10 January, 2017

सिंहासन खाली करो...कि जनता आती है


कटनी।  सबसे बड़े हवाला घोटाला कांड की जाँच कर रहे कटनी एस पी गौरव तिवारी के तबादले से जहा लोग नाखुश है वही सत्ता पक्ष की मनमानी के खिलाफ उभरते आक्रोश की एक झलक भी है।

जिस जल्दबाजी में कटनी एस पी का ट्रांसफर किया गया उससे आम जनता हैरान है क्योकि 40 फर्मो के लगभग जाली हवाला कारोबारी और एक सत्ता के रसूखदार नेता का हाथ है

इधर सोसल मीडिया पर चर्चा है की प्रदेश के मुखिया के सभी कार्यक्रम का खर्च कटनी और आसपास इन्ही हवाला कारोबारियों के जिम्मे था

शिवराज की नमामि देवी नर्मदे की यात्रा में कुछ ही लोगो की तस्वीरे बार बार दिखती है जो की अपने नेता के लिए संगठित आर्थिक अपराधियो की भाटी कार्य करते है

सत्ताधारी दल सत्ता के नशे में मगरूर हो चूका है और अब सत्ता के खिलाफ उम्दा कटनी का यह जान आक्रोश जिसमे महिलाये, बच्चे, बूढ़े, नवजवान सभी खड़े मिले

500 करोड़ के हवाला कांड की जांच प्रभावित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार के इस फैसले का विरोध करके कटनी के लोगो ने सत्ताधारी दल के विरुद्ध माहौल का संकेत दे दिया है


03 January, 2017

आर टी आई एक्टिविस्ट या ब्लेकमेलर



सुचना का अधिकार अधिनियम लागू करने वालो को भी शायद यह नही पता था की इस अधिनियम से बेरोजगारों को रोजगार भी मिलेगा

आर टी आई यानी सुचना का अधिकार अधिनियम 2005 के  लागू  होते ही ऐसी धारणा बनी की अब तो भ्रष्टाचार का खात्मा होकर ही रहेगा. लेकिन इसके ठीक बिपरीत भ्रस्टाचारी और अधिक फल फूल  रहे है.  अब आर टी आई का खौफ पहले की तरह नही रहा है.

पहले-पहल  आर टी आई कार्यकर्ता को बड़े सम्मान से देखा जाता और समय के साथ यह स्वयं को आर टी आई एक्टिविस्ट कहलाने लगे.
  अब तो ऐसा लगता है कि  यह अधिनियम अधिकांस लोगो की रोजी रोटी का साधन बन चूका  है. कुछ वर्षो पहले जो आर टी आई का आवेदन लिखने का तरीका पूछते थे  वह अब  आलीशान मकान और चार पहिये  में घूमने लगे

उनने इसे मुख्य हथियार बना लिया उनकी अब तूती बोलती है और  कई जिलो में वार्षिक  बसूली कर रहे है

शुरू में  जब यह एक्टिविस्ट सुचना लगाने लोकसूचना अधिकारी को ढूढते कार्यालय पहुचता था तो  उसे घण्टो चक्कर लगवाये जाते थक हार कर फिर  कही आवेदन स्वीकार होता.

 इस परेशानी का हल आर टी आई लगाने वालो ने रजिस्टर्ड डाक से ढूढ़ निकाला. अब उन्हें जहा की भी जानकारी मांगनी होती तो वे रजिस्टर्ड डाक से यह आवेदन लगाकर तीस दिन का इन्तजार करते.

ऐसे में  कई बार सम्बंधित विभाग साधारण डाक से उनसे पत्राचार करते जिसे यह एक्टिविस्ट नजरअंदाज करके प्रथम अपील लगाने की समय सीमा का इन्तजार करते. और अधिकांस में उन्हें इसमें सफलता मिलती.

यही नहीं  बी पी एल की पात्रता का भी लाभ फर्जी टाइप के एक्टिविस्ट उठाने लगे. वे अपने परिजनों के नाम से आवेदन लगाकर स्वयं जानकारी लेने पहुचंते है और फ्री में जानकारी प्राप्त करते  असल में  इस अधिनियम की जानकारी स्वयं कर्मचारियों को भी नहीं है वरना इन्हें तो कार्यालय में प्रवेश ही न करने दिया जाय.

क्या आपको पता है कि  आजतक सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त  जानकारी से इन फर्जी एक्टिविस्टों ने समाज को क्या लाभ दिया???

इन आर टी आई अक्टिविस्ट का आवेदन साल में एक बार कमाई वाले सरकारी विभागों में जरूर पहुचता है फिर इनको सूचना मिलती भी है की नहीं किसी को नहीं पता और यदि मिलती है तो इस जानकारी का फिर करते क्या है?