10 February, 2012

कैद के पल

दिनांक ०८.०२.१२ की शाम लगभग छै: बजे पिता के लिए दवा लेने दूकान जा रहा था तभी अचानक आठ दस लडको ने बस स्टेण्ड रीठी पर घेर लिया एवं गाली गलौज करने लगे। जिन लडक़ों ने मुझे घेरा था वे सब कटनी जिले के रीठी जनपद पंचायत के देवरी ग्राम के थे. उन्हीं में से एक ने गाली देते हुए कालर पकड़ ली व कहा की बहुत बड़ा पत्रकार बन गया है मेरे चाचा अनिल राय के खिलाफ कई बार समाचार पत्र में छाप चुके हो । तभी एक लड़के ने अनिल राय को फोन लगाया और कहा की अखिलेश उपाध्याय का क्या करना है और उन्होंने मेरी बाइक की चावी छीन ली और कहा की चल देवरी अनिल चाचा ने बुलाया है। और मुझे जबरन देवरी ले जाने के लिए धक्का देने लगे। मेरे बार-बार कहने पर वे मान ही नहीं रहे थे तब मैं मजबूरन उनके साथ गाडी में बैठ कर देवरी गया.। इन लडको की तीन बाइक थी जो घेरकर आगे पीछे चल रहीं थी।
दरअसल मामला यह है की सहकारी समिति के माध्यम से करी जा रही धान खरीदी में हमेशा की तरह इस बार भी अनिल राय सेल्समेन द्वारा धान खरीदी की जा रही थी इस धान खरीदी में जमकर अनियमितताए की गयी और खूब क्षेत्र के व्यापारियों ने किसानो के नाम फर्जी धान बेचकर माल कमाया.

इस अनियमित्ताओ को शुरू से मैंने कटनी के कलेक्टर और एस डी एम् को बार-बार अवगत कराया लेकिन किसी ने भी कोई जाँच नहीं की. तभी किसी ने इसकी शिकायत क्षेत्रीय विधायक निशीथ पटेल से की तो उनके आदेश पर सहकारी समिती रीठी ने तत्काल प्रभाव से सेल्स मेन अनिल राय से लीड का काम छीन लिया व एक जाँच दल इस मामले की जाँच करने पंहुचा.
जब जाँच दल अपनी जाँच करने पंहुचा तब मै स्थल पर जानकारी लेने पंहुचा.
इसकी खबर अगले दिन स्थानीय अखबारों में छपी. तब अनिल राय ने मेरे दो तीन मित्रो को फोन पर मेरे बारे में बताया की अखिलेश को समझा लो भतीजो का नया खून है कुछ भी हो सकता है.
०६.०२.२००२ को खबर छपने के दिन शाम को अनिल राय का रात आठ बजे फोन आया की कहा हो और बहुत खबर छाप रहे हो कहा मिलोगे. तब मैंने कहा जहा कहोगे फोन करना मिल लेगे. लेकिन अगले दिन अनिल राय का कोई फोन नहीं आया.
आठ फरवरी को फालो अप में फिर से एक अखबार ने खबर छपी. मुझे आशंका थी की चूकी अनिल राय ने मेरे परिचितों को आगाह किया था इसलिए कुछ भी कर सकता है. इसी सिलसिले में मै रीठी टी आई आर पी तिवारी के पास एक बजे गया और इस सारे घटनाक्रम को बताया. उन्होंने कहा मै अनिल राय को बुलाकर समझा दूगा .

उसके बाद क्या हुआ वह आप पढ़ ही चुके है

देवरी ले जाकर अनिल राय मुझसे पूंछता रहा की हमारे बारे में बार-बार क्यों लिख रहे हो। और तरह-तरह के दबाब डालकर और आरोप लगाकर मुझसे समाचार के सूत्र पूंछता रहा। असल में अनिल राय और उसके व्यक्तियों की इस हिमाकत का कारण उसके द्वारा सेल्समेन के पद पर रहते हुए अकूत संपत्ति कमाना तथा उसकी पत्नी अहिल्या राय का राजनैतिक दल भाजपा से सम्बद्ध है.
निश्चित है की ऐसे व्यक्ति पुलिस और आला अधिकारियो को पैसे के दम पर अपने पक्ष करके रखते है.
मेरे अपहरण की सूचना मिलते ही मेरे मित्र पंद्रह मिनिट में मेरे पास पहुच गए. और तब तक भोपाल में बैठे मेरे पत्रकार मित्र भी सक्रीय हो गए और उन्होंने आई जी, एस पी, कमिश्नर, भा जा प् प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा सभी को सूचित कर दिया. पुलिस तो अपने समय के मुताबिक पहुची. ऐसे में टी आई रीठी की भूमिका भी संदिग्ध लगती है.
मेरे मित्रो की संख्या देखकर अनिल राय के होसले ढीले पद गए और फिर मै सकुशल घर पहुच सका.
इस सारे मामले में पुलिस बिलकुल भी निष्क्रिय बनी रही.
जब मै थाने रिपोर्ट दर्ज करने गया तो टी आई ने जबरन यह लिखवाया की मै अपने परिचित के साथ गया. जबकि पत्रकार होने के नाते मै तो सभी से परिचित था.

खैर अगले दिन प्रेस क्लब कटनी के द्वारा एस पी, कलेक्टर,जनसंपर्क आयुक्त भोपाल और मुख्य मंत्री मध्य प्रदेश शासन के नाम एक ज्ञापन दिया गया जिसमे तीन मागे राखी गयी -
१ एफ आई आर दर्ज की जाए
२ टी आई को तत्काल हटाया जाए
३ सेल्स में अनिल राय को तत्काल पद से प्रथक किया जावे

तब कही जाकर एफ आई आर दर्ज हो सकी और एडिसनल एस पी ने आश्वासन दिया की बारह घंटे के अन्दर टी आई रीठी को भी हटा दिया जाएगा.