06 June, 2013

बहुत अखरा  तुम्हारा जाना 

पिछले दिनों हमारे एक परिचित  नहीं रहे। उनका जाना अप्रत्याशित था। सबेरे-सबेरे उनके मरने की खबर ने व्यथित कर  दिया।

जीवन भर कड़ी मेहनत से रुपया तो खूब बनाया लेकिन अपना स्वास्थ्य बनाना भूल गए। अपने पीछे संपत्ति और बिलखते बच्चे छोड़ गये।

उसी दिन से खिन्न चित्त से काम में कही मन नहीं लग रहा।

पैसे की भूख ने खुद को समय ही न मिल सका।

कुछ अच्छा काम करने वाले याद  किये जाते है लेकिन धन कमाने की लालसा ने तुम्हे कुछ न करने दिया। तुम मुझे इतना सन्देश दे गए की मानव तन पाने के बाद ऐसा काम जया जरूर करना चाहिए जिससे लोग इतना तो  कहे की यार ऐसे लोग बार-बार जन्म नहीं लेते।