31 October, 2011

भगवान भरोसे स्टेशन का पूछताछ केन्द्र

कटनी, रेल्वे स्टेशन के पूछतांछ केन्द्र में पदस्थ रेल कर्मियों की यात्रियों के साथ अभद्रता करने तथा यहां आने
वाले फोन रिसीव न करने की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। आश्चर्य कि बात तो यह है कि जब पूछतांछ केन्द्र
में पदस्थ रेल कर्मियों की शिकायत स्टेशन अधीक्षक से की जाती है तो उनका दो टूक जबाब रहता है कि पूछतांछ केन्द्र की
व्यवस्था को ठीक करना उनके बस में नहीं है। इसको तो मंडल रेल कार्यालय में पदस्थ रेल अधिकारी ही ठीक कर सकते
हैं। पूछतांछ केन्द्र में लंबे समय से पदस्थ कुछ महिला रेल कर्मियों से यदि यात्री थोड़ा बहस कर ले तो उसको झूठे मामले
में फंसाने तक की धमकी दी जाती है। पूछतांछ केन्द्र की पटरी से उतरी व्यवस्था के संबंध में रेल यात्रियों ने बताया कि
जबलपुर रेल मंडल का महत्वपूर्ण रेल स्टेशन होने के बावजूद केन्द्र में पदस्थ रेल कर्मी गंभीरता पूर्वक अपनी जि मेदारियों
का निर्वहन नहीं करते हैं। जिसका परिणाम यात्रियों को परेशान होकर भुगतना पड़ता है। पूछतांछ केन्द्र में व्य ितगत रूप से
उपस्थित होकर ट्रेन की जानकारी लेने वाले यात्रियों को तो सही जबाब दिया नहीं जाता दूरभाष पर भी लोगो को ट्रेन की
सही जानकारी उपल ध नहीं कराई जाती है। यात्रियों का यह भी कहना है कि यहां पदस्थ रेल कर्मी ज्यादातर समय यहां
लगे रेल्वे के फोन को छोड़कर प्राय: सभी फोन का रिसीवर उठाकर किनारे रख देते हैं। जिसकी वजह से दूरभाष पर ट्रेन
की जानकारी लेने वालो को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। बताया जाता है कि जब कोई यात्री व्यवस्था से परेशान होकर
इसकी शिकायत स्टेशन अधीक्षक से करते हैं तो वह भी इस व्यवस्था को ठीक करने में अपनी असमर्थता व्य त करते हैं।

पेंशन के इंतजार में तीन निराश्रित वृद्धों ने तोड़ा दम

बहोरीबंद, बहोरीबंद
जनपद क्षेत्र की अनेक ग्राम पंचायतों
में निराश्रित वृद्धों को कई कई महीने
वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल पाती
जिससे इन निराश्रित वृद्धों को एक
वत की रोटी के लिये भी भीख
मांगने को मजबूर होना पड़ रहा।
बताया गया कि ग्राम पंचायत चांदन
खेड़ा में पिछले चार- पांच महीने से
वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिली। पेंशन
राशि पंचायत को प्राप्त हो जाने के
बावजूद सरपंच द्वारा उत राशि
डाकघर में जमा नहीं कराई जाती।
ग्रामीणों ने बताया कि पेंशन राशि के
इंतजार में यहां पिछले दो तीन महीनों
में गोपाली बर्मन, कस्तूरी विश्वकर्मा
एंव सुशीला बाई नामक तीन निराश्रित
वृद्धों की मौत हो चुकी है। सीईओ
जनपद एवं एस.डी.एम. का ध्यान इस
ओर आकृष्ट कराया गया है।

मजदूरी का भुगतान भी नहीं कर रहे सरपंच


कटनी. मनरेगा के तहत कराये जा रहे निर्माण कार्य के दौरान घटित एक दुर्घटना में ज मी हुये मजदूर का उपचार कराना तो दूर सरपंच एवं सचिव उसे मजदूरी का भुगतान भी नहीं कर रहे। परेशान मजदूर ने गत दिवस जिला कले टर को लिखित शिकायत सौंपकर उचित उपचार कराने तथा उसकी लंबित मजदूरी का भुगतान कराये जाने की मांग की है। बड़वारा जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत सकरीगढ़ निवासी मजदूर बेड़ी लाल केवट ने कले टर से की गई अपनी शिकायत में बताया है कि वह सकरीगढ़ पंचायत में मनरेगा के तहत कराये जा रहे कार्यों में मजदूरी करता रहा। मु ितधाम एवं कांजी हाऊस में कराये गये कार्यों के अलावा वृक्षारोपण कार्य में भी उसने मजदूरी की थी। बीते 24 सित बर को सरपंच एवं सचिव द्वारा उसे शासकीय मिडिल स्कूल के शौचालय निर्माण कार्य के लिये ले जाया गया था। जहां शौचालय में लगी चीपें निकालने का काम उसे सौंपा गया था। उ त कार्य में सुरक्षा की कमी को दे ाते हुये उसने कार्य करने से इंकार कर दिया था। तब सरपंच एवं सचिव द्वारा उसे मकाकर जबरिया कार्य कराया गया था। कार्य के दौरान जर्जर स्थिति में फंसी एक चीप उसके हाथ में गिर गई थी। जिससे उसका हाथ चर हो गया है। दुर्घटना के बाद उसे पहले स्थानीय लीनिक में डॉ. उपाध्याय के यहां ले जाया गया । बाद में कटनी के निजी अस्पताल में उसका उपचार हुआ जहां उसके हाथ में प्लास्टर चढ़ाया गया है। वर्तमान में वह कार्य करने में असमर्थ है। इधर सरपंच एवं सचिव द्वारा न तो उसे इलाज
का खर्चा दिया जा रहा न ही उसके इ कीस दिन के काम की मजदूरी का भुगतान किया जा रहा। मजदूर बेड़ी लाल केवट ने कले टर से उपचार के दौरान हुए व्यय एवं लंबित मजदूरी का भुगतान शीघ्र कराये जाने की मांग की है

अनूठी पहल: पहली बार पशु पक्षियों का भण्डारा

अनूठी पहल: पहली बार पशु पक्षियों का भण्डारा

कटनी युवा उत्साही लोगों ने आज शहर में घूम-घूम कर पशु पक्षियों को खाना खिलाया। इस अनोखी पहल के पीछे कारण बताया गया पर्यावरण और पशु रक्षा। संस्था के राकेश जायसवाल गुड्डा अधिवक्ता संघ सचिव संतोष परौहा, आदि ने मिलकर यह पहल की। जन संवदेना अभियान के तहत फारेस्टर खेल मैदान के पास पशुओं के लिए खाना बनाया गया। सैकड़ों डबल रोटी के पैकेट मंगवाए गए और फिर शुरू हुआ मूक पशुओं को खाना खिलाने का सिलसिला, जो दोपहर तक चलता रहा। यही नहीं एक वाहन में सेकड़ों ब्रेड के पैकिट तथा पशुओं के लिए बनाया गया भोजन लाद कर शहर में घूम घूम कर पशुओं को खाना दिया गया। संस्था के सदस्यों ने इस अनूठी पहल के माध्यम से संदेश दिया कि पर्यावरण और प्रकृति की रक्षा के लिए जरूरी है पशु पक्षियों को बचाया जाए, बूचड़ खाने बंद किए जाएं, शाकाहार का संदेश प्रचारित किया जाए, मांस पर प्रतिबंध हो, पेड़ों की कटाई बंद हो, पशु पालन को बढ़ावा दिया जाए योंकि पशुधन सबसे बड़ा धन होता है। पहल करने वाले सदस्यों का कहना था कि इंसान अपने अंदर की दया का जगाए और पशुओं की रक्षा करे। वाहन से घूम कर पशुओं को दिया खाना पशुओं को भी लगा अजीब इस अनोखे भंड़ारे को लेकर जहां शहर में चर्चा थी वहीं पशुओं को दुलार के साथ जब खाना खिलाया जा रहा था तो वह भी कुछ अचरज में थे। कुछ पशुओं को जब युवाओं की टोली खाना देने के लिए पास जा रही थी तो बेचारे डर के मारे भाग रहे थे।

पशुओं को भी लगा अजीब
इस अनोखे भंड़ारे को लेकर जहां शहर में चर्चा थी वहीं पशुओं को दुलार के साथ जब खाना खिलाया जा रहा था तो वह भी कुछ अचरज में थे। कुछ पशुओं को जब युवाओं की टोली खाना देने के लिए पास जा रही थी तो बेचारे डर के मारे भाग रहे थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि हमेशा तो इंसान से उन्हें कम से कम खाने के मामले में दुत्कार ही मिलती है तो फिर आज ऐसा या हो गया जो उन्हें स-स मान भोजन कराया जा रहा है। बहरहाल लोगों ने इस अनूठी पहल की सराहना ही। लोगों का कहना था कि सचमुच मूक पशुओं के लिए सोचने वाला कोई नहीं।