05 October, 2011

280 लाख करोड़ का सवाल है ...

भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये उनके स्विस बैंक में जमा है. ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है. या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाया जा सकता है. ऐसा भी कह सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है. ये रकम इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल तक ख़त्म ना हो. यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है.
जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है. इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है. भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है. हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार है.हाल ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला,२ जी स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला... और ना जाने कौन कौन से घोटाले अभी उजागर होने वाले है ......

(मनरेगा) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना :सफेद हाथी



राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यूपीए सरकार का सबसे महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम है। यह योजना फरवरी 2006 में शुरू हुई। लगभग शुरू से ही इसकी गड़बडियां सामने आने लगीं।तीन साल बाद इस योजना के साथ महात्मा गांधी का नाम तो जोड़ दिया गया, पर अनियमितताओं का सिलसिला चलता रहा है।
कुछ यक्ष प्रश्न जो वर्तमान में उत्तर मांग रहे हैं हर भारतीय से .

इस योजना ने  देश को क्या दिया है ?
इस योजना का परिणाम क्या मिला है ?
इस योजना के भारी भरकम खर्च से ग्रामीण लोगो का विकास क्या  वास्तव में हुआ है ?

क्यों नहीं हर साल के बजट में आवंटित इस मोटे बजट से सरकार ग्रामीण इलाको में निजी क्षेत्र के साथ मिलकर उद्योग धंधे विकसित कर देती है इससे देश का सकल घरेलु उत्पादन भी बढ़ जाता और हर ग्रामीण को काम मिल जाता और सही मायने में कर के रूप में प्राप्त राजस्व का सही उपयोग हो जाता ?

वर्तमान रूप में इस योजना को ढ़ोते रहना क्या सही है ?