15 March, 2012

देश की 53 प्रतिशत आबादी के पास शौचालय नहीं हैं।

2011 की जनगणना के शुरुआती नमूनों के आधार पर जो आंकड़े सरकार ने जारी किये हैं, वे आंखें खोलने वाले हैं। देश के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौली ने खुद ये आंकड़े जारी किये, इसलिए इनकी सचाई और विश्वसनीयता पर कोई शक पैदा नहीं हो सकता। इन आंकड़ों में दिये गये कुछ कटु सत्यों पर जरा गौर करें: - देश की 53 प्रतिशत आबादी के पास शौचालय नहीं हैं। - 58 प्रतिशत घरों में ही बाथरूम है। बाकी घरों के लोगों के बाहर नहाना पड़ता है। - 39 प्रतिशत घरों में रसोई नहीं है। - 18 प्रतिशत घरों में रेडियो, टीवी, कंम्प्यूटर/लैपटॉप, फोन, साइकल, कार/स्कूटर और मोटरसाइकिल/मोपेड जैसी विशेष संपत्तियां नहीं हैं। - 36.8 प्रतिशत घरों में फोन नहीं है। - 58.8 प्रतिशत घरों में टीवी नहीं है। - 90.6 प्रतिशत घरों में कंप्यूटर/लैपटॉप नहीं है। - 79 प्रतिशत घरों में कोई दोपहिया वाहन नहीं है। - 71 प्रतिशत घरों की पक्की छत नहीं है। - 43 प्रतिशत ग्रामीण घरों में आज भी रात को केरोसिन जलाकर रोशनी की जाती है। - शहरों में एक-तिहाई घरों में खाना बनाने के लिए एलपीजी की सुविधा नहीं है। - 20 प्रतिशत शहरी घरों में आज भी लकड़ियां जलाकर खाना बनाया जाता है। - देश के केवल 41 प्रतिशत घर रहने लायक हैं। - 20 प्रतिशत घरों में आधा किलोमीटर दूर से पेयजल लाया जाता है। - केवल 28 प्रतिशत ग्रामीण घरों के भीतर पेयजल उपलब्ध है