10 January, 2012

तुम्हारी फाईलो में गाँव का मौसम गुलाबी है

जनपद पंचायत रीठी में आज भी ऐसे सैकड़ों गांव हैं जहा विकास के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ है। सरकारी आकड़ों में तो गाँव खुशहाल और सुविधा संपन्न हो चुके हैं मगर इन आकड़ों की हकीकत क्षेत्र का दौरा करने पर देखी जा सकती है।
रीठी जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह ने अपने शपथ ग्रहण के पश्चात नियमित क्षेत्र का सघन दौरा करके विकास की एक रूपरेखा निर्धारित की है और अब उस पर क्रमश: उन्होंने विकास के कार्य कराना प्रारंभ भी कर दिए हैं।



इसी सिलसिले में वर्ष 10-11 के गौड खनिज मद से प्राप्त आबंटन पर उन्होने जनपद क्षेत्र की ऐसी पंचायतों को चुना जो आज तक विकास की धारा से अछूते रह गए हैं। आज जब ग्राम पंचायत सुगवा के मूरपार में सीसी रोड का भूमि पूजन हो रहा तो गाँव की महिलओं के मंगल गीत उनकी खुशी का इजहार कर रही थी। इस गाँव में कीचड़ से सनी गलियों में निकल पाना बहुत मुश्किल है।
इस अवसर पर जनपद सदस्य कुँजीलाल यादव ने अध्यक्ष को धन्यवाद ज्ञापित किया और विकास से उपेक्षित इस ग्राम में इसी क्रम से राशि दिए जाने की अपेक्षा व्यक्त की।
भूमि पूजन के इस अवसर पर ग्राम मूरपार के बालक, नवजवान व वृद्व सभी उपस्थित थे। जनपद पंचायत रीठी के उपाध्यक्ष गुलाम गौस चिस्ती, जनपद सदस्य माया छोटे पटैल, उदयभान यादव, दशोदा रामदास दाहिया, बराती कोल, कुँजीलाल भी इस विकास की नीव के पथ के पथिक रहे।

09 January, 2012

बीमार होने पर आठ किलोमीटर दूर इलाज कराने जाने के लिए विवश

नहीं मिलती शक्कर


सरकार आदिवासियों के विकास की योजनाओं का लाख ढिढोरा पीटती रहे लेकिन क टनी जिले के सुदूर अंचलों में बसे आदिवासियों की हालत में आज भी कोई सुधार नहीं हो सका है। अपने भोले भाले स्वभाव के अनुरूप रीठी जनपद के बसुधा ग्राम पंचायत के आदिवासियों का यही हाल है।
विगत दिनों जनपद अध्यक्ष प्रीति सिंह अपने क्षेत्र के लोगों का हाल जानने जब अपने ही निर्वाचन क्षेत्र बसुधा पहुंची तो वहां के हालात जान अचंभित रह गयी। मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे यहां के आदिवासी आज भी बीमार होने पर यहां से आठ किलोमीटर दूर रीठी जाने के लिए विवश हैं। यहां पदस्थ एम पी डब्लू द्वारा पैसे देकर र दवाइयां दी जाती हैं जबकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुफत बांटने के लिए दवा दी जाती है।
यहां के सरपंच जगतसिंह ने अध्यक्ष को बताया की इस क्षेत्र में एक उप स्वास्थ्य केंद्र खोले जाने की नितान्त आवश्यकता है इस पर प्रीति सिंह ने बताया की उनकी यह मांग शासन से पहले ही प्रस्तावित की जा चुकी है और वित्त वर्ष 12-13 में यह स्वीकृत भी हो जाएगा। उन्होने बी एम ओ एवं सुपरवाईजर को बसुधा क्षेत्र में लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य कर्मी को •ो नियमित क्षेत्र में भ्रमण करने एवं शासन से प्रदान की जाने वाली दवा ग्रामीणों को मुफत बांटने के निर्देश दिए।

एक अन्य शिकायत में ग्राम की बेलाबाई ने अध्यक्ष को बताया की भादोंके बाद से शक्कर आज तक नहीं बटी है। यहा पदस्थ सेल्समैन रामकुमार सेन द्वारा महीनो शक्कर नहीं बाटी जा रही। सहकारी समिति द्वारा घोर लापरवाही की जा रही है और सेल्समैन महीने में एक बार ही यहां की दुकान खोलता है। अध्यक्ष ने सहकारी सेवा समिति के समिति प्रबंधक को तत्काल संबंधित सेल्समैन द्वारा हर महीने राशन नियमित बांटने के निर्देश दिए.

इसके पहले एक कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष ने गौड खनिज मद से तीन लाख की राशि से बनने बाली सडक का भूमि पूजन किया । इस अवसर पर सरपंच जगत सिंह, नन्हे सिंह, अमर सिंह, चतुराज सिंह, इन्दल सिंह, खुशाली, मिठाईलाल, रोहिणी विश्व•र्मा, रामचरण, मानसिंह, जागेश्वर, नरेश सिंह, देव सिंह, भारत सिंह उपसरपंच, मुन्ना सिंह, लखन सिंह, कुसुम सिंह पंच, नमई सिंह सचिव उपस्थित थे।

06 January, 2012

योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

नए कले टर अशोक कुमार सिंह ने साफ कर दिया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन के मामले में वे किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। खासकर परिवार कल्याण कार्यक्रम में दिया गया लक्ष्य किसी भी हाल में पूरा होना चाहिए। मु यालय
से गायब रहने वाले अधिकारियों को हिदायत देते हुए कले टर श्री सिंह ने कहा कि अधिकारी अब अवकाश पर जाने या मु यालय छोडऩे के पहले उनसे अनुमति लें। इसके लिए लिखित या दूरभाष पर संपर्क किया जा सकता है। मंगलवार को कटनी जिले का प्रभार ग्रहण करने के बाद नवागत कले टर अशोक कुमार सिंह कले ट्रेट सभागार में अधिकारियों के साथ पहली बैठक ले रहे थे। बैठक में कले टर श्री सिंह ने दो टूक कहा कि शासन की योजनाओं व कार्यक्रमों की समीक्षा अब विभागीय समूहवार की जावेगी। इसके लिए ग्रुप बनाये जाएंगे और एक-एक ग्रुप में चार-पांच विभाग रहेंगे। जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके। बैठक में कले टर ने अधिकारियों से परिचय प्राप्त किया और चर्चा की। उन्होंने बीज निगम से बीज वितरण, कृषि विभाग से रबी फसलों की बुआई व स्थिति तथा विपणन संघ से फर्टीलाइजर खाद वितरण की जानकारी ली। बीज निगम प्रबंधक श्री पाण्डे ने बताया कि जिले में किसानों को रबी की फसलों का बीज उपल ध करा दिया गया है। उप संचालक कृषि ए. के. नागल ने बताया कि जिले में रबी मौसम की फसलों में गेहूॅ, चना, व अन्य फसलें बोई गई हैं। वर्तमान में फसलों की स्थिति ठीक है। जिला विपणन संघ अधिकारी एम. एल. रजक ने बताया कि किसानों को यूरिया खाद का वितरण किया जा रहा है। बैठक में कले टर ने कहा कि सेवानिवृ ा होने वाले कर्मचारियों के सारे स्वत्वों का भुगतान उसी दिन हो जाना चाहिए। केवल न्यायालयीन प्रकरण को छोड़कर, जो विभाग सेवानिवृ िा के दिन
अधिकारियों, कर्मचारी के स्वत्वों को प्रद ा नहीं करेंगे, ऐसे विभाग के प्रति नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने विभाग प्रमुखों को आगाह किया कि वे स्थापना शाखा लिपिक से इस संबंध में जानकारी अवश्य लेते रहें। यदि किसी कर्मचारी का प्रकरण न्यायालयीन भी है, तो मेरे समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि माननीय न्यायालय के आदेशों का पालन करते
हुए कार्यवाही की जा सकें। बैठक में एस. डी. एम.तेजस्वी एस. नायक, डिप्टी कले टर ओ. पी. सनोडिया सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
स्वास्थ्य विभाग पर टेढ़ी नजर
कले टर श्री सिंह ने सीएमओ से कहा कि परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत हर हाल में लक्ष्य की पूर्ति की जावे। सीएमओ डॉ. जी.सी.चौरसिया ने बताया कि जिले को 12 हजार 900 हितग्राहियों की नसंबन्दी आपरेशन करने का लक्ष्य दिया गया है।
जिसके विरूद्ध अभी तक 54.5 प्रतिशत उपल िध हासिल कर ली गई है। जिस पर कले टर ने नाराजगी भी जताई। बैठक में सिविल सर्जन के. के. जैन ने बताया कि जिले में स्वास्थ विभाग का अमला स्वीकृत पदों की अपेक्षाकृत कम हैं। जिस
पर कले टर ने सभी विभाग प्रमुखों से अपने-अपने विभागों में कितने अधिकारी, कर्मचारी की कमी है, इसकी जानकारी तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिससे शासन से विभागीय कार्यान्वयन हेतु अमले की मांग जा सके।
बताओ यों नहीं लगा ट्रांसफार्मर मत्स्य विभाग के सहायक संचालक ए. के. सिंह ने बताया कि सुरखी ग्राम में मत्स्य प्रक्षेत्र हेतु ट्रांसफार्मर लगाया जाना है। विद्युत विभाग में वर्ष 2009 में ट्रांसफार्मर लगाने के लिए राशि जमा कर दी गई हैं
लेकिन अब तक ट्रांसफार्मर नहीं लगा। जिस पर कले टर ने विद्युत विभाग सहायक यंत्री से कहा कि दो वर्ष बीतने के बाद भी ट्रांसफार्मर यों ही लगा। पूरा विवरण मेरे समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि इस कार्य में आ रही बधाओं को दूर किया जा सके।

सचिव से नहीं लें काम
बैठक में कले टर श्री सिंह ने सामाजिक आर्थिक संगणना में प्रशिक्षण, क प्यूटरआपरेटर और गणना में लगाये जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के संबंध में निर्देश देते हुए कहा कि इस कार्य में ग्राम पंचायत सचिव को नही लगाया जाए।
जिला पंचायत के मु य कार्यपालन अधिकारी जेड. यू. शेख ने बताया कि यह प्रशिक्षण दो फरवरी से आयोजित किया जायेगा। कले टर ने हाउसिंग बोर्ड से आवास, जल संसाधन से तालाब निर्माण एवं लोक निर्माण विभाग से पेंच वर्क कार्य की जानकारी भी प्राप्त ली। विद्युत विभाग से अस्थायी कने शन का विवरण लिया। सहायक यंत्री ने बताया कि इस वर्ष 17 हजार अस्थायी विद्युत कने शन दिये गये है। वन विभाग के एस.डी.ओ. ने बताया कि जिले में 33 प्रतिशत वन क्षेत्र है। जिले में तेन्दूप ाा, महुआ, कुल्लू, गोद तथा अन्य लघु वनोपज अर्जित होती हैं।

अलग से होगी कृषि मंडी समिति की समीक्षा
कले टर अशोक सिंह ने कहा कि कृषि उपज मंडी समिति की अलग से समीक्षा होगी। इस हेतु मण्डी में किसानों को मिलने वाली सुविधाओं, व्यवस्थाओं तथा मण्डी शुल्क आदि का जायजा लिया जायेगा। कले टर ने जिले में चल रहे बरगी
दायी तट नहर कार्य की भी जानकारी ली। नर्मदा घाटी बरगी परियोजना कार्यपालन यंत्री कैलाश चौबे ने बताया कि जिले में 50 किलो मीटर नहर कार्य स्वीकृत है। इसमें 38 किलोमीटर ओपनकट नहर और 12 किलामीटर सुरंग नहर का कार्य
किया जा रहा है। वर्तमान में सुरंग नहर कार्य उच्च तकनीक मशीनीकरण से जारी है। अभी तक यह कार्य 3 प्रतिशत हुआ है। यह कार्य वर्ष 2013 तक पूर्ण किया jaayega

अब पशुओं का ऑनलाइन इलाज

जल्द शुरू होगी अनोखी सुविधा
कटनी, मिशन 2013 के मद्देनजर प्रदेश की सरकार ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए नई-नई सुविधाओं का पिटारा खोलने की गत में है। हालांकि यह लाभ की दृष्टि से कितनी कारगर होती हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा । इसी पहल के फलस्वरूप अब मध्य प्रदेश में पशुओं के इलाज की ऑनलाइन सुविधा शीघ्र प्रारंभ होगी। इसके लिए सरकार ने पूरा मसौदा तैयार कर लिया है। दरअसल इस आन लाइन इलाज की जरूरत सरकार को इस लिए पड़ी योंकि लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के हिलए स्वास्थ्य सुविधाएं हीं होने की शिकायत मिल रही थीं। भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार सुदूर ग्रामीण अंचलों के पशुपालकों को घर पहुंचकर पशु चिकित्सा सुविधा उपल ध कराने के लिए ऑनलाइन कंसलटेंसी के माध्यम से यह परियोजना तैयार की गई है। योजना के संबंध पशुपालन मंत्री अजय विश्नोई ने बताया कि अगले वर्ष प्रदेश में पशुपालन के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियां होंगी। नलाइन पशु उपचार की ड्वेट, परियोजना में कम लागत में पशुओं के उपचार की सुविधा पशुपालकों के घरों में पैरावेट के जरिए उपल ध होगी। इसके साथ ही गौ-वंश के संरक्षण के लिए कुछ जिले में गौ अ यारण्य शुरू किया जाएगा। इसकी योजना भी विभाग द्वारा तैयार की गई है।

अतिथि सत्कार में फूंके 60 लाख

समूचे प्रदेश में आम आदमी की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। स्वर्णिम मध्प्रदेश का दावा करने वाली शिवराज सिंह सरकार का न केवल खजाना खाली है बल्कि वर्तमान में सरकार पर 69.259.16 करोड़ का कर्ज भी है। बावजूद इसके इन आंकड़ों से सबक लेने की बजाय सरकार और उसके अफसरों ने अतिथि सत्कार के नाम पर 60 लाख 40 हजार 101 रूपये फूंक डाले है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि अनिल तिवारीने कहा है कि शिवराज सरकार कर्ज लेकर घी पीने की कहावत रितार्थ कर रही है। सरकारी खजाने की हालत ठीक न होने के बावजूद राज्य मंत्रालय की सत्कार शाखा ने शिष्टïाचार कार्यालय में उपल ध शासकीय वाहनों का उपयोग न करते हुये निजी ऑपरेटरों या ट्रेवल्स से वाहन किराये पर लेकर 60 लाख 40 हजार 101 रूपये के किराये का भुगतान किया है, यह खुलासा ऑडिट रिर्पोट में हुआ है। ऑडिट रिर्पोट तत्कालीन शिष्टïाचार अधिकारी बसंत कुर्रे सत्कार अधिकारी, संजय सिंह चौहान कैशियर, राजेन्द्र बलवेट व संजय मिश्रा के कार्यकाल की कराई गई
जिसमें स्पष्टï कहा गया है कि अतिथियों के उपयोग के लिये शासकीय वाहनों या स्टेट गैरेज के वाहनों का उपयोग करना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इतना ही नहीं भुगतान के पूर्व संबंधित अधिकारी की अनुमति नहीं ली जो अनियमितताओं की श्रेणी में आता है। पन्ना के वरिष्ठï जिला पंचायत सदस्य अनिल तिवारी ने कहा है कि व्यर्थ के स मेलनों
और भाजपा के व्ही.आई.पी. नेताओं की आवभगत में करोड़ों रूपये खर्च करने वाली प्रदेश सरकार अरबों के कर्ज का प्रतिमाह औसत 5051.८३ करोड़ रूपये का याज चुका रही है यानि बजट से ज्यादा राशि ऋण चुकाने में खर्च किया जा रहा है। वि िान्न संस्थाओं की आऊट स्टेडिंग पर 3 करोड़ की गारंटी दे रखी है कुल जमा सरकार पर 77.999.०२ करोड़ का दायित्व है। बुंदेलखण्ड के नामी नेताओं में शुमार अनिल तिवारी ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुये कहा है कि गोवा जैसे छोटे राज्य की औसत आय प्रति व्य ित सालाना 1,32,719 रूपये है जबकि देश के बड़े प्रदेशों में शामिल मध्यप्रदेश के निवासी प्रति व्य ित की सालाना औसत आय मात्र 27,250 रूपये रह गई है। ये आंकड़े सरकार की असफलता की कहानी बयां कर रहे है। तने सबके बावजूद राज्य मंत्रालय में 1 फरवरी 2009 से 31 अगस्त 2009 तक की गई वि िान्न बैठकों में मंत्रियों- धिकारियों के चाय- नाश्ते पर 3 करोड़ ८० लाख 716 रूपये खर्च किये गये

धान खरीदी में प्रतिदिन लाखो का घोटाला

प्रदेश की भाजपा सरकार नौकरशाहों पर नियंत्रण लगा पाने में असहाय नजर आ रही है तभी तो सेवा सहकारी केन्द्रों में गरीब किसानो की धान खरीदी में खुलेआम घोटाला किया या जा रहा है।
जिला सहकारी बैंक रीठी अंतर्गत सोसाइटियों में किसानो की धान हफतों से पड़ी रह जाती है वहीं दलालों, व्यापारियों की धान खुलेआम खरीदी जा रही है।
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी धान खरीदी का मौसम सहकारी समिति कर्मचारियों एवं दलालों के लिए चांदी काटने का मौसम होता है। किसानो की माने तो उन्होने पंजीयन तो करा लिया लेकिन उन्हें डेट पर डेट दी जा रही है फिर भी धान नहीं तौली जा रही है। वहीं व्यापारियों की मिली भगत से ऊपर ही ऊपर रातों में ट्रक लोड कराकर कटनी ऍफ़ सी आई भेजे जा रहे हैं।
सूत्रों की माने तो रीठी सहकारी समिति के पुराने दलाल तथा अन्य व्यापारी इस समय केवल धान खरीदी के गोरखधंधे में लगे हैं। यह व्यपारी किसानो से कम कीमत पर धान खरीद रहे हैं और इन पर रीठी सहकारी समिति की सील वाला प्रिंट अपनी गोदाम पर लगाकर सीधे कटनी भेजा जा रहा है। स्पष्ट रूप से इसमें समिति प्रबंधक एवं धान खरीदी कर रहे सेल्समैन के सहयोग के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव ही नहीं है। इनके माध्यम से रात में ही गेटपास प्राप्त कर बाहर के बाहर बड़ा खेल चल रहा हैं।
वही वास्तविक किसानो की खाद खुले में पड़ी बारिस की मार झेलने पड़ी है। किसानो को गुमरहा किया जा रहा है और तरह-तरह के तर्क देकर उनकी धान नहीं खरीदी जा रही है।
किसानो ने कलेक्टर व एस डी एम कटनी से मांग की है की रीठी, बडग़ांव, देवगांव, बिलहारी में चल रहे खरीदी केन्द्रों की यदि मौके पर पड़ताल की जाए तो बड़ा घोटाला उजागर होने की संभावना है।

05 January, 2012

हिन्दुत्व को बदनाम करने का कांग्रेस का तीसरा अध्याय शुरू----------

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यू.पी.ए. गठबन्धन सरकार संत, मंदिर और संघ को बदनाम करने पर तुली हुई है। एक साजिश के तहत योजनाबध्द ढंग से वह इस कार्य में संलग्न है। दिग्विजय सिंह को इन देश विरोधी कारनामों के अघोषित प्रवक्ता भी बन गये हैं। दिग्विजय ंसिंह उस पर बयान जारी कर कांग्रेस प्रमुख की रजामंदी की मुहर लगा देते हैं। निश्चित ही देश के लिए शुभ संकेत नहीं है।
जैसे अंग्रेजों के जमाने में अंग्रेज भारतीय सैनिकों द्वारा भारतीयों पर अत्याचार करवाते थे ठीक उसी तर्ज पर सोनिया गाँधी दिग्विजय सिंह से कार्य करवा रही हैं। राष्ट्र एवं हिन्दुव को बल प्रदान करने वाले इन तीनों शक्ति केन्द्राें पर सरकार का हमला निरंतर जारी है। सरकार इन तीनों को अपने कार्य में बाधा मानती है और ये तीनों उसके मार्ग मेंं बाधक हैं भी, क्योंकि संघ पूरे देश में अराष्ट्रीय गतिविधियों पर जनजागरण द्वारा रोक लगाता है, संत देश के कोने-कोने में घूम-घूम कर प्रवचन द्वारा लोगों को सदविचारों से अवगत कराते हैं जिससे ईसाई मिशनरियों को धर्म परिवर्तन कराने में काफी दिक्ततों का सामना करना पड़ता है और यह सब काम हिन्दुओं के श्रध्दा केन्द्र मंदिरों के कारण उसमें सफल नहीं हो पाते हैं।
संत, मंदिर और संघ ये तीनों राष्ट्र की प्राण शक्ति हैं। ये राष्ट्र की प्रेरणा, श्रध्दा एवं सुरक्षा के केन्द्र हैं। इन पर कुठाराघात देश पर कुठाराघात है। इसलिए कांग्रेस की कुटिल नीतियों को पहचानना होगा और इनका प्रत्युत्तर के लिए सम्पूर्ण देशवासी को खड़ा होना होगा। इन सारी समस्याओं की जड़ एण्टोनिया माइनो उर्फ सोनिया गांधी ही हैं। वह पोप की एजेंंट की तरह कार्य कर रही हैं। सरकार की संपूर्ण क्रिया कलाप स्वयं कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी ही संचालित करती हैं। मनमोहन सिंह तो नाम मात्र के प्रधानमंत्री हैं। वास्तव में भारत के इतिहास में यह पहला मौका है जब कोई प्रधानमंत्री अपनी शक्तियों का प्रयोग किसी दूसरे के इशारे पर करता हो। कांग्रेस संताें और संघ के खिलाफ जोरदार अभियान चला चुकी है। इसलिए अब उसके निशाने पर देश के प्रमुख मंदिर और ट्रस्ट हैं। देश के प्रसिध्द मंदिरों का खजाना जो कि अंग्रेज भी नहीं जान सके थे उन मंदिरों की जासूसी करा कर उसकी गोपनीयता, पवित्रता को भंग कर उसकी धनराशि को हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। जो काम अंग्रेज और मुगल नहीं कर पाये उसको करने में सोनिया गांधी सफल हो रही हैं।
कई दशकों से बंद मंदिरों के कपाट खुलाकर वहां उपलब्ध सामग्री का आकलन कर मंदिर की संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास कर लोगों की श्रध्दा भंग करने का प्रयास किया जा रहा है। ये लोग ऐसा कर मंदिरों से लोगों को दूर करना चाहते हैं ताकि वह इन से प्रेरणा न पा सके और धीरे-धीरे हिन्दू अपनी संस्कृति से दूर होते जायें। यह है कांग्रेसी चाल। सरकार जहां एक ओर हिन्दू मंदिराें एवं ट्रस्टों को अपने अधीन करने में लगी है वही दूसरी ओर मस्जिद एवं मदरसों को भरकम धनराशि अनुदान के रूप में मुहैया कराई जा रही है। यह कांग्रेस का दोहरा मापदण्ड क्या दर्शाता है। देश के मस्जिद एवं मदरसों के लिए विदेशों से काफी पैसा आता है लेकिन सरकार को इसका पता भी नहीं चल पाता है।
यह हिन्दुओं की उदारता, सहिष्णुता एवं शहनशीलता का ही परिणाम है कि सरकार एक के बाद एक देश एवं हिन्दुत्व विरोधी कार्य करने में लगी है। लेकिन हिन्दू चुप बैठा है। देश के जितने प्रसिध्द मंदिर है, सब उसके निशाने पर हैं। जो काम मुगल सैनिक बंदूक की नोक पर करते थे वही काम आज सोनिया गांधी अपनी सरकार के सहारे करवा रही हैं। संतों पर सरकार का हमला जारी है। जगद्गुरू शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती, आशाराम बापू, श्री श्री रविशंकर प्रसाद , अमृतानन्दमयी माँ, कृपालु जी महराज को लांक्षित करने की साजिश रची गई बाद में सरकार की कलई खुल कर सामने आयी, स्वर्गीय लक्ष्मणानन्द सरस्वती सहित कई संतों को मरवाने के बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और स्वामी असीमानन्द को जबरन जुर्म कबूल करवाने वाली सरकार और उसके बाद 4 जून को दिल्ली की काली रात केवल भारतीयों को ही नहीं अपितु विश्व के लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
सरकार एक जनहित याचिका का बहाना लेकर केरल के पद्मनाभ स्वामी मंदिर के खजाने का निरीक्षण करा रही है उसमें भी वह विदेशियों की मद्द ले रही है। आखिर प्रश्न यह उठता है कि क्या भारत में उस स्तर के लोग नहीं है जो उसका मूल्य आंकने के लिए विदेशी लोगों की आवश्यकता पड़ी। सरकार मन्दिर के खजाने को हड़पने के चक्कर मे है। जबकि वह मन्दिर त्रावणकोर के राज परिवार का है। उसका वाकायदा ट्रस्ट बना है। ट्रस्ट सरकार को कर भी देता है। उसके तहखाने में सदियों पुराने अस्त्र-शस्त्र, राज दण्ड, धर्म दण्ड, सोने के आभूषण, सोने चांदी के सिक्के, रत्न जड़ित मुकुट, बेशकीमती मूर्तियां तथा शाही परिवार के आभूषण मिले हैं जो मंदिर के खजाने के अंश हैं। जिसको अंग्रेजों से बचाने के लिए तत्कालीन राज परिवारों ने मन्दिर के हवाले कर दियें थे। स्थानीय लोंगो का मानना है कि मन्दिर की सम्पत्ति राज परिवार की है तथा केंन्द्र एवं राज्य सरकार नही ले सकती।
देश के कई मंदिरों के उदाहरण सामने आये है कि मंदिर की संपत्ति को सरकार ने अपने कब्जे में लेकर जमकर दुरूपयोग किया है तथा मंदिर बदहाली के शिकार हुए हैं। यह खजाना राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है लिहाजा इसको सुरक्षित एवं संरक्षित रखने की जरूरत है। देश के किसी भी मस्जिद या चर्च को न तो सरकारी अधिग्रहण में लिया गया है और न ही उसकी आय व्यय एवं सम्पत्ति की जांच हुई है। मन्दिरों की धनराशि और चढ़ावें को सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण में लगाती है लेकिन अल्पसंख्यक अपने मस्जिद और चर्च का पैसा धर्मान्तरण में लगातें है। इसके लिए ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता है कि मन्दिरों की धनराशि हिन्दुओं के कल्याण तथा उत्थान में खर्च की जाय। हमारे देश के अधिकांश मन्दिर और प्रमुख संत जनकल्याण हेतु अनेक कार्यक्रम चलाते हैं लेकिन सरकार को वह सब दिखाई नहीं पड़ता है। इसके लिए हमें आशाराम बापू द्वारा दिये गये नारे ‘मैडम भारत छोड़ो’ को बुलंद करना होगा तभी देश का कल्याण है, क्योंकि वह विदेशियों की हस्तक है। उनकी सारी नीतियां विदेश परस्त हैं।