12 December, 2014

Sahaj Express: शिक्षा का गिरता स्तर जिम्मेदार कौन ?

Sahaj Express: शिक्षा का गिरता स्तर जिम्मेदार कौन ?: कटनी - अखिलेश उपाध्याय  शिक्षा विभाग में व्यपात अनियमितता इस समय चरम पर है कटनी जिले के स्कूलों में शिक्षा का स्तर बहुत गिर गया है यहाँ...

शिक्षा का गिरता स्तर जिम्मेदार कौन ?

कटनी - अखिलेश उपाध्याय 
शिक्षा विभाग में व्यपात अनियमितता इस समय चरम पर है कटनी जिले के स्कूलों में शिक्षा का स्तर बहुत गिर गया है यहाँ के विद्यालयों में शिक्षक कभी भी समय पर नहीं पहुँचते स्कूल लगने का समय साढ़े दस का होता है और अधिकांश मास्टर पान के ठेलो पर मस्ती करते दीखते है आराम से ग्यारह साढ़े ग्यारह बजे तक स्कूल में पहुँचते है फिर अधिकांश अखबारों में डूब जाते है बमुश्किल एक आध पीरियड शाला में बिताते है 

गौरव खो दिया विद्यालय ने 
कभी जबलपुर जिले की शान रहा रीठी स्कूल आज अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है यहाँ पदस्थ् शिक्षक लापरवाह और पढ़ाई के प्रति रूचि नहीं लेते इस समय रीठी तहसील मुख्यालय के विद्यालयों में पढ़ाई को छोड़कर सब  कुछ हो रहा है एक्सलेंस स्कूल के हाल बेहाल है यहाँ पदस्थ प्रिंसिपल उषा दुबे स्वयं कटनी से आना जाना कर रही है ऐसे में स्कूल में अनुशासन कैसे हो?
प्रिंसिपल के देर से आने का लाभ उन शिक्षको को मिलता है जिनको पढ़ाने में जरा भी रूचि नहीं है. समय पर शिक्षको का विद्यालय  न पहुचना अप -डाउन करके नौकरी क्स्टनर वालो की  तो जैसे परंपरा ही बन गई है. 

नहीं मिली किताबे 
जिले में  अभी भी ऐसे दर्जनो विद्यार्थी है जिन्हे किताबे नहीं मिली है. जिस कारन बच्चे बिना किताबो के पढ़ रहे है. बच्चे यदि शिक्षक से किताब की मांग करते है तो कह दिया जाता है की अब किताबे नहीं मिलेगी. 
इधर शिक्षको के पास पुस्तके बाटने का कोई रिकार्ड भी नहीं तैयार किया जाता कुछ अखबारों में समाचार प्रकाशित होने के बाद से विद्यालयों  में हड़कम्प की स्थिति है और आनन- फानन में किताबो के वितरण के  कक्षावार रजिस्टर तैयार कराये जा रहे है जबकि इन किताबो के वितरण के समय ही वितरण पंजी  को तैयार करना चाहिए और इस लापरवाही का खामियाजा बच्चे साल भर बिना किताब के पढ़कर गुजारते  है 
जिला शिक्षा विभाग की टीम नियमित अवलोकन भी करती है लेकिन यह सब महज कागजो तक ही सीमित होता है क्योकि शिक्षा के स्तर  में न तो कोई सुधार  दिख रहा है और न ही इसके लिए जिम्मेदार गंभीर ही दीखते है 

प्रयोगशाला की दुर्दशा 
जिले की प्रयोगशालाओ के हाल बेहाल है हाईस्कूल स्तर  पर हर साल मिलने वाले प्रयोगशाला मद जो पच्चीस हजार होती है इसका प्रयोग कैसे होता है यह यहाँ की प्रयोगशाला की दुर्दशा देखकर अंदाज लगाया जा सकता है. 
 विद्यार्थियों को लेब में ले जाकर प्रयोग नहीं कराये जाते और तो और प्रयोगशाला में सामान क्या है और कैसी हालत में है यह तो प्रयोगशाला सहायको तक को मालूम नहीं है 
सूचना का अधिकारर लगाकर यदि जानकारी मांगी जाती है तो स्वयं प्रिंसिपल  और महिला कर्मी अपने महिला होने का नाजायज फायदा उठाते हुए यह धमकी देते है की उन्हें झूठे केस में फसा दिया जाएगा अभी हाल ही में ऐसे ही एक मामले में कलेक्टर तक को पत्र लिखकर सूचना प्रदान करने का निवेदन किया गया है. 

वही रीठी प्रिंसिपल उषा दुबे की मनमानी चरम पर है हफ्तेमें  कभी कभार आने वाली प्रिंसिपल को विद्यालय के  घटते स्तर  से कोई लेना देना नहीं है वह तो आफिस पहुंचकर बिल वाउचर निबटाने में ज्यादा रूचि रखती है जिसकी पुष्टि एक आर टी आई से होती है जिसमे प्री मेट्रिक बालिका छात्रावास में बतौर नोडल  अधिकारी रीठी  एक्सलेंस प्रिंसिपल ने वर्ष २०१३-१४ में छियालीस सौ का भुगतान लिया है और उन्होंने छुट्टी के दिनों में भी निरिक्षण किया है जबकि यहाँ का बच्चा-बच्चा  जनता है की प्रिंसिपल  रीठी किस बस से पहुचती है और कितने बजे की बस से रवाना हो जाती है 
इस आदिम जाती छात्रावास में पिछले कई सालो से पढ़ाने वाले शिक्षक संतोष मिश्रा, के के नीखरा महीने में कभी-कभार पढ़ाने पहुँचते है एक आर टी आई में प्राप्त आंकड़े यह कहानी कह रहे है जिसमे आगंतुक पंजी पर इनके आने वाले का कोई भी जिक्र नहीं है. और यह सभी शिक्षक साल भर बिना छुट्टी पेमेंट उठाते है आदिम जाती की वर्तमान जिला सयोंजक  द्वारा कमीशन लेकर मामले में लीपापोती की जाती है 

अब ललख टेक का सवाल यह है की अखबारों में लगातार छपने के बाद भी जिला कलेकटर व दी ई ओ की उदासीनता कई सवाल खड़े करती है?