25 September, 2015

गौक्रांति के जनक गोपाल मणि महाराज से एक मुलाकात.. जरूर पढ़े और पूरा पढ़े ... गौक्रांति के जनक गोपाल मणि महाराज से एक मुलाकात.. जिस भारत में कभी दूध की नदियां बहती थी वहां आज गाय का खून बह रहा है। हमें अपने प्रयासों से इस स्थिति को बदलना है और गाय को बचाकर भारत के स्वर्णिम युग को वापस लाना है”… चंडीगढ़। देश में गौमाता का खोया हुआ सम्मान और स्थान वापस दिलाने के लिए आजीवन प्रयासरत रहने का संकल्प लेने वाले पूज्य गुरुदेव गोपाल मणि महाराज को आज पूरा भारत बेहद सम्मान की दृष्टि से देखता है। उनके द्वारा रचित गौमहत्व का ग्रंथ ‘धेनुमानस’ देशवासियों को गाय के महत्व से परिचित करा रहा है। गुरुदेव के जीवन का एकमात्र लक्ष्य गौरक्षा और गौसेवा है। वो केवल यहीं चाहते हैं कि एक बार फिर से भारत में उस स्वर्णिंम युग की वापसी हो जब घर-घर में गाय हुआ करती थी और कोई रोगी नहीं था। लोगों को गाय का महत्व समझाने और गाय की रक्षा के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से गुरुदेव देशभर में घूम-घूम कर गौकथा का वाचन करते हैं। उन्होंने कमजोर, अपाहिज और सड़कों पर घूमने वाली अनेक गायों के उचित रखरखाव और देखभाल के लिए कई शहरों में गौशालाओं का निर्माण भी करवाया है। गोपाल मणि जी ने गाय को देश की राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का संकल्प लिया है, और इसी संकल्प को देश की जनता और प्रशासन तक पहुंचाने के लिए गौक्रांति की शुरुआत की है जिससे गाय केवल हिन्दु धर्म का ही नहीं बल्कि अन्य धर्मो, विचारों और प्रतिष्ठा का भी हिस्सा बने और हर व्यक्ति के जीवन का अभिन्न अंग बने। गुरुदेव के इन प्रयासों को लेकर हम और आप जैसे आम इंसानों के मन में काफी सवाल उठते हैं क्योंकि हमने ना तो धेनुमानस का पाठ किया है और ना ही हम गाय के महत्व को समझते हैं। आप लोग भी शायद सोचते होंगे कि गुरुजी क्यों केवल गाय को लेकर ही इतने चिंतित हैं, ऐसा क्या है गाय में, क्यों इतनी महत्वपूर्ण है गाय..? और भी तो पशु हैं जिनको रक्षण की ज़रूरत है, फिर गुरुजी का प्रयास केवल गाय के लिए ही क्यों...? ऐसे ही कुछ सवालों और जिज्ञासाओं को लेकर हमने गुरुदेव गोपाल मणि जी से बात की। प्रस्तुत है उस बातचीत के कुछ अंश.. आपका ध्यान गाय बचाने पर कैसे गया। कब और क्यों आपने सोचा कि गाय को बचाना है और उसके महत्व को दुनिया के सामने लाना है जिसकी वजह से आपने धेनुमानस की भी रचना की। जय गौ माता की…। देखिए गाय हमारे समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गाय हमारे धर्म में है, गाय हमारे दिलों में है, दिमाग में है। हमारे समाज और संस्कृति में तो गाय का बहुत ज्यादा महत्व है। गाय की उपासना की जाती है, उसके पंचगव्य को पूजा में प्रयोग किया जाता है, उसके गोबर से घर को स्वच्छ किया जाता है। तो गाय तो शुरू से ही भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रही है। आज़ादी से पहले और काफी बाद तक भी लोगों में गाय के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना थी। घरों में गाएं पलती थी और बच्चे-बड़े सब उसका दूध पीकर जीवन जीते थे। आज जिस तरह से गौहत्या हो रही है, उसमें भारतीय नहीं अंग्रेजी दिमाग चल रहा है जो हमारे दिमाग में इस कदर जमकर बैठ गया है, कि उसकी वजह से हम अपनी जड़ों को भूल गए हैं, अपना भला-बुरा सोचने की ताकत गंवा बैठे हैं। उस गाय को भूल गए हैं जो हर तरह से हमें जीवनदान देने में भूमिका निभाती है। जब देश में निरंतर गायों को कम होते और गौमाता की हत्या होते देखा तभी सोच लिया कि अब गाय माता को बचाने की दिशा में प्रयास करना होगा। भारतीय समाज जो बदलते वक्त के साथ गाय को भूल चुका है, उसे फिर से गाय का महत्व याद दिलाना होगा, उसे फिर से घर घर में लाना होगा। बस इसी सोच के साथ अपने गौ रक्षा आंदोलन की शुरूआत की और देश भर में जा-जाकर इसके प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयत्न किया। आपको धेनुमानस की रचना करने की प्रेरणा कैसे मिली..? देखिए धेनुमानस मेरी नहीं हमारे भारत के प्राचीन ऋषि मुनियों की रचना है। मैं इसकी रचना का श्रेय कैसे ले सकता हूं। हमारे ऋषि मुनि जंगल में गायों के बीच रहते थे, गाय के महत्व और उसके मानव जीवन पर प्रभाव को जानते थे और तब उनके मुंह से निर्मल गौकथा का वाचन होता था। मैंने तो गौ-गंगा, गौरी-गणेश और गुरु की प्रेरणा से सिर्फ उसी गौकथा को कलमबद्ध और संकलित किया है, ताकि इस ग्रंथ के जरिए हर इंसान तक गौमाता का महत्व और उनकी सरस कथा पहुंच सके। हर इंसान गौ महत्व को समझ सके। दुनिया मुझे इसका रचियता मानती है तो यह उनकी विनम्रता है लेकिन यह केवल साधु-संतों की प्रेरणा से संभव हुआ है। आप कहते गाय प्राचीनकाल से पूज्यनीय है तो क्या हमारे पुराणों में भी गाय का जिक्र मिलता है? बिल्कुल मिलता है। चारों वेदों और उपनिषदों में गाय के महत्व संबंधी बातें और श्लोक लिखे हैं। रामायण की रचना करने वाले तुलसीदास जी ने कहा है कि रामायण की चौपाई गाय के चार पै Posted Date: 25 Sep 2015 Download Jay Gomata-Cow News application from https://play.google.com/store/apps/details?id=com.mobisys.android.gaumata