20 December, 2011

गरीबों की योजनाओं का लाभ अमीरों को

बहोरीबंद जनपद क्षेत्र की 79 ग्राम पंचायतों में नव बर माह तक गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों की सं या 25 हजार तक पहुंच गई है। ये 25 हजार परिवार गरीबी रेखा की सूची में शामिल है। बताया गया कि गरीबी रेखा की सूची में शामिल इन परिवारों में से आधे से भी ज्यादा परिवार ऐसे है जो गरीबी रेखा के दायरे में नहीं आते। बावजूद इसके वे गरीब बनकर
शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा रहे। जबकि ऐसे हजारों गरीब परिवार है जो पात्र होने के बावजूद गरीबी रेखा की सूची में शामिल नहीं किये गये। एक शिकायत में बताया गया कि ग्राम पंचायतों में सरपंच एवं सचिवों द्वारा अपने चहेतों लोगों का नाम गरीबी रेखा सूची में दर्ज करा दिया जाता है।

राजस्व एवं अन्य विभागों के अधिकारी, कर्मचारी जिन्हें गरीबी रेखा सूची तैयार करने की जि मेदारी सौंपी जाती है वे बिना किसी जांच पड़ताल अथवा भौतिक सत्यापन के ही सरपंच सचिवों की सिफारिश के आधार पर परिवारों का नाम गरीबी रेखा सूची में दर्ज कर लेते हैं शिकायत में यह भी बताया गया कि अगर गरीबी रेखा सूची का वास्तव में निष्पक्ष तरीके से भौतिक सत्यापन
किया जाये तो ऐसे सैकड़ों लोग मिलेंगे जिनके पास न केवल प के मकान है बल्कि दुपहिया, चार पहिया वाहन एवं ट्रे टर भी है। उनके नाम पर कई- कई एकड़ जमीन भी है जहां वे कृषि कार्य करते है। राज्य शासन द्वारा गरीबी रेखा सूची में आपात्रों के नाम पाये जाने पर उनके विरूद्ध पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कराने तक के निर्देश जिला कले टरों को दिये गये थे।
कले टर की ओर से कटनी में भी उ त आशय के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये थे पर अधिकारियों ने उ त आदेशों का पालन नहीं किया। जिसके कारण आज भी जनपद क्षेत्र में हजारो गरीब नागरिक शासन की योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित है उनकी जगह स पन्न लोग अपात्र होते हुये भी गरीबों के लिये संचालित योजनाओं का लाभ उठा रहे है। क्षेत्रवासियों का
कहना है कि प्रत्येक पंचायत की गरीबी रेखा सूची का भौतिक सत्यापन किया जाये तथा अधिकारी कर्मचारी मौके पर जाकर जांच कर्रें। ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

अब तक नहीं बनी थी सड़क

गौण खनिज की राशि से होगा निर्माण
जनपद पंचायत रीठी में विकास की धारा में एक और कड़ी जोड़ते हुए जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रीति सिंह ने ग्राम पंचायत रैपुरा में सीसी रोड का भूमिपूजन किया। वर्ष 2010-11 के लिए आवंटित गौण खनिज की राशि से ढाई लाख की लागत से रैपुरा में यह सड़क बन रही है। भूमि पूजन में एकत्रित ग्रामीणों में से एक राम गरीब सेन ने बताया कि आज तक इस ग्राम में सांसद, विधायक एवं जनपद निधि से कोई भी विकास कार्य नहीं कराए गए हैं। जनपद अध्यक्ष ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा
अर्चना करते हुए गेती चलाकर भूमि पूजन किया।


इस अवसर पर जनपद सदस्य बाराती कोल, मुंडी बाई, रामचरण चौधरी, सरपंच सुधाकर मिश्रा, सुखीलाल, बाबूलाल चौधरी, रामदयाल कोल, कल्लू चौधरी, झुल्लूराम सेन, श्यामलाल कोल, मिट्ठूलाल कोल, लाल दाहिया, अनिल परौहा, रघुनाथ कोल आदि उपस्थित रहे।

तीन महीने से नहीं मिली पेंशन
उपस्थित ग्रामीणों ने जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह को बताया कि उन्हें तीन महीनों से पेंशन नहीं मिली है। पेंशन की समस्या को लेकर भारी तादाद में वृद्ध महिलाए एवं पुरूष सभी की एक ही मांग थी कि पेंशन समय पर यों नहीं दी जा रही। जनपद अध्यक्ष
प्रीति सिंह ने रीठी सीईओ एवं जिला पंचायत सीईओ से तत्काल चर्चा कर पेंशन भुगतान करने का आश्वासन दिया

नहीं बजती घंटी...

अपने गौरवपूर्ण इतिहास को समेटे रीठी का हाई स्कूल आज अपनी दुर्दशा पर स्वयं व्यथित है. अब भले ही इस विद्यालय जो उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा दे दिया गया हो लेकिन यह विद्यालय अब नाम मात्र का उत्कृष्ट है जबकि जब यह साधारण हायर सेकंडरी विद्यालय था तब यहाँ के शिक्षक और विद्यार्थी अपनी मेहनत और लगन से कम संसाधनों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे थे.
आज दिनांक २०.१२.२०११ को इस स्कूल की दुर्दशा को देख मुझे बड़ा दुःख हुआ. साधे दस बजे मै जब स्कूल परिषर में घुसहा तो पूरे मैदान में बच्चे कई समूहों में खड़े थे. प्रधानाचार्य का कही अत पता नहीं था. विद्यार्थियों से पूछने पर पता चला की इस समय परीक्षा चल रही है और परीक्षा का समय है सुबह १०.३० से

मै बहुत देर तक घंटी बजने की बात जोहता रहा
११.१५ पर कुछ हलचल सी होती दिखी. मास्टर हाथ में कापिया लेकर कमरों की और बढ़ रहे थे. मैंने देखा बच्चे धीरे-धीरे कमरों में जाकर अपनी जगह पर बैठ रहे थे क्योकि उनको परीक्षा की कापिया बाती जा रही थी.

लेकिन घंटी अभी भी नहीं बजी थी...और न ही प्रार्थना हुई थी.



बच्चो से पूछने पर पता चला की ऐसा तो इस स्कूल में हमेशा होता है. कभी कभी तो ११.३० पर प्रार्थना होती है

स्वयं प्रिंसिपल १२.०० बजे बस से पहुची. जब संस्था प्रमुख ही देर से पहुचेगा तो भला फिर स्टाफ के शिक्षक कैसे समय पर पहुचेगे.

रीठी उत्कृष्ट विद्यालय के हाल बेहाल है .