30 December, 2014

Sahaj Express: आर टी आई और तिरिया चरित्र

Sahaj Express: आर टी आई और तिरिया चरित्र: सूचना का अधिकार अधिनियम लागू करते समय किसी ने कभी सोचा भी नहीं होगा की इसके बचाव के लिए लोग कैसे-कैसे ढंग ढूढ़ लेंगे।  एक तो पहले ही आर टी आ...

आर टी आई और तिरिया चरित्र

सूचना का अधिकार अधिनियम लागू करते समय किसी ने कभी सोचा भी नहीं होगा की इसके बचाव के लिए लोग कैसे-कैसे ढंग ढूढ़ लेंगे।  एक तो पहले ही आर टी आई लगाने वाले को इतना भटकाया जाता है की यदि उसका आत्मबल प्रबल न हो तो वह हतोत्साहित होकर बैठ जाए.

कटनी जिले में इन दिनों सूचना का अधिकार लगाने पर सूचना न देना पड़े इसका पहले सम्बंधित विभाग द्वारा बरगलाया जाता है. यदि जानकारी दी भी जाती है वह भ्रमात्मक होती है. ऐसे में यदि कोई महिला अधिकारी हुई तब तो समझो वह अपने महिला होने का लाभ लेना चाहती है.

ऐसा ही पिछले दिनों एक आर टी आई एक्टविस्ट के साथ हुआ जिसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया व उसे झूठे मामले में उलझाने की पूरी कोशिश की गयी. कटनी जिले के रीठी तहसील का एक मामला है जहा सूरज पाल ने प्री मेट्रिक आदिम जाती बालिका छात्रावास में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी चाही थी. समय सीमा में जानकारी न मिलने पर प्रथम  अपीलीय अधिकारी से अपील की गयी. यहाँ से भी जानकारी नहीं दी गयी उल्टा यह लिख दिया गया की आवेदक को जानकारी मिल गई है और वह संतुष्ट है जबकि सूरज पाल ने इस तरह से कुछ भी नहीं लिखा था

अंत में सी एम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत की इसमें भी दो बार गुमराह किया गया. लगभग छह महीने का समय इस दौरान गुजर गया और आवेदक को आधी अधूरी जानकारी दी गई और जबरन दबाव डाला गया की मै संतुष्ट हूँ ऐसा लिख कर दो नहीं तो महिला से छेड़छाड़ .......इत्यादि मामले में फसा दिया जाएगा।

इधर 22.12.2014 की शाम चार बजे छात्रावास अधीक्षिका नेहा गुप्ता सूरज पाल के घर पहुंची और कहा चलकर जानकारी ले लो  घर पर सूरज नहीं था सूरज का छोटा भाई व उसका दोस्त बैठे बारह्वी की  थे उन्होंने कहा हम  जायेगे आप  तो सूरज को जानकारी देना तब अधीक्षिका ने कहा बगल में ही हॉस्टल है चलकर जानकारी ले लो क्योकि  मुझे उच्चाधिकारियों का दबाव है मेरी नौकरी दाव पर है

तब दोनों अधीक्षिका के साथ छात्रावास पहुचे. अपनेह कार्यालय में बैठाकर अधीक्षिका अलमारी में कागज़ ढूढ़ने लगी तभी अचानक अधीक्षिका ने कमरे पर टला जड़ दिया कमरे के दूसरे दरवाजे पर पहले से खड़े किसी व्यक्ति ने दूसरे दरवाजे की भी बहार से कुण्डी लगा दी.

इसके बाद अधीक्षिका ने सूरज को फोन लगाया और कहा तुम्हारे भाई मेरे पास है मुझे लिखकर दो की  अधिकार में  माँगी गई जानकारी मुझे मिल चुकी है नहीं तो मै उनको छेड़छाड़ के मामले में फसा दूँगी

जब तक सूरज छात्रावास पहुचता तब तक पूरा मोहल्ला इकट्ठा हो चूका था.सूरज को देखकर अधीक्षिका ने में गेट पर भी टला जड़ दिया और कहा की  जानकारी मिल गई है ऐसा लिखा कर दो सूरज ने कहा पहले मेरे भाईयो को बहार निकालो तभी अधीक्षिका के पास फोन आया और उसने अपने बाल फैला लिए और जोर जोर से चिल्लाने लगी व कपडे फाड़ने लगी जिसे लोगो ने देखा इस घटना की जानकारी लोगो  ने जिला संयोजक को फोन पर दी

तभी अधीक्षिका को निर्देश देने वाले ने  फिर फोन किया और अधीक्षिका ने महिला हेल्प लाईन पर शिकायत कर दी और  थोड़ी देर में पुलिस पहुंच गयी

पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है  पुलिस के मामला दर्ज करने के बाद जिला संयोजक कटनी ने एक पत्र के माध्यम से धाराए बढ़ाने के लिए लिखा है फिलहाल सूरज के नाबालिग भाई की जमानत हो गई है.

ऐसे में त्रिया चरित्र के आगे आर टी आई एक्टविस्ट पस्त है 

12 December, 2014

Sahaj Express: शिक्षा का गिरता स्तर जिम्मेदार कौन ?

Sahaj Express: शिक्षा का गिरता स्तर जिम्मेदार कौन ?: कटनी - अखिलेश उपाध्याय  शिक्षा विभाग में व्यपात अनियमितता इस समय चरम पर है कटनी जिले के स्कूलों में शिक्षा का स्तर बहुत गिर गया है यहाँ...

शिक्षा का गिरता स्तर जिम्मेदार कौन ?

कटनी - अखिलेश उपाध्याय 
शिक्षा विभाग में व्यपात अनियमितता इस समय चरम पर है कटनी जिले के स्कूलों में शिक्षा का स्तर बहुत गिर गया है यहाँ के विद्यालयों में शिक्षक कभी भी समय पर नहीं पहुँचते स्कूल लगने का समय साढ़े दस का होता है और अधिकांश मास्टर पान के ठेलो पर मस्ती करते दीखते है आराम से ग्यारह साढ़े ग्यारह बजे तक स्कूल में पहुँचते है फिर अधिकांश अखबारों में डूब जाते है बमुश्किल एक आध पीरियड शाला में बिताते है 

गौरव खो दिया विद्यालय ने 
कभी जबलपुर जिले की शान रहा रीठी स्कूल आज अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है यहाँ पदस्थ् शिक्षक लापरवाह और पढ़ाई के प्रति रूचि नहीं लेते इस समय रीठी तहसील मुख्यालय के विद्यालयों में पढ़ाई को छोड़कर सब  कुछ हो रहा है एक्सलेंस स्कूल के हाल बेहाल है यहाँ पदस्थ प्रिंसिपल उषा दुबे स्वयं कटनी से आना जाना कर रही है ऐसे में स्कूल में अनुशासन कैसे हो?
प्रिंसिपल के देर से आने का लाभ उन शिक्षको को मिलता है जिनको पढ़ाने में जरा भी रूचि नहीं है. समय पर शिक्षको का विद्यालय  न पहुचना अप -डाउन करके नौकरी क्स्टनर वालो की  तो जैसे परंपरा ही बन गई है. 

नहीं मिली किताबे 
जिले में  अभी भी ऐसे दर्जनो विद्यार्थी है जिन्हे किताबे नहीं मिली है. जिस कारन बच्चे बिना किताबो के पढ़ रहे है. बच्चे यदि शिक्षक से किताब की मांग करते है तो कह दिया जाता है की अब किताबे नहीं मिलेगी. 
इधर शिक्षको के पास पुस्तके बाटने का कोई रिकार्ड भी नहीं तैयार किया जाता कुछ अखबारों में समाचार प्रकाशित होने के बाद से विद्यालयों  में हड़कम्प की स्थिति है और आनन- फानन में किताबो के वितरण के  कक्षावार रजिस्टर तैयार कराये जा रहे है जबकि इन किताबो के वितरण के समय ही वितरण पंजी  को तैयार करना चाहिए और इस लापरवाही का खामियाजा बच्चे साल भर बिना किताब के पढ़कर गुजारते  है 
जिला शिक्षा विभाग की टीम नियमित अवलोकन भी करती है लेकिन यह सब महज कागजो तक ही सीमित होता है क्योकि शिक्षा के स्तर  में न तो कोई सुधार  दिख रहा है और न ही इसके लिए जिम्मेदार गंभीर ही दीखते है 

प्रयोगशाला की दुर्दशा 
जिले की प्रयोगशालाओ के हाल बेहाल है हाईस्कूल स्तर  पर हर साल मिलने वाले प्रयोगशाला मद जो पच्चीस हजार होती है इसका प्रयोग कैसे होता है यह यहाँ की प्रयोगशाला की दुर्दशा देखकर अंदाज लगाया जा सकता है. 
 विद्यार्थियों को लेब में ले जाकर प्रयोग नहीं कराये जाते और तो और प्रयोगशाला में सामान क्या है और कैसी हालत में है यह तो प्रयोगशाला सहायको तक को मालूम नहीं है 
सूचना का अधिकारर लगाकर यदि जानकारी मांगी जाती है तो स्वयं प्रिंसिपल  और महिला कर्मी अपने महिला होने का नाजायज फायदा उठाते हुए यह धमकी देते है की उन्हें झूठे केस में फसा दिया जाएगा अभी हाल ही में ऐसे ही एक मामले में कलेक्टर तक को पत्र लिखकर सूचना प्रदान करने का निवेदन किया गया है. 

वही रीठी प्रिंसिपल उषा दुबे की मनमानी चरम पर है हफ्तेमें  कभी कभार आने वाली प्रिंसिपल को विद्यालय के  घटते स्तर  से कोई लेना देना नहीं है वह तो आफिस पहुंचकर बिल वाउचर निबटाने में ज्यादा रूचि रखती है जिसकी पुष्टि एक आर टी आई से होती है जिसमे प्री मेट्रिक बालिका छात्रावास में बतौर नोडल  अधिकारी रीठी  एक्सलेंस प्रिंसिपल ने वर्ष २०१३-१४ में छियालीस सौ का भुगतान लिया है और उन्होंने छुट्टी के दिनों में भी निरिक्षण किया है जबकि यहाँ का बच्चा-बच्चा  जनता है की प्रिंसिपल  रीठी किस बस से पहुचती है और कितने बजे की बस से रवाना हो जाती है 
इस आदिम जाती छात्रावास में पिछले कई सालो से पढ़ाने वाले शिक्षक संतोष मिश्रा, के के नीखरा महीने में कभी-कभार पढ़ाने पहुँचते है एक आर टी आई में प्राप्त आंकड़े यह कहानी कह रहे है जिसमे आगंतुक पंजी पर इनके आने वाले का कोई भी जिक्र नहीं है. और यह सभी शिक्षक साल भर बिना छुट्टी पेमेंट उठाते है आदिम जाती की वर्तमान जिला सयोंजक  द्वारा कमीशन लेकर मामले में लीपापोती की जाती है 

अब ललख टेक का सवाल यह है की अखबारों में लगातार छपने के बाद भी जिला कलेकटर व दी ई ओ की उदासीनता कई सवाल खड़े करती है?  









07 December, 2014

मीना की दुनिया - बच्चो की दुनिया से कितनी दूर

मीना की दुनिया - बच्चो की दुनिया से कितनी दूर

राज्य शिक्षा केंद्र और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से समस्त प्राथमिक एवम माध्यमिक शालाओ के विद्यार्थियों के लिए एक रेडियो कार्यक्रम मीना की दुनिया का प्रसारण 5.8.14  से लगातार प्रसारित किया  जा रहा है. लेकिन विडम्बना यह है की इस योजना में जिले के प्राथमिक एवम माध्यमिक कक्षाओ के शिक्षको में जरा सी भी रूचि नहीं देखी जाती
अधिकांश विद्यालयों में इस कार्यक्रम को नहीं चलाया जाता इस सम्बन्ध में रीठी क्षेत्र के बच्चो से जब यह पूछा तो अधिकतर बच्चे तो इस कार्यक्रम से अनभिज्ञ है.
जबकि सभी विद्यालयों में इसके लिए रेडियो उपलब्द्ध कराया गया है और इससे सम्बंधित रजिस्टर भी संधारित नहीं किया जाता
कुछ  शालाओ में यह कार्यक्रम कभी कभार चलाया जा रहा है इसमें निरंतरता नहीं है
रेडियो से प्रसारित इस कार्यक्रम की उपलब्द्धि विद्यालयों में लगभग शून्य है