है. धीरे-धीरे यात्री को विशवास हो जाने के बाद चाय या फिर बिस्किट खिलाई जाती है. यात्री भी विशवास में आकर बिस्किट या चाय ले लेता है इसके बाद वह बेहोश होने लगता है. चाय व बिस्किट के अलावा सेव में इंजेक्शन के माध्यम से बेहोशी का रसायन डालकर रूमाल सुंघा कर भी जहरखुरानी की वारदातों को अंजाम दिया जाता है.

इनका कहना है - 


रेल पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में विशेष स्क्वाड का गठन किया गया है. साथ ही गोपनीय जाँच की जा रही है. प्लेटफार्म व ट्रेनों में गश्त बढाई गई है.
                                               - अजीत सिंह बघेल, टी आई जी आर पी 

ट्रेनों में बढ़ रही जहरखुरानी को बारदातो के मद्देनजर सुरक्षा व्यस्था बढाई गई. इसमें बगैर बर्दी के जवान ट्रेनों व स्टेशन में निगाह  रख रहे है. प्रभावित ट्रेनों में गश्त बधाई गई है . डाग स्क्वाड से चेकिंग कराई जा रही है. जनरल  कोच में विडियोग्राफी कराई जाती है ताकि वारदात के बाद आरोपी को पकड़ने में मदद मिल सके साथ ही स्टेशन में ट्रेन आने के दौरान उद्घोषणा भी कराई जाती है की अनजान व्यक्ति से खाने -पीने का सामान न ले.
                                           - संदीप सिंह ठाकुर, रेल सुरक्षा प्रभारी 


जहरखुरानी के सम्बन्ध में टीम का गठन किया जा रहा है. बहुत जल्द टीम का गठन होगा. हलाकि इस तरह की घटनाओं के मामले राजकीय रेल पुलिस  (जी आर पी) थानों में दर्ज होते है लेकिन आर पी ऍफ़ भी मामलो की जाँच कर रोकने का प्रयास करती है
                                            - प्रवीण सिंह गहलोत, इन्स्पेक्टर यात्री सुरक्षा 



पंचायती राज व्यस्था के असफल होने का जीता जागता उदहारण

जब बाराती   कोल जनपद पंचायत सदस्य रीठी के रैपुरा से दो वर्षो पूर्व चुना  गया  तो उसे बड़ी उम्मीदे  थी की अब वह अपना  तथा अपने क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा. अभी साइकिल पंचर की दूकान चलाकर अपना उदर-पोषण कर रहे बाराती कोल को अब अपने क्षेत्र में अपने मतदाताओं से किये गए वादे निभा पाना बड़ा कठिन है.
मुंडी बाई 

मुंडी बाई का घर एवं बच्चे 

बाराती कोल अपने घर में 

मुंडी बाई  का घर 
दूसरी बार  जनपद सदस्य बनने के बाद बाराती को क्षेत्र के लोगो ने फूल माला  पहनाकर स्वागत किया था और उसे रीठी  से अपने गाँव तक लेकर आये थे.


सदस्य बनने के बाद वह प्रतिदिन रीठी जनपद कार्यालय जो उसके घर से बीस किलोमीटर दूर है जाता था और अपने क्षेत्र में विकास के लिए जनपद सी ई ओ से गिडगिडाता  रहा.


उसने जनपद में होने वाली सभी मीटिंग में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जो की जनपद सी ई ओ रीठी ने ली. बाराती ने बताया की मैंने अपने क्षेत्र के लोगो की मागो के लिए जनपद से लेकर जिला सी ई ओ तथा कलेक्टर तक दौड़ लगाईं लेकिन कोई फायदा न हुआ.


बाराती कोल अपनी साईकिल दुकान पर 
लगातार दो वर्षो से इस क्षेत्र से जनपद सदस्य चुनने के बाद इस आदिवासी सदस्य को दुःख है की वह अपने क्षेत्र में आज तक कोई काम न करा सका. जबकि बाराती को जनपद सदस्य बनने के बाद केवल बारह सौ रूपये का मासिक मानदेय मिलता है जिसे वह  जनता की सभी समस्याओं के लिए जनपद से लेकर जिला तक दौड़ लगाने में खर्च कर देता है . लेकिन वह कहता है की रीठी  जनपद जाने का मतलब सौ रूपये का खर्च बस के किराए  और चाय नाश्ते में ही खर्च हो जाता है.

पंचर सुधारते हु बाराती 
अपने खपरैल घर में रहे रहे बाराती कोल को अब पंचायती राज व्यवस्था से मोह भंग हो चूका है . दो बच्चो के पिता ने बताया की वह प्रतिदिन सौ रूपये अपनी साइकिल पंचर की दूकान से अपने परिवार के उदर पोषण के लिए कमा  लेता है.

अपने चुनाव जीतने के लिए बाराती ने अपने रिश्तेदारों से कर्ज लिया था जिसे वह आज तक चूका  रहा है. जब लोग उससे क्षेत्र में विकास कराने की बात करते है तो वह कहता है की आप जनपद सी ई ओ से  संपर्क करे जो अपनी मन मर्जी से काम करने के लिए जाने जाते है और उनकी कोई बात नहीं सुनते है .

आज सबको पता है की पंचायती राज सिस्टम एक छलावा है, बराती ने कहा, यह तो केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए है जो हर एक काम सेंक्सन करने के लिए कमीशन लेते है. इनका फिक्स कमीशन होता है बगैर कमीशन के कोई काम ही नहीं होते.

बाराती ने बताया की वह अपनी दो एकड़ खेती से घर चलाता है और अपने मतदाताओ से संपर्क में रहता है क्योकि उसके अधिकांस मतदाता साइकिल का प्रयोग करते है.

इसी प्रकार मुंडी बाई कोल जो की बाराती  के साथ ही जनपद सदस्य चुनी गयी अब वह भी इस तंत्र से तंग आ चुकी है. आदिवासी महिला इन दिनों रैपुरा के पास बनने वाली एक चिमनी फेक्टरी में दिहाड़ी का काम कर रही है मुंडी को लगता है की वह जनपद की कोई भी मीटिंग में न जाए क्योकि इन मीटिंग का कोई भी अर्थ नहीं निकलता है.

मुंडी बाई ने बताया की उसके पास स्वयं का घर भी नहीं है और न ही खेती है. मुंडीबाई ने बताया की  यदि मै और मेरा पति एक  हफ्ता तक काम न करे तो फिर हमें रोटी के लाले पड़ जाते है. मुंडी बाई का पति कटनी में मिस्त्री  के रूप में मजदूरी करता है.  कमाल की बात तो यह है  इस जनपद सदस्य का आज तक बी पी एल का कार्ड भी नहीं बनाया गया जबकि उसने कई बार आवेदन दिया.

बाराती की तरह मुंडी बाई भी अपने जनपद सदस्य के पद से संतुष्ट नहीं है. मुंडी बाई ने कहा की मै पंचायती राज व्यस्था के जमीनी स्तर पर असफल होने का जीता जागता उदहारण हूँ .